राज्य का सुसमाचार वार्तालाप मंच, एपिसोड 17 : भारतीय ईसाई पादरी प्रोबिन बोरो के साथ एक विशेष साक्षात्कार

07 नवम्बर, 2026

प्रोबिन बोरो का जन्म भारत के असम में हुआ था। 1996 में, उन्होंने धर्मशास्त्र का अध्ययन करने के लिए सेमिनरी में प्रवेश लिया, लेकिन उन्होंने देखा कि धर्मशास्त्रीय सिद्धांत उनकी आस्था की उलझनों को सुलझा नहीं पाए। परमेश्वर की सेवा करने के 20 से अधिक वर्षों में, उन्होंने अपनी कलीसिया को धीरे-धीरे वीरानी में जाते देखा—पादरी और एल्डर एक-दूसरे के खिलाफ साजिश रच रहे थे, और विश्वासी सांसारिक प्रवृत्तियों के पीछे भाग रहे थे, लेकिन वे कुछ भी कर पाने में पूरी तरह से बेबस थे। वे पूरी गंभीरता से खोजते रहे : धर्मशास्त्र समझने के बावजूद वे कलीसिया को सहारा क्यों नहीं दे पा रहे थे? इतने वर्षों तक प्रभु में विश्वास करने के बाद भी लोग अभी भी पाप के बंधन से मुक्त क्यों नहीं हो पा रहे थे? ठीक उस समय जब वे अंधकार में खो गए थे और बेसब्री से जवाब ढूँढ़ रहे थे, उन्होंने 2019 में फेसबुक पर एक सभा में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार किया। इसने उनकी आस्था के सफर में एक नया मोड़ ला दिया।

02:43 धर्मशास्त्रीय ज्ञान मेरे दिल की उलझन को सुलझा नहीं सका

13:09 क्या धर्मशास्त्रीय ज्ञान कलीसिया की वीरानी को ठीक कर सकता है?

29:48 मैंने आखिरकार प्रभु की वापसी का स्वागत किया!

52:46 प्रभु की वापसी का स्वागत करने के बाद मेरी पुरानी कलीसिया ने मुझे ठुकरा दिया

01:04:03 धर्मशास्त्र पर मेरा चिंतन और मेरी समझ

01:18:33 सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करके, मैंने पाप से शुद्ध होने का मार्ग पा लिया

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

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