परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर उन्हें पूर्ण बनाता है, जो उसके हृदय के अनुसार हैं" | अंश 545

परमेश्वर अब एक विशेष लोगों के समूह को प्राप्त करना चाहता है, ऐसा समूह जिसमें वे लोग शामिल हैं जो उसके साथ सहयोग करने का प्रयास करते हैं, जो उसके कार्य का पालन कर सकते हैं, जो विश्वास करते हैं कि परमेश्वर द्वारा बोले हुए वचन सत्य हैं, जो परमेश्वर की अपेक्षाओं को अपने अभ्यास में ला सकते हैं; ये वे लोग हैं जिनके हृदयों में सच्ची समझ है, ये वे लोग हैं, जिन्हें पूर्ण बनाया जा सकता है, और वे निःसंदेह पूर्णता के पथ पर चलने में समर्थ होंगे। जिन्हें पूर्ण नहीं बनाया जा सकता है, ये वे लोग हैं जो परमेश्वर के कार्य की स्पष्ट समझ के बिना हैं, जो परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते नहीं हैं, जो उसके वचनों पर कोई ध्यान नहीं देते, और जिनके हृदय में परमेश्वर के लिए कोई प्रेम नहीं है। ऐसे लोग हैं जो शैतान के हैं, जो देहधारी परमेश्वर पर संदेह करने के द्वारा, उसके बारे में अनिश्चित रहने के द्वारा, उसके वचनों को कभी भी गंभीरता से नहीं लेने के द्वारा, और हमेशा परमेश्वर को धोखा देने के द्वारा, परमेश्वर का विरोध करते हैं। ऐसे लोगों को पूर्ण बनाने का कोई उपाय नहीं है।

यदि तू पूर्ण बनाया जाना चाहता है, तो पहले तुझ पर परमेश्वर द्वारा कृपा की जानी चाहिए, क्योंकि वह उन्हें पूर्ण बनाता है, जिन पर वह कृपा करता है, जो उसके हृदय के अनुसार होते हैं। यदि तू परमेश्वर के हृदय के अनुसार होना चाहता है, तो तेरे पास ऐसा हृदय अवश्य होना चाहिए जो उसके कार्यों का पालन करता हो, तुझे सत्य का अनुसरण करने का प्रयास अवश्य करना चाहिए, और तुझे सभी बातों में परमेश्वर की छानबीन को अवश्य स्वीकार करना चाहिए। क्या तू जो कुछ भी करता है, वो परमेश्वर की छानबीन से गुजरता है? क्या तेरा इरादा सही है? यदि तेरा इरादा सही है, तो परमेश्वर तेरी प्रशंसा करेगा; यदि तेरा इरादा ग़लत है, तो यह दिखाता है, कि जिसे तेरा दिल प्यार करता है वह परमेश्वर नहीं है, बल्कि यह देह और शैतान है। इसलिए तुझे सभी बातों में परमेश्वर की छानबीन को स्वीकार करने के लिए प्रार्थना को माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। जब तू प्रार्थना करता है, तब भले ही मैं व्यक्तिगत रूप से तेरे सामने खड़ा नहीं होता हूँ, लेकिन पवित्र आत्मा तेरे साथ होता है, और यह स्वयं मुझसे और पवित्र आत्मा से तू प्रार्थना कर रहा होता है। तू इस देह पर क्यों भरोसा करता है? तू इसलिए भरोसा करता है क्योंकि उसमें परमेश्वर का आत्मा है। यदि वह व्यक्ति परमेश्वर के आत्मा के बिना होता तो क्या तू उस पर भरोसा करता? जब तू इस व्यक्ति पर भरोसा करता है, तो तू परमेश्वर के आत्मा पर भरोसा करता है। जब तू इस व्यक्ति से डरता है, तो तू परमेश्वर के आत्मा से डरता है। परमेश्वर के आत्मा पर भरोसा इस व्यक्ति पर भरोसा करना है, और इस व्यक्ति पर भरोसा करना, परमेश्वर के आत्मा पर भरोसा करना भी है। जब तू प्रार्थना करता है, तो तू महसूस करता है कि परमेश्वर का आत्मा तेरे साथ है, और परमेश्वर तेरे सामने है; इसलिए तू उसके आत्मा से प्रार्थना करता है। आज, अधिकांश लोग अपने कृत्यों को परमेश्वर के सम्मुख लाने से बहुत डरते हैं; जबकि तू परमेश्वर की देह को धोखा दे सकता है, परन्तु उसके आत्मा को धोखा नहीं दे सकता है। कोई भी बात, जो परमेश्वर की छानबीन का सामना नहीं कर सकती, वह सत्य के अनुरूप नहीं है, और उसे अलग कर देना चाहिए; ऐसा न करना परमेश्वर के विरूद्ध पाप करना है। इसलिए, तुझे हर समय, जब तू प्रार्थना करता है, जब तू अपने भाई-बहनों के साथ बातचीत और संगति करता है, और जब तू अपना कर्तव्य करता है और अपने काम में लगा रहता है, तो तुझे अपना हृदय परमेश्वर के सम्मुख अवश्य रखना चाहिए। जब तू अपना कार्य पूरा करता है, तो परमेश्वर तेरे साथ होता है, और जब तक तेरा इरादा सही है और परमेश्वर के घर के कार्य के लिए है, तब तक जो कुछ भी तू करेगा, परमेश्वर उसे स्वीकार करेगा; इसलिए तुझे अपने कार्य को पूरा करने के लिए अपने आपको ईमानदारी से समर्पित कर देना चाहिए। जब तू प्रार्थना करता है, यदि तेरे हृदय में परमेश्वर के लिए प्रेम है, और यदि तू परमेश्वर की देखभाल, संरक्षण और छानबीन की तलाश करता है, यदि ये चीज़ें तेरे इरादे हैं, तो तेरी प्रार्थनाएँ प्रभावशाली होंगी। उदाहरण के लिए, जब तू सभाओं में प्रार्थना करता है, यदि तू अपना हृदय खोल कर परमेश्वर से प्रार्थना करता है, और बिना झूठ बोले परमेश्वर से बोल देता है कि तेरे हृदय में क्या है, तब तेरी प्रार्थनाएँ निश्चित रूप से प्रभावशाली होंगी। यदि तू ईमानदारी से अपने दिल में परमेश्वर से प्रेम करता है, तो परमेश्वर से एक प्रतिज्ञा कर : "परमेश्वर, जो कि स्वर्ग में और पृथ्वी पर और सब वस्तुओं में है, मैं तुझसे प्रतिज्ञा करता हूँ : तेरा आत्मा, जो कुछ मैं करता हूँ, उसे जाँचे और मेरी सुरक्षा करे और हर समय मेरी देखभाल करे, इसे संभव बनाए कि मेरे सभी कृत्य तेरी उपस्थिति में खड़े रह सकें। यदि कभी भी मेरा हृदय तुझसे प्यार करना बंद कर दे, या यह कभी भी तुझसे विश्वासघात करे, तो तू मुझे कठोरता से ताड़ना और श्राप दे। मुझे ना तो इस जगत में और न आगे क्षमा कर!" क्या तू ऐसी शपथ खाने की हिम्मत करता है? यदि तू नहीं करता है, तो यह दर्शाता है कि तू कायर है, और तू अभी भी खुद से ही प्यार करता है। क्या तुम लोगों के पास यह संकल्प है? यदि वास्तव में यही तेरा संकल्प है, तो तुझे प्रतिज्ञा लेनी चाहिए। यदि तेरे पास ऐसी प्रतिज्ञा लेने का संकल्प है, तो परमेश्वर तेरे संकल्प को पूरा करेगा। जब तू परमेश्वर से प्रतिज्ञा करता है, तो वह सुनता है। परमेश्वर तेरी प्रार्थना और तेरे अभ्यास से निर्धारित करता है कि तू पापी है या धार्मिक। यह अब तुम लोगों को पूर्ण बनाने की प्रक्रिया है, और यदि पूर्ण बनाए जाने पर वास्तव में तुझे विश्वास है, तो तू जो कुछ भी करता है, वह सब परमेश्वर के सम्मुख लाएगा और उसकी छानबीन को स्वीकार करेगा; और यदि तू कुछ ऐसा करता है जो उग्र रूप से विद्रोहशील है या यदि तू परमेश्वर के साथ विश्वासघात करता है, तो परमेश्वर तेरी प्रतिज्ञा को साकार करेगा, और तब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तेरे साथ क्या होता है, चाहे वह विनाश हो या ताड़ना, यह तेरे स्वयं का कार्य है। तूने प्रतिज्ञा ली थी, इसलिए तुझे ही इसका पालन करना चाहिए। यदि तूने कोई प्रतिज्ञा की, लेकिन उसका पालन नहीं किया, तो तुझे विनाश भुगतना होगा। चूँकि प्रतिज्ञा तेरी थी, परमेश्वर तेरी प्रतिज्ञा को साकार करेगा। कुछ लोग प्रार्थना के बाद डरते हैं, और विलाप करते हैं, "सब ख़त्म हो गया! व्यभिचार का मेरा मौका चला गया; दुष्ट चीजें करने का मेरा मौका चला गया; सांसारिक लालचों में लिप्त होने का मेरा मौका चला गया!" ऐसे लोग अभी भी सांसारिकता और पाप को ही प्यार करते हैं, और उन्हें निश्चित ही विनाश को भुगतना पड़ेगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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