परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 68" | अंश 95

मेरा वचन हर देश, स्थान, राष्ट्र और संप्रदाय में कार्यान्वित है, और हर कोने में हर समय मेरा वचन पूरा हो रहा है। हर जगह होने वाली आपदाएँ लोगों के बीच के युद्ध नहीं हैं, न ही वे हथियारों से लड़ी जा रही लड़ाईयाँ हैं। बाद में अब और कोई भी युद्ध नहीं होगा। सभी मेरी मुट्ठी में हैं। सब मेरे न्याय का सामना करेंगे और आपदा के बीच दिन काटेंगे। जो लोग मेरा विरोध करते हैं और जो मेरे साथ सहयोग करने की पहल नहीं करते हैं उन्हें विभिन्न आपदाओं की पीड़ा भुगतने दो। उन्हें अनंत काल तक रोने और अपने दाँतों को पीसने दो, और हमेशा के लिए अंधकार में रहने दो। वे जीवित नहीं बचेंगे। मैं स्पष्टवादिता और फुर्ती के साथ कार्य करता हूँ, और इस बात पर विचार नहीं करता हूँ कि तू अतीत में मेरे प्रति कितना वफ़ादार रहा है। अगर तू मेरा विरोध करेगा, तो ज़रा सी, यहाँ तक कि एक पल की भी देरी के बिना, ज़रा सी भी दया के बिना मेरे न्याय का हाथ तेज़ी से तुझ पर कोप को बरसाएगा। मैं निरंतर कहता रहा हूँ कि मैं वह परमेश्वर हूँ जो अपना वचन निभाता है। हर एक वचन जो मैं कहूँगा वह पूरा होगा, और तुम सब लोग इसे देखोगे। हर चीज़ में वास्तविकता में प्रवेश करने का यही सच्चा अर्थ है।

मेरे प्रिय पुत्रों, मेरे प्रियजनों, पर, निश्चित रूप से बड़ी आपदाएँ नहीं पड़ेंगी। मैं हर समय और हर पल अपने पुत्रों की देखरेख करूँगा। तुम लोग निश्चित रूप से उस पीड़ा और कष्ट को नहीं भुगतोगे; बल्कि, यह मेरे पुत्रों की सिद्धता और उनमें मेरे वचन की पूर्ति के लिए है, ताकि तुम लोग मेरी सर्वशक्तिमत्ता को पहचान सको, जीवन में आगे बढ़ सको, शीघ्र ही मेरी खातिर ज़िम्मेदारी कंधे पर ले सको, और मेरी प्रबंधन योजना की पूर्णता के लिए अपनी संपूर्ण अस्मिता को समर्पित कर सको। तुम लोगों को इसकी वजह से ख़ुश और हर्षित और प्रसन्न होना चाहिए। मैं तुम लोगों को सब कुछ सौंप दूँगा, तुम लोगों को नियंत्रण में लेने की अनुमति दूँगा। मैं इसे तुम लोगों के हाथों में रख दूँगा। अगर कोई पुत्र अपने पिता की पूरी संपत्ति की विरासत पाता है, तो मेरे ज्येष्ठ पुत्रों, तुम लोगों के साथ यह कितना अधिक सच है? तुम लोग वास्तव में धन्य हो। बड़ी आपदाओं को भुगतने के बजाय, तुम लोग अनन्त आशीषों का आनंद लोगे। कैसी महिमा है! कैसी महिमा है!

अपनी गति बढ़ाओ और हर समय और हर जगहों में मेरे पदचिह्नों का अनुसरण करो, और पीछे मत छूट जाओ। अपने हृदयों को मेरे हृदय का अनुसरण करने दो; अपने मन को मेरे मन का अनुसरण करने दो। एक हृदय, एक मन से मेरे साथ सहयोग करो। मेरे साथ खाओ, मेरे साथ रहो, और मेरे साथ आनंद लो। आनंद लेने और प्राप्त करने के लिए अद्भुत आशीष तुम लोगों की प्रतीक्षा में है। मेरे भीतर ऐसी अतुलनीय प्रचुरता है। यह ज़रा-सा भी किसी और के लिए तैयार नहीं किया गया है—मैं इसे पूरी तरह से अपने पुत्रों के लिए करता हूँ।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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