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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

बिजली की एक चमक पर, प्रत्येक जानवर अपने असली स्वरूप में प्रकट हो जाता है। उसी तरह, मेरे प्रकाश से प्रकाशित मानवजाति ने उस पवित्रता को पुनः-प्राप्त कर लिया है जिससे वह कभी सम्पन्न थी। ओह, अतीत का वह भ्रष्ट संसार गंदे पानी में पलट गया है, और सतह के नीचे डूब कर, कीचड़ में घुल गया है! ओह, वह सम्पूर्ण मानवजाति ने, जिसे मैंने रचा था, अंततः फिर से रोशनी में जीवन को प्राप्त कर लिया है, अपने अस्तित्व की नींव को पा लिया है, और कीचड़ में संघर्ष करना बंद कर दिया है! ओह, सृष्टि की असंख्य चीजें जो मैंने अपने हाथों में थामे रखी हैं! वे कैसे मेरे वचनों के माध्यम से नई नहीं की जा सकती हैं? वे कैसे, रोशनी में, अपने कार्यों को नहीं कर सकती हैं? पृथ्वी अब स्थिर और मूक नहीं है, स्वर्ग अब उजाड़ और दुःखी नहीं है। स्वर्ग और पृथ्वी, अब खालीपन द्वारा पृथक नहीं हैं, पुनः कभी भी पृथक नहीं किए जाने के लिए, अब एक ही बन गए हैं। इस आनन्द के अवसर पर, इस उत्साह के अवसर पर, मेरी धार्मिकता और मेरी पवित्रता, सम्पूर्ण बह्माण्ड में फैल गई है, और सम्पूर्ण मानवजाति बिना रुके उसकी प्रशंसा करती है। स्वर्ग के शहर खुशी से हँस रहे हैं, और पृथ्वी के राज्य खुशी से नाच रहे हैं। इस क्षण कौन आनन्द नहीं ले रहा है? और इस क्षण कौन रो नहीं रहा है? पृथ्वी अपनी मौलिक स्थिति में स्वर्ग से सम्बंध रखती है और स्वर्ग पृथ्वी के साथ एक हो जाता है। मनुष्य, स्वर्ग और पृथ्वी को बाँधे रखने वाली डोर है, और उसकी पवित्रता के कारण, उसके नवीनीकरण के कारण, स्वर्ग अब पृथ्वी से छुपा हुआ नहीं है, और पृथ्वी स्वर्ग के प्रति अब और मूक नहीं है। मानवजाति के चेहरों पर अब संतुष्टि की मुस्कान बिखरी हुई है और उनके हृदयों में मिठास बह रही है जिसकी कोई सीमा नहीं है। मनुष्य मनुष्य से झगड़ा नहीं करता है, न ही मनुष्य एक दूसरे से असहमति के साथ झगड़ता है। क्या कोई ऐसा है जो, मेरी रोशनी में, दूसरों के साथ शान्ति से नहीं रहता है? क्या ऐसा कोई है जो, मेरे दिनों में, मेरे नाम का अपमान करता है? सभी मानव श्रद्धा भरी निगाहों से मुझे निहारते हैं और अपने हृदयों में वे चुपचाप मुझे पुकारते हैं। मैंने मानवजाति के प्रत्येक कार्य को खोजा हैः मानवों में, जो शुद्ध किए गए हैं, ऐसे कोई नहीं हैं जो मेर् प्रति अवज्ञाकारी हैं, ऐसे कोई नहीं हैं जो मेरी आलोचना करते हैं। सम्पूर्ण मानवजाति में मेरा स्वभाव भर गया है। हर कोई मुझे जानने के लिए आ रहा है, मेरे और करीब आ रहा है, मेरी आराधना कर रहा है। मैं मनुष्य की आत्मा में दृढ़ खड़ा हूँ, मैं मनुष्य की दृष्टि में उच्चतम शिखर पर उठा हुआ हूँ, और उसकी नसों में रक्त के माध्यम से प्रवाहित होता हूँ। मनुष्य के हृदय में आनन्द की उमंग पृथ्वी की सतह पर हर स्थान को भर देती है, हवा तेज़ और ताज़ा हो जाती है, घना कोहरा मैदान को अब और आच्छादित नहीं करता है, और सूर्य प्रकाशमान होकर चमकता है।

अब, मेरे राज्य को देखो, जहाँ पर मैं सब का राजा हूँ, और जहाँ पर में सब पर शासन करता हूँ। सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान दिन तक, मेरे पुत्र, मेरे द्वारा निर्देशित हो कर, जीवन की कई कठिनाईयों से, संसार के कई अन्यायों से, संसार के कई उतार-चढ़ावों से गुजरे हैं, किन्तु अब वे मेरी रोशनी में निवास करते हैं। कल के अन्याय पर कौन नहीं रोता है? आज के दिन तक आने की कठिनाईयों पर कौन आँसू नहीं बहाता है? और फिर, क्या कोई ऐसा है जो अपने आप को मेरे प्रति समर्पित करने के लिए इस अवसर का उपयोग नहीं करना चाहता है? क्या कोई ऐसा है जो अपने हृदय में बढ़ रहे ज़ुनून को बाहर निकालने के लिए इस अवसर का उपयोग नहीं करता है? क्या कोई ऐसे हैं जो, इस समय, उस बात को नहीं बोलते हैं जो उन्होंने अनुभव की हैं? इस समय, प्रत्येक मानव अपने आप का सबसे उत्तम भाग मेरे लिए समर्पित कर रहे हैं। कल के किए हुए मूर्खतापूर्ण कार्यों के लिए कितने लोग पछतावे से व्यथित हैं, कल की गई कोशिशों के लिए कितने लोग अपने आप से घृणा करते हैं! समस्त मानवजाति को स्वयं का पता चल गया है, उन सभी ने शैतान के कर्मों और मेरी अद्भुदता को देख लिया है और उनके हृदयों में मेरे लिए एक स्थान स्थापित हो गया है। मनुष्यों के बीच द्वेष या परित्याग से मेरा अब और सामना नहीं होगा, क्योंकि मेरा महान कार्य पहले ही पूर्ण हो चुका है, और अब और कोई रूकावट नहीं है। आज, मेरे राज्य के पुत्रों के बीच, क्या कोई ऐसे हैं जिन्होंने अपने स्वयं के निमित्त विचार न किया हो? क्या कोई ऐसे हैं जिनके पास उन तरीकों के कारण चिंता करने का अतिरिक्त कारण नहीं है जिनसे मैं कार्य करता हूँ? क्या कोई ऐसे हैं जिन्होने ईमानदारी से अपने आप को मेरे वास्ते समर्पित कर दिया है? क्या तुम लोगों के भीतर की अशुद्धियाँ कम हो गई हैं? या वे बढ़ गई हैं? यदि तुम्हारे हृदय के अशुद्ध तत्व न तो कम हुए और न बढ़े हैं, तो मैं ऐसे लोगों को निश्चित रूप से दूर फेंक दूँगा। मैं ऐसे संत चाहता हूँ जो मेरे हृदय के अनुसार हों, न कि अशुद्ध आत्माएँ जो मेरे विरूद्ध विद्रोह करती हैं। भले ही मैं मानवजाति से अधिक नहीं माँगता हूँ, फिर भी मनुष्य के हृदय का आंतरिक संसार इतना जटिल है कि मानवजाति आसानी से मेरी इच्छा से सहमत नहीं हो सकती है या मेरी इच्छाओं को तुरंत संतुष्ट नहीं कर सकती है। मानवजाति में से अधिकांश चुपचाप, अंत में सर्वोच्च प्रतिष्ठा पर कब्जा करने में समर्थ होने की आशा में अपने आप को लगा रहे हैं। मानवजाति में से अधिकांश लोग, दूसरी बार शैतान के चंगुल में फँसने से भयभीत, एक क्षण के लिए भी ढीला पड़ने का साहस किए बिना, अपनी पूरी ताकत से प्रयास कर रहे हैं। वे मेरे विरूद्ध शिकायतो को आश्रय देने का ख्याल करने का अब और साहस नहीं करते हैं, बल्कि निरंतर मेरे सामने अपनी निष्ठा दिखाने का प्रयास करते हैं। मैंने कई लोगों के हृदय से बोले गए वचनों को, पीड़ा के बीच दर्दनाक अनुभवों के बारे में कई लोगों द्वारा कहे गए वर्णनों को सुना है; मैंने कई लोगों को, कठिन स्थितियों में, बिना नागा किए मेरे प्रति अपनी निष्ठा को अर्पित करते हुए देखा है, और कई लोगों को पथरीली मार्ग पर चलते हुए, बाहर निकलने के रास्ते के लिए संघर्ष करते हुए देखा है। इन परिस्थितियों में, उन्होंने कभी भी शिकायत नहीं की है; यहाँ तक कि जब, रोशनी को प्राप्त करने में असमर्थ, वे थोड़ा निरुत्साहित हुए, तब भी उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। किन्तु मैंने कई लोगों को उनके हृदय की गहराई से अभिशाप देते हुए, स्वर्ग को कोसते हुए और पृथ्वी को दोष देते हुए सुना है, और मैंने यह भी देखा है कि कई लोग अपनी विपत्ति के बीच अपने आप को निराशा के बीच में छोड़ देते हैं, अपने आप को ऐसे कचरे के समान कूड़ेदान में फेंक देते हैं, ताकि वे गंदगी और जमी हुई कीट से ढक जाएँ। मैंने कई लोगों को एक दूसरे से लड़ते-झगड़ते देखा है, क्योंकि उनकी स्थिति में परिवर्तन, और साथ ही "चेहरे" के बदलावों, ने उनके साथी मनुष्यों के साथ उनके सम्बन्धों में परिवर्तन ला दिया है, इसलिए मित्र मित्र नहीं रहे हैं और, अपने मुँह से एक दूसरे पर आक्रमण करते हुए, शत्रु बन गए हैं। अधिसंख्य लोग मेरे वचनों को मशीनगन की गोलियों की तरह उपयोग करते हैं, अनजाने में एक दूसरे पर गोली की बौछार करते हैं, जब तक कि मनुष्यों की दुनिया में हर जगह कोलाहल न भर जाए जो शान्त स्थान की शान्ति को छिन्न-भिन्न कर देता है। सौभाग्य से, यह अब आज है; अन्यथा कौन जाने कि कितने लोग इस मशीनगन की गोलियों की अथक बौछार से नष्ट हो गए होते।

मुझसे निकले हुए वचनों का अनुसरण करते हुए, और समस्त मानवजाति की स्थिति के साथ गति बनाए रखते हुए, मेरा राज्य, कदम दर कदम, पृथ्वी पर उतरता है। मनुष्य अब और चिंताजनक विचारों को आश्रय नहीं देता है, या दूसरे लोगों का "ध्यान रखता" नहीं है, या उनकी ओर से "सोचता" नहीं है। और इसलिए, विवादपूर्ण झगड़े अब और नहीं होते हैं, और उन वचनों का अनुसरण करते हुए जो मुझसे जारी होते हैं, ये आधुनिक युग के विविध प्रकार के "हथियार" भी वापस ले लिए जाते हैं। मनुष्य फिर से मनुष्य के साथ शान्ति प्राप्त करता है, मानव हृदय एक बार फिर से समरसता की भावना बिखेरता है, कोई भी किसी गुप्त हमले के खिलाफ अब और बचाव नहीं करता है। समस्त मानवजाति अब सामान्य हो गई है और एक नए जीवन को आरम्भ कर चुकी है। एक नए परिवेश में विद्यमान, अच्छी संख्या में लोग, ऐसा महसूस करते हुए मानो कि वे एक बिल्कुल ही नए संसार में प्रवेश कर चुके हैं, अपने आसपास देखते हैं, और इस वजह से वे तुरंत अपने वर्तमान परिवेश को अपनाने में या एक दम से सही मार्ग पर आने में समर्थ नहीं होते हैं। इसलिए जहाँ तक मानवजाति की बात है यह "आत्मा तो तैयार है किन्तु देह दुर्बल है" का मामला है। यद्यपि मैंने, मनुष्य की तरह, स्वयं विपरीत परिस्थितियों की कड़वाहट को नहीं चखा है, फिर भी मैं उसकी अपर्याप्तताओँ के बारे में वह सब जानता हूँ जो मुझे जाननी हैं। मैं मनुष्य की आवश्यकताओं से घनिष्ठता से परिचित हूँ और उसकी कमजोरियों के बारे में मेरी समझ पूरी है। इसी कारण से, मैं मनुष्य की कमियों की वजह से उसका मज़ाक नहीं उड़ाता हूँ; मैं, उसके अधार्मिक कर्मों पर निर्भर करते हुए, केवल "शिक्षा" के एक उचित उपाय को प्रशासित करता हूँ, जो हर एक को सही रास्ते पर आने में सक्षम बनाता है, ताकि मानवजाति भटकती हुई अनाथ नहीं रहेगी और एक घर के साथ पोषित बच्चे बन जाएगी। तब भी, मेरे कार्य सिद्धांतों द्वारा नियंत्रित होते हैं। यदि मानवजाति उस परमानंद का मज़ा लेने की अनिच्छुक है जो मुझ में है, तो मैं केवल इतना ही कर सकता हूँ कि उनकी अभिलाषाओं के साथ रहूँ और उन्हें अथाह गड्ढे में भेज दूँ। इस बिन्दु पर, अब किसी को भी अपने हृदय में इसके बाद शिकायतों को आश्रय नहीं देना चाहिए, बल्कि सभी को मेरे द्वारा की गई व्यवस्थाओं में मेरी धार्मिकता को देखने में समर्थ होना चाहिए। मैं मानवजाति को विवश नहीं करता हूँ कि वे मुझे प्रेम करें, न ही मैं मुझे प्रेम करने के लिए किसी मनुष्य को मारता हूँ। मुझ में पूरी स्वतंत्रता है, पूरी मुक्ति है। यद्यपि मनुष्य का भाग्य मेरे हाथ में रहता है, किन्तु मैंने मनुष्य को स्वतंत्र इच्छा दी है, जो मेरे नियंत्रण के अधीन नहीं है। इस तरह से, मानवजाति मेरी प्रशासनिक आज्ञाओं के कारण मुसीबत में पड़ने के लिए तरीकों का अविष्कार नहीं करेगी, बल्कि इसके बजाय, मेरी उदारता पर भरोसा करके, मुक्ति प्राप्त करेगी। और कई लोग, मेरे प्रति संयम में रहने से दूर, मुक्त किए जाने के कार्य में अपने स्वयं के मार्ग को खोजते जाते हैं।

मैंने मानवजाति के साथ हमेशा उदारता से व्यवहार किया है, कभी भी जटिल समस्याओं को नहीं रखा है, किसी एक भी व्यक्ति को कभी भी परेशानी में नहीं डाला है; क्या यह ऐसा नहीं है? यद्यपि बहुत सारे लोग मुझसे प्रेम नहीं करते हैं, इस प्रकार के दृष्टिकोण से परेशान होने से दूर, मैंने मनुष्यों को कठोर समुद्र में तैरने की अनुमति देने की हद तक छूट देते हुए, मैंने मनुष्यों को स्वतंत्रता दी है। क्योंकि मनुष्य एक पात्र है जिसका दाम नहीं लगाया जाए: यद्यपि वह उन आशीषों को देखता है जो मेरे हाथ में है, किन्तु इसका आनन्द लेने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है, परन्तु शैतान के हाथ से विपत्ति को इकट्ठा करेगा, फलस्वरूप अपने आप को शैतान के द्वारा "पोषण" के रूप में चूसे जाने के लिए बर्बाद कर रहा है। वास्तव में, कुछ लोग हैं जिन्होंने मेरे प्रकाश को अपनी आँखों से देखा है, और इसलिए, भले ही वे वर्तमान समय के धुंध में जी रहे हैं, फिर भी उन्होंने इस अँधेरा करने वाले धुंध के कारण प्रकाश में अपना विश्वास नहीं खोया है। बल्कि धुंध में टटोलना और खोजना जारी रखा है—यद्यपि बाधाओं से भरे एक पथ के माध्यम से। जब मनुष्य मेरे विरूद्ध विद्रोह करता है, तो मैं उस पर अपना गुस्से से भरा कोप फेंकता हूँ, और इसलिए मनुष्य अपनी अवज्ञा द्वारा नष्ट हो सकता है। जब वह मेरा आज्ञापालन करता है, तो मैं उससे छिपा रहता हूँ, इस प्रकार से उसके हृदय की गहराई में प्रेम को उत्तेजित करता हूँ, एक ऐसा प्रेम जो धोखा देना नहीं चाहता है बल्कि मुझे आनन्द देना चाहता है। कितनी बार, मेरे लिए मनुष्य की खोज में, उसके सच्चे विश्वास को प्राप्त करने के लिए, मैंने अपनी आँखें बंद की और चुप रहा हूँ? किन्तु जब मैं नहीं बोलता हूँ, तो मनुष्य का विश्वास एक पल में बदल जाता है, और इसलिए जो कुछ मुझे दिखाई देता है वह उसका खोटा "माल" हैं, क्योंकि मनुष्य ने मुझे कभी भी ईमानदारी से प्रेम नहीं किया है। यह केवल तभी होता है जब मैं अपने आप को प्रकट करता हूँ कि मनुष्य अपने "विश्वास" का जबरदस्त प्रदर्शन करता है; किन्तु जब मैं अपने गुप्त स्थान में छिपा होता हूँ, तो वे कमज़ोर और बुजदिल हो जाते हैं, मानो कि मेरा अपमान करने से वे डर गए हों, या यहाँ तक कि क्योंकि कुछ लोग मेरे चेहरे को नहीं देख सकते हैं, इसलिए वे मुझे अच्छी तरह से जाँच के अधीन करते हैं और उससे निष्कर्ष निकालते हैं कि मैं वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं हूँ। कितने लोग इस अवस्था में रहते हैं, कितने लोगों की इस प्रकार की मानसिकता है, किन्तु यह सिर्फ इतना ही है कि सभी मनुष्य उस बात को छिपाने में निपुण हैं जो उनमें शर्मनाक है। इस कारण, वे स्वयं की अयोग्यताओं पर लोगों का ध्यान दिलवाने के अनिच्छुक हैं, और केवल मेरे वचनों के सत्य को ही स्वीकार करते हैं जबकि अपने स्वयं के आत्म-सम्मान को बचाने के लिए ढिठाई से सुरक्षात्मक छद्मावरण देने का प्रयास करते हैं।

17 मार्च, 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार तीन चेतावनियाँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है पतरस ने यीशु को कैसे जाना "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक

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