परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (8)" | अंश 195

मैंने कई बार कहा है कि परमेश्वर का अंतिम दिनों का कार्य प्रत्येक व्यक्ति की आत्मा को परिवर्तित करने, प्रत्येक व्यक्ति की रूह को बदलने के लिए किया जाता है, ताकि उसके दिल में, जिसने बहुत बड़ा आघात सहा है, सुधार लाया जा सके और इस प्रकार उसकी उस आत्मा को बचाया जा सके, जिसे बुराई द्वारा गंभीर रूप से हानि पहुंचाई गई है; इसका उद्देश्य लोगों की आत्माओं को जगाना है, उनके जमे हुए दिलों को पिघलाना है, और उनका कायाकल्प होने देना है। यही परमेश्वर की महानतम इच्छा है। मनुष्य का जीवन और उसके अनुभव कितने ऊँचे या गहरे हैं, इसकी बात करना छोड़ दो; जब लोगों के हृदय जाग्रत कर दिए जाएँगे, जब उन्हें उनके सपनों से जगा दिया जाएगा और वे बड़े लाल अजगर द्वारा पहुँचाई गई हानि से पूरी तरह से अवगत हो जाएँगे, तो परमेश्वर की सेवकाई का काम पूरा हो जाएगा। परमेश्वर का कार्य पूरा होने का दिन मनुष्य द्वारा आधिकारिक तौर पर परमेश्वर पर विश्वास की सही राह पर चलना शुरू करने का दिन भी है। इस समय, परमेश्वर की सेवकाई समाप्त हो जाएगी : देहधारी परमेश्वर का कार्य पूरी तरह समाप्त हो चुका होगा, और मनुष्य आधिकारिक तौर पर उस कर्तव्य को निभाना शुरू कर देगा, जो उसे निभाना चाहिए—वह अपनी सेवकाई का कार्य करेगा। ये परमेश्वर के कार्य के कदम हैं। इस प्रकार, तुम लोगों को इन बातों को जानने की नींव पर प्रवेश का अपना मार्ग टटोलना चाहिए। यह सब तुम लोगों को समझना चाहिए। मनुष्य के प्रवेश में तभी सुधार आएगा, जब परिवर्तन उसके दिल की गहराई में होगा, क्योंकि परमेश्वर का कार्य मनुष्य का राक्षसों के एकत्र होने के इस स्थान से पूर्ण उद्धार करना है—उस मनुष्य का, जिसे छुड़ा लिया गया है, जो अभी भी अंधेरे की शक्तियों के बीच रहता है, और जिसने कभी भी स्वयं को जगाया नहीं है; यह हो सकता है कि मनुष्य पाप की सहस्राब्दियों से मुक्त हो जाए, और परमेश्वर का चहेता बन जाए, बड़े लाल अजगर को पूरी तरह से मार डाले, परमेश्वर का राज्य स्थापित कर दे, और जल्दी ही परमेश्वर के दिल को आराम पहुँचा दे; यह बिना रोकटोक के उस घृणा को अपने सीने से निकाल देना है, उन फफूंदग्रस्त रोगाणुओं का उन्मूलन करना है, तुम लोगों के लिए इस जीवन को छोड़ पाना संभव बनाना है जो एक बैल या घोड़े के जीवन से कुछ अलग नहीं है, दास बनकर रहना छोड़ देना है, बड़े लाल अजगर द्वारा खुलकर कुचले जाने या उसकी आज्ञा मानने को त्याग देना है; तुम लोग अब इस असफल राष्ट्र का हिस्सा नहीं रहोगे, तुम अब घृणित बड़े लाल अजगर से जुड़े नहीं रहोगे, और तुम अब उसके दास नहीं रहोगे। राक्षसों का घोंसला परमेश्वर द्वारा निश्चित रूप से टुकड़े-टुकड़े कर दिया जाएगा, और तुम लोग परमेश्वर के साथ खड़े होगे—तुम लोग परमेश्वर के हो, और दासों के इस साम्राज्य के नहीं हो। परमेश्वर लंबे समय से इस अंधेरे समाज से अत्यधिक घृणा करता आया है। वह इस दुष्ट, घिनौने बूढ़े सर्प पर अपने पैर रखने के लिए अपने दांत पीसता है, ताकि वह फिर से कभी उठ न पाए, और फिर कभी मनुष्य के साथ दुर्व्यवहार न कर पाए; वह उसके अतीत के कर्मों को क्षमा नहीं करेगा, वह उसके द्वारा मनुष्य को दिए गए धोखे को बरदाश्त नहीं करेगा, और वह युगों-युगों में उसके द्वारा किए गए हर पाप का हिसाब चुकता करेगा। परमेश्वर इस समस्त बुराइयों के सरगना को जरा भी नहीं छोड़ेगा, वह इसे पूरी तरह से इसे नष्ट कर देगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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