परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या : अध्याय 42" | अंश 231

यह कहा जा सकता है कि आज के सभी कथन भावी मामलों की भविष्यवाणी करते हैं; ये कथन बताते हैं कि परमेश्वर अपने कार्य के अगले चरण के लिए किस प्रकार व्यवस्थाएँ कर रहा है। परमेश्वर ने कलीसिया के लोगों में अपना काम लगभग पूरा कर लिया है, और बाद में वह सभी लोगों के सामने क्रोध के साथ प्रकट होगा। जैसा कि परमेश्वर कहता है, "मैं धरती के लोगों से अपने कार्यों को स्वीकार करवाऊंगा, और 'न्यायपीठ' के सामने मेरे कर्म साबित होंगे, ताकि उन्हें पृथ्वी के लोगों के बीच स्वीकार किया जाए, जो स्वीकार करेंगे।" क्या तुम लोगों ने इन वचनों में कुछ देखा? इनमें परमेश्वर के कार्य के अगले हिस्से का सारांश है। पहले, परमेश्वर उन सभी संरक्षक कुत्तों को, जो राजनीतिक शक्ति को संचालित करते हैं, गंभीरता से विश्वास कराएगा और उन्हें बाध्य करेगा कि वे इतिहास के मंच से स्वयं पीछे हट जाएँ, और फिर कभी प्रतिष्ठा के लिए लड़ाई न करें, और फिर कभी कुचक्रों और षड्यंत्रों में संलग्न न हों। यह कार्य परमेश्वर द्वारा पृथ्वी पर विभिन्न आपदाएँ ढाकर किया जाना चाहिए। परंतु यह ऐसा मामला बिलकुल नहीं है कि परमेश्वर प्रकट होगा। क्योंकि, इस समय, बड़े लाल अजगर का राष्ट्र अभी भी मलिनता की भूमि होगा, और इसलिए परमेश्वर प्रकट नहीं होगा, परंतु केवल ताड़ना के रूप में उभरेगा। ऐसा है परमेश्वर का धर्मी स्वभाव, जिससे कोई बच नहीं सकता। इस दौरान, बड़े लाल अजगर के राष्ट्र में बसे सभी व्यक्ति विपत्तियों का सामना करेंगे, जिसमें स्वाभाविक रूप से पृथ्वी पर राज्य (कलीसिया) भी शामिल है। यह वही समय है, जब तथ्य सामने आएँगे, और इसलिए इसका अनुभव सभी लोगों द्वारा किया जाएगा, और कोई बच नहीं पाएगा। यह परमेश्वर द्वारा पूर्वनिर्धारित किया गया है। यह ठीक कार्य के इस चरण के कारण है, जिसके बारे में परमेश्वर कहता है, "यही समय है महान योजनाओं को पूरा करने का।" क्योंकि भविष्य में पृथ्वी पर कोई कलीसिया नहीं होगा, और तबाही के आगमन के कारण लोग केवल उसी के बारे में सोच पाएँगे, जो उनके सामने होगा, और बाकी हर चीज़ को वे नज़रअंदाज़ कर देंगे, और तबाही के बीच परमेश्वर का आनंद लेना उनके लिए मुश्किल होगा। इसलिए, लोगों से कहा जाता है कि इस अद्भुत समय के दौरान अपने पूरे दिल से परमेश्वर से प्रेम करें, ताकि वे इस अवसर को गँवा न बैठें। जब यह तथ्य गुज़र जाएगा, तो परमेश्वर ने बड़े लाल अजगर को पूरी तरह हरा दिया होगा, और इस प्रकार परमेश्वर के लोगों की गवाही का कार्य समाप्त हो गया होगा; इसके बाद परमेश्वर कार्य के अगले चरण की शुरुआत करेगा, वह बड़े लाल अजगर के देश को तबाह कर देगा, और अंततः ब्रह्मांड के सभी लोगों को सलीब पर उलटा लटका देगा, जिसके बाद वह पूरी मानवजाति को नष्ट कर देगा—ये परमेश्वर के कार्य के भावी चरण हैं। इसलिए, तुम लोगों को इस शांतिपूर्ण वातावरण में परमेश्वर से प्रेम करने का प्रयास करना चाहिए। भविष्य में तुम लोगों के पास परमेश्वर से प्रेम करने के और अधिक अवसर नहीं होंगे, क्योंकि लोगों के पास केवल देह में रहते हुए परमेश्वर से प्रेम करने का अवसर होता है; जब वे किसी दूसरे संसार में रहेंगे, तो कोई परमेश्वर से प्रेम करने की बात नहीं करेगा। क्या यह एक सृजित प्राणी की ज़िम्मेदारी नहीं है? और इसलिए तुम लोगों को अपने जीवन-काल के दौरान परमेश्वर से कैसे प्रेम करना चाहिए? क्या तुमने कभी इस बारे में सोचा है? क्या तुम परमेश्वर से प्रेम करने के लिए मर जाने के बाद का इंतज़ार कर रहे हो? क्या यह खोखली बात नहीं है? तुम आज ही परमेश्वर से प्रेम करने का प्रयास क्यों नहीं करते? क्या व्यस्त रहते हुए परमेश्वर से प्रेम करना परमेश्वर के प्रति सच्चा प्रेम हो सकता है? ऐसा कहने का कारण यह है कि परमेश्वर के कार्य का यह चरण जल्दी ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि परमेश्वर के पास पहले ही शैतान के सामने गवाही है। इसलिए, मनुष्य को कुछ भी करने की कोई आवश्यकता नहीं है; मनुष्य को केवल उन वर्षों में परमेश्वर से प्रेम करने के लिए कहा जा रहा है, जिनमें वह जीवित है—यह कुंजी है। चूँकि परमेश्वर की अपेक्षाएँ बहुत ऊँची नहीं हैं, और इसके अलावा, चूँकि उसके दिल में एक झुलसाने वाली बेचैनी है, इसलिए उसने कार्य के इस चरण के समाप्त होने से पहले ही कार्य के अगले चरण का सारांश प्रकट कर दिया है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कितना समय बचा है; यदि परमेश्वर अपने दिल में इतना व्यग्र नहीं होता, तो क्या वह ये वचन इतनी जल्दी कहता? समय कम होने के कारण ही परमेश्वर इस तरह से कार्य करता है। आशा है कि तुम लोग अपने पूरे दिल से, अपने पूरे मस्तिष्क से, और अपनी पूरी शक्ति से परमेश्वर से प्रेम कर पाओगे, ठीक वैसे ही, जैसे तुम लोग अपने जीवन को सँजोते हो। क्या यह परम सार्थक जीवन नहीं है? जीवन का अर्थ तुम्हें और कहाँ मिल सकता है? क्या तुम बहुत अंधे नहीं हो रहे हो? क्या तुम परमेश्वर से प्रेम करने के लिए तैयार हो? क्या परमेश्वर मनुष्य के प्रेम के योग्य है? क्या लोग मनुष्य की आराधना के योग्य हैं? तो तुम्हें क्या करना चाहिए? परमेश्वर से बिना किसी संदेह के निडर होकर प्रेम करो, और देखो कि परमेश्वर तुम्हारे साथ क्या करेगा। देखो कि क्या वह तुम्हें मार डालता है? संक्षेप में, परमेश्वर से प्रेम करने का कार्य परमेश्वर के लिए नकल करने और लिखने के कार्य से अधिक महत्वपूर्ण है। तुम्हें उस चीज़ को पहला स्थान देना चाहिए, जो सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि तुम्हारे जीवन का अधिक मूल्य हो और वह ख़ुशियों से भरा हो, और फिर तुम्हें अपने लिए परमेश्वर के "दंडादेश" की प्रतीक्षा करनी चाहिए। मैं सोचता हूँ कि क्या तुम्हारी योजना में परमेश्वर से प्रेम करना शामिल होगा? मैं चाहता हूँ कि हर व्यक्ति की योजनाएँ परमेश्वर द्वारा पूरी की जाएँ और वे सब साकार हो जाएँ।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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