परमेश्वर के दैनिक वचन | "पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान" | अंश 528

उनके लिए जिन्हें सिद्ध किया जाना है, उन पर विजयी होने के कार्य का यह कदम अति आवश्यक है; केवल जब मनुष्य पर विजय पा लिया जाता है, तभी मनुष्य सिद्ध किए जाने के कार्य का अनुभव कर सकता है। केवल जीत लिए जाने की भूमिका को निभाने में कोई बड़ा मूल्य नहीं है, जो तुझे परमेश्वर के इस्तेमाल के योग्य नहीं बनाएगा। सुसमाचार फैलाने हेतु अपनी भूमिका को निभाने के लिए तेरे पास कोई साधन नहीं होगा, क्योंकि तू जीवन का अनुसरण नहीं करता है, और अपने आप में परिवर्तन और नवीनीकरण का अनुसरण नहीं करता है, और इसलिए तेरे पास जीवन का कोई वास्तविक अनुभव नहीं होता है। इस कदम दर कदम कार्य के दौरान, तूने एक बार सेवा का कार्य करने वाले के, और एक विषमता के समान कार्य किया था, किन्तु अंततः यदि तू पतरस के समान बनने के लिए अनुसरण नहीं करता है, और यदि तेरा अनुसरण उस मार्ग के अनुसार नहीं है जिसके द्वारा पतरस को सिद्ध बनाया गया था, तो, स्वाभाविक रूप से, तू अपने स्वभाव में परिवर्तन का अनुभव नहीं करेगा। यदि तू ऐसा व्यक्ति है जो सिद्ध किए जाने के लिए अनुसरण करता है, तो तुझे गवाही देनी होगी, और तू कहेगा: "परमेश्वर के इस कदम दर कदम कार्य में, मैं ने परमेश्वर की ताड़ना और न्याय के कार्य को स्वीकार कर लिया है, और यद्यपि मैं ने बड़ा कष्ट सहा है, फिर भी मैं जान गया हूँ कि परमेश्वर मनुष्य को सिद्ध कैसे बनाता है, मैं ने परमेश्वर के द्वारा किए गए कार्य को प्राप्त कर लिया है, मेरे पास परमेश्वर की धार्मिकता का ज्ञान है, और उसकी ताड़ना ने मुझे बचा लिया है। उसका धर्मी स्वभाव मुझमें आ गया है, और मेरे लिए आशीषें और अनुग्रह लाया है, और उसके न्याय और उसकी ताड़ना ने मुझे सुरक्षित और शुद्ध किया है। यदि परमेश्वर के द्वारा मेरी ताड़ना और मेरा न्याय नहीं किया जाता, और यदि परमेश्वर के कठोर वचन मेरे ऊपर नहीं आते, तो मैं परमेश्वर को नहीं जान सकता था, न ही मुझे बचाया जा सकता था। एक जीवधारी के रूप में, आज मैं यह देखता हूँ, एक व्यक्ति न केवल परमेश्वर के द्वारा बनाए गए सभी चीज़ों का आनन्द उठाता है, परन्तु, अति महत्वपूर्ण रूप से, सभी जीवधारियों को परमेश्वर के धर्मी स्वभाव का आनन्द उठाना चाहिए, और उसके धर्मी न्याय का आनन्द उठाना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर का स्वभाव मनुष्य के आनन्द के योग्य है। एक ऐसे जीव के रूप में जिसे शैतान द्वारा भ्रष्ट बना दिया गया है, उसे परमेश्वर के धर्मी स्वभाव का आनंद उठाना चाहिए। उसके धर्मी स्वभाव में उसकी ताड़ना और उसका न्याय है, और, इसके अतिरिक्त, उसमें बड़ा प्रेम है। यद्यपि आज मैं परमेश्वर के प्रेम को पूरी तरह प्राप्त करने में असमर्थ हूँ, फिर भी मुझे उसे देखने का सौभाग्य प्राप्त है, और इस में मैं आशीषित हूँ।" यह वह पथ है जिस पर वे चलते हैं जो सिद्ध किए जाने का अनुभव करते हैं और जिसके ज्ञान के बारे में वे बोलते हैं। ऐसे लोग पतरस के समान हैं; उनके पास पतरस के समान ही अनुभव हैं। वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने जीवन प्राप्त किया है, और जिनके पास सत्य है। यदि मनुष्य बिलकुल अंत तक अनुभव करता है, तो परमेश्वर के न्याय के दौरान वह अनिवार्य रूप से पूरी तरह शैतान के प्रभाव से अपने आपको को छुड़ा लेगा, और परमेश्वर के द्वारा ग्रहण कर लिया जाएगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

क्या तुम वो इंसान हो जो परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाये जाने की खोज करता है?

अगर तुम वो इंसान हो जो प्रयास कर रहा है पूर्ण बनाये जाने का, तो गवाही धारण कर चुके होगे तुम, और तुम कहने वाले हो:

"परमेश्वर कदम दर कदम जो कर रहा है, ताड़ना और न्याय के इस कार्य को मैंने स्वीकार लिया। हालाँकि दुख उठाये हैं बहुत, पर मैंने पा लिया है परमेश्वर के कार्य को। परमेश्वर की धार्मिकता और किस तरह से बनाता है पूर्ण वो इंसान को, जान लिया है मैंने।

परमेश्वर का धर्मी स्वभाव आ गया है मुझ पर, दिया है आशीष मुझे, किया है अनुग्रह मुझ पर। उसके न्याय ने मुझे बचाया है, मुझे शुद्ध किया, रक्षा की है मेरी, बचा हूँ मैं और मैंने उसे जान लिया, परमेश्वर के कड़े वचनों, ताड़ना और न्याय द्वारा, बचा हूँ मैं और मैंने उसे जान लिया है।" इसी राह पर चले हैं वो पूर्ण बनाये जा रहे हैं जो, इसी ज्ञान की बात करते हैं वो। उन्हीं लोगों ने पाया है जीवन, जो हैं पतरस की तरह, जिनमें परमेश्वर का सत्य है। अंत तक वे जब इस राह पर चलेंगे, ताड़ना और न्याय से गुज़रेंगे, तो यकीनन शुद्ध किये जायेंगे, पूरी तरह से वे शैतान के असर से निकलेंगे, और वे परमेश्वर को प्राप्त होंगे।

"आज देख लिया है मैंने, परमेश्वर के जीव के रूप में, सिर्फ़ आनंद नहीं लेते हम, सृष्टिकर्ता की बनाई चीज़ों का। मगर बात है ये ज़्यादा अहम, जीव जिनको बनाया उसने, परमेश्वर के धर्मी स्वभाव और न्याय का उन्हें आनंद लेना चाहिये।

परमेश्वर का स्वभाव योग्य है इंसान के आनंद के, भ्रष्ट जीवों को आनंद लेना चाहिये परमेश्वर की धार्मिकता का। न्याय भी है उसमें, ताड़ना भी है उसमें, प्रेम भी है महान उसमें। परमेश्वर का प्रेम भले ही, पूरी तरह ना पा सकूँ, मगर धन्य हो गया हूँ मैं इसे देख के, मगर धन्य हो गया हूँ मैं इसे देख के, देख के।"

इसी राह पर चले हैं वो पूर्ण बनाये जा रहे हैं जो, इसी ज्ञान की बात करते हैं वो। उन्हीं लोगों ने पाया है जीवन, जो हैं पतरस की तरह, जिनमें परमेश्वर का सत्य है। अंत तक वे जब इस राह पर चलेंगे, ताड़ना और न्याय से गुज़रेंगे, तो यकीनन शुद्ध किये जायेंगे, पूरी तरह से वे शैतान के असर से निकलेंगे, और वे परमेश्वर को प्राप्त होंगे। अगर तुम वो इंसान हो जो प्रयास कर रहा है पूर्ण बनाये जाने का, तो गवाही धारण कर चुके होगे तुम।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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