परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 590

जब एक बार विजय के कार्य को पूरा कर लिया जाता है, तब मनुष्य को एक सुन्दर संसार में पहुंचाया जाएगा। निश्चित रूप से, यह जीवन तब भी पृथ्वी पर ही होगा, परन्तु यह मनुष्य के आज के जीवन से पूरी तरह से भिन्न होगा। यह वह जीवन है जो मानवजाति के तब पास होगा जब सम्पूर्ण मानवजाति पर विजय प्राप्त कर लिया जाता है, यह पृथ्वी पर मनुष्य के लिए, और मानवजाति के लिए एक नई शुरुआत होगी कि उसके पास ऐसा जीवन हो जो इस बात का सबूत होगा कि मानवजाति ने एक नए एवं सुन्दर आयाम में प्रवेश कर लिया है। यह पृथ्वी पर मनुष्य एवं परमेश्वर के जीवन की शुरुआत होगी। ऐसे सुन्दर जीवन का आधार ऐसा ही होगा, जब मनुष्य को शुद्ध कर लिया जाता है और उस पर विजय पा लिया जाता है उसके पश्चात्, वह परमेश्वर के सम्मुख समर्पित हो जाता है। और इस प्रकार, इससे पहले कि मानवजाति उस बेहतरीन मंज़िल में प्रवेश करे विजय का कार्य परमेश्वर के कार्य का अंतिम चरण है। ऐसा जीवन ही पृथ्वी पर मनुष्य के भविष्य का जीवन है, यह पृथ्वी पर सबसे अधिक सुन्दर जीवन है, उस प्रकार का जीवन है जिसकी लालसा मनुष्य करता है, और उस प्रकार का जीवन है जिसे मनुष्य ने संसार के इतिहास में पहले कभी हासिल नहीं किया गया है। यह 6,000 वर्षों के प्रबधंकीय कार्य का अंतिम परिणाम है, यह वह है जिसकी मानवजाति ने अत्यंत अभिलाषा की है, और साथ ही यह मनुष्य के लिए परमेश्वर की प्रतिज्ञा भी है। परन्तु यह प्रतिज्ञा तुरन्त ही पूरी नहीं हो सकती है: मनुष्य अपने भविष्य की मंज़िल में केवल तभी प्रवेश करेगा जब एक बार अंतिम दिनों के कार्य को पूरा कर लिया जाता है और उस पर पूरी तरह से विजय पा लिया जाता है, अर्थात्, जब एक बार शैतान को पूरी तरह से पराजित कर दिया जाता है। जब मनुष्य को परिष्कृत कर दिया जाता है उसके पश्चात् ही वह पापपूर्ण स्वभाव से रहित होगा, क्योंकि परमेश्वर ने शैतान को पराजित कर दिया होगा, जिसका अर्थ यह है कि विरोधी ताकतों के द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं होगा, और कोई विरोधी ताकतें मनुष्य के शरीर पर आक्रमण नहीं कर सकती हैं। और इस प्रकार मनुष्य स्वतन्त्र एवं पवित्र होगा—वह अनन्तकाल में प्रवेश कर चुका होगा। जब अन्धकार की विरोधी ताकतों को बांध दिया जाता है केवल तभी मनुष्य जहाँ कहीं जाता है वहाँ वह स्वतन्त्र होगा, और विद्रोहीपन या विरोध से रहित होगा। मनुष्य की सलामती के लिए शैतान को बस बांधना है; आज, वह सही सलामत नहीं है क्योंकि शैतान पृथ्वी पर अभी भी हर जगह समस्याएं खड़ी करता है, और क्योंकि परमेश्वर के प्रबधंन का समूचा कार्य अभी तक समाप्ति पर नहीं पहुंचा है। जब एक बार शैतान को पराजित कर दिया जाता है, तो मनुष्य पूरी तरह से स्वतन्त्र हो जाएगा; जब मनुष्य परमेश्वर को प्राप्त करता है और शैतान के प्रभुत्व से बाहर निकल आता है, तब वह धार्मिकता के सूर्य को देखेगा। वह जीवन जिसे सामान्य मानव को प्राप्त करना है उसे पुनः प्राप्त कर लिया जाएगा; वह सब कुछ जिसे एक सामान्य मनुष्य के द्वारा धारण किया जाना चाहिए—जैसे भले एवं बुरे को परखने की योग्यता, और एक समझ कि किस प्रकार भोजन करना है और स्वयं को वस्त्र से ढंकना है, और सामान्य जीवन व्यतीत करने की क्षमता—यह सब कुछ पुनः प्राप्त कर लिया जाएगा। भले ही हव्वा को सांप के द्वारा प्रलोभन नहीं दिया गया होता, फिर भी शुरुआत में मनुष्य की सृष्टि के बाद उसके पास ऐसा ही सामान्य जीवन होना चाहिए था। उसे पृथ्वी पर भोजन करना, और कपड़े पहनना, और सामान्य मनुष्य का जीवन जीना चाहिए था। फिर भी जब मनुष्य भ्रष्ट हो गया उसके बाद, यह जीवन कभी साकार न होनेवाला एक स्वप्न बन गया था, और यहाँ तक कि आज भी मनुष्य ऐसी चीज़ों की कल्पना करने का साहस नहीं करता है। वास्तव में, यह सुन्दर जीवन जिसकी मनुष्य अभिलाषा करता है वह एक आवश्यकता हैः यदि मनुष्य ऐसे मंज़िल से रहित होता, तो पृथ्वी पर उसका भ्रष्ट जीवन कभी समाप्त नहीं होता, और यदि ऐसा कोई सुन्दर जीवन न होता, तो शैतान की नियति या उस युग का कोई अन्त नहीं होता जिसके अंतर्गत शैतान पृथ्वी पर अपने प्रभुत्व को कायम रखता है। मनुष्य को ऐसे आयाम में पहुंचना होगा जहाँ अंधकार की शक्तियों के द्वारा पहुंचा नहीं जा सकता है, और जब मनुष्य वहाँ पहुंच जाता है, तो यह प्रमाणित करेगा कि शैतान को पराजित कर दिया गया है। इस रीति से, जब एक बार शैतान के द्वारा कोई व्यवधान नहीं होता है, तो स्वयं परमेश्वर मानवजाति को नियन्त्रित करेगा, और वह मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन के लिए आदेश देगा और उसे नियन्त्रित करेगा; केवल इसे ही शैतान की पराजय के रूप में गिना जाएगा। आज का मनुष्य का जीवन मुख्यतः गंदगी का जीवन है, और अभी भी दुख एवं कष्ट का एक जीवन है। इसे शैतान की पराजय नहीं कहा जा सकता है; मनुष्य को अभी भी कष्ट के सागर से बच कर निकलना है, अभी भी मनुष्य के जीवन की कठिनाइयों से, या शैतान के प्रभाव से बचकर निकलना है, और उसके पास अभी भी परमेश्वर के बारे में बहुत छोटी सी जानकारी है। मनुष्य की सारी परेशानी को शैतान के द्वारा उत्पन्न किया गया था, वह शैतान ही था जो मनुष्य के जीवन में कष्टों को लेकर आया था, और जब शैतान को बांध दिया जाता है केवल उसके पश्चात् ही मनुष्य कष्ट के सागर से पूरी तरह से बचकर निकलने में सक्षम हो पाएगा। फिर भी मनुष्य के हृदय पर विजय पाने एवं उसे प्राप्त करने के द्वारा, और शैतान के साथ युद्ध में मनुष्य को लूट का सामान बनाने के माध्यम से शैतान के बांधे जाने को हासिल किया जाता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

अंत के दिनों में मनुष्य से परमेश्वर का वादा

जब विजय-कार्य पूरा हो जाएगा, तब इंसान एक ख़ूबसूरत दुनिया में जाएगा। तब भी धरती पर जीवन होगा, मगर आज जैसा न होगा। इंसान पर विजय के बाद ये नया जीवन है, नए राज्य में जाने का प्रमाण है, धरती पर ईश्वर के साथ इंसान के जीवन की शुरुआत है। धरती पर इंसान का आगे का जीवन सुंदर है, जिसकी कामना की इंसान ने, जो देखा न गया पहले कभी इतिहास में। छह हज़ार सालों के काम का यही अंतिम परिणाम है। इसी के लिए इंसान सबसे ज़्यादा तरसता है, यही ईश्वर का इंसान से वादा है, वादा है।

ऐसे सुंदर जीवन का आधार है कि इंसान पहले शुद्ध हो, उसे जीता जाए, और फिर वो ईश्वर को समर्पित हो। इस तरह, विजय-कार्य ईश्वर के कार्य का अंतिम चरण है इंसान के ऐसी सुंदर जगह पर जाने से पहले। धरती पर इंसान का आगे का जीवन सुंदर है, जिसकी कामना की इंसान ने, जो देखा न गया पहले कभी इतिहास में। छह हज़ार सालों के काम का यही अंतिम परिणाम है। इसी के लिए इंसान सबसे ज़्यादा तरसता है, यही ईश्वर का इंसान से वादा है, वादा है।

ये वादा अभी पूरा न होगा: आगे की मंज़िल पर इंसान तभी पहुँचेगा; जब पूरा हो जाएगा अंत के दिनों का काम; जब जीत लिया जाएगा पूरी तरह इंसान को, जब हरा दिया जाएगा शैतान को। धरती पर इंसान का आगे का जीवन सुंदर है, जिसकी कामना की इंसान ने, जो देखा न गया पहले कभी इतिहास में। छह हज़ार सालों के काम का यही अंतिम परिणाम है। इसी के लिए इंसान सबसे ज़्यादा तरसता है, यही ईश्वर का इंसान से वादा है।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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