परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे" | अंश 504

यदि लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, और परमेश्वर के वचनों का अनुभव करते हैं, ऐसे हृदय के साथ जिसमें परमेश्वर के प्रति श्रद्धा होती है, तो ऐसे ही लोगों में परमेश्वर का उद्धार और उसका प्रेम देखा जा सकता है। ये लोग परमेश्वर की गवाही देने के योग्य होते हैं, वे सत्य को जीते हैं, और जो वे गवाही देते हैं वह भी सत्य ही होता है, परमेश्वर क्या है और उसका स्वभाव कैसा है, और वे परमेश्वर के प्रेम के मध्य रहते हैं और परमेश्वर का प्रेम उन्होंने देखा है। यदि लोग परमेश्वर से प्रेम करने की इच्छा रखते हैं, तो उन्हें परमेश्वर की सुन्दरता का स्वाद लेना चाहिये, और परमेश्वर की सुन्दरता को देखना चाहिये; तब जाकर उनके भीतर परमेश्वर से प्रेम करने वाला हृदय जाग सकता है, ऐसा हृदय जो परमेश्वर के लिए समर्पित हो सके। परमेश्वर लोगों को अपने वचनों और अभिव्यक्ति, कल्पना के माध्यम से स्वयं से प्रेम नहीं कराता है, या उन्हेंमजबूर नहीं करता है के वे उससे प्रेम करें। बल्कि वह उन्हें उनकी मर्जी से उसे प्रेम करने देता है और वह उन्हें अपने कार्यों और कथनों के ज़रिए अपनी सुन्दरता दिखाता है, जिसके बाद लोगों के भीतर परमेश्वर का प्रेम पैदा होता है। केवल इसी प्रकार से लोग परमेश्वर की सच्ची गवाही दे सकते हैं। लोग परमेश्वर को केवल इसलिए प्रेम नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें दूसरों के द्वारा ऐसे करने के लिए कहा गया है, न ही यह कोई क्षणिक भावनात्मक आवेग है। वे परमेश्वर को प्रेम इसलिए करते हैं क्योंकि उन्होंने उसकी सुन्दरता को देखा है, उन्होंने उसमें और भी बहुत कुछ देखा है जो लोगों के प्रेम के काबिल है, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के उद्धार, बुद्धि और अद्भुत कार्यों को देखा है—और परिणामस्वरूप, वे वास्तव में परमेश्वर का यशगान करते हैं, और उसके लिए वास्तव में तरसते हैं, और उनमें इस प्रकार का जुनून उत्पन्न होता है कि वे परमेश्वर को प्राप्त किए बिना जीवित नहीं रह सकते हैं। जो लोग वाकई परमेश्वर की गवाही देते हैं वे इसलिए उसकी एक ज़बर्दस्त गवाही दे सकते हैं क्योंकि उनकी गवाही सच्चे ज्ञान और परमेश्वर के लिए सच्ची लालसा की नींव पर आधारित होती है। यह एक भावनात्मक आवेग के अनुसार नहीं है, बल्कि परमेश्वर के ज्ञान और स्वभाव पर आधारित है। क्योंकि वे परमेश्वर को जान पाए हैं, वे यह महसूस करते हैं कि उन्हें निश्चय ही परमेश्वर की गवाही देनी चाहिए, और जो परमेश्वर के लिए तरसते हैं वे भी परमेश्वर के बारे में जानें, और परमेश्वर की सुन्दरता एवं उसकी वास्तविकता से परिचित हों। परमेश्वर के प्रति लोगों के प्रेम के समान ही उनकी गवाही भी सहज स्फूर्त होती है, यह वास्तविक होती है, और उसकी महत्ता एवं मूल्य असली होता है। यह निष्क्रिय या खोखला और अर्थहीन नहीं होता। जो लोग परमेश्वर से वास्तव में प्रेम करते हैं उनके जीवन में बहुमूल्य और सार्थक होने और केवल उनका परमेश्वर पर सच्चा विश्वास करने का कारण यह है कि ये लोग परमेश्वर की ज्योति में रहते हैं, वे परमेश्वर के कार्य और प्रबंधन के लिए जीवित रह सकते हैं; वे अंधकार में नहीं रहते, बल्कि ज्योति में जीवित रहते हैं; वे अर्थहीन जीवन नहीं जीते हैं, बल्कि परमेश्वर के द्वारा आशीषित जीवन जीते हैं। केवल वही लोग जो परमेश्वर को प्रेम करते हैं परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं, वे ही परमेश्वर की साक्षी हैं और परमेश्वर के द्वारा आशीषित हैं और केवल वही परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को प्राप्त कर सकते हैं। जो परमेश्वर को प्रेम करते हैं वे परमेश्वर के करीबी होते हैं, वे परमेश्वर के प्रेमी लोग हैं और वे ही परमेश्वर के साथ उसकी आशीषों का आनन्द ले सकते हैं। केवल ऐसेही लोग अनन्त शाश्वत रहेंगे और वे ही हमेशा परमेश्वर की देखभाल और सुरक्षा में रहेंगे। परमेश्वर लोगों के द्वारा प्रेम करने के लिए है, और वह सभी लोगों के प्रेम के योग्य है, परन्तु सभी लोग परमेश्वर को प्रेम करनेके काबिल नहीं हैं, और सभी लोग उसकी गवाही नहीं दे सकते हैं और परमेश्वर के साथ सामर्थ्य को बनाए नहीं रखे रह सकते। क्योंकि वे परमेश्वर की गवाही देने के योग्य हैं और परमेश्वर के कार्यों के लिये अपने सभी प्रयास समर्पित कर सकते हैं, जो सच में परमेश्वर को प्रेम करते हैं वे कहीं भी स्वर्ग के नीचे बिना किसी के विरोध के आ-जा सकते हैं। और वे पृथ्वी पर सामर्थ्य धारण करते हैं और परमेश्वर के सभी लोगों पर शासन करते हैं। ये लोग संसार के अलग-अलग भागों से एक साथ आते हैं, वे भिन्न-भिन्न भाषाएं बोलते और उनकी त्वचा का रंग अलग-अलग होता है, परन्तु उनके अस्तित्व की सार्थकता समान होती है, उन सबमें परमेश्वर को प्रेम करने वाला हृदय होता है, उन सबकी एक ही गवाही होती है और एक ही संकल्प और इच्छा होती है। जो परमेश्वर को प्रेम करते हैं वे संसार में कहीं भी स्वतंत्रता से आ-जा सकते हैं, जो परमेश्वर की गवाही देते हैं वे सम्पूर्ण ब्रह्माण्डमें यात्रा कर सकते हैं। ये परमेश्वर के अत्यधिक प्रेम के पात्र होते है, ये परमेश्वर के द्वारा आशीषित लोग हैं, और वे हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

केवल वही लोग परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो उसे जानते हैं

मज़बूत होती गवाही उनकी जो बनते गवाह परमेश्वर के क्योंकि टिकी होती है गवाही उनके सच्चे ज्ञान और ईश्वर के लिए तड़प पर। गवाही परमेश्वर की नहीं देते वो भावों में बहकर, देते ईश्वर और उसके स्वभाव के अपने ज्ञान से। क्योंकि वे जान गए हैं परमेश्वर को, लगता उन्हें गवाह बनें वो। वो जान लेंं ईश्वर को, जो तड़पेंं जानने को, जानें उसकी वास्तविकता और मनोहरता को।

जैसे लोगों में भरा प्यार परमेश्वर का, गवाही उनकी नहीं कोई मजबूरी, यही है असली और मोल है इसका, और है सच्चा महत्त्व इसका। ना है निष्क्रिय, ना ही खोखला, ना ही है ये बेमतलब-सा। मज़बूत होती गवाही उनकी जो बनते गवाह परमेश्वर के क्योंकि टिकी होती है गवाही उनके सच्चे ज्ञान और ईश्वर के लिए तड़प पर। गवाही परमेश्वर की नहीं देते वो भावों में बहकर, देते ईश्वर और उसके स्वभाव के अपने ज्ञान से।

जो सच्‍चा प्यार करते परमेश्वर से ज़्यादा मोल बस उन्हीं के जीवन का, वही करते असल में यकीं परमेश्वर में, क्योंकि जीते हैं वो प्रकाश में ईश्वर के।

जी सकते हैं वो ईश्वर के काम की खातिर और ईश्वर के प्रबंधन के लिए। बेमतलब नहीं रह जाती ज़िंदगी उनकी, मिल जाता ईश्‍वर का आशीष जीवन में। नहीं कटती ज़िंदगी उनकी अंधेरे में, रहते हैं वो प्रकाश में। मज़बूत होती गवाही उनकी जो बनते गवाह परमेश्वर के क्योंकि टिकी होती है गवाही उनके सच्चे ज्ञान और ईश्वर के लिए तड़प पर। गवाही परमेश्वर की नहीं देते वो भावों में बहकर, देते ईश्वर और उसके स्वभाव के अपने ज्ञान से।

नहीं कटती ज़िंदगी उनकी अंधेरे में, रहते हैं वो प्रकाश में। मज़बूत होती गवाही उनकी जो बनते गवाह परमेश्वर के क्योंकि टिकी होती है गवाही उनके सच्चे ज्ञान और ईश्वर के लिए तड़प पर। गवाही परमेश्वर की नहीं देते वो भावों में बहकर, देते ईश्वर और उसके स्वभाव के अपने ज्ञान से।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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