परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 121

मनुष्य को शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है, और वह परमेश्वर के सभी जीवधारियों में सबसे ऊपर है, अतः मनुष्य को परमेश्वर के उद्धार की आवश्यकता है। परमेश्वर के उद्धार का विषय मनुष्य है, न कि शैतान, और जिसे बचाया जाना चाहिए वह मनुष्य की देह है, एवं मनुष्य का प्राण है, और शैतान नहीं है। शैतान परमेश्वर के सम्पूर्ण विनाश का विषय है, मनुष्य परमेश्वर के उद्धार का विषय है, और मनुष्य के शरीर को शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया जा चुका है, अतः जिसे पहले बचाना है वह मनुष्य का शरीर ही होगा। मनुष्य की देह को बहुत ज़्यादा भ्रष्ट किया जा चुका है, और यह कुछ ऐसा बन गया है जो परमेश्वर का विरोध करता है, जो यहाँ तक कि खुले तौर पर परमेश्वर का विरोध करता है और उसके अस्तित्व को भी नकारता है। इस भ्रष्ट देह का उपचार करना बहुत ही मुश्किल है, और देह के भ्रष्ट स्वभाव की अपेक्षा किसी और चीज़ के साथ निपटना या उसे बदलना ज़्यादा कठिन नहीं है। शैतान परेशानियां खड़ी करने के लिए मनुष्य की देह के भीतर आता है, और परमेश्वर के कार्य में गड़बड़ी डालने के लिए मनुष्य की देह का उपयोग करता है, और परमेश्वर की योजना को बाधित करता है, और इस प्रकार मनुष्य शैतान, एवं परमेश्वर का शत्रु बन चुका है। मनुष्य को बचाने के लिए, पहले उस पर विजय पाना होगा। यही कारण है कि परमेश्वर चुनौती के लिए उठता है, और देह में होकर आता है कि वह कार्य करे जिसे उसने करने का इरादा किया है, और शैतान के साथ लड़े। उसका उद्देश्य मनुष्य का उद्धार है, जिसे भ्रष्ट किया जा चुका है, और शैतान की पराजय एवं उसका सम्पूर्ण विनाश है, जो उसके विरुद्ध विद्रोह करता है। वह मनुष्य पर विजय पाने के अपने कार्य के जरिए शैतान को पराजित करता है, और ठीक उसी समय भ्रष्ट मानवजाति का उद्धार करता है। इस प्रकार, परमेश्वर एक बार में ही दो समस्याओं का हल करता है। वह देह में होकर कार्य करता है, देह में होकर बात करता है, और देह में होकर समस्त कार्यों की शुरुआत करता है जिससे मनुष्य के साथ बेहतर ढंग से संलग्न हो सके, और बेहतर ढंग से मनुष्य पर विजय पा सके। अंतिम बार जब परमेश्वर ने देहधारण किया है, तो अंतिम दिनों के उसके कार्य को देह में पूरा किया जाएगा। वह सभी मनुष्यों को उनके किस्म के अनुसार वर्गीकृत करेगा, अपने सम्पूर्ण प्रबंधन को समाप्त करेगा, और साथ ही देह में अपने समस्त कार्य को भी समाप्त करेगा। जब पृथ्वी पर उसके सभी कार्य समाप्त हो जाते हैं, तो वह पूरी तरह से विजयी हो जाएगा। देह में कार्य करते हुए, परमेश्वर ने मानवजाति को पूरी तरह से जीत लिया होगा, और मानवजाति को पूर्ण रूप से अर्जित कर लिया होगा। क्या इसका अर्थ यह नहीं है कि उसका समूचा प्रबंधन समापन की ओर आ चुका होगा? जब परमेश्वर देह में अपना कार्य पूरा करता है, चूँकि उसने शैतान को पूरी तरह से हरा दिया है और विजयी हुआ है, तो शैतान के पास मनुष्य को भ्रष्ट करने के लिए आगे और कोई अवसर नहीं होगा। परमेश्वर के प्रथम देहधारण का कार्य था मनुष्य के पापों का छुटकारा एवं उनकी क्षमा। अब यह मानवजाति को जीतने एवं पूरी तरह से अर्जित करने का कार्य है, ताकि शैतान के पास आगे से अपने कार्य को करने के लिए कोई मार्ग न हो, और वह पूरी तरह से हार चुका होगा, और परमेश्वर पूरी तरह से विजयी होगा। यह देह का कार्य है, और वह कार्य है जिसे स्वयं परमेश्वर के द्वारा किया गया है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

अंत के दिनों में देहधारी परमेश्वर करता है परमेश्वर के प्रबन्धन का अंत

इंसान से बेहतर जुड़ने और उसे जीतने के लिए देह में कार्य करता है, बोलता है परमेश्वर। पहली बार देहधारी हुए परमेश्वर ने, काम किये इंसान के छुटकारे, पाप-क्षमा के। अब करने हैं काम, इंसान को जीतने और पाने के। आख़िरी बार जब देहधारी होता है परमेश्वर, अंत के दिनों के कामों को ख़त्म करेगा, सभी लोगों को उनकी किस्मों में बांटेगा। प्रबंधन को, देह में अपने सारे कामों को ख़त्म करेगा। धरती पर काम पूरा होने पर वो विजयी होगा, विजयी होगा।

जब इंसान को पूरी तरह जीत लेगा, पा लेगा परमेश्वर, तो क्या उसका प्रबंधन पूरा न हो चुका होगा? देह में अपने काम का अंत कर जब विजयी होता है परमेश्वर, शैतान हार जाता है, इंसान को दूषित करने का दूसरा मौका न होता है। यही है देह का कार्य, जिसे करता है स्वयं परमेश्वर! आख़िरी बार जब देहधारी होता है परमेश्वर, अंत के दिनों के कामों को ख़त्म करेगा, सभी लोगों को उनकी किस्मों में बांटेगा। प्रबंधन को, देह में अपने सारे कामों को ख़त्म करेगा। धरती पर काम पूरा होने पर वो विजयी होगा, विजयी होगा। आख़िरी बार जब देहधारी होता है परमेश्वर, अंत के दिनों के कामों को ख़त्म करेगा, सभी लोगों को उनकी किस्मों में बांटेगा। प्रबंधन को, देह में अपने सारे कामों को ख़त्म करेगा। धरती पर काम पूरा होने पर वो विजयी होगा, विजयी होगा।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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