परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" | अंश 306

मैंने बहुत सारे वचन कहे हैं, और अपनी इच्छा और स्वभाव को भी व्यक्त किया है, और फिर भी, लोग अभी भी मुझे जानने और मुझ में विश्वास करने में अक्षम ही हैं। या, यह भी कहा जा सकता है कि, वे अभी भी मेरी आज्ञा का पालन करने में अक्षम हैं। वे जो बाइबल में जीते हैं, जो व्यवस्था में जीते हैं, जो सलीब पर जीते हैं, वे जो शिक्षा-सिद्धान्त के अनुसार जीते हैं, वे जो उस कार्य के मध्य में जीते हैं जिन्हें मैं आज करता हूं—उनमें से कौन मेरे अनुकूल है? तुम सब सिर्फ़ आशीष और पुरस्कार पाने के बारे में ही सोचते हो, और कभी एक बार भी तुम लोगों ने यह विचार नहीं किया कि मेरे अनुकूल कैसे बन सकते हो, या अपने आप को मेरे साथ शत्रुता होने से कैसे रोक सकते हो। मैं तुम सबसे बहुत निराश हूं, क्योंकि मैंने तुम लोगों को बहुत अधिक दिया है, फिर भी मैंने तुम लोगों से बहुत ही कम हासिल किया है। तुम लोगों का छल, तुम लोगों का घमण्ड, तुम लोगों लालच, तुम लोगों की ज़रूरत से अधिक अभिलाषाएं, तुम लोगों का धोखा, तुम लोगों का आज्ञा-उल्लंघन—इनमें से कौन सी चीज़ मेरी नज़र से बच सकती है? तुम लोग मेरे साथ चाल चलते हो, मुझे मूर्ख बनाते हो, मेरा अपमान करते हो, मुझे धोखा देते हो, मुझ से ज़बरदस्ती वसूल करते हो, बलिदानों के लिए मुझ पर बल प्रयोग करते हो—ऐसे दुष्कर्म मेरी सज़ा से कैसे बच निकल सकते हैं? तुम लोगों की बुराई मेरे साथ तुम्हारी शत्रुता का प्रमाण है, और मेरी अनुकूलता में न होने का प्रमाण है। तुम सब में से प्रत्येक अपने आप में यह विश्वास करता है कि वह मेरे अनुकूल है, परन्तु यदि ऐसा है, तो फिर यह अखंडनीय प्रमाण किस पर लागू होता है? तुम लोगों को लगता है कि तुम्हारे अंदर मेरे प्रति बहुत निष्कपटता और ईमानदारी है। तुम सब सोचते हो कि तुम लोग बहुत ही रहमदिल, बहुत ही करुणामय हो, और तुम सबने मुझे बहुत कुछ समर्पित किया है। तुम सब सोचते हो कि तुम लोगों ने मेरे लिए पर्याप्त काम कर दिया है। फिर भी, क्या तुम लोगों ने कभी इन धारणाओं की अपने ख़ुद के स्वभाव से तुलना की है? मैं कहता हूं कि तुम लोग बहुत ही घमण्डी, बहुत ही लालची, बहुत ही यन्त्रवत् हो; और तुम सब मुझे बहुत ही गहरी चालबाज़ियों से मूर्ख बनाते हो, और तुम्हारे इरादे घृणित हैं और तुम्हारी विधियाँ घृणित हैं। तुम लोगों की ईमानदारी बहुत ही थोड़ी है, तुम्हारी गम्भीरता बहुत ही थोड़ी है, और तुम्हारी अंतरात्मा तो और अधिक क्षुद्र है। तुम लोगों के हृदय में बहुत ही अधिक द्वेष है, और इससे कोई भी नहीं बचा है, यहाँ तक कि मैं भी नहीं। तुम सब मुझे अपने बच्चों, या अपने पति, या आत्म-संरक्षण के लिए बाहर निकाल देते हो। मेरी चिंता करने की बजाय—तुम सब अपने परिवार, अपने बच्चों, अपने सामाजिक स्तर, अपने भविष्य, और अपनी ख़ुद की संतुष्टि की चिंता करते हो। तुमने कभी बातचीत करते समय या कार्य करते समय मेरे बारे में सोचा है? जब मौसम ठंडा होता है, तो तुम लोगों की सोच अपने बच्चों, अपने पति, अपनी पत्नी, या अपने माता-पिता के लिए ही होती है। जब मौसम गरम होता है, तब भी, तुम सबके हृदय में मेरे लिए कोई स्थान नहीं होता है। जब तुम अपना कर्तव्य निभाते हो, तुम अपने ख़ुद के फायदों, अपनी ख़ुद की व्यक्तिगत सुरक्षा, अपने परिवार के सदस्यों के बारे में ही सोच रहे होते हो। तुमने कभी भी ऐसा क्या काम किया है जो सिर्फ मेरे लिए ही हो? तुमने कब सिर्फ मेरे बारे में ही सोचा है? कब तुमने अपने आप को, हर कीमत पर, केवल मेरे लिए और मेरे कार्य के लिए ही समर्पित किया है? मेरे साथ तुम्हारी अनुकूलता का प्रमाण कहाँ है? मेरे साथ तुम्हारी ईमानदारी की वास्तविकता कहाँ है? मेरे साथ तुम्हारी आज्ञाकारिता की वास्तविकता कहाँ है? कब तुम्हारे इरादे केवल मेरी आशीषों का लाभ पाने के लिए ही नहीं रहे हैं? तुम सब मुझे मूर्ख बनाते और धोखा देते हो, तुम सब सत्य के साथ खेलते हो, और सत्य के अस्तित्व को छुपाते हो, और सत्य के सार-तत्व को धोखा देते हो, और तुम लोग इस प्रकार अपने आप को मेरा शत्रु बनाते हो, अतः भविष्य में क्या तुम लोगों की प्रतीक्षा कर रहा है? तुम लोग केवल एक अज्ञात परमेश्वर से अनुकूलता की ही खोज करते हो, और मात्र ही एक अज्ञात विश्वास की खोज करते हो, फिर भी तुम सब मसीह की अनुकूलता में नहीं हो। क्या तुम्हारी दुष्टता को भी वही कठोर दण्ड नहीं मिलेगा जो पापी को मिलता है? उस समय, तुम सबको अहसास होगा कि कोई भी जो मसीह के अनुकूल नहीं होता, क्रोध के दिन से वह बच नहीं पायेगा, और तुम लोगों पता चलेगा कि जो मसीह के शत्रु हैं उन्हें किस प्रकार का कठोर दण्ड दिया जायेगा। जब वह दिन आएगा, परमेश्वर में विश्वास के कारण भाग्यवान होने के तुम लोगों के सभी सपने, और स्वर्ग में जाने का अधिकार, सब बिखर जायेंगे। परंतु, यह उनके लिए नहीं है जो मसीह के अनुकूल हैं। यद्यपि उन्होंने बहुत कुछ खो दिया है, जबकि उन्होंने बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना भी किया है, वह उस सब उत्तराधिकार को प्राप्त करेंगे जो मैं मानवजाति को वसीयत के रूप में दूंगा। अंततः, तुम समझ जाओगे कि सिर्फ़ मैं ही धर्मी परमेश्वर हूं, और केवल मैं ही मानवजाति को उसकी खूबसूरत मंजिल तक ले जाने में सक्षम हूँ।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

कौन परमेश्वर के अनुकूल है

परमेश्वर ने अनगिनत वचन व्यक्त किये हैं, और अपनी इच्छा और स्वभाव भी जताया, फिर भी लोग नाकाबिल हैं उसे जानने के, उसमें विश्वास करने और उसका पालन करने में। तुम सब बस सोचते हो पुरस्कारों और आशीषों के बारे में न ही परमेश्वर के अनुकूल होने के बारे में, न ही उसके विरुद्ध न होने के बारे में। परमेश्वर तुमसे बहुत निराश है, उसने तुम लोगों को कितना कुछ दिया है, लेकिन कितना कम तुमसे पाया है। जो जीते हैं बाइबल में या क्रूस पर, जो जीते हैं व्यवस्था या सिद्धांतों के बीच, या आज परमेश्वर जो करता कार्य उसके बीच, उनमें से कौन है जो परमेश्वर के अनुकूल है?

तुम लोगों का घमंड, लालच, बड़ी अभिलाषाएं, धोखा और अनाज्ञाकारिता, इनमें से परमेश्वर की निगाहों से क्या बच पायेगा? तुम सब उसे शर्मिंदा करते, उसके साथ चाल चलते हो, उससे ज़बरदस्ती वसूलते, और बलिदान के लिए बल प्रयोग करते हो, ये सब उसके दंड से कैसे बच पायेगा, कभी सोचते हो? तुम्हारे कुकर्म हैं सबूत कि परमेश्वर के खिलाफ हो तुम लोग और उसके अनुकूल नहीं हो तुम। जो जीते हैं बाइबल में या क्रूस पर, जो जीते हैं व्यवस्था या सिद्धांतों के बीच, या आज परमेश्वर जो करता कार्य उसके बीच, उनमें से कौन है जो परमेश्वर के अनुकूल है?

“मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना” से

दुनिया आपदा से घिर गई है। यह हमें क्या चेतावनी देती है? आपदाओं के बीच हम परमेश्वर द्वारा कैसे सुरक्षित किये जा सकते हैं? इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारे साथ हमारी ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ें।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

संबंधित सामग्री

परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम सभी कितने नीच चरित्र के हो!" | अंश 340

तुम लोगों का विश्वास बहुत सुंदर है; तुम्हारा कहना है कि तुम अपना सारा जीवन-काल मेरे कार्य के लिए खपाने को तैयार हो, और तुम इसके लिए अपने...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर से सचमुच प्यार करते हैं, वे वो लोग हैं जो परमेश्वर की व्यावहारिकता के प्रति पूर्णतः समर्पित हो सकते हैं" | अंश 491

परमेश्वर के देह में होने के दौरान, जिस आज्ञाकारिता की वह लोगों से अपेक्षा करता है वह वह नहीं होती है जो लोग कल्पना करते हैं—आलोचना या...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" | अंश 146

परमेश्वर के कार्यों को जानना कोई आसान बात नहीं है: तुम्हारी खोज में तुम्हारा स्तर-मान और उद्देश्य होना चाहिए, तुम्हें ज्ञात होना चाहिए कि...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 155

प्रबंधकीय कार्य केवल मानवजाति के कारण ही घटित हुआ था, जिसका अर्थ है कि इसे केवल मानवजाति के अस्तित्व के द्वारा ही उत्पन्न किया गया था।...