परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे" | अंश 503

जैसे ही परमेश्वर लोगों के भीतर का जीवन बन जाता है, तो वे परमेश्वर को छोड़ने में असमर्थ बन जाते हैं। क्या यह परमेश्वर का कार्य नहीं है? इससे बड़ी कोई गवाही नहीं है! परमेश्वर ने एक निश्चिति बिन्दु तक कार्य किया है; उसने लोगों को सेवा के लिये कहा है, और ताड़ना ग्रहण करो या मर जाओ और लोग उससे दूर नहीं गए हैं, जो यह दिखाता है कि ये लोग परमेश्वर के द्वारा जीत लिए गए हैं। जिन में सत्य है वे ऐसे लोग हैं जिनके पास असली अनुभव है और वे अपनी गवाही में, परमेश्वर के लिये दृढ़ता से खड़े रह सकते हैं, बिना कभी पीछे हटे और जो परमेश्वर के साथ प्रेम रखते हैं और लोगों के साथ भी सामान्य सम्बन्ध रखतेहैं, जबउनके साथ कुछघटनाएं घटती हैं, तोवे पूरी तरह से परमेश्वर का आज्ञापालन कर सकते हैं और मृत्यु तक उसका आज्ञापालन करने में सक्षम होतेहैं। वास्तविक जीवन में तुम्हारा व्यवहार और प्रकाशन परमेश्वर के लिए गवाही है, वे मनुष्य के द्वारा जीए जाते हैं और परमेश्वर के लिए गवाही ठहरते हैं, और वास्वत में यही परमेश्वर के प्रेम का आनन्द लेना है; जब इस बिन्दु तक तुम्हारा अनुभव होता है, तो उसमें एक प्रभाव की उपलब्धि हो चुकी होती है। तुम असली जीवन जी रहे होते हैं, और तुम्हारे प्रत्येक कार्य को अन्य लोग प्रशंसा से देखते हैं, तुम्हारा बाह्य रूप साधारण होता है परन्तु तुम अत्यंत धार्मिकता का जीवन जीते हो, और जब तुम परमेश्वर के वचन दूसरों तक पहुंचाते हो तो तुम्हें परमेश्वर मार्गदर्शन और प्रबुद्धता प्रदान करता है। तुम अपने शब्दों के द्वारा परमेश्वर की इच्छा को व्यक्त करते हो और वास्तविकता को सम्प्रेषित करते हो, और आत्मा की सेवा को अच्छी तरह समझते हो। तुम खुलकर बोलते हो, तुम सभ्य और ईमानदार हो, झगड़ालू नहीं और शालीन हो, परमेश्वर के प्रबंधों को मानते हो और जब तुम पर चीज़ें आ पड‌ती हैं तो तुम अपनी गवाही में दृढ़ रहते हो, चाहे कुछ भी हो जाए तुम जिसके साथ भी व्यवहार कर रहे होते हो शांत और शांतचित्त बने रहते हो। इस तरह के व्यक्ति ने परमेश्वर के प्रेम को देखा है। कुछ लोग अभी भी युवा हैं, परन्तु वे मध्यम आयु के समान व्यवहार करते हैं; वे परिपक्व होते हैं, सत्य को धारण किए रहते हैं और दूसरों के द्वारा प्रशंसा प्राप्त करते हैं—और यह वे लोग हैं जो गवाही देते हैं और परमेश्वर की अभिव्यक्ति हैं। मतलब यह कि, जब वे एक निश्चित बिन्दु तक अनुभव कर चुके होते हैं, अपने अंदर वे परमेश्वर के लिए एक अन्तर्दृष्टि रखते हैं और इसलिए वे अपने बाहरी स्वभाव में स्थिर हो जायेंगे। बहुत से लोग सत्य को व्यवहार में नहीं लाते हैं और अपनी गवाही में दृढ़ नहीं बने रहते हैं। इस प्रकार के लोगों में परमेश्वर का प्रेम नहीं होता है या उसकी गवाही नहीं होती है, और ऐसे लोगों को ही परमेश्वर नापसंद करता है। वे परमेश्वर के वचन को खाते और पीते हैं, परन्तु जो वे व्यक्त करते हैं वह शैतान की बातें होती हैं और वे परमेश्वर के वचन को शैतान के द्वारा तिरस्कृत करने देते हैं। ऐसे लोगों में परमेश्वर के प्रेम का कोई चिन्ह नहीं पाया जाता है; जो कुछ वे व्यक्त करते हैं वह शैतान ही होता है। यदि परमेश्वर के सामने तुम्हारा हृदय सदैव शांत रहता है और तुम हमेशा लोगों एंव अपने आसपास की चीज़ों पर और जो कुछ तुम्हारे आसपास घट रहा होता है, उस पर ध्यान देते हो, और यदि तुम परमेश्वर के बोझ के प्रति सचेत रहते हो, और तुम्हारा हृदय हमेशा परमेश्वर के प्रति श्रद्धा रखता है, तो परमेश्वर तुम्हें भीतर से अक्सर प्रबुद्ध करता रहेगा। कलीसिया में ऐसे लोग होते हैं जो “पर्यवेक्षक” होते हैं, वे दूसरों की असफलताओं पर नज़र रखते हैं, और उनकी नकल करके अनुकरण करने लगते हैं। वे फर्क नहीं कर पाते हैं, वे पाप से घृणा नहीं करते, और वे शैतान की बातों से घृणा या निराश महसूस नहीं करते हैं। ऐसे लोग शैतान की बातों से भरे होते हैं, और वे पूरी तरह से परमेश्वर के द्वारा त्याग दिए जाएंगे। तुम्हारा हृदय परमेश्वर के प्रति सदा श्रद्धावान रहना चाहिये, तुम्हें अपने शब्दों और कार्यों में संयत होना चाहिये, और परमेश्वर का विरोध करने या उसे परेशान करने की बात नहीं सोचनी चाहिये। तुम्हें कभी भी बिना कोई मूल्य चुकाए अपने अंदर परमेश्वर के कार्य के लिये तैयार नहीं होना चाहिये, या ऐसी कामना नहीं होनी चाहिये कि तुमने जो कुछ कठिनाइयाँ झेली हैं और जो कुछ अभ्यास मे लाए हो वो नगण्य हो जाए। तुम्हें परमेश्वर को प्रेम करने के लिये आगामी पथ पर और कड़ा परिश्रम करने के लिये तैयार रहना चाहिये। ऐसे ही लोगों की दूरदृष्टि उनकी नींव होती है। ऐसे ही लोग प्रगति की खोज करते हैं।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

सच्चाई से जी कर ही तू दे सकता है गवाही

सत्य है जिनमें, वे ही ऐसे लोग हैं जो अपने अनुभव में, मज़बूती से दे सकते हैं गवाही, खड़े रह सकते हैं डटकर, परमेश्वर के पक्ष में, कभी हटते नहीं पीछे, मौत आने तक मानते हैं हुक्म परमेश्वर का, बनाए रखते हैं सामान्य रिश्ता उनसे, जो प्रेम करते हैं परमेश्वर से। असल ज़िंदगी में तेरा अमल और अभिव्यक्ति हैं गवाही परमेश्वर की। जिसे इंसान को चाहिये जीना। यही है असल में परमेश्वर के प्यार का आनन्द लेना। जब पहुँचेगा तू यहाँ, तो हासिल होगा उपयुक्त नतीजा।

तेरे पास है असल बर्ताव सत्य के अमल का। तेरा हर काम सराहा जाता है दूसरों द्वारा। सादा है तेरा बाहरी रूप मगर, जीता है धर्मपरायणता का जीवन तू। परमेश्वर करता है प्रबुद्ध तुझे, जब साझा करता है परमेश्वर के वचनों को तू।

अपने शब्दों से इच्छा परमेश्वर की तू बोल पाता है, सच्चाई बोलता है, आत्मा में सेवा को समझता है, अपनी ज़बान में तू खरा है, शालीन है, सरल है, अशांत नहीं है, परमेश्वर की योजना का पालन कर सकता है, अपनी गवाही में डटा रह सकता है। जब आ जाती है कोई बात तुझ पर, तो तू शांत-स्थिर रहता है। परमेश्वर के प्यार को ऐसे ही इंसान ने देखा है। असल ज़िंदगी में तेरा अमल और अभिव्यक्ति हैं गवाही परमेश्वर की, जिसे इंसान को चाहिये जीना। यही है असल में परमेश्वर के प्यार का आनन्द लेना। जब पहुँचेगा तू यहाँ, तो हासिल होगा उपयुक्त नतीजा।

‘मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ’ से

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