सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

recital-the-word-appears-in-the-flesh
अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

श्रेणियाँ

recital-latest-expression
वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

तुम्हारे जीवन के कार्यों से अनुमान लगता है, कि तुम लोगों को पोषण और पुन: आपूर्ति के लिए प्रतिदिन वचनों की आवश्यकता है, क्योंकि तुम लोगों में बहुत सारी कमियां हैं और तुम लोगों में ग्रहण करने की योग्यता और ज्ञान बहुत ही कम है। अपने दैनिक जीवन में तुम लोग एक ऐसे वातावरण में रहते हो जिसमें कोई सत्य या भला एहसास नहीं है। तुम में अस्तित्व में बने रहने के लिए प्रधान वस्तु की कमी है और मुझे या सत्य को जानने के लिए तुम लोगों के पास आधार नहीं है। तुम्हारा विश्वास महज एक ऐसे अस्पष्ट भरोसे पर या धार्मिक रीति-रिवाजों और ज्ञान के ऊपर बना हुआ है जो पूरी तरह सिद्धांतों पर टिका हुआ है। प्रतिदिन मैं तुम लोगों के क्रियाकलापों को देखता हूँ और तुम लोगों के इरादों और बुरे परिणामों की जाँच करता हूँ। मुझे कभी भी ऐसा कोई नहीं मिला जो सचमुच में अपना हृदय और अपनी आत्मा मेरी वेदी के ऊपर रखे, जिसे कभी हटाया न गया हो। इसलिए जिन्हें मैं ऐसी मानवजाति के ऊपर प्रकट करना चाहता हूँ, उन सभी वचनों को व्यर्थ में नहीं उड़ेलना चाहता। अपने हृदय में, मैं केवल अपने अपूर्ण कार्यों को पूरा करने और उस मानवजाति का उद्धार करने की योजना बना रहा हूँ जिन्हें मुझे बचाना है। तो भी, मैं उन सभी के लिए कामना करता हूँ जो मेरे उन वचनों से, जो मैं उन पर अर्पित करता हूं, उद्धार और सत्य प्राप्त करने हेतु मेरा अनुसरण करते हैं. मैं आशा करता हूँ कि एक दिन जब तुम अपनी आँखें बन्द करोगे, तो तुम एक ऐसे संसार को देखोगे जहाँ खुशबू हवा में फैल जाती है और जीवन के जल की धाराएँ बहती हैं, एक निराशाजनक और ठण्डे संसार को नहीं जहाँ अन्धकार आसमान को ढक लेता है और जहाँ चीख पुकार कभी नहीं थमती है।

प्रतिदिन उसके द्वारा प्रत्येक मनुष्य के कार्यों और विचारों पर चिंतन किया जाता है और साथ ही, वे अपने कल की तैयारी में जुट जाते हैं। यही वह मार्ग है जिस पर सभी जीवितों को चलना होगा और जिसे मैंने सभी के लिए पूर्वनिर्धारित कर दिया है। इससे कोई बच नहीं सकता और इसमें किसी के लिए कोई छूट नहीं है। मैंने अनगिनित वचन कहे हैं और इसके साथ-साथ मैंने अनगिनत कार्य किये हैं। प्रतिदिन मैं देखता हूँ जब प्रत्येक मनुष्य स्वाभाविक रूप से वह सब कुछ करता है जिसे उसे अपने अंतर्निहित स्वभाव के अनुसार करना है, और वह किस प्रकार विकसित होता जाता है। अनजाने में अनेक लोगों ने "सही मार्ग" पर पहले से ही चलना आरम्भ कर दिया है, जिसे मैंने हर प्रकार के मनुष्य के प्रकटन के लिए निर्धारित किया था। मैंने पहले से ही हर प्रकार के मनुष्य को अलग-अलग वातावरण में रखा है और अपने-अपने स्थानों में प्रत्येक मनुष्य अपनी अंतर्निहित विशेषताओं को प्रकट कर रहा है। उन्हें कोई बांध नहीं सकता और कोई उन्हें बहका नहीं सकता। वे सम्पूर्ण रूप से स्वतन्त्र हैं और वे जो अभिव्यक्त करते हैं वह स्वाभाविक रूप से अभिव्यक्त होता है। केवल एक ही चीज़ है जो उनको नियन्त्रण में रखती है और वह है मेरे वचन। इसलिए असंख्य मनुष्य अप्रसन्नता से मेरे वचनों को पढ़ते हैं ताकि उनका अंत कहीं उनकी मृत्यु न हो, परन्तु मेरे वचनों को कभी भी अभ्यास में लाते नहीं हैं। दूसरी ओर, कुछ लोगों के लिए मेरे वचनों के मार्गदर्शन और आपूर्ति के बिना दिन गुज़ारना कठिन होता है, अतः वे स्वाभाविक तौर पर मेरे वचनों को हर समय थामे रहते हैं। जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, वे मनुष्य के जीवन के रहस्य, मानवजाति की मंजिल, और मनुष्य होने के मूल्य की खोज करते जाते हैं। मानवजाति मेरे वचन की उपस्थिति में इससे अलग और कुछ नहीं है और मैं बस चीज़ों को उनके अपने हिसाब से होने देता हूं। मैं ऐसा कुछ नहीं करता हूँ जो मनुष्य को उनके अस्तित्व के आधार के रूप में मेरे वचन के अनुसार जीने के लिए बाध्य करे। इस प्रकार वे जिनमें कभी विवेक नहीं रहा है या जिनके अस्तित्व का मूल्य नहीं है, शांतचित्त होकर चीज़ों को घटित होते देखते हैं और बेधड़क मेरे वचनों को दरकिनार कर देते हैं और जो चाहते हैं करते हैं। वे सत्य से और उन सब से जो मुझसे आता है, उकताने लगते हैं। इसके अतिरिक्त, वे मेरे घर में रहते हुए भी उकता जाते हैं। ये लोग भले ही सेवकाई कर रहे हों, फिर भी अपने लक्ष्य के लिए और दण्ड से बचने के लिए मेरे घर में अस्थायीतौर पर रहते हैं। परन्तु उनके इरादे कभी नहीं बदलते हैं और न ही उनके कार्य। यह आशीषों के लिए उनकी इच्छा को और प्रोत्साहित करता है, यह उस राज्य में एकतरफा यात्रा के लिए जहां वे अनंतकाल के लिये रह सकें और अनंत स्वर्ग में यात्रा के लिये भी। जितना अधिक वे मेरे दिन के जल्दी निकट आने की लालसा करते हैं, वे उतना ही अधिक महसूस करते हैं कि सत्य उनके लिए एक अवरोध और उनके मार्ग के लिए एक रोड़ा बन गया है। वे सत्य का अनुसरण या न्याय तथा ताड़ना को स्वीकार किए बगैर, और उन सब से बढ़कर, मेरे घर में समर्पित रूप से रहने की जरूरत को समझे बिना और जो आज्ञा मैं देता हूँ उसका पालन किए बिना, सदा-सर्वदा स्वर्ग के राज्य का आनन्द उठाने और राज्य में कदम रखने के लिए इन्तज़ार नहीं कर पाते हैं। ये लोग मेरे घर में प्रवेश न तो ऐसे हृदय की संतुष्टि के लिए करते हैं जो सत्य की खोज करता है और न ही मेरे प्रबन्धन के साथ मिलकर कार्य करने के लिए। वे महज उनमें से एक होने का लक्ष्य रखते हैं जिसे आने वाले युग में नष्ट नहीं किया जाएगा। इसलिए उनके हृदय ने कभी नहीं जाना कि सत्य क्या है या सत्य को कैसे ग्रहण किया जाता है। यही कारण है कि ऐसे लोगों ने कभी भी सत्य का अभ्यास नहीं किया न ही अपनी भ्रष्टता की गहराई के चरम का एहसास किया है, फिर भी वे मेरे घर में अंत तक "सेवकों" के रूप में रहे। वे "धीरज से" मेरे दिन के आने का इन्तज़ार करते हैं और जब वे मेरे कार्य के तरीके के द्वारा यहाँ वहाँ उछाले जाते हैं तो वे थकते नहीं हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी कोशिश कितनी बड़ी है और उन्होंने उसकी क्या कीमत चुकाई है, कोई नहीं देखेगा कि उन्होंने सत्य के लिए कष्ट सहा है या मेरे लिए बलिदान किया है। अपने हृदय में, वे उस दिन को देखने का इन्तज़ार नहीं कर सकते हैं जब मैं पुराने युग का अंत करूँगा, और इससे बढ़कर, वे यह जानने के लिए बेचैन हैं कि मेरी सामर्थ और मेरा अधिकार कितना विशाल है। यह वो एक चीज़ है जिसमें बदलाव लाने और सत्य का अनुसरण करने के लिए उन्होंने कभी भी शीघ्रता नहीं की है। वे उससे प्रेम करते हैं जिससे मैं उकता गया हूँ और वे उससे उकता गए हैं जिससे मैं प्रेम करता हूँ। वे उसकी चाह करते हैं जिससे मैं नफरत करता हूँ लेकिन साथ ही वे उसे खोने से डरते हैं जिससे मैं घृणा करता हूँ। वे इस बुरे संसार में रहते तो हैं फिर भी इस संसार से कभी नफरत नहीं करते हैं और इस बात से बहुत भयभीत हैं कि इसे मेरे द्वारा नष्ट कर दिया जाएगा। उनके इरादे परस्पर विरोधी हैं: वे इस संसार से अतिप्रसन्न हैं जिससे मैं घृणा करता हूँ, फिर भी साथ ही वे मुझसे लालसा रखते हैं कि मैं इस संसार को शीघ्र नष्ट कर दूँ। इस रीति से वे विनाश के कष्ट से बचा लिए जाएँगे और इससे पहले कि वे सत्य के मार्ग से भटक जाएँ, वे अगले युग के स्वामियों के रूप में रूपान्तरित कर दिए जाएँगे। यह इसलिए है क्योंकि वे सत्य से प्रेम नहीं करते हैं और वह सब कुछ जो मुझ से आता है, वे उससे उकता गए हैं। शायद वे थोड़े से समय के लिए यह सोचकर "आज्ञाकारी लोग" बन जाएँगे कि कहीं आशीषों को खो न दें, लेकिन आशीषों के लिए उनकी चिंतित मानसिकता तथा जलती हुई आग की झील में प्रवेश करने और नाश होने का भय कभी धुंधला नहीं पड़ सकता। जैसे-जैसे मेरा दिन नज़दीक आता है, वैसे-वैसे उनकी इच्छा लगातार उत्कट होती जाती है। और विनाश जितना भयंकर होता है, उतना ही ज़्यादा यह उनको असहाय कर देता है और मुझे प्रसन्न करने के लिए एवं उन आशीषों को खोने से बचाने के लिए जिनकी उन्होंने लम्बे समय से लालसा की है, उसके लिए वे यह नहीं जानते हैं कि कहाँ से प्रारम्भ करें। एक बार जब मेरा हाथ अपना काम करना प्रारम्भ कर देता है तो ये लोग एक अग्रगामी सैन्य टुकड़ी के रूप में कार्य करने के लिए उत्सुक हो जाते हैं। वे बस सैन्य टुकड़ी की प्रथम पंक्ति में आने के बारे में सोचते हैं और यह सोचकर बहुत ज़्यादा भयभीत होते हैं कि मैं उन्हें नहीं देखूंगा। वे वही करते और कहते हैं जिसे वे सही समझते हैं; और यह नहीं जानते कि उनके कार्य कभी भी सत्य के अनुरूप नहीं रहे और वे मात्र मेरी योजनाओं में गड़बड़ी और हस्तक्षेप करने के लिए हैं। यद्यपि उन्होंने पुरजोर प्रयास किया है और शायद कठिनाई से होकर गुज़रने की उनकी इच्छा और इरादा सही हो, फिर भी जो कुछ वे करते हैं उनसे मेरा कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि मैंने कभी नहीं देखा कि उनके कार्य अच्छे इरादे के साथ किए गए हों और ऐसा तो बहुत ही कम हुआ जब मैंने उन्हें अपनी वेदी के ऊपर कुछ रखते हुए देखा हो। इन अनेक वर्षों में मेरे सामने उनके कार्य ऐसे ही हैं।

प्रारम्भ में मैं तुम लोगों को और अधिक सच्चाई प्रदान करना चाहता था, लेकिन चूंकि सत्य के प्रति तुम्हारी मनोवृत्ति इतनी नीरस और उदासीन है कि मुझे पीछे हटना पड़ा है। मैं नहीं चाहता कि मेरी कोशिशें व्यर्थ जाएँ, न ही मैं यह देखना चाहता हूँ कि लोग मेरे वचनों को थामे रहें और फिर हर जगह वह करें जिससे मेरा विरोध होता हो, मुझे कलंकित करता हो और मेरी निन्दा करता हो। तुम्हारे स्वभावों और तुम्हारी मानवता के कारण, तुम्हें वचनों का एक छोटा-सा भाग ही प्रदान करता हूँ जो तुम्हारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। ऐसा अब तक नहीं हुआ है कि मैं सचमुच में इस बात की पुष्टि करुं कि जो निर्णय और योजनाएँ मैंने बनाई हैं वे तुम्हारी जरूरतों के अनुसार हैं, और इसके अतिरिक्त, यह प्रमाणित करुं कि मानवजाति के प्रति मेरी मनोवृत्ति सही है। मेरे सामने तुम्हारे इतने वर्षों के काम ने मुझे वह उत्तर दे दिया जो मुझे पहले कभी नहीं मिला था। और इस उत्तर से यह प्रश्न सामने आता हैः "सच्चाई और सच्चे परमेश्वर के सामने मनुष्य की मनोवृत्ति क्या है?" जो प्रयास मैंने मनुष्य में प्रवाहित किया है मेरे मनुष्य से मेरे प्रेम के सार-तत्व को साबित करता है, और मेरे सामने मनुष्य के कार्यों ने सत्य से घृणा करने और मेरा विरोध करने के इंसान के मुख्य सार-तत्व को भी प्रमाणित कर दिया है। मैं हर समय उन सबके लिए चिंतित रहता हूँ जिन्होंने मेरा अनुसरण किया है, फिर भी ऐसा कोई समय नहीं होता है जब मेरा अनुसरण करने वाले मेरे वचनों को ग्रहण करने में समर्थ होते हों; वे मेरे किसी भी सुझाव को जो मुझसे आता है, स्वीकार करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। यही वह बात है जो मुझे सबसे ज़्यादा उदास करती है। कोई भी मुझे समझने में समर्थ नहीं है, इसके अतिरिक्त, कोई भी मुझे ग्रहण करने में सक्षम नहीं है, भले ही मेरी मनोवृत्ति निष्कपट और मेरे वचन सौम्य हैं। सभी अपने मूल इरादों के अनुसार मेरे द्वारा सौंपे गए कार्य को कर रहे हैं; वे मेरे विचारों को नहीं खोजते हैं और मेरी अपेक्षाओं की खोज तो बहुत ही कम करते हैं। वे अभी भी दावा करते हैं कि वफादारी के साथ मेरी सेवा करते हैं, जबकि पूरे समय मुझसे विद्रोह करते रहते हैं। बहुत से लोग यह विश्वास करते हैं कि वे सच्चाइयां जो उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं या जिन्हें वे व्यवहार में नहीं ला सकते हैं वे सत्य ही नहीं हैं। ऐसे मनुष्यों के लिए, मेरी सच्चाइयां नकारने और दरकिनार करने के लिये हैं तब उसी समय, मैं वह बन जाता हूँ जिसे मनुष्य एकमात्र परमेश्वर के रूप में अपने शब्दों में स्वीकार करता है, परन्तु साथ ही मुझे एक ऐसे परदेशी के रूप में मानता है जो सत्य, मार्ग और जीवन नहीं है। कोई इस सत्य को नहीं जानता हैः मेरे वचन सदा-सर्वदा न बदलने वाली सच्चाइयां हैं। मैं मनुष्य के लिए जीवन की आपूर्ति हूँ और मानवजाति के लिए एकमात्र मार्गदर्शक हूँ। मेरे वचनों की कीमत और उसका अर्थ इसके द्वारा निर्धारित नहीं होता है कि उन्हें मानवजाति के द्वारा पहचाना और स्वीकारा गया है कि नहीं, परन्तु यह स्वयं वचनों के सार-तत्व के द्वारा होता है। भले ही इस पृथ्वी पर एक भी ऐसा इंसान मेरे वचनों को ग्रहण न कर पाए, फिर भी मेरे वचन का मूल्य और मानवजाति के प्रति उसकी सहायता का मूल्यांकन किसी मनुष्य के द्वारा नहीं किया जा सकता है। इसलिए जब बहुत सारे लोगों का सामना मेरे वचनों से होता है जो विद्रोह करते हैं, उनका खण्डन करते हैं, या उनसे पूरी तरह घृणा करते हैं, तो उन सब के प्रति मेरा रवैया यह हैः समय और तथ्यों को मेरी गवाही देने दो और यह दिखाने दो कि मेरे वचन सत्य, मार्ग और जीवन हैं। उन्हें यह दिखाने दो कि जो कुछ मैंने कहा है वह सही है, और वह ऐसा है जिसकी आपूर्ति लोगों को की जानी चाहिए, और इसके अतिरिक्त, जिसे मनुष्य को स्वीकार करना चाहिए। मैं उन सबको जो मेरा अनुसरण करते हैं, यह तथ्य ज्ञात करवाऊँगाः जो लोग पूरी तरह से मेरे वचनों को स्वीकार नहीं कर सकते, जो मेरे वचनों को अभ्यास में नहीं ला सकते, और जो मेरे वचनों के कारण उद्धार प्राप्त नहीं कर पाते, वे हैं जो मेरे वचनों के कारण निंदित हुए हैं और इसके अलावा, जिन्होंने मेरे उद्धार को खो दिया है, मेरी लाठी उन पर से कभी नहीं हटेगी।

16 अप्रैल 2003

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार तीन चेतावनियाँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है पतरस ने यीशु को कैसे जाना "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन

00:00
00:00

0खोज परिणाम