परमेश्वर के दैनिक वचन | "जिन्हें पूर्ण बनाया जाना है उन्हें शुद्धिकरण से अवश्य गुज़रना चाहिए" | अंश 517

बड़े लाल अजगर के देश में परमेश्वर का काम शानदार और अथाह है। वह एक समूह के लोगों को पूर्ण बनाएगा और कुछ अन्य को हटा देगा, क्योंकि कलीसिया में सभी प्रकार के लोग हैं—ऐसे लोग हैं जो सत्य से प्रेम करते हैं और ऐसे लोग हैं जो नहीं करते; ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर के काम अनुभव करते हैं और कुछ ऐसे हैं जो नहीं करते; कुछ ऐसे हैं जो कर्तव्य करते हैं और कुछ जो नहीं करते; ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर के लिए गवाही देते हैं और कुछ नहीं देते—और उनमें से एक हिस्सा अविश्वासियों और दुष्ट इंसानों का है जो निश्चित ही हटा दिये जाएंगे। यदि तुम स्पष्ट रूप से परमेश्वर के काम को नहीं जानते हो तो तुम नकारात्मक होगे; ऐसा इसलिए है क्योंकि परमेश्वर का काम केवल अल्पसंख्या के लोगों में ही देखा जा सकता है। उस समय यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सचमुच परमेश्वर से प्यार करता है और कौन नहीं। जो लोग सचमुच परमेश्वर से प्यार करते हैं, उनके पास पवित्र आत्मा का काम है, जो सचमुच उससे प्यार नहीं करते हैं, वे उसके काम के प्रत्येक चरण के माध्यम से प्रकट किए जाएँगे। वे निष्कासन की वस्तुएँ बन जाएँगे। ये लोग जीतने के कार्य के दौरान प्रकट किए जाएँगे, उनमें पूर्ण बनाए जाने के लिए कोई मूल्य नहीं है। जो पूर्ण बनाए गए हैं, वे पूरी तरह से परमेश्वर द्वारा प्राप्त कर लिए गए हैं, और पतरस की तरह परमेश्वर को प्रेम करने में सक्षम हैं। जिन लोगों को जीत लिया गया है उनके पास सहज प्रेम नहीं है, बल्कि केवल निष्क्रिय प्रेम है, और वे परमेश्वर से प्रेम करने के लिए बाध्य हैं। सहज प्रेम व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से प्राप्त समझ के माध्यम से विकसित होता है। यह प्रेम एक व्यक्ति के दिल में भरा होता है और वह उन्हें स्वैच्छिक रूप से परमेश्वर के प्रति समर्पित करवाता है; परमेश्वर के वचन उनकी नींव बन जाते हैं और वे परमेश्वर के लिए कष्ट सहने में समर्थ हो जाते हैं। निस्सन्देह, ये ऐसी चीज़ें हैं जो उसके पास होती हैं जिसे परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाया जा चुका है। यदि तुम केवल जीते जाने के लिए प्रयास करते हो, तो तुम परमेश्वर के लिए गवाही नहीं दे सकते हो; यदि परमेश्वर केवल लोगों को जीतने के माध्यम से ही उद्धार का लक्ष्य प्राप्त करता है, तो सेवा करने वालों का चरण काम ख़त्म कर देगा। लेकिन, लोगों को जीतना परमेश्वर का अंतिम लक्ष्य नहीं है, उसका अंतिम लक्ष्य लोगों को पूर्ण बनाना है। इसलिए बजाय यह कहने के कि यह चरण जीतने का कार्य है, यह कहो कि यह पूर्ण बनाने और निष्कासन करने का कार्य है। कुछ लोगों को पूरी तरह से नहीं जीता गया है, और उन्हें जीतने के दौरान, लोगों के एक समूह को पूर्ण बनाया जाएगा। कार्य के इन दोनों खंडों को एक साथ किया जाता है। काम की इतनी लंबी अवधि में भी लोग मार्ग से विचलित नहीं हुए हैं और यह दर्शाता है कि जीतने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है—यह जीत लिए जाने का एक तथ्य है। शुद्धिकरण जीते जाने के वास्ते नहीं हैं, बल्कि वे पूर्ण बनाए जाने के वास्ते हैं। शुद्धिकरणों के बिना, लोगों को पूर्ण नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए शुद्धिकरण बहुत मूल्यवान हैं! आज लोगों के एक समूह को पूर्ण बनाया जा रहा और प्राप्त किया जा रहा है। पहले उल्लेख किए गए सभी दस आशीषों का लक्ष्य वे लोग थे जिन्हें पूर्ण बनाया जा चुका है। धरती पर उनकी छवि बदलने के बारे में हर चीज उन पर लक्षित है जिन्हें पूर्ण बनाया जा चुका है। जिन लोगों को पूर्ण नहीं बनाया गया है वे परमेश्वर के वादों को पाने के योग्य नहीं हैं।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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