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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

मनुष्य, शैतान के प्रभाव के बंधन में जकड़ा हुआ, अंधकार के प्रभाव के आवरण में रह रहा है जिसमें से बच निकलने का मार्ग नहीं हैं। और मनुष्य का स्वभाव, शैतान के द्वारा संसाधित किए जाने के पश्चात्, उत्तरोत्तर भ्रष्ट होता जा रहा है। कोई कह सकता है कि परमेश्वर को वास्तव में प्यार करने में असमर्थ, मनुष्य, सदैव अपने भ्रष्ट शैतानी स्वभाव में रहा है। यह तो ऐसा है, यदि मनुष्य परमेश्वर को प्यार करने की इच्छा करता है, तो उसे स्वयं को सही मानना, स्वयं को महत्त्व देना, अहंकार, मिथ्याभिमान तथा इसी तरह की चीजों से वंचित अवश्य कर देना चाहिए जो सभी शैतान के स्वभाव से संबंधित हैं। अन्यथा, मनुष्य का प्रेम अशुद्ध प्रेम, शैतान का प्रेम है, और ऐसा प्रेम है जो परमेश्वर का अनुमोदन सर्वथा प्राप्त नहीं कर सकता है। पवित्र आत्मा द्वारा प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध बनाए गए, निपटे गए, तोड़े, काट-छाँट किए, अनुशासित किए, ताड़ना दिए, या शुद्ध किए गए बिना कोई भी परमेश्वर को वास्तव में प्यार करने में समर्थ नहीं है। यदि तुम कहो कि तुम्हारे स्वभाव का एक हिस्सा परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए तुम परमेश्वर को सच्चा प्रेम करने में समर्थ हो, तो तुम ऐसे व्यक्ति हो जो अहंकार में वचन बोलता है और एक हास्यास्पद मनुष्य हो। और इस तरह के मनुष्य ही प्रधान दूत हैं! मनुष्य की अंतर्निहित प्रकृति प्रत्यक्ष रूप से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ है। मनुष्य को अपनी अंतर्निहित प्रकृति को परमेश्वर द्वारा सिद्धता के माध्यम से त्यागना है, और फिर केवल परमेश्वर की इच्छा की परवाह करके, और परमेश्वर की इच्छा को पूरा करके, और इसके अतिरिक्त पवित्र आत्मा के कार्य से गुज़र कर ही उसके जीवन व्यतीत करने को परमेश्वर द्वारा अनुमोदित किया जा सकता है। देह में रहने वाला कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में समर्थ नहीं है, जब तक कि वह पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किया गया कोई व्यक्ति न हो। हालाँकि, यहाँ तक कि इस तरह के व्यक्ति के लिए भी, उसके स्वभाव को और जिस जीवन को वह व्यतीत करता है उसे पूर्णतः परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करना नहीं कहा जा सकता है; कोई केवल यही कह सकता है कि वह जो जीवन व्यतीत करता है वह पवित्र आत्मा के द्वारा निर्देशित होता है। ऐसे व्यक्ति का स्वभाव परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है।

यद्यपि मनुष्य का स्वभाव परमेश्वर द्वारा नियत किया जाता है—यह निर्विवाद है और इसे सकारात्मक चीज माना जा सकता है—तब भी इसे शैतान द्वारा संसाधित किया गया है। इसीलिए, मनुष्य का संपूर्ण स्वभाव शैतान का ही स्वभाव है। कोई मनुष्य कह सकता है कि चीज़ों को करने में, परमेश्वर, स्वभाव से, निष्कपट है, और कि वह भी इसी तरीके से व्यवहार करता है, उसका भी इसी तरह का चरित्र है, और इसलिए, वह कहता है कि उसका यह स्वभाव परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है। यह किस प्रकार का मनुष्य है? क्या भ्रष्ट शैतानी स्वभाव परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में समर्थ है? जो कोई भी यह घोषणा करता है कि उसका स्वभाव परमेश्वर का प्रतिनिधि है, तो वह परमेश्वर की ईशनिन्दा करता है और यह पवित्र आत्मा को अपमानित करता है! जिस तरीके से पवित्र आत्मा कार्य करता है उस परिप्रेक्ष्य से, पृथ्वी पर परमेश्वर जो कार्य करता है वह केवल जीतने के लिए है। यही कारण है कि मनुष्य का अधिकांश शैतानी स्वभाव अभी तक शुद्ध नहीं किया गया है, और मनुष्य जो जीवन व्यतीत कर रहा है वह अभी भी शैतान की छवि है। यह मनुष्य की अच्छाई है और मनुष्य की देह के कार्यों का प्रतिनिधित्व करती है, या, अधिक सटीक रूप से कहें तो, यह शैतान का प्रतिनिधित्व करती है और परमेश्वर का बिल्कुल भी प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती है। यहाँ तक कि यदि मनुष्य परमेश्वर को पहले से ही इस हद तक प्यार करता हो कि वह पृथ्वी पर स्वर्ग के जीवन का आनन्द लेने में समर्थ हो, इस तरह के वक्तव्यों को कहने में समर्थ हो जैसे किः "हे परमेश्वर! मैं तुझे पर्याप्त रूप से प्यार नहीं कर सकता हूँ," और उच्चतम क्षेत्र तक पहुँच गया हो, तब भी तुम नहीं कह सकते हो कि वह परमेश्वर में जीवन व्यतीत करता है या परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि मनुष्य का सार परमेश्वर के सार से विपरीत है। मनुष्य कभी भी परमेश्वर में जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है, परमेश्वर तो बिल्कुल नहीं बन सकता है। पवित्र आत्मा ने मनुष्य को जीवन व्यतीत करने के लिए जो निर्देश दिया है वह केवल उसी के अनुसार है जो परमेश्वर मनुष्य से कहता है।

शैतान के समस्त कार्य और कर्म मनुष्य में व्यक्त होते हैं। अब मनुष्य के समस्त कार्य और कर्म शैतान की अभिव्यक्ति हैं और इसलिए परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं। मनुष्य शैतान का मूर्त रूप है, और मनुष्य का स्वभाव परमेश्वर के स्वभाव का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ है। कुछ मनुष्य अच्छे चरित्र वाले होते हैं; परमेश्वर ऐसे व्यक्तियों के चरित्र के माध्यम से कुछ कार्य कर सकता है और जिस कार्य को वे करते हैं वह पवित्र आत्मा द्वारा निर्देशित होता है। फिर भी उनका स्वभाव परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ है। परमेश्वर जो कार्य उनमें करता है, वह केवल जो पहले से ही भीतर विद्यमान होता है उसी पर कार्य करता और उसे ही विस्तारित करता है। वे चाहे भविष्यद्वक्ता हों या परमेश्वर द्वारा अतीत के युगों से उपयोग में लाए गए व्यक्ति हों, कोई भी उसका प्रत्यक्षतः प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है। सभी मनुष्य परिस्थितियों के दबाव में ही परमेश्वर से प्रेम करने लगते हैं, और कोई भी अपनी स्वयं की इच्छा से सहयोग करने का प्रयत्न नहीं करता है। सकारात्मक चीजें क्या हैं? वह सब जो सीधे परमेश्वर से आता है सकारात्मक है। हालाँकि, मनुष्य का स्वभाव शैतान द्वारा संसाधित कर दिया गया है और परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है। केवल देहधारी परमेश्वर—उसका प्रेम, उसकी दुःख उठाने की इच्छा, उसकी धार्मिकता, आत्मसमर्पण, और विनम्रता और गोपनीयता—ये सभी प्रत्यक्ष रूप से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब वह आया, तो वह पापमय प्रकृति से रहित था और, शैतान द्वारा संसाधित किए बिना, सीधे परमेश्वर से आया। यीशु केवल पापमय देह की सदृशता में है और पाप का प्रतिनिधित्व नहीं करता है; इसलिए, सलीब पर चढ़ने के माध्यम से उसके कार्य निष्पादन से पहले के समय (उसके सलीब पर चढ़ने के क्षण सहित) तक के उसके कार्य, कर्म, और वचन, सभी परमेश्वर के प्रत्यक्ष रूप से प्रतिनिधि हैं। यीशु का यह उदाहरण इस बात को प्रमाणित करने हेतु पर्याप्त है कि पापमय प्रकृति वाला कोई भी व्यक्ति परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है, और मनुष्य का पाप शैतान का प्रतिनिधित्व करता है। कहने का अर्थ है, कि पाप परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं करता है और परमेश्वर पापरहित है। यहाँ तक कि पवित्र आत्मा द्वारा मनुष्य में किया गया कार्य भी केवल पवित्र आत्मा द्वारा निर्देशित किया गया माना जा सकता है, और मनुष्य द्वारा परमेश्वर की ओर से किया गया नहीं कहा जा सकता है। किन्तु, जहाँ तक मनुष्य का संबंध है, न उसका पाप और न उसका स्वभाव परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है। आज से लेकर पीछे अतीत तक पवित्र आत्मा द्वारा मनुष्य पर किए गए कार्य के परिप्रेक्ष्य से, मनुष्य पर अधिकांश पवित्र आत्मा द्वारा किया गया था। इसकी वजह से मनुष्य के पास वह है जिसे वह जीता है। हालाँकि, यह केवल एक पक्षीय ही है, और पवित्र आत्मा द्वारा निपटाए और अनुशासित किए जाने के बाद बहुत ही कम लोग सत्य पर जीने में समर्थ हैं। कहने का अर्थ है, कि मात्र पवित्र आत्मा का कार्य ही उपस्थित है और मनुष्य की ओर से सहयोग अनुपस्थित है। क्या तुम इसे अब स्पष्ट रूप से देखते हो? तो फिर, जब पवित्र आत्मा कार्य कर रहा हो उस समय उसके साथ कार्य करने के लिए अपना अधिकतम देने के लिए और, परिणामस्वरूप अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए, तुम्हें क्या करना चाहिए?

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं

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