परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक वास्तविक व्यक्ति होने का क्या अर्थ है" | अंश 349

आज जहाँ पर मानवजाति है, वहाँ तक पहुँचने के लिए, उसे दसियों हज़ार साल लग गए। हालाँकि, मेरी मूल सृजन की मानवजाति बहुत पहले ही अधोगति में डूब गई है। वे पहले ही वैसे नहीं रहे हैं जैसा मैं चाहता हूँ, और इस प्रकार मानवजाति, जैसा वे मेरी आँखों में प्रतीत होते हैं, अब और मानव कहलाने योग्य नहीं हैं। बल्कि वे मानवजाति के मैल हैं, जिन्हें शैतान ने बंदी बना लिया है, चलती-फिरती सड़ी हुई लाशें हैं जिनमें शैतान रहता है और जिसमें वह आच्छादित रहता है। लोग मेरे अस्तित्व में थोड़ा सा भी विश्वास नहीं करते हैं, न ही वे मेरे आने का स्वागत करते हैं। मानवजाति मेरे अनुरोधों का, उन्हें अस्थायी रूप से स्वीकार करते हुए, केवल डाह के साथ उत्तर देती है, और जीवन के सुखों और दुःखों को मेरे साथ ईमानदारी से साझा नहीं करती है। चूँकि लोग मुझे अगम्य के रूप में देखते हैं, इसलिए वे मुझ पर, किसी सत्ताधारी का अनुग्रह प्राप्त करने का रवैया शुरू करते हुए, डाह से मुस्कुराने का दिखावा करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों को मेरे कार्य के बारे में ज्ञान नहीं है, वर्तमान में मेरी इच्छा को तो वे बिल्कुल भी नहीं जानते हैं। मैं तुम लोगों के साथ ईमानदार रहूँगा: जब वह दिन आयेगा, तो हर वह व्यक्ति जो मेरी आराधना करता है उसका दुःख सहन करना तुम लोगों के दुःख सहन करने की अपेक्षा आसान होगा। मुझमें तुम्हारे विश्वास का अंश, वास्तव में, अय्यूब से अधिक नहीं है—यहाँ तक कि यहूदी फरीसियों का विश्वास भी तुम लोगों से कहीं बढ़कर है—और इसलिए, यदि आग का दिन उतरेगा, तो तुम लोगों के दुःख उन फरीसियों के दुःखों की अपेक्षा जब यीशु द्वारा डाँटे गए थे, उन 250 अगुओं के दुःखों की अपेक्षा जिन्होंने मूसा का विरोध किया था, और चिलचिलाती आग की लपटों के नीचे सदोम के दुःखों की अपेक्षा अधिक बढ़े हुए होंगे। जब मूसा ने चट्टान पर प्रहार किया, और यहोवा द्वारा प्रदान किया गया पानी उसमें से बहने लगा, तो यह उसके विश्वास के कारण ही था। जब दाऊद ने—आनंद से भरे अपने हृदय के साथ—मुझ यहोवा की स्तुति में वीणा बजायी तो यह उसके विश्वास की वजह से ही था। जब अय्यूब ने अपने पशुओं को जो पहाड़ों में भरे रहते थे और सम्पदा के न गिने जा सकने वाले ढेरों को खो दिया, और उसका शरीर पीड़ादायक फोड़ों से आच्छादित हो गया, तो यह उसके विश्वास के कारण ही था। जब वह मुझ यहोवा की आवाज़ को सुन सकता था, और मुझ यहोवा की महिमा को देख सकता था, तो यह उसके विश्वास के कारण ही था। यह कि पतरस यीशु मसीह का अनुसरण कर सका, तो यह उसके विश्वास के द्वारा ही था। यह कि उसे मेरे वास्ते सलीब पर चढ़ाया जा सका था और वह महिमामयी गवाही दे सका था, तो यह भी उसके विश्वास के द्वारा ही था। जब यूहन्ना ने मनुष्य के पुत्र की महिमामय छवि को देखा, तो यह उसके विश्वास के द्वारा ही था। जब उसने अंत के दिनों के बारे में दर्शन को देखा, तो यह सब भी उसके विश्वास के द्वारा ही था। इस बात का कारण कि क्यों तथाकथित अन्य-जाति राष्ट्रों ने मेरा प्रकाशन प्राप्त कर लिया है, और पता कर लिया है कि मैं मनुष्यों के बीच अपना कार्य करने के लिए देह में लौट आया हूँ, यह भी उनके विश्वास के कारण ही है। वे सब जो मेरे कठोर वचनों के द्वारा मार खाते हैं और फिर भी वे उनसे सांत्वना पाते हैं, और जो बचाए जाते हैं—क्या उन्होंने ऐसा अपने विश्वास के कारण ही नहीं किया है? वे जो मुझ में विश्वास करते किन्तु फिर भी कठिनाइयों का सामना करते हैं, क्या वे भी संसार के द्वारा तिरस्कृत नहीं किए गए हैं? जो मेरे वचन से बाहर जी रहे हैं, परीक्षा के दुःखों से भाग रहे हैं, क्या वे सभी संसार में उद्देश्यहीन नहीं भटक रहे हैं? वह मेरी सांत्वना के वचनों से बहुत दूर, पतझड़ के पत्तों के सदृश इधर-उधर फड़फड़ा रहे हैं, उनके पास आराम के लिए कोई जगह नहीं है और उन्हें मेरे वचनों की सांत्वना तो बिल्कुल भी नहीं है। यद्यपि मेरी ताड़ना और शुद्धिकरण उनका पीछा नहीं करते हैं, तब भी क्या वे भिखारी नहीं हैं, जो, स्वर्ग के राज्य के बाहर सड़कों पर भटकते हुए, एक जगह से दूसरी जगह उद्देश्यहीन भटक रहे हैं? क्या संसार सचमुच में तुम्हारे आराम करने की जगह है? क्या तुम लोग मेरी ताड़ना से बच कर संसार से संतुष्टि की धीमी सी भी मुस्कुराहट को प्राप्त कर सकते हो? क्या तुम लोग वास्तव में अपने क्षणभंगुर आनंद का उपयोग कर सकते हो अपने हृदय के खालीपन को ढकने के लिए जिसे कि छुपाया नहीं जा सकता है? तुम लोग अपने परिवार में किसी को भी मूर्ख बना सकते हो, मगर तुम मुझे कभी भी मूर्ख नहीं बना सकते हो। क्योंकि तुम लोगों का विश्वास अत्यधिक अल्प है, तुम अभी भी ऐसी किसी भी खुशी को पाने के लिए शक्तिहीन हो जो जीवन को प्रदान करनी है। मैं तुम लोगों से आग्रह करता हूँ: बेहतर होगा कि अपना आधा जीवन ईमानदारी से मेरे वास्ते बिताओ बजाय इसके कि अपने पूरे जीवन को साधारण कोटि में और देह के लिए अल्प मूल्य का कार्य करने में सक्रिय रखते हुए और उन सभी दुःखों को सहन करते हुए जो एक व्यक्ति के लिए सहन करना मुश्किल है। अपने आप को इतना अधिक बहुमूल्य समझना और मेरी ताड़ना से भागना कौन सा उद्देश्य पूरा करता है? केवल अनंतकाल की शर्मिंदगी, अनंतकाल की ताड़ना का फल भुगतने के लिए मेरी क्षणिक ताड़ना से अपने आप को छुपाना कौन से उद्देश्य को पूरा करता है? मैं वस्तुतः अपनी इच्छा के प्रति किसी को भी नहीं झुकाऊँगा। यदि कोई व्यक्ति सचमुच में मेरी सभी योजनाओं के प्रति समर्पण करने का इच्छुक है, तो मैं उसके साथ ख़राब बर्ताव नहीं करूँगा। परन्तु मैं अपेक्षा करता हूँ कि सभी लोग मुझमें विश्वास करें, बिल्कुल वैसे ही जैसे अय्यूब ने मुझ यहोवा में विश्वास किया था। यदि तुम लोगों का विश्वास थोमा से बढ़कर होगा, तब तुम लोगों का विश्वास मेरी प्रशंसा प्राप्त करेगा, अपनी ईमानदारी में तुम लोग मेरा परम सुख पाओगे, और निश्चित रूप से तुम लोग अपने दिनों में मेरी महिमा को पाओगे। हालाँकि, जो लोग संसार में विश्वास करते हैं और शैतान पर विश्वास करते हैं उन्होंने अपने हृदयों को ठीक वैसे ही कठोर बना लिया है जैसे कि सदोम शहर के जनसमूहों ने, अपनी आँखों में हवा से उड़े हुए रेत के कणों और अपने मुँह को शैतान की भेंटों के साथ बना लिया था, जिनके अस्पष्ट मन बहुत पहले ही दुष्ट के द्वारा कब्ज़े में कर लिए गए हैं जिसने संसार को हड़प लिया था। उनके विचार लगभग पूरी तरह से प्राचीन शैतान की कैद में पड़ गए हैं। और इसलिए, इस प्रकार मानवजाति का विश्वास हवा के झोंके के साथ उड़ गया है, और वे यहाँ तक कि मेरे कार्य पर ध्यान देने में भी असमर्थ रहते हैं। वे केवल इतना ही कर सकते हैं कि सामना करने का एक कमज़ोर प्रयास करें या एक मोटे तौर पर विश्लेषण करें, क्योंकि वे बहुत पहले से ही शैतान के ज़हर से भर चुके हैं।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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