परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 82
जिस दौरान प्रभु यीशु ने देह में रहकर काम किया, उसके अधिकतर अनुयायी उसकी पहचान और उसके द्वारा कही गई चीज़ों को पूरी तरह से सत्यापित नहीं कर...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
परमेश्वर पर अपने विश्वास में, तुम्हें परमेश्वर को कैसे जानना चाहिए? तुम्हें परमेश्वर को उसके आज के वचनों और कार्य के आधार पर जानना चाहिए, बिना किसी विचलन या भ्रान्ति के, और अन्य सभी चीजों से पहले तुम्हें परमेश्वर के कार्य को जानना चाहिए। यही परमेश्वर को जानने का आधार है। अन्य सभी विभिन्न भ्रांतियां जिनमें परमेश्वर के वचन की शुद्ध स्वीकृति नहीं है वे धार्मिक धारणाएं हैं, ये वे स्वीकृति हैं जो पथभ्रष्ट और गलत हैं। धार्मिक नेताओं की सबसे बड़ी कुशलता यह है कि वे अतीत में स्वीकृत परमेश्वर के वचनों को लेकर आते हैं और परमेश्वर के आज के वचनों के विरुद्ध उनकी जांच की जाती है। यदि आज के समय में परमेश्वर की सेवा करते समय, तुम पवित्र आत्मा द्वारा अतीत में कही गई प्रबुद्ध बातों को पकड़े रहते हो, तो तुम्हारी सेवा रूकावट उत्पन्न करेगी और तुम्हारे अभ्यास पुराने हो जाएँगे और धार्मिक अनुष्ठान से कुछ अधिक नहीं होंगे। यदि तुम मानते हो कि जो परमेश्वर की सेवा करते हैं उनकी बाहरी प्रकृति विनम्र और धैर्यवान होनी चाहिए, और यदि तुम आज इस प्रकार की जानकारी को अभ्यास में लाते हो तो ऐसा ज्ञान धार्मिक अवधारणा है, और इस प्रकार का अभ्यास एक पाखण्डी कार्य बन गया है। "धार्मिक धारणाएं" उन बातों का उल्लेख करती हैं जो अप्रचलित और पुराने ढंग की हैं (परमेश्वर के द्वारा पहले कहे गए वचनों और पवित्र आत्मा के द्वारा सीधे तौर पर प्रकट किए गए प्रकाश की स्वीकृति समेत), और यदि वे आज अभ्यास में लाए जाते हैं, तो वे परमेश्वर के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं, और मनुष्य को कोई भी लाभ प्रदान नहीं करते हैं। यदि मनुष्य अपने भीतर की उन बातों को शुद्ध नहीं कर पाता है जो धार्मिक धारणाओं से आती हैं, तो वे मनुष्यों द्वारा परमेश्वर की सेवकाई में बहुत बड़ी बाधा बन जाएँगे। लोग धार्मिक धारणाओं के साथ पवित्र आत्मा के कार्यों के साथ किसी भी प्रकार से कदम से कदम नहीं मिला सकते हैं, वे एक, फिर दो कदम पीछे हो जाएंगे—क्योंकि ये धार्मिक धारणाएं मनुष्य को असाधारण रूप से आत्मतुष्ट और घमण्डी बना देती हैं। परमेश्वर अतीत में की गई बातों और किए गए कार्यों की ललक महसूस नहीं करता है, यदि कुछ अप्रचलित हो गया है, तो वह उसे समाप्त कर देता है। निश्चय ही तुम अपनी धारणाओं को त्यागने में सक्षम हो? यदि तुम परमेश्वर के पूर्व में कहे गए वचनों पर बने रहते हो, तो क्या वे यह सिद्ध करते हैं कि तुम परमेश्वर के कार्य को जानते हो? यदि तुम पवित्र आत्मा की ज्योति को आज स्वीकार करने में असमर्थ हो, और उसके बजाय अतीत की ज्योति से चिपके रहते हो, तो क्या यह सिद्ध कर सकता है कि तुम परमेश्वर के नक्शेकदम पर चलते हो? क्या तुम अभी भी धार्मिक धारणाओं को छोड़ पाने में असमर्थ हो? यदि यह मामला है, तो तुम परमेश्वर का विरोध करने वाले बन जाओगे।
यदि मनुष्य धार्मिक धारणाओं को छोड़ दे, तो वह आज परमेश्वर के वचनों और उसके कार्य को मापने के लिए अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं करेगा, और उसके बजाय सीधे अनुसरण करेगा। भले ही परमेश्वर का आज का कार्य साफ़ तौर पर अतीत से अलग है, तुम अतीत के विचारों का त्याग कर पाते हो और आज सीधे तौर पर परमेश्वर के वचनों को पालन कर पाते हो। यदि तुम इस प्रकार के ज्ञान के योग्य हो कि तुम आज परमेश्वर के कार्य को सबसे मुख्य स्थान देते हो भले ही उसने अतीत में किसी भी तरह से कार्य किया हो, तो तुम एक ऐसे व्यक्ति होगे जो अपनी अवधारणों को छोड़ चुका है, जो परमेश्वर का आज्ञापालन करता है, और जो परमेश्वर का कार्य और वचनों का पालन करने में सक्षम है और परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करता है। इस तरह, तुम ऐसे व्यक्ति होगे जो सचमुच परमेश्वर का आज्ञापालन करता है। तुम परमेश्वर के कार्य का विश्लेषण या अध्ययन नहीं करते हो; यह कुछ ऐसा है कि मानो परमेश्वर अपने अतीत के कार्य को भूल गया है और तुम भी उसे भूल गए हो। वर्तमान ही वर्तमान है, और अतीत, बीता हुआ कल हो गया है, और चूँकि आज परमेश्वर ने जो कुछ अतीत में किया उसे अलग कर दिया है इसलिए तुम्हें भी उसमें बसे नहीं रहना चाहिए। केवल तभी तुम वैसे व्यक्ति बन पाओगे जो परमेश्वर का पूरी तरह से आज्ञापालन करता है और जिसने अपनी धार्मिक धारणाओं को पूरी तरह से त्याग दिया है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जो परमेश्वर के आज के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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