परमेश्वर के दैनिक वचन | "युवा और वृद्ध लोगों के लिए वचन" | अंश 345

यद्यपि तुम युवा लोग जवान शेरों के समान हो, पर तुम्हारे दिलों में शायद ही सच्चा मार्ग है। तुम्हारा यौवन तुम लोगों को मेरे अधिक कार्य का हकदार नहीं बनाता; उलटे तुम हमेशा अपने प्रति मेरी घृणा को भड़काते हो। यद्यपि तुम लोग युवा हो, लेकिन तुम लोगों में या तो जीवन-शक्ति की या फिर महत्वाकांक्षा की कमी है, और तुम लोग अपने भविष्य के बारे में हमेशा अप्रतिबद्ध रहते हो; ऐसा लगता है, मानो तुम लोग उदासीन और चिंताग्रस्त हो। यह कहा जा सकता है कि युवा लोगों में जो जीवन-शक्ति, आदर्श और उद्देश्य पाए जाने चाहिए, वे तुम लोगों में बिलकुल नहीं मिल सकते; इस तरह के तुम युवा लोग उद्देश्यहीन हो और सही और गलत, अच्छे और बुरे, सुंदरता और कुरूपता के बीच भेद करने की कोई योग्यता नहीं रखते। तुम लोगों में कोई भी ऐसे तत्त्व खोज पाना असंभव है, जो ताज़ा हों। तुम लोग लगभग पूरी तरह से पुराने ढंग के हो, और इस तरह के तुम युवा लोगों ने भीड़ का अनुसरण करना, तर्कहीन होना भी सीख लिया है। तुम लोग स्पष्ट रूप से सही को गलत से अलग नहीं कर सकते, सच और झूठ में भेद नहीं कर सकते, उत्कृष्टता के लिए कभी प्रयास नहीं कर सकते, न ही तुम लोग यह बता सकते हो कि सही क्या है और गलत क्या है, सत्य क्या है और ढोंग क्या है। तुम लोगों में धर्म की दुर्गंध बूढ़े लोगों से भी अधिक भारी और गंभीर है। तुम लोग अभिमानी और अविवेकी भी हो, तुम प्रतिस्पर्धी हो, और तुम लोगों में आक्रामकता का शौक बहुत मजबूत है—इस तरह के युवा व्यक्ति के पास सत्य कैसे हो सकता है? इस तरह का युवा व्यक्ति, जिसका कोई रुख ही न हो, गवाही कैसे दे सकता है? जिस व्यक्ति में सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता न हो, उसे युवा कैसे कहा जा सकता है? जिस व्यक्ति में एक युवा व्यक्ति की जीवन-शक्ति, जोश, ताज़गी, शांति और स्थिरता नहीं है, उसे मेरा अनुयायी कैसे कहा जा सकता है? जिस व्यक्ति में कोई सच्चाई, कोई न्याय की भावना न हो, बल्कि जिसे खेलना और लड़ना पसंद हो, वह मेरा गवाह बनने के योग्य कैसे हो सकता है? युवा लोगों की आँखें दूसरों के लिए धोखे और पूर्वाग्रह से भरी हुई नहीं होनी चाहिए, और उन्हें विनाशकारी, घृणित कृत्य नहीं करने चाहिए। उन्हें आदर्शों, आकांक्षाओं और खुद को बेहतर बनाने की उत्साहपूर्ण इच्छा से रहित नहीं होना चाहिए; उनमें उस सत्य के मार्ग पर बने रहने की दृढ़ता होनी चाहिए, जिसे उन्होंने अब चुना है—ताकि वे मेरे लिए अपना पूरा जीवन खपाने की अपनी इच्छा साकार कर सकें। उन्हें सत्य से रहित नहीं होना चाहिए, न ही उन्हें ढोंग और अधर्म को छिपाना चाहिए—उन्हें उचित रुख पर दृढ़ रहना चाहिए। उन्हें सिर्फ यूँ ही धारा के साथ बह नहीं जाना चाहिए, बल्कि उनमें न्याय और सत्य के लिए बलिदान और संघर्ष करने की हिम्मत होनी चाहिए। युवा लोगों में अँधेरे की शक्तियों के उत्पीड़न के सामने न झुकने और अपने अस्तित्व के महत्व को रूपांतरित करने का साहस होना चाहिए। युवा लोगों को प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने नतमस्तक नहीं हो जाना चाहिए, बल्कि अपने भाइयों और बहनों के लिए माफ़ी की भावना के साथ खुला और स्पष्ट होना चाहिए। बेशक, ये सभी से मेरी अपेक्षाएँ हैं, और सभी को मेरी सलाह। लेकिन इससे भी बढ़कर, ये सभी युवा लोगों के लिए मेरे सुखदायक वचन हैं। तुम लोगों को मेरे वचनों के अनुसार आचरण करना चाहिए। विशेष रूप से, युवा लोगों को मुद्दों में विवेक का उपयोग करने और न्याय और सत्य की तलाश करने के संकल्प से रहित नहीं होना चाहिए। तुम लोगों को सभी सुंदर और अच्छी चीज़ों का अनुसरण करना चाहिए, और तुम्हें सभी सकारात्मक चीजों की वास्तविकता प्राप्त करनी चाहिए। तुम्हें अपने जीवन के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए और उसे हलके में नहीं लेना चाहिए। लोग पृथ्वी पर आते हैं और मेरे सामने आ पाना दुर्लभ है, और सत्य को खोजने और प्राप्त करने का अवसर पाना भी दुर्लभ है। तुम लोग इस खूबसूरत समय को इस जीवन में अनुसरण करने का सही मार्ग मानकर महत्त्व क्यों नहीं दोगे? और तुम लोग हमेशा सत्य और न्याय के प्रति इतने तिरस्कारपूर्ण क्यों बने रहते हो? तुम लोग क्यों हमेशा उस अधार्मिकता और गंदगी के लिए स्वयं को रौंदते और बरबाद करते रहते हो, जो लोगों के साथ खिलवाड़ करती है? और तुम लोग क्यों बूढ़े लोगों की तरह वैसे काम करते हो, जो अधर्मी लोग करते हैं? तुम लोग पुरानी चीज़ों के पुराने तरीकों का अनुकरण क्यों करते हो? तुम लोगों का जीवन न्याय, सत्य और पवित्रता से भरा होना चाहिए; उसे इतनी कम उम्र में इतना भ्रष्ट नहीं होना चाहिए, जो नरक में गिराने की ओर अग्रसर करे। क्या तुम लोगों को नहीं लगता कि यह एक भयानक दुर्भाग्य होगा? क्या तुम लोगों को नहीं लगता कि यह बहुत अन्यायपूर्ण होगा?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

किसका अनुसरण करें नौजवान

नौजवानों की नज़रें पूर्वाग्रही, कपट से भरी नहीं होनी चाहिये। न नौजवानों को घृणित और घातक तरीकों से काम करना चाहिये। उनमें अरमान होने चाहिये, जी जान से आगे बढ़ना चाहिये, न संभावनाओं को लेकर मायूस होना चाहिये, ज़िंदगी और भविष्य पर विश्वास होना चाहिये। नौजवानों को सूझ-बूझ, न्याय की खोज और सत्य में अटल होना चाहिये। सुंदर चीज़ों का तुम्हें अनुसरण करना चाहिये, सकारात्मक चीज़ों की वास्तविकता को हासिल करना चाहिये। ज़िंदगी के प्रति ज़िम्मेदार होना चाहिये। तुम्हें इसे हल्के में हरगिज़ न लेना चाहिये।

सत्य की राह पर नौजवानों को कायम रहना चाहिये। इस तरह अपनी ज़िंदगी को परमेश्वर के लिये खपाना चाहिये। सत्य का उनमें अभाव नहीं होना चाहिये, न उन्हें झूठ और अधर्म को पनाह देनी चाहिये। उन्हें सही रुख़ अपनाना चाहिये। उन्हें यूँ ही नहीं बह जाना चाहिये। उनमें बलिदान का, इंसाफ और सत्य के लिये लड़ने का साहस होना चाहिये।

नौजवानों को अंधेरे की शक्तियों के दमन के आगे झुकना नहीं चाहिये। उनमें ज़िंदगी के मायने बदल देने का हौसला होना चाहिये। नौजवानों को मुश्किलों के आगे हार नहीं माननी चाहिये। उन्हें खुला और बेबाक होना चाहिये, उन्हें साथी विश्वासियों को माफ कर देना चाहिये।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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