परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर के कार्य को जानना | अंश 222

जब पृथ्वी पर सीनियों का देश साकार होगा—जब राज्य साकार होगा—तो पृथ्वी पर और युद्ध नहीं होंगे; फिर कभी सूखा, महामारी और भूकंप नहीं आएँगे, लोग हथियारों का उत्पादन बंद कर देंगे; सभी शांति और स्थिरता में रहेंगे; लोगों के बीच सामान्य व्यवहार होंगे और देशों के बीच भी सामान्य व्यवहार होंगे। फिर भी वर्तमान की इससे कोई तुलना नहीं है। स्वर्ग के नीचे सब कुछ अराजक है और हर देश में धीरे-धीरे तख़्तापलट की शुरुआत हो रही है। परमेश्वर के कथनों की वजह से, लोग धीरे-धीरे बदल रहे हैं और आंतरिक रूप से, हर देश धीरे-धीरे टूट रहा है। रेत के महल की तरह बेबीलोन की स्थिर नींव हिलनी शुरू हो गयी है, और जैसे ही परमेश्वर की इच्छा में बदलाव होता है, दुनिया में अनजाने में भारी बदलाव होने लगते हैं, और किसी भी समय हर तरह के चिह्न प्रकट होने लगते हैं, जो दिखाता है कि दुनिया के अंत का दिन आ गया है! यह परमेश्वर की योजना है; वह इन्हीं कदमों के ज़रिए कार्य करता है, और निश्चित रूप से हर देश टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर जाएगा, पुराने सदोम का दूसरी बार सर्वनाश होगा, और इस प्रकार परमेश्वर कहता है, "संसार का पतन हो रहा है! बेबीलोन गतिहीनता की स्थिति में है!" स्वयं परमेश्वर के अलावा और कोई इसे पूरी तरह से समझ नहीं सकता; आख़िरकार, लोगों की जागरूकता की एक सीमा है। उदाहरण के लिए, आंतरिक मामलों के मंत्रियों को पता हो सकता है कि वर्तमान परिस्थितियाँ अस्थिर और अराजक हैं, लेकिन वे उनका समाधान करने में असमर्थ हैं। वे केवल धारा के संग बह सकते हैं, अपने हृदय में उस दिन की आस लगाए हुए, जब वे अपने मस्तक उन्नत रख सकेंगे, जब सूर्य एक बार फिर से पूर्व में उगेगा, देश भर में चमकेगा और इस दुःखद स्थिति को पलट देगा। लेकिन उन्हें पता नहीं कि जब सूर्य दूसरी बार उगता है, तो उसका उदय पुरानी व्यवस्था को बहाल करने के उद्देश्य से नहीं होता, यह एक पुनरुत्थान होता है, एक संपूर्ण परिवर्तन। पूरे ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर की योजना ऐसी ही है। वह एक नई दुनिया को अस्तित्व में लाएगा लेकिन सबसे पहले वह इंसान का नवीनीकरण करेगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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