परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 65" | अंश 222

एक के बाद सभी आपदाएँ आ पड़ेंगी; सभी राष्ट्र और सभी स्थान आपदाओं का अनुभव करेंगे—हर जगह दैवी कोप, अकाल, बाढ़, सूखा और भूकंप होंगे। ये आपदाएँ सिर्फ एक या दो जगहों पर ही नहीं होंगी, न ही ये एक या दो दिनों में समाप्त हो जाएँगी, बल्कि इसके बजाय ये बड़े से बड़े क्षेत्र तक फैल जाएँगी, और आपदाएँ अधिकाधिक गंभीर हो जाएँगी। इस समय के दौरान सभी प्रकार की कीट महामारियाँ क्रमशः उत्पन्न होती जाएँगी, और सभी स्थानों पर नरभक्षण की घटनाएँ होगी। सभी राष्ट्रों और लोगों पर यह मेरा न्याय है। मेरे पुत्रो! तुम लोगों को आपदाओं की पीड़ा या कठिनाइयों को नहीं भुगतना चाहिए। मैं चाहता हूँ कि तुम लोग शीघ्र परिपक्व हो जाओ और जितनी जल्दी हो सके मेरे कंधों के बोझ को उठा लो; तुम लोग मेरी इच्छा को क्यों नहीं समझते हो? आगे का काम अत्यधिक प्रचंड होता जाएगा। क्या तुम लोग इतने निष्ठुर हो कि सारा काम मेरे हाथों में देकर, मुझे अकेले इतना कठिन काम करने के लिए छोड़ रहे हो? मैं सरल वचनों में बोलूँगा: जिनके जीवन परिपक्व होंगे वे शरण में प्रवेश करेंगे और पीड़ा या कठिनाई का सामना नहीं करेंगे; जिनके जीवन परिपक्व नहीं होंगे उन्हें अवश्य पीड़ा और नुकसान भुगतना पड़ेगा। मेरे वचन पर्याप्त रूप से स्पष्ट हैं, है न?

मेरा नाम अवश्य सभी दिशाओं और सभी स्थानों में फैलना चाहिए, ताकि हर कोई मेरे पवित्र नाम को और मुझे जान सके। अमेरिका, जापान, कनाडा, सिंगापुर, सोवियत संघ, मकाऊ, हांगकांग और अन्य देशों से जीवन के सभी क्षेत्रों के लोग सच्चे मार्ग की खोज में तुरंत चीन में एक साथ भीड़ लगाएँगे। उनके लिए मेरे नाम की पहले से ही गवाही दी जा चुकी है; बस तुम लोगों का जितनी जल्दी हो सके परिपक्व होना बाकी है, ताकि तुम लोग उनकी चरवाही और अगुआई कर सको। यही कारण है कि मैं कहता हूँ कि आगे का काम अधिक बड़ा होगा। आपदाओं के परिणामस्वरूप मेरा नाम व्यापक रूप से फैलेगा, और यदि तुम लोग सावधान नहीं रहते हो, तो तुम लोग उस हिस्से को गँवा दोगे जो तुम्हारा होना चाहिए; क्या तुम लोग डरते नहीं हो? मेरा नाम सभी धर्मों, जीवन के सभी क्षेत्रों, सभी राष्ट्रों और सभी संप्रदायों तक फैला है। यह मेरा कार्य है जो, निकटता से जुड़े संबंधों में, व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है; यह सब मेरी बुद्धिमान व्यवस्था द्वारा होता है। मैं केवल यही चाहता हूँ कि तुम लोग मेरे पदचिह्नों का निकटता से अनुसरण करके हर कदम के साथ आगे बढ़ने में सक्षम रहो।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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