परमेश्वर के दैनिक वचन | "मात्र उन्हें ही पूर्ण बनाया जा सकता है जो अभ्यास पर ध्यान देते हैं" | अंश 548

प्रत्येक व्यक्ति में चलने के लिए पवित्र आत्मा के पास एक मार्ग है और प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण होने का अवसर प्रदान करता है। तुम्हारी नकारात्मकता के द्वारा तुम्हें तुम्हारी भ्रष्टता दिखाई जाती है, और फिर नकारात्मकता को उतार फेंकने के द्वारा तुम अभ्यास करने के लिए एक मार्ग प्राप्त करोगे; इन सब तरीकों से तुम पूर्ण किए जाते हो। इसके अलावा, निरन्तर मार्गदर्शन और तुम में कुछ सकारात्मक बातों की रोशनी के द्वारा तुम अपने कार्य को अग्रसक्रियता से पूरा करोगे, अंतर्दृष्टि में विकसित होओगे और पहचानने की योग्यता प्राप्त करोगे। जब तुम्हारी परिस्थितियाँ अच्छी होती हैं, तुम विशेषकर परमेश्वर के वचन पढ़ने और परमेश्वर से प्रार्थना करने के इच्छुक होते हो, और जो उपदेश तुम सुनते हो, उसे अपनी अवस्था के साथ जोड़ सकते हो। ऐसे समयों में परमेश्वर तुम्हें भीतर से प्रबुद्ध और रोशन करता है, तुम्हें सकारात्मक पहलू वाली कुछ बातें एहसास कराता है। इस तरह सकारात्मक पहलू में तुम पूर्ण किए जाते हो। नकारात्मक परिस्थितियों में, तुम दुर्बल और नकारात्मक होते हो; और तुम्हें महसूस होता है कि तुम्हारे दिल में परमेश्वर नहीं है, फिर भी परमेश्वर तुम्हें रोशन करता है और अभ्यास करने के लिए एक मार्ग खोजने में तुम्हारी सहायता करता है। इससे बाहर आना नकारात्मक पहलू में पूर्णता प्राप्त करना है। परमेश्वर मनुष्य को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं में पूर्ण बना सकता है। यह इस पर निर्भर करता है, कि तुम अनुभव करने में समर्थ हो और क्या तुम परमेश्वर के द्वारा पूर्ण किए जाने की कोशिश करते हो। यदि तुम सचमुच परमेश्वर के द्वारा पूर्ण किए जाने की कोशिश करते हो, तब नकारात्मक तुम्हारी हानि नहीं कर सकता, परन्तु तुम्हारे लिए वे बातें ला सकता है, जो अधिक वास्तविक हैं, और तुम्हें यह जानने के लिए और अधिक योग्य बना सकता है कि तुम्हारे भीतर क्या कमी है, अपनी वास्तविक परिस्थतियों को अधिक समझने में और यह देखने योग्य बना सकता है कि मनुष्य के पास कुछ नहीं है और मनुष्य कुछ नहीं है; यदि तुम परीक्षाओं को अनुभव नहीं करते, तो तुम नहीं जानते, और तुम सर्वदा महसूस करोगे कि तुम दूसरों से ऊपर हो और प्रत्येक व्यक्ति से उत्तम हो। इस सब के द्वारा तुम देखोगे कि जो कुछ पहले आया था वह परमेश्वर के द्वारा किया गया और सुरक्षित रखा गया था। परीक्षाओं में प्रवेश तुम्हें प्रेम या विश्वास रहित बना देता है, तुममें प्रार्थना की कमी होती है, और तुम भजन गाने में असमर्थ होते हो और अनजाने में ही तुम इन सब के मध्य स्वयं को जान लेते हो। परमेश्वर के पास मनुष्य को पूर्ण बनाने के अनेक साधन हैं। मनुष्य के भ्रष्ट स्वभाव से निपटने के लिए वह समस्त प्रकार के वातावरण का प्रयोग करता है, और मनुष्य को अनावृत करने के लिए विभिन्न चीजों का प्रयोग करता है, एक ओर वह मनुष्य के साथ निपटता है और दूसरी ओर मनुष्य को अनावृत करता है, और एक अन्य बात में वह मनुष्य को उजागर करता है, उसके हृदय की गहराइयों में स्थित "रहस्यों" को खोदकर और ज़ाहिर करते हुए, मनुष्य की अनेक अवस्थाएँ दिखा करके उसकी प्रकृति को प्रकट करता है। परमेश्वर अनेक विधियों जैसे कि प्रकाशन, व्यवहार करने, शुद्धिकरण, और ताड़ना के द्वारा मनुष्य को पूर्ण बनाता है, जिससे मनुष्य जान सके कि परमेश्वर व्यावहारिक है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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