परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 101
केवल परमेश्वर, जिसके पास सृष्टिकर्ता की पहचान है, ही अद्वितीय अधिकार रखता है (चुने हुए अंश) परमेश्वर का अधिकार किसका प्रतीक है? क्या यह...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
जो कार्य अब किया जा रहा है, वह लोगों से अपने पूर्वज शैतान का त्याग करवाने के लिए किया जा रहा है। वचन के द्वारा सभी न्यायों का उद्देश्य मानवजाति के भ्रष्ट स्वभाव को उजागर करना और लोगों को जीवन का सार समझने में सक्षम बनाना है। ये बार-बार के न्याय लोगों के हृदयों को बेध देते हैं। प्रत्येक न्याय सीधे उनके भाग्य से संबंधित होता है और उनके हृदयों को घायल करने के लिए होता है, ताकि वे उन सभी बातों को जाने दें और फलस्वरूप जीवन के बारे में जान जाएँ, इस गंदी दुनिया को जान जाएँ, परमेश्वर की बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता को जान जाएँ, और मानवजाति को भी जान जाएँ, जिसे शैतान ने भ्रष्ट कर दिया है। जितना अधिक मनुष्य इस प्रकार की ताड़ना और न्याय प्राप्त करता है, उतना ही अधिक मनुष्य का हृदय घायल किया जा सकता है और उतना ही अधिक उसकी आत्मा को जगाया जा सकता है। इन अत्यधिक भ्रष्ट और सबसे अधिक गहराई से धोखा खाए हुए लोगों की आत्माओं को जगाना इस प्रकार के न्याय का लक्ष्य है। मनुष्य के पास कोई आत्मा नहीं है, अर्थात् उसकी आत्मा बहुत पहले ही मर गई और वह नहीं जानता है कि स्वर्ग है, नहीं जानता कि परमेश्वर है, और निश्चित रूप से नहीं जानता कि वह मौत की अतल खाई में संघर्ष कर रहा है; वह संभवतः कैसे जान सकता है कि वह पृथ्वी पर इस गंदे नरक में जी रहा है? वह संभवतः कैसे जान सकता है कि उसका यह सड़ा हुआ शव शैतान की भ्रष्टता के माध्यम से मृत्यु के अधोलोक में गिर गया है? वह संभवतः कैसे जान सकता है कि पृथ्वी पर प्रत्येक चीज़ मानवजाति द्वारा बहुत पहले ही इतनी बरबाद कर दी गई है कि अब सुधारी नहीं जा सकती? और वह संभवतः कैसे जान सकता है कि आज स्रष्टा पृथ्वी पर आया है और भ्रष्ट लोगों के एक समूह की तलाश कर रहा है, जिसे वह बचा सके? मनुष्य द्वारा हर संभव शुद्धिकरण और न्याय का अनुभव करने के बाद भी, उसकी सुस्त चेतना मुश्किल से ही हिलती-डुलती है और वास्तव में लगभग प्रतिक्रियाहीन रहती है। मानवजाति कितनी पतित है! और यद्यपि इस प्रकार का न्याय आसमान से गिरने वाले क्रूर ओलों के समान है, फिर भी वह मनुष्य के लिए सर्वाधिक लाभप्रद है। यदि इस तरह से लोगों का न्याय न हो, तो कोई भी परिणाम नहीं निकलेगा और लोगों को दुःख की अतल खाई से बचाना नितांत असंभव होगा। यदि यह कार्य न हो, तो लोगों का अधोलोक से बाहर निकलना बहुत कठिन होगा, क्योंकि उनके हृदय बहुत पहले ही मर चुके हैं और उनकी आत्माओं को शैतान द्वारा बहुत पहले ही कुचल दिया गया है। पतन की गहराइयों में डूब चुके तुम लोगों को बचाने के लिए तुम्हें सख़्ती से पुकारने, तुम्हारा सख़्ती से न्याय करने की आवश्यकता है; केवल तभी तुम लोगों के जमे हुए हृदयों को जगाना संभव होगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल पूर्ण बनाया गया मनुष्य ही सार्थक जीवन जी सकता है
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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