परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है" | अंश 303

मनुष्य परमेश्वर को पाने में इसलिए असफल नहीं हो जाता है कि परमेश्वर के पास भावना है, या इसलिए कि परमेश्वर मनुष्य के द्वारा प्राप्त होना नहीं चाहता, परन्तु इसलिए कि मनुष्य परमेश्वर को पाना ही नहीं चाहता, और इसलिए क्योंकि मनुष्य परमेश्वर को तीव्रता से खोजता ही नहीं। उनमें से कोई भी जो सचमुच परमेश्वर को खोजता है वह परमेश्वर के द्वारा श्रापित कैसे किया जा सकता है? जो सही समझ और संवेदनशील सद्विवेक का हो वह परमेश्वर के द्वारा कैसे श्रापित किया जा सकता है? उनमें से कोई भी जो सचमुच परमेश्वर की आराधना और सेवा करता है वह उसके कोप की आग से नाश कैसे किया जा सकता है? कोई भी जो परमेश्वर की आज्ञा मानने के लिए खुश है वह परमेश्वर के घर से बाहर कैसे निकाला जा सकता है? कोई भी जो परमेश्वर को पर्याप्त प्रेम नहीं कर सका वह परमेश्वर की सजा में कैसे रह सकेगा? कैसे कोई भी जो परमेश्वर के लिए सबकुछ त्यागने के लिए खुश है उसके लिए कुछ भी न बचे? मनुष्य परमेश्वर का पीछा करने के लिए अनिच्छुक है, अपनी सम्पत्ति को परमेश्वर के लिए खर्च करने के लिए अनिच्छुक है, और परमेश्वर के लिए एक जीवन भर के प्रयास को समर्पित करने के लिए अनिच्छुक है, और इसके बजाय कहता है कि परमेश्वर बहुत दूर चला गया, वह भी परमेश्वर के बारे में बहुत कुछ मनुष्य की धारणाओं के साथ अन्तर पर है। एक ऐसी मानवता के साथ, यद्यपि तुम सब अपने प्रयासों में चाहे प्रचुर भी होते फिर भी तुम सब परमेश्वर के अनुमोदन पाने में अयोग्य ही होते, इस तथ्य के बारे में कुछ न कहने के लिए कि परमेश्वर को नहीं खोजते हो। क्या तुम सब नहीं जानते कि तुम सब मानवजाति दोषपूर्ण उत्पाद हो? क्या तुम सब नहीं जानते कि तुम लोगों की मानवता से बढ़कर अन्य कोई भी मानवता अधिक नीच नहीं है? क्या तुम सब नहीं जानते कि तुम लोग का "आदरसूचक शीर्षक" क्या है? वे जो सच में परमेश्वर को प्रेम करते हैं तुम सब भेड़िये का पिता, भेड़िये की माता, भेड़िये का पुत्र, और भेड़िये का पोता कह कर बुलाते हैं; तुम सब भेड़िये के वंशज हो, भेड़िये के लोग, और तुम सब को अपनी खुद की पहचान जाननी चाहिए और कभी नहीं भूलनी चाहिए। यह न सोचो कि तुम सब कोई उच्च आकृति हो: तुम सब मानवजाति के मध्य गैर-मनुष्यों का सबसे अधिक क्रूर झुंड हो। क्या तुम सबको इसके बारे में कुछ भी नहीं पता? क्या तुम लोगों को पता है कि तुम सबके मध्य में कार्य करने के लिए मैंने कितना जोखिम उठाया है? यदि तुम सबकी समझ वापस सामान्य नहीं हो सकती, और तुम सबका सद्विवेक सामान्य रूप से कार्य नहीं कर सकता, तो फिर तुम सब कभी भी "भेड़िये" की पदवी से मुक्त नहीं हो पाओगे, तुम सब कभी भी श्राप के दिन से बच नहीं पाओगे, अपनी सजा के दिन से कभी बच नहीं पाओगे। तुम सब हीन जन्मे थे, एक चीज जो बिना किसी मूल्य के है। तुम सब सहज ढंग से भूखे भेड़ियों का झुंड, मलबे और कचरे का एक ढेर हो, और, तुम सबकी तरह, मैं तुम लोगों के ऊपर एहसान पाने के लिए कार्य नहीं करता, परन्तु इसलिए कि कार्य की आवश्यकता है। यदि तुम सब इसी ढंग से विद्रोही बने रहोगे, तो मैं अपना कार्य रोक दूँगा, और फिर दोबारा तुम सबके ऊपर कभी कार्य नहीं करूँगा; इसके प्रतिकूल, मैं अपना कार्य दूसरे झुंड पर स्थानान्तरण कर दूँगा जो मुझे प्रसन्न करता है, और इस तरह से मैं तुम सबको हमेशा के लिए छोड़ दूँगा, क्योंकि मैं उन पर नजर रखने के लिए अनिच्छुक हूँ जो मेरे साथ शत्रुता में हैं। तो फिर, क्या तुम सब मेरे अनुरूप बनने की कामना करते हो, या मेरे विरुद्ध शत्रुता बनाने की?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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