परमेश्वर के दैनिक वचन | "अंधकार के प्रभाव से बच निकलो और तुम परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जाओगे" | अंश 535

अंधकार के प्रभाव से बचने के लिए, पहले तुम्हें परमेश्वर के प्रति वफादार होना चाहिए और तुम्हारे अंदर सत्य का अनुसरण करने की उत्सुकता होनी चाहिए, तभी तुम्हारी अवस्था सही हो सकती है। अंधकार के प्रभाव से बचने के लिए सही अवस्था में रहना पहली जरूरत है। सही अवस्था के न होने का मतलब है कि तुम परमेश्वर के प्रति वफादार नहीं हो और तुममें सत्य की खोज करने की उत्सुकता नहीं है; और अंधकार के प्रभाव से बचने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। मेरे वचन इंसान के अंधकार के प्रभावों से बचने का आधार हैं, और जो लोग मेरे वचनों के अनुसार अभ्यास नहीं कर सकते, वे अंधकार के प्रभाव के बंधन से बच नहीं सकते। सही अवस्था में जीने का अर्थ है परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन में जीना, परमेश्वर के प्रति वफादार होने की अवस्था में जीना, सत्य खोजने की अवस्था में जीना, ईमानदारी से परमेश्वर के लिए खुद को खपाने की वास्तविकता में जीना, और वास्तव में परमेश्वर से प्रेम करने की अवस्था में जीना। जो लोग इन अवस्थाओं में और इस वास्तविकता में जीते हैं, वे जैसे-जैसे सत्य में अधिक गहराई से प्रवेश करेंगे, वैसे-वैसे वे रूपांतरित होते जाएँगे, और जैसे-जैसे काम गहन होता जाएगा, वे रूपांतरित हो जाएँगे; और अंत में, वे ऐसे इंसान बन जाएँगे जो यकीनन परमेश्वर को प्राप्त हो जाएँगे और उससे प्रेम करेंगे। जो लोग अंधकार के प्रभाव से बच निकले हैं, वे धीरे-धीरे परमेश्वर की इच्छा को सुनिश्चित कर सकते हैं, इसे समझ सकते हैं, और अंततः परमेश्वर के विश्वासपात्र बन जाते हैं। उनके अंदर न केवल परमेश्वर के बारे में कोई धारणा नहीं होती, वे लोग परमेश्वर के खिलाफ कोई विद्रोह भी नहीं करते, बल्कि वे लोग उन धारणाओं और विद्रोह से और भी अधिक घृणा करने लगते हैं जो उनमें पहले थे, और उनके हृदय में परमेश्वर के लिए सच्चा प्यार पैदा हो जाता है। जो लोग अंधकार के प्रभाव से बच निकलने में असमर्थ हैं, वे अपनी देह में लिप्त रहते हैं, और विद्रोह से भरे होते हैं; जीवनयापन के लिए उनका हृदय मानव धारणाओं और जीवन-दर्शन से, और साथ ही अपने इरादों और विचार-विमर्शों से भरा रहता है। परमेश्वर मनुष्य से एकनिष्ठ प्रेम की अपेक्षा करता है; परमेश्वर अपेक्षा करता है कि मनुष्य उसके वचनों से भरा रहे और उसके लिए प्यार से भरे हृदय से परिपूर्ण रहे। परमेश्वर के वचनों में रहना, उसके वचनों में ढूँढना जो उन्हें खोजना चाहिए, परमेश्वर को उसके वचनों के लिए प्यार करना, उसके वचनों के लिए भागना, उसके वचनों के लिए जीना—ये ऐसे लक्ष्य हैं जिन्हें पाने के लिए इंसान को प्रयास करने चाहिए। सबकुछ परमेश्वर के वचनों पर निर्मित किया जाना चाहिए; इंसान तभी परमेश्वर की अपेक्षाओं को पूरा करने में सक्षम हो पाएगा। यदि मनुष्य में परमेश्वर के वचन नहीं होंगे, तो इंसान शैतान के चंगुल में फँसे भुनगे से ज़्यादा कुछ नहीं है! इसका आकलन करो : परमेश्वर के कितने वचनों ने तुम्हारे अंदर जड़ें जमाई हैं? किन चीज़ों में तुम परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीवन जीते रहे हो? किन चीज़ों में तुम परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीवन नहीं जीते रहे हो? यदि तुम पूरी तरह से परमेश्वर के वचनों के प्रभाव में नहीं हो, तो तुम्हारे दिल पर किसने कब्ज़ा कर रखा है? अपने रोजमर्रा के जीवन में, क्या तुम शैतान द्वारा नियंत्रित किए जा रहे हो, या परमेश्वर के वचनों ने तुम पर अधिकार कर रखा है? क्या तुम्हारी प्रार्थनाएँ परमेश्वर के वचनों की बुनियाद पर आधारित हैं? क्या तुम परमेश्वर के वचनों के प्रबोधन से अपनी नकारात्मक अवस्था से बाहर आ गए हो? परमेश्वर के वचनों को अपने अस्तित्व की नींव की तरह लेना—यही वो है जिसमें सबको प्रवेश करना चाहिए। यदि तुम्हारे जीवन में परमेश्वर के वचन विद्यमान नहीं हैं, तो तुम अंधकार के प्रभाव में जी रहे हो, तुम परमेश्वर से विद्रोह कर रहे हो, तुम उसका विरोध कर रहे हो, और तुम परमेश्वर के नाम का अपमान कर रहे हो। इस तरह के मनुष्यों का परमेश्वर में विश्वास पूरी तरह से बदमाशी है, एक विघ्न है। तुम्हारा कितना जीवन परमेश्वर के वचनों के अनुसार रहा है? तुम्हारा कितना जीवन परमेश्वर के वचनों के अनुसार नहीं रहा है? परमेश्वर के वचनों को तुमसे जो अपेक्षाएँ थीं, उनमें से तुमने कितनी पूरी की हैं? कितनी तुममें खो गई हैं? क्या तुमने ऐसी चीज़ों को बारीकी से देखा है?

अंधकार के प्रभाव से निकलने के लिए, पवित्र आत्मा का कार्य और इंसान का समर्पित सहयोग, दोनों की आवश्यकता होती है। मैं क्यों कहता हूँ कि इंसान सही रास्ते पर नहीं है? जो लोग सही रास्ते पर हैं, वे सबसे पहले, अपना हृदय ईश्वर को समर्पित कर सकते हैं। इस कार्य में प्रवेश करने में लंबा समय लगता है, क्योंकि मानवजाति हमेशा से अंधकार के प्रभाव में रहती आई है, हजारों सालों से शैतान की दासता में रह रही है, इसलिए यह प्रवेश एक या दो दिन में प्राप्त नहीं किया जा सकता। आज मैंने यह मुद्दा इसलिए उठाया है ताकि इंसान अपनी स्थिति को समझ सकें; एक बार जब इंसान इस बात को समझ जाएगा कि अंधकार का प्रभाव क्या होता है और प्रकाश में रहना क्या होता है, तो प्रवेश आसान हो जाता है। क्योंकि इससे पहले कि तुम शैतान के प्रभाव से निकलो, तुम्हें पता होना चाहिए कि ये क्या होता है; तभी तुम्हें इससे छुटकारा पाने का मार्ग मिल सकता है। जहाँ तक यह बात है कि उसके बाद क्या करना है, यह तो इंसान का खुद का मामला है। हर चीज़ में एक सकारात्मक पहलू से प्रवेश करो, और कभी निष्क्रिय होकर इंतजार मत करो। मात्र यही तरीका है जिससे तुम्हें परमेश्वर द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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