सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

Recital-the-word-appears-in-the-flesh-1
अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

श्रेणियाँ

Recital-latest-expression-1
वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

मानवजाति का मुख्य कार्य यह है कि वह अपने अस्तित्व के आधार के लिए मेरे वचनों को ग्रहण करे। मनुष्य को मेरे कथन के प्रत्येक भाग को अपने व्यक्तिगत हिस्से में स्थापित करना ही होगा; यदि वह ऐसा नहीं करता है तो वह अपने ऊपर संकट को निमंत्रण देता है और अपना ही नाश खोज रहा है। मानवजाति मुझे नहीं जानती है, और इसी कारण से, अपने स्वयं के जीवन को मुझे बदले में सौंपने के बजाय, वह मेरे सामने अपने हाथों की तुच्छ चीज़ों का प्रदर्शन करता है, ताकि वह मुझे संतुष्ट कर सके। मगर चीज़ें जैसी हैं उनसे बिल्कुल भी सन्तुष्ट न होकर, मैं निरंतर मानवजाति से मांग करता रहता हूं। मैं मनुष्य के श्रद्धा-भाव से प्रेम करता हूं; परन्तु उसकी धमकियों से घृणा करता हूं। सभी लोगों के हृदय में लोभ भरा रहता है; जैसे कि उसका हृदय शैतान के बंधनों में फंसा हुआ है, और मनुष्य उन बंधनों से मुक्त होने और अपने हृदय को अर्पण करने में सक्षम नहीं है। जब मैं बातचीत करता हूं, तो मनुष्य मेरी बातों को तन्मय होकर सुनता है; परन्तु जब मैं बातचीत करना बंद कर देता हूं, तो वह फिर से अपने ही "काम" में लग जाता है और पूरी तरह से मेरे शब्दों पर ध्यान देना बंद कर देता है, जैसे कि मानो मेरे वचन उसके काम के लिए अनुलग्नक हों। मैं कभी भी मानवता के साथ लापरवाही नहीं करता हूं, और फिर भी मैं मानवता के साथ लम्बे समय से कष्ट भोग रहा हूं और मानवता के साथ उदार बना रहा हूं। इसलिए, मेरी उदारता की वजह से, मानवजाति कुछ ज़्यादा ही भरोसा कर बैठी है तथा आत्म-ज्ञान और आत्म-विचार के योग्य नहीं बची, और वे मेरे धैर्य का फायदा उठाकर मुझे धोखा दे रहे हैं। उनमें से कोई भी व्यक्ति मेरी ईमानदारी से परवाह नहीं करता और कोई भी व्यक्ति मुझे इतना बहुमूल्य नहीं समझता कि अपने हृदय के करीब रखे; केवल जब उनके पास बचा हुआ व्यर्थ समय होता है तभी वे थोड़ा-बहुत आदर भाव मुझे दे देते हैं। जो प्रयास मैंने मनुष्यों के लिए किए हैं वे पहले से ही उनके अनुमान से परे हैं। मैंने मनुष्य पर अद्वितीय कार्य गढ़ा है, और इसके अलावा, मैंने उन्हें एक और बोझ दे दिया है, ताकि मेरे स्वरूप से, मनुष्य ज्ञान को प्राप्त करे और उसमें एक परिवर्तन आये। मैं मनुष्य से मात्र उपभोक्ता बनने की अपेक्षा नहीं करता हूं, बल्कि अपेक्षा करता हूं कि वह एक निर्माता बन सके जो शैतान को हराने में सक्षम हो। हालांकि मैं मनुष्यों के सामने कुछ मांग नहीं रखता हूं, इसके बावजूद मेरी मांगों के कुछ मानक हैं, क्योंकि मैं जो कुछ करता हूं उसमें एक उद्देश्य छिपा होता है, और जो कुछ करता हूं उसके अपने सिद्धांत हैं: जैसा इंसान सोचता है, मैं वैसी बेतरतीबी से कुछ कार्य नहीं करता हूं और न ही अपनी सनकीपन में स्वर्ग, पृथ्वी और असंख्य चीज़ों को निर्माण करता हूं। मेरे कार्य करने के तरीके से मनुष्य को कुछ न कुछ सीखना-समझना चाहिए। उसे अपनी युवावस्था को यूं ही नहीं गंवाना चाहिए और न ही अपने जीवन को उस वस्त्र की तरह समझना चाहिये जिस पर रखे-रखे धूल जम जाती है। बल्कि, उसे खुद पर सख्त रक्षक रखना चाहिए, उसे मुझसे प्राप्त उपहार का आनंद तब तक लेते रहना चाहिये जब तक कि वह मेरी ओर न मुड़ जाये और मेरी खातिर शैतान से न भिड़ जाये। बस मैं इंसान से इतना ही तो चाहता हूं?

जब पूर्व में एक धीमी प्रकाश की किरण दिखाई देती है, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लोग उस पूर्व की रोशनी की ओर उस अवसर विशेष पर अपना पूरा ध्यान लगा देते हैं। गहरी नींद से जागकर, मनुष्य उस पूर्वी रोशनी के स्रोत पर अपना ध्यान तो केंद्रित करता है, परन्तु मानव अपनी सीमाओं के कारण, उस स्थान को देख नहीं पाता जहां से वह रोशनी निकलती है। जब सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड प्रकाशित हो जायेगा, तब, मनुष्य अपनी निद्रा और स्वप्न से बाहर आएंगे, और तभी वे महसूस करेंगे कि धीरे-धीरे मेरा दिन इस संसार में आ रहा है। सम्पूर्ण मानवजाति उत्सव मनाती है क्योंकि रोशनी आ रही है, और इस वजह से वह गहरी नींद नहीं है, और अब चेतनाशून्य नहीं रही। मेरी रोशनी की चमक के तले, सम्पूर्ण मानवजाति का मन और दृष्टि स्पष्ट हो जाती है, और अचानक जीवन के आनन्द से भर जाती है। मैं धुंध के आवरण से ढकी हुई मानवजाति की ओर देखता हूं। सभी जानवर आराम कर रहे हैं; क्षीण प्रकाश के उदित होने से, सृष्टि में मौजूद प्रत्येक चीज़ चेतना में आ जाती है, क्योंकि एक नये जीवन का आगमन हो रहा है। इसी कारण से, जानवर भी अपनी मांदो से रेंगते हुए बाहर आते हैं, अपने भोजन की तलाश में। जाहिर है कि पेड़-पौधे, भी इसका अपवाद नहीं हैं, और रोशनी की चमक में उनकी पत्तियाँ उज्जवल ज्योति के साथ दमकती हैं, इस इंतजार में कि जब मैं इस धरती पार आऊं तो वे अपने हिस्से का समर्पण मुझे अर्पित करें। सम्पूर्ण मानवजाति रोशनी आने की प्रतीक्षा में है, फिर भी वे उसके आगमन से डरते हैं, चिंतित हैं कि कहीं उनकी अपनी कुरूपता उजागर न हो जाये, क्योंकि मनुष्य पूरी तरह से नग्न है, और छिपाने के लिए उसके पास कुछ भी नहीं है। ऐसे कितने लोग हैं जो रोशनी के आगमन से आतंकित हैं, कितने लोग हैं जो इस सदमे में हैं कि रोशनी प्रकट हो चुकी है? कितने लोग रोशनी को देखकर असीम पछतावे से भरे हुए हैं, अपनी ही गंदगी से घृणा कर रहे हैं, परन्तु जो घटित हो चुका उसे बदलने में असमर्थ हैं केवल इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि मैं आऊं और उन्हें उनका दंड सुनाऊं। ऐसे कितने लोग हैं जो अंधकार के कष्टों से शुद्ध हुए हैं, जिन्हें रोशनी देखकर इसके गहन अर्थ से आघात पहुंचा है और उसके बाद से, वे उसे खोने के डर से अपनी सीने से चिपकाकर रखते हैं? कितने लोग, रोशनी के अचानक प्रगट होने से अपने पथ से बाहर फेंके जाने के बजाए, अपने प्रतिदिन के काम में लग जाते हैं, क्योंकि वे सालों से अंधे रहे हैं, और इसलिए वे रोशनी के आने को पहचान नहीं पाते, न ही इससे संतुष्टि प्राप्त होती है। मनुष्य के हृदय में, मैं न तो उच्च हूं, न ही नीचे हूं। जहां तक मनुष्यों की बात है, यह उदासीनता की बात है चाहे मेरा अस्तित्व हो या न हो, जैसे कि मेरा अस्तित्व न होने से मनुष्य का अकेलापन ही नहीं रहेगा और यदि मेरा अस्तित्व है, तो इससे उन्हें कोई खुशी नहीं मिलेगी। क्योंकि मनुष्य मुझे प्रेम नहीं करते हैं, जो आनन्द मैं उन्हें देता हूं वो बहुत ही थोड़ा है। परन्तु जैसे ही मानवजाति मुझे थोड़ा सा भी आदर देती है, तो मैं भी मानवता के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदल लूंगा इसी कारण से, केवल जब मानवजाति इस नियम को स्वीकारती है, तभी मानव इतने भाग्यशाली होंगें कि वे अपने आप को मुझे समर्पित कर सकें और जो मेरे हाथों में है उसकी मांग कर सकें। निश्चय ही मनुष्य का मेरे प्रति प्रेम उसके स्वयं के हितों से नहीं बंधा है? निश्चय ही मेरे प्रति इंसान की निष्ठा मात्र उन चीजों से नहीं बंधी है जो मैं उसे देता हूं। क्या ऐसा हो सकता है, कि जब तक वह मेरी रोशनी को न देखे, वह अपने विश्वास के द्वारा मुझे प्रेम करने में असमर्थ होता है? निश्चय ही मनुष्य की शक्ति और ताकत वाकई आज की स्थिति के अनुसार सीमित नहीं है ? क्या ऐसा हो सकता है कि मनुष्य को मुझे प्रेम करने के लिए साहस की आवश्यकता है?

मेरे अस्तित्व पर निर्भर रहते हुए, सृष्टि की असंख्य चीजें अपने स्थानों में ही मेरी आज्ञा को मानती हैं, और मेरे अनुशासन के अभाव में, अनैतिक कार्यों में लिप्त नहीं होतीं। इसलिए, भूमि पर पहाड़ देशों के मध्य सीमा बन जाते हैं, भूमि के मध्य अलगाव रखने के लिए समुद्र बाधाएं बन जाते हैं, और वायु पृथ्वी के स्थान पर मनुष्य से मनुष्य के मध्य बहती रहती है। केवल मानवता ही सही मायने में मेरी इच्छा के अनुसार मांगों को पूरा करने में असमर्थ है; इसलिए मैंने कहा है कि सम्पूर्ण सृष्टि में से केवल मनुष्य ही आज्ञा-उल्लंघन की श्रेणी में आता है। मनुष्य ने कभी भी मेरे प्रति अपना वास्तव में समर्पण नहीं किया है और इसी कारण से मैंने उसे हमेशा बहुत ही सख्त अनुशासन में रखा है। यदि मानवता के मध्य में, ऐसा हो जाता है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड पर मेरी महिमा फैल जाती है, तो मैं अपनी सम्पूर्ण महिमा ले लूंगा और मनुष्यों के सामने प्रस्तुत करूंगा। क्योंकि मनुष्य अपनी अशुद्धता में मेरी महिमा देखने के अयोग्य है, क्योंकि हज़ारों वर्षों से मैं खुले में नहीं आया, बल्कि छिपा ही रहा हूं; इसी कारण से मेरी महिमा मानवजाति के सामने कभी भी व्यक्त नहीं हुई, और मनुष्य पाप की गहरी खाई में डूबा रहा है। मैंने मानवजाति की अधर्मिता को क्षमा कर दिया है, परन्तु मनुष्य नहीं जानता कि स्वयं को संरक्षित कैसे किया जाए, और हमेशा उसने पाप के सामने घुटने टेक दिये हैं, पाप उसे आहत करता रहा है। क्या यह मानव की आत्म-सम्मान और आत्म-प्रेम की कमी नहीं है? मानवता के मध्य, क्या कोई ऐसा है जो वास्तव में प्रेम कर सकता है? मनुष्य की भक्ति में क्या वज़न हो सकता है? क्या उसकी तथाकथित प्रमाणिकता में मिलावट नहीं है? क्या उसकी भक्ति पूरी तरह से मिलावटी नहीं है? मैं मनुष्य से अविभाजित प्रेम की अपेक्षा करता हूं। मनुष्य मुझे नहीं जानता है, और हालांकि वह मुझे खोजने का प्रयत्न करता है, परन्तु वह अपना सच्चा और ईमानदार हृदय नहीं देता है। मैं इंसान से वह बलपूर्वक नहीं लेना चाहता, जो वह देना नहीं चाहता है। यदि वह मुझे अपनी भक्ति देगा मैं उसे बिना विनम्र एतराज़ के ग्रहण कर लूंगा; परन्तु यदि वह मुझ पर विश्वास नहीं करेगा और अपने आप में से ज़रा सा भी मुझे अर्पण करने से मना करेगा, तो उस बारे में और भी अधिक दुखित होने की बजाय मैं बस उसे किसी दूसरे तरीके से निपटाऊंगा और उसे उस घर में भेजूंगा जहां के लिये वह उपयुक्त है। पूरे आसमान में फैली गड़गड़ाहट मनुष्य को मार गिरायेगी; ऊंचे-ऊंचे पहाड़ उनके नीचे गिरते ही, उसे दफना देंगे; जंगली जानवर अपनी भूख मिटाने के लिए उसे नोंच कर खा जायेंगे; और महासागर उसके सिर के पास ही हिलोरे मारेंगे। और जैसे ही मानवता भाई-बंधुओं के झगड़ों में उलझेगी, लोग अपने ही मध्य से उत्पन्न होने वाली आपदाओं से अपने विनाश को प्राप्त होंगे।

परमेश्वर का राज्य मानवता के मध्य विस्तार पा रहा है, यह मानवता के मध्य बन रहा है, यह मानवता के मध्य खड़ा हो रहा है; ऐसी कोई भी शक्ति नहीं है जो मेरे राज्य को नष्ट कर सके। आज के राज्य के मेरे लोगों में से तुम सबमें से ऐसा कौन है जो मानवों में मानव नहीं है ? तुम लोगों में से कौन मानवीय परिस्थितियों से बाहर है ? जब भीड़ के मध्य मेरे प्रारम्भ बिन्दु को सुनाया जायेगा, तो मानवजाति किस प्रकार से प्रतिक्रिया व्यक्त करेगी? तुम सबने अपनी आंखों से मानवजाति की दशा को देखा है; निश्चय ही तुम लोग अब इस संसार में हमेशा के लिए बने रहने की आशा नहीं कर रहे होगे? अब मैं निर्बाध अपने लोगों के मध्य चल रहा हूं, मेरे लोगों के मध्य में रहता हूं। आज, जो मेरे लिए वास्तविक प्रेम रखते हैं, ऐसे लोग ही धन्य हैं; जो मुझे समर्पित रहते हैं वे धन्य हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य में रहेंगे; जो मुझे जानते हैं वे धन्य हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य में शक्ति प्राप्त करेंगे; जो मेरा अनुसरण करते हैं वे धन्य हैं, वे निश्चय ही शैतान के बंधनों से स्वतंत्र होंगे और मेरी आशीषों का आनन्द लेंगे; वे लोग धन्य हैं जो अपने आप को मेरे लिए त्यागते हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य को प्राप्त करेंगे और मेरे राज्य का उपहार पाएंगे। जो लोग मेरे खातिर मेरे चारों ओर दौड़ते हैं उनके लिए मैं उत्सव मनाऊंगा, जो लोग मेरे लिए अपने आप को समर्पित करते हैं मैं उन्हें आनन्द से गले लगाऊंगा, जो लोग मुझे भेंट देते हैं मैं उन्हें आनन्द दूंगा। जो लोग मेरे शब्दों में आनन्द प्राप्त करते हैं उन्हें मैं आशीष दूंगा; वे निश्चय ही ऐसे खम्भे होंगे जो मेरे राज्य में शहतीर को थामने वाले होंगे, वे निश्चय ही अनेकों उपहारों को मेरे घर में प्राप्त करेंगे और उनके साथ कोई तुलना नहीं कर पाएगा। क्या तुम सबने मिलने वाली आशीषों को स्वीकार किया है? क्या कभी तुम सबने मिलने वाले वायदों को पाया है? तुम लोग निश्चय ही, मेरी रोशनी के नेतृत्व में, अंधकार की शक्तियों के गढ़ को तोड़ोगे। तुम अंधकार के मध्य निश्चय ही मार्गदर्शन करने वाली ज्योति से वंचित नहीं रहोगे। तुम सब निश्चय ही सम्पूर्ण सृष्टि पर स्वामी होगे। तुम लोग शैतान पर निश्चय ही विजयी बनोगे। तुम सब निश्चय ही महान लाल ड्रैगन के राज्य के पतन को देखोगे और मेरी विजय की गवाही के लिए असंख्य लोगों की भीड़ में खड़े होगे। तुम लोग निश्चय ही पाप के देश में दृढ़ और अटूट खड़े रहोगे। तुम सब जो कष्ट सह रहे हो, उनके मध्य तुम मेरे द्वारा आने वाली आशीषों को प्राप्त करोगे और मेरी महिमा के भीतर के ब्रह्माण्ड में निश्चय ही जगमगाओगे।

मार्च 19, 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग एक परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो

00:00
00:00

0खोज परिणाम