परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 11
परमेश्वर मनुष्य के परिणाम और परिणाम-निर्धारण के मानकों को कैसे तय करता है इससे पहले कि तुम्हारा अपना कोई दृष्टिकोण या निष्कर्ष हो, तुम्हें...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
आज, मैं चीन में परमेश्वर के चुने हुए लोगों में इसलिए काम करता हूँ ताकि उनके सारे विद्रोही स्वभावों को प्रकट करके उनकी समस्त कुरूपता को बेनकाब करूँ, और इससे मुझे वो सब बातें कहने के लिए संदर्भ मिलता है जो मुझे कहने की ज़रूरत है। तत्पश्चात, जब मैं सम्पूर्ण कायनात को जीतने के कार्य के अगले चरण पर काम करूँगा, तो मैं पूरी कायनात के लोगों की धार्मिकता का न्याय करने के लिए तुम लोगों के प्रति अपने न्याय का प्रयोग करूँगा, क्योंकि तुम्हीं लोग मनुष्यजाति में विद्रोहियों के प्रतिनिधि हो। जो लोग ऊपर नहीं उठ पाएँगे, वे सिर्फ विषमता और सेवा करने वाली चीज़ें बन जाएँगे, जबकि जो लोग ऊपर उठ पाएँगे, उनका प्रयोग किया जाएगा। मैं ऐसा क्यों कहता हूँ कि वे जो लोग नहीं उठ पाएँगे, वे केवल विषमता के रूप में कार्य करेंगे? क्योंकि मेरे वर्तमान वचन और कार्य, तुम लोगों की पृष्ठभूमि को निशाना बनाते हैं और इसलिए कि तुम सब समस्त मनुष्यजाति में विद्रोही लोगों के प्रतिनिधि और साक्षात प्रतिमान बन चुके हो। बाद में, मैं इन वचनों को, जो तुम सबको जीतते हैं, विदेशों में ले जाऊँगा और वहाँ के लोगों को जीतने के लिए उनका प्रयोग करूँगा, फिर भी तुम उन्हें प्राप्त नहीं कर पाओगे। क्या वह तुम्हें एक विषमता नहीं बनाएगा? समस्त मनुष्यजाति का भ्रष्ट स्वभाव, मनुष्य के विद्रोही कार्य, मनुष्य की भद्दी छवियाँ और चेहरे, आज ये सभी उन वचनों में दर्ज होते हैं, जिनका प्रयोग तुम लोगों को जीतने के लिए किया गया था। तब मैं इन वचनों का प्रयोग प्रत्येक राष्ट्र और सम्प्रदाय के लोगों को जीतने के लिए करूँगा, क्योंकि तुम सब आदर्श और उदाहरण हो। हालाँकि, मैंने तुम लोगों को जानबूझकर नहीं त्यागा; यदि तुम अपने अनुसरण में असफल होते हो और इस प्रकार तुम असाध्य होना प्रमाणित करते हो, तो क्या तुम सब मात्र सेवा करने वाली वस्तु और विषमता नहीं होगे? मैंने एक बार कहा था कि शैतान की युक्तियों के आधार पर मेरी बुद्धि प्रयुक्त की जाती है। मैंने ऐसा क्यों कहा था? क्या वह उसके पीछे का सत्य नहीं है, जो मैं अभी कह और कर रहा हूँ? यदि तुम आगे नहीं बढ़ सकते, यदि तुम पूर्ण नहीं किए जाते, बल्कि दण्डित किए जाते हो, तो क्या तुम विषमता नहीं बन जाओगे? हो सकता है तुम ने अपने समय में अत्यधिक पीड़ा सही हो, परन्तु तुम अभी भी कुछ नहीं समझते; तुम जीवन की प्रत्येक बात के विषय में अज्ञानी हो। यद्यपि तुम्हें ताड़ना दी गई और तुम्हारा न्याय किया गया; फिर भी तुम बिलकुल भी नहीं बदले और तुम ने भीतर तक जीवन ग्रहण ही नहीं किया है। जब तुम्हारे कार्य को जाँचने का समय आएगा, तुम अग्नि जैसे भयंकर परीक्षण और उस से भी बड़े क्लेश का अनुभव करोगे। यह अग्नि तुम्हारे सम्पूर्ण अस्तित्व को राख में बदल देगी। ऐसा व्यक्ति जिसमें जीवन नहीं है, ऐसा व्यक्ति जिसके भीतर एक रत्ती भी शुद्ध स्वर्ण न है, एक ऐसा व्यक्ति जो अभी भी पुराने भ्रष्ट स्वभाव में फंसा हुआ है, और ऐसा व्यक्ति जो विषमता होने का काम भी अच्छे से न कर सके, तो तुम्हें क्यों नहीं हटाया जाएगा? किसी ऐसे व्यक्ति का विजय-कार्य के लिए क्या उपयोग है, जिसका मूल्य एक पाई भी नहीं है और जिसके पास जीवन ही नहीं है? जब वह समय आएगा, तो तुम सब के दिन नूह और सदोम के दिनों से भी अधिक कठिन होंगे! तब तुम्हारी प्रार्थनाएँ भी तुम्हारा कुछ भला नहीं करेंगी। जब उद्धार का कार्य पहले ही समाप्त हो चुका है तो तुम बाद में वापस आकर नए सिरे से पश्चाताप करना कैसे आरम्भ कर सकते हो? एक बार जब उद्धार का सम्पूर्ण कार्य कर लिया जाएगा, तो उद्धार का और कार्य नहीं होगा; तब जो होगा, वह मात्र बुराई को दण्ड देने के कार्य का आरम्भ होगा। तुम विरोध करते हो, तुम विद्रोह करते हो, और तुम वो काम करते हो, जो तुम जानते हो कि बुरे हैं। क्या तुम कठोर दण्ड के लक्ष्य नहीं हो? मैं आज यह तुम्हारे लिए स्पष्ट रूप से बोल रहा हूँ। यदि तुम अनसुना करते हो, तो जब बाद में तुम पर विपत्ति टूटेगी, यदि तुम तब विश्वास और पछतावा करना आरम्भ करोगे, तो क्या इसमें तब बहुत देर नहीं हो चुकी होगी? मैं तुम्हें आज पश्चाताप करने का एक अवसर प्रदान कर रहा हूँ, परन्तु तुम ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हो। तुम और कितनी प्रतीक्षा करना चाहते हो? ताड़ना के दिन तक? मैं आज तुम्हारे पिछले अपराध याद नहीं रखता हूँ; मैं तुम्हें बार-बार क्षमा करता हूँ, मात्र तुम्हारे सकारात्मक पक्ष को देखने के लिए मैं तुम्हारे नकारात्मक पक्ष को अनदेखा करता हूँ, क्योंकि मेरे समस्त वर्तमान वचन और कार्य तुम्हें बचाने के लिए हैं। तुम्हारे प्रति मैं कोई बुरा इरादा नहीं रखता। फिर भी तुम प्रवेश करने से इन्कार करते हो; तुम भले और बुरे में अंतर नहीं कर सकते और नहीं जानते कि दयालुता की प्रशंसा कैसे की जाती है। क्या ऐसे लोग बस दण्ड और धार्मिक प्रतिफल की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, विजय के कार्य की आंतरिक सच्चाई (1)
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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