परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 59

अपनी परीक्षाओं के पश्चात् अय्यूब

(अय्यूब 42:7-9) ऐसा हुआ कि जब यहोवा ये बातें अय्यूब से कह चुका, तब उसने तेमानी एलीपज से कहा, "मेरा क्रोध तेरे और तेरे दोनों मित्रों पर भड़का है, क्योंकि जैसी ठीक बात मेरे दास अय्यूब ने मेरे विषय कही है, वैसी तुम लोगों ने नहीं कही। इसलिये अब तुम सात बैल और सात मेढ़े छाँटकर मेरे दास अय्यूब के पास जाकर अपने निमित्त होमबलि चढ़ाओ, तब मेरा दास अय्यूब तुम्हारे लिये प्रार्थना करेगा, क्योंकि उसी की प्रार्थना मैं ग्रहण करूँगा; और नहीं, तो मैं तुम से तुम्हारी मूढ़ता के योग्य बर्ताव करूँगा, क्योंकि तुम लोगों ने मेरे विषय मेरे दास अय्यूब की सी ठीक बात नहीं कही।" यह सुन तेमानी एलीपज, शूही बिलदद और नामाती सोपर ने जाकर यहोवा की आज्ञा के अनुसार किया, और यहोवा ने अय्यूब की प्रार्थना ग्रहण की।

(अय्यूब 42:10) जब अय्यूब ने अपने मित्रों के लिये प्रार्थना की, तब यहोवा ने उसका सारा दुःख दूर किया, और जितना अय्यूब के पास पहले था, उसका दुगना यहोवा ने उसे दे दिया।

(अय्यूब 42:12) यहोवा ने अय्यूब के बाद के दिनों में उसके पहले के दिनों से अधिक आशीष दी; और उसके चौदह हज़ार भेड़ बकरियाँ, छः हज़ार ऊँट, हज़ार जोड़ी बैल, और हज़ार गदहियाँ हो गईं।

(अय्यूब 42:17) अन्त में अय्यूब वृद्धावस्था में दीर्घायु होकर मर गया।

वे जो परमेश्वर का भय मानते और बुराई से दूर रहते हैं उन्हें परमेश्वर के द्वारा स्नेह से देखा जाता है, जबकि ऐसे लोग जो मूर्ख हैं उन्हें परमेश्वर के द्वारा नीची दृष्टि से देखा जाता है

अय्यूब 42:7-9 में, परमेश्वर कहता है कि अय्यूब उसका दास है। उसके द्वारा "दास" शब्द का उपयोग करना अय्यूब की ओर संकेत करता है जो उसके हृदय में अय्यूब के महत्व को दर्शाता है; हालाँकि परमेश्वर ने अय्यूब को ऐसा कुछ कहकर नहीं पुकारा था जो और अधिक सम्मानीय होता, परमेश्वर के हृदय के भीतर अय्यूब के महत्व से इस उपाधि का कोई सम्बन्ध नहीं था। यहाँ पर "दास" शब्द अय्यूब के लिए परमेश्वर का दिया हुआ उपनाम है। "मेरे दास अय्यूब" की ओर परमेश्वर के अनगिनित संकेत यह दिखाते हैं कि वह अय्यूब से कितना प्रसन्न था, और हालाँकि परमेश्वर ने "दास" शब्द के पीछे छिपे अर्थ को नहीं बताया था, फिर भी दास शब्द की परमेश्वर की परिभाषा को पवित्र शास्त्र के इस अंश के इन वचनों में देखा जा सकता है। परमेश्वर ने सबसे पहले तेमानी एलीपज से कहा: "मेरा क्रोध तेरे और तेरे दोनों मित्रों पर भड़का है, क्योंकि जैसी ठीक बात मेरे दास अय्यूब ने मेरे विषय कही है, वैसी तुम लोगों ने नहीं कही।" ये शब्द पहली बार आए हैं जिनमें परमेश्वर ने लोगों से खुलकर कहा था कि उसने वह सब कुछ स्वीकार किया था जो अय्यूब के द्वारा परमेश्वर की परीक्षाओं के बाद कहा एवं किया गया था, और ये शब्द पहली बार आए हैं जिनमें उसने उन सब चीज़ों की सटीकता एवं सत्यता की पुष्टि की थी जिन्हें अयूब ने किया एवं कहा था। परमेश्वर उनके ग़लत, एवं बेतुके वार्तालाप के कारण एलीपज और अन्य से क्रोधित था, क्योंकि वे अय्यूब के समान परमेश्वर के प्रगटीकरण को नहीं देख सकते थे या उन वचनों को नहीं सुन सकते थे जो उसने उनके जीवन में कहा था, फिर भी अय्यूब के पास परमेश्वर का ऐसा सटीक ज्ञान था, जबकि वे केवल आंख मूंद कर परमेश्वर के विषय में अनुमान लगा सकते थे, और परमेश्वर की इच्छा का उल्लंघन कर सकते थे और वह सब जो वे करते थे उनमें उसके धीरज को परख सकते थे। परिणामस्वरूप, ठीक उसी समय सब कुछ स्वीकार करते हुए जिन्हें अय्यूब द्वारा किया एवं कहा गया था, परमेश्वर अन्य लोगों के प्रति क्रोधित हो गया था, क्योंकि उनमें परमेश्वर के भय की वास्तविकता को देखने में वह न केवल असमर्थ था, बल्कि उसने जो कुछ वे कहते थे उनमें परमेश्वर के भय के विषय में भी कुछ नहीं सुना था। और इस प्रकार इसके आगे परमेश्वर ने उनसे निम्नलिखित मांग की: "इसलिये अब तुम सात बैल और सात मेढ़े छाँटकर मेरे दास अय्यूब के पास जाकर अपने निमित्त होमबलि चढ़ाओ, तब मेरा दास अय्यूब तुम्हारे लिये प्रार्थना करेगा, क्योंकि उसी की प्रार्थना मैं ग्रहण करूँगा; और नहीं, तो मैं तुम से तुम्हारी मूढ़ता के योग्य बर्ताव करूँगा।" इस अंश में परमेश्वर ऐलीपज एवं अन्य से कह रहा है कि कुछ ऐसा करें जो उन्हें पापों से छुटकारा देगा, क्योंकि उनकी मूर्खता यहोवा परमेश्वर के विरुद्ध एक पाप था, और इस प्रकार उन्हें अपनी ग़लती का सुधार करने के लिए होमबलि चढ़ाना पड़ा। होमबलियों को अकसर परमेश्वर को चढ़ाया जाता था, परन्तु इन होमबलियों के विषय में असामान्य बात यह है कि उन्हें अय्यूब को चढ़ाया गया था। अय्यूब को परमेश्वर के द्वारा स्वीकार किया गया था क्योंकि उसने अपनी परीक्षाओं के दौरान परमेश्वर के लिए गवाही दी थी। इसी बीच, अय्यूब के इन मित्रों को उसकी परीक्षाओं के दौरान प्रकट किया गया था; उनकी मूर्खता के कारण परमेश्वर के द्वारा उनकी भर्त्सना की गई थी, और उन्होंने परमेश्वर के क्रोध को भड़काया था, और उन्हें परमेश्वर के द्वारा दण्ड दिया जाना चाहिए—अय्यूब के सामने होमबलि चढ़ाने के द्वारा दण्ड दिया गया—जिसके बाद अय्यूब ने उनके लिए प्रार्थना की कि उनके प्रति परमेश्वर का दण्ड एवं उसका क्रोध दूर हो जाए। परमेश्वर का अभिप्राय था कि उन्हें लज्जित किया जाए, क्योंकि वे ऐसे लोग नहीं थे जो परमेश्वर का भय मानते और बुराई से दूर रहते थे, और उन्होंने अय्यूब की खराई पर दोष लगाया था। एक लिहाज से, परमेश्वर उन्हें बता रहा था कि उसने उनके कार्यों को स्वीकार नहीं किया था परन्तु बड़े रूप में अय्यूब को स्वीकार किया और उस से प्रसन्न हुआ था; दूसरे लिहाज से, परमेश्वर उनसे कह रहा था कि परमेश्वर के द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद परमेश्वर के सामने मनुष्य को ऊंचा किया जाता है, यह कि मनुष्य की मूर्खता के कारण परमेश्वर के द्वारा मनुष्य से घृणा की जाती है, और इसके कारण परमेश्वर को ठेस पहुंचती है, और वह परमेश्वर की नज़रों में नीच एवं बुरा है। दो प्रकार के लोगों के विषय में ये परमेश्वर के द्वारा दी गई परिभाषाएं हैं, इन दो प्रकार के लोगों के प्रति ये परमेश्वर की मनोवृत्तियां हैं, और इन दो प्रकार के लोगों के मूल्य एवं स्थिति के विषय में ये परमेश्वर के स्पष्ट कथन हैं। भले ही परमेश्वर ने अय्यूब को अपना दास कहा था, फिर भी परमेश्वर की दृष्टि में यह "दास" अति प्रिय था, और उसे दूसरों के लिए प्रार्थना करने और उनकी ग़लतियों को क्षमा करने का अधिकार प्रदान किया गया था। यह "दास" परमेश्वर से सीधे बातचीत कर सकता था और सीधे परमेश्वर के सामने आ सकता था, उसकी हैसियत दूसरों की अपेक्षा अधिक ऊंची थी। यह "दास" शब्द का असली अर्थ है जिसे परमेश्वर के द्वारा कहा गया था। अय्यूब को यह विशेष सम्मान परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के कारण दिया गया था, और दूसरों को परमेश्वर के द्वारा दास नहीं कहा गया था इसका कारण है क्योंकि वे परमेश्वर का भय नहीं मानते थे और बुराई से दूर नहीं रहते थे। परमेश्वर की ये दो स्पष्ट भिन्न मनोवृत्तियां ही दो प्रकार के लोगों के प्रति उसकी मनोवृत्तियां हैं: ऐसे लोग जो परमेश्वर का भय मानते और बुराई से दूर रहते हैं उन्हें परमेश्वर के द्वारा स्वीकार किया जाता है, और उन्हें उसकी दृष्टि में बहुमूल्य माना जाता है, जबकि ऐसे लोग जो मूर्ख हैं वे परमेश्वर से नहीं डरते हैं, और वे बुराई से दूर रहने में असमर्थ हैं, और वे परमेश्वर की कृपा को पाने के योग्य नहीं हैं; अकसर परमेश्वर के द्वारा उनसे घृणा एवं उनकी निन्दा की जाती है, और वे परमेश्वर की दृष्टि में नीच हैं।

परमेश्वर अय्यूब को अधिकार प्रदान करता है

अय्यूब ने अपने मित्रों के लिए प्रार्थना की, और उसके बाद, अय्यूब की प्रार्थनाओं के कारण, परमेश्वर ने उनकी मूर्खता के अनुसार उनके साथ व्यवहार नहीं किया—उसने उन्हें दण्ड नहीं दिया या उनसे कोई बदला नहीं लिया। और ऐसा क्यों था? क्योंकि उनके लिए परमेश्वर के दास अय्यूब की प्रार्थनाएं परमेश्वर के कानों तक पहुंच गई थीं; परमेश्वर ने उन्हें क्षमा किया था क्योंकि उसने अय्यूब की प्रार्थनाओं को स्वीकार किया था। और हम इसमें क्या देखते हैं? जब परमेश्वर किसी को आशीष देता है, तो वह उन्हें बहुत सारे प्रतिफल देता है, सिर्फ भौतिक वस्तुएं ही नहीं, या फिर दोनों देता है: परमेश्वर उन्हें अधिकार भी देता है, और दूसरों के लिए प्रार्थना करने के लिए उन्हें समर्थ भी बनाता है, और परमेश्वर भूल जाता है, और उन लोगों के गुनाहों को अनदेखा करता है क्योंकि उसने इन प्रार्थनाओं को सुन लिया है। यह वही अधिकार है जिसे परमेश्वर ने अय्यूब को दिया था। अय्यूब की प्रार्थनाओं के माध्यम से उनकी निन्दा को रोकने के लिए यहोवा परमेश्वर ने उन मूर्ख लोगों को लज्जित किया था—जो वास्तव में एलीपज़ और दूसरों के लिए उसका विशेष दण्ड था।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

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