परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है" | अंश 215

बाइबल के दृष्य का स्मरण करें जब परमेश्वर ने सदोम पर विनाश का कार्य किया और इस बारे में भी विचार करें कि किस प्रकार से लूत की पत्नी नमक का खम्भा बन गई। वापस विचार करें कि किस प्रकार से नीनवे के लोगों ने टाट और राख में पश्चाताप किया, और स्मरण करें कि 2,000 वर्ष पहले यहूदियों द्वारा यीशु को सलीब पर चढ़ा दिए जाने के बाद क्या हुआ था। यहूदियों को इस्राएल से निर्वासित कर दिया गया था और वे दुनियाभर के देशों में भाग गए थे। कई लोगों को मार दिया गया था, और सम्पूर्ण यहूदी देश अभूतपूर्व विनाश के अधीन कर दिया गया था। उन्होंने परमेश्वर को सलीब पर चढ़ाया था—जघन्य अपराध किया था—और परमेश्वर के स्वभाव को उकसाया था। उन्होंने जो किया था उसका उनसे भुगतान करवाया गया था, उनसे उनके कार्यों के परिणामों को भुगतवाया गया था। उन्होंने परमेश्वर की निंदा की थी, परमेश्वर को अस्वीकार किया था, और इसलिए उनकी केवल एक ही नियति थी: परमेश्वर द्वारा दण्डित किया जाना। यही वह कड़वा परिणाम और आपदा है जो उनके शासक अपने देश और राष्ट्र पर लाए।

आज, परमेश्वर अपना कार्य करने के लिए संसार में वापस आ गया है। उसका पहला ठहराव, नास्तिकता का कट्टर गढ़, तानाशाही शासकों का विशाल जमावड़ाः चीन, है। परमेश्वर ने अपनी बुद्धि और सामर्थ्य से लोगों का एक समूह प्राप्त कर लिया है। इस अवधि के दौरान, चीन की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा उसका हर तरह से शिकार किया जाता है और उसे अत्याधिक पीड़ा के अधीन किया जाता है, उसके पास अपना सिर टिकाने के लिए कोई जगह नहीं है और वह किसी भी शरणस्थल को पाने में असमर्थ है। इसके बावजूद, परमेश्वर तब भी उस कार्य को जारी रखता है जिसे करने का उसका इरादा हैः वह अपनी वाणी बोलता है और सुसमाचार का प्रसार करता है। कोई भी परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता की थाह नहीं ले सकता है। चीन में, जो कि एक ऐसा देश है जो परमेश्वर को एक शत्रु मानता है, परमेश्वर ने कभी भी अपना कार्य बंद नहीं किया है। इसके बजाय, और अधिक लोगों ने उसके कार्य और वचन को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि परमेश्वर मानवजाति के हर एक सदस्य को बचाने के लिए वह सब कुछ करता है जो वह कर सकता है। हमें विश्वास है कि परमेश्वर जो कुछ प्राप्त करना चाहता है उस मार्ग में कोई भी देश या शक्ति ठहर नहीं सकता है। वे जो परमेश्वर के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं, परमेश्वर के वचन का विरोध करते हैं, परमेश्वर की योजना में विघ्न डालते हैं और उसे बिगाड़ते हैं, अंततः परमेश्वर के द्वारा दण्डित किए जाएँगे। वह जो परमेश्वर के कार्य की अवज्ञा करता है नष्ट कर दिया जाएगा; कोई भी राष्ट्र जो परमेश्वर के कार्य को अस्वीकार करता है, उसे नष्ट कर दिया जाएगा; कोई भी देश जो परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिए उठता है, वह इस पृथ्वी पर से मिटा दिया जाएगा; और उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मैं सभी देशों, राष्ट्रों और यहाँ तक कि उद्योग के लोगों से विनती करता हूँ, कि परमेश्वर की आवाज़ को सुनें, परमेश्वर के कार्य को देखें, मानवजाति के भाग्य पर ध्यान दें, इस प्रकार परमेश्वर को सर्वाधिक पवित्र, सर्वाधिक सम्माननीय, मानवजाति के बीच आराधना का सर्वोच्च, और एकमात्र लक्ष्य बनाएँ और सम्पूर्ण मानवजाति को परमेश्वर के आशीष के अधीन जीवन जीने की अनुमति दें, ठीक उसी तरह से जैसे अब्राहम के वंशज यहोवा की प्रतिज्ञाओं के अधीन रहे थे और ठीक उसी तरह से जैसे आदम और हवा, जो मूल रूप से परमेश्वर के द्वारा बनाए गए थे, अदन के बगीचे में रहे थे।

परमेश्वर का कार्य बलपूर्वक उमड़ती हुई लहरों के समान है। उसे कोई नहीं रोक सकता है, और कोई भी उसके क़दमों को थाम नहीं सकता है। केवल वे लोग ही जो उसके वचनों को सावधानीपूर्वक सुनते हैं, और उसकी खोज करते हैं और उसके लिए प्यासे हैं, उसके पदचिह्नों का अनुसरण करके उसकी प्रतिज्ञा को प्राप्त कर सकते हैं। जो ऐसा नहीं करते हैं वे ज़बर्दस्त आपदा और उचित दण्ड के अधीन किए जाएँगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

कोई ताकत आड़े आ नहीं सकती उस लक्ष्य के जो हासिल करना चाहता है परमेश्वर

परमेश्वर अब फिर आया है जगत में अपना कार्य करने। अधिनायकों की विशाल सभा उसका पहला पड़ाव है: चीन-मज़बूत गढ़ है नास्तिकता का, गढ़ है नास्तिकता का। अपनी बुद्धि और सामर्थ से पा लिया है लोगों के एक समूह को परमेश्वर ने। इस समय के दरमियाँ पीछा करता है उसका हर तरह से, चीन का सत्ताधारी दल। वो सह रहा है दुख-दर्द, न आरामगाह है न कोई आसरा है। फिर भी, वो उस काम में लगा है, जो काम करना है उसे, जो काम करना है उसे: अपनी वाणी सुनाना और सुसमाचार फैलाना।

परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता की थाह कोई पा नहीं सकता। चीन जैसे देश में जो शत्रु समझता है परमेश्वर को, परमेश्वर ने अपना काम रोका नहीं कभी, रोका नहीं कभी। बल्कि और ज़्यादा लोग आए हैं, स्वीकार करने उसके काम को, उसके वचन को, क्योंकि परमेश्वर जो भी कर सकता है, करता है, मानवता को बचाने, परमेश्वर जो भी कर सकता है, करता है, इंसान को बचाने। परमेश्वर जो हासिल करना चाहता है, न कोई देश आ सकता है उस रास्ते में, न आ सकती ताकत कोई। अगर बाधा डालेगा कोई परमेश्वर के काम में, या करेगा विरोध कोई उसके वचन का, रोकेगा या पहुँचाएगा नुकसान उसकी योजना को, तो सज़ा देगा परमेश्वर उसे अंत में, तो सज़ा देगा परमेश्वर उसे अंत में।

अगर अवहेलना करता है कोई परमेश्वर के काम की, तो परमेश्वर पहुँचा देता है सीधे उसे नरक में। अगर कोई देश अवहेलना करता है उसके काम की, तो परमेश्वर कर देता है तबाह उस देश को। अगर कोई राष्ट्र सिर उठाता है परमेश्वर के काम के विरोध में, तो वो मिटा देगा उसे धरती से, और फिर रहेगा न वजूद उसका। परमेश्वर जो हासिल करना चाहता है, न कोई देश आ सकता है उस रास्ते में, न आ सकती ताकत कोई। अगर बाधा डालेगा कोई परमेश्वर के काम में, या करेगा विरोध कोई उसके वचन का, रोकेगा या पहुँचाएगा नुकसान उसकी योजना को, तो सज़ा देगा परमेश्वर उसे अंत में, तो सज़ा देगा परमेश्वर उसे अंत में।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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