परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है" | अंश 498

लोगों की कौन सी आंतरिक स्थिति पर यह सब परीक्षणों को लक्ष्य किया जाता है? ये लोगों के विद्रोही स्वभाव को लक्षित करती हैं जो परमेश्वर को संतुष्ट करने के अयोग्य है। लोगों के भीतर बहुत सी अशुद्ध बातें हैं, और बहुत सा पांखड भरा हुआ है, और इसलिए परमेश्वर उन्हें परीक्षाओं के आधीन करता है ताकि उन्हें शुद्ध बना सके। परन्तु यदि आज, तू उसे संतुष्ट करने के योग्य है, तो भविष्य की परीक्षाएं तुझे सिद्ध बनाने के लिए होंगी। यदि तू उसे आज संतुष्ट करने में असमर्थ है, तो भविष्य की परीक्षाएं तुझे लुभाएंगी, और तू अनजाने में नीचे गिर जाएगा, और उस समय तू स्वयं की सहायता करने में असमर्थ होगा, क्योंकि तू परमेश्वर के कार्य के साथ बराबरी नहीं कर सकता है और तुझमें वास्तविक कद-काठी नहीं होता है। इसलिए, यदि तू भविष्य में दृढ़ बने रहने की इच्छा रखता है, तो परमेश्वर को संतुष्ट करना और अंत तक उसका अनुसरण करना बेहतर होगा, आज तुझे एक दृढ़ आधार बनाना होगा, तुझे सत्य को हर बात के अभ्यास में लाकर, और उसकी इच्छा को ध्यान में रखकर परमेश्वर को संतुष्ट करना होगा। यदि तू हमेशा इस प्रकार का अभ्यास करे, तो तेरे भीतर एक आधार बनेगा, और परमेश्वर तेरे भीतर हृदय को प्रेरणा देगा जो परमेश्वर से प्रेम करेगा, और वह तुझे विश्वास देगा। एक दिन, जब एक परीक्षा वास्तव में तेरे ऊपर आएगी, तुझे वास्तव में कुछ पीड़ा का अनुभव हो सकता है, और तू एक बिन्दु तक व्यथित महसूस कर सकता है और तीव्र पीड़ा सह सकता है, जैसे कि आप मर रहे हो—परन्तु परमेश्वर के लिए तेरा प्रेम नहीं बदलेगा और यह अधिक गहरा हो जाएगा। यही परमेश्वर की आशीषें हैं। यदि तू आज परमेश्वर द्वारा कही और की जाने वाली सभी बातों को आज्ञाकारी हृदय से स्वीकारने के योग्य है, तो तू निश्चय ही परमेश्वर के द्वारा आशीषित होगा और इसलिए तू परमेश्वर के द्वारा आशीषित व्यक्ति बन जाएगा और उसकी प्रतिज्ञाओं को प्राप्त करेगा। यदि आज, तू अभ्यास न करे, जब एक दिन तेरे ऊपर परीक्षाएं आएंगी तो तू बिना विश्वास या बिना प्रेम के हृदय वाला होगा, और उस समय परीक्षाएं प्रलोभन बन जाएंगी; तू शैतान के प्रलोभनों के मध्य में फंस जाएगा और किसी भी प्रकार से बच निकलने का रास्ता तेरे पास नहीं होगा। आज, तू छोटी सी परीक्षा तेरे ऊपर आने से दृढ़ खड़ा रह सकता है, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि एक दिन जब बड़ी परीक्षाएँ तेरे ऊपर आएँगी तब भी तू दृढ़ खड़ा रह पाए। कुछ लोग अभिमानी होते हैं, और सोचते हैं कि वे पहले से ही लगभग पूर्ण हो गए हैं। यदि तू ऐसे समय में गहराई से नहीं सोचेगा और उदासीन ही बने रहेगा, तो तू खतरे में होगा। आज, परमेश्वर महान परीक्षणों वाला कार्य नहीं करता है, जो सभी दिखावे में अच्छा दिखाई देता है, परन्तु जब परमेश्वर तेरी परीक्षा लेता है, तू देखेगा कि तेरे भीतर बहुत सारी कमियां मौजूद हैं, क्योंकि तेरी कद-काठी बहुत ही छोटी है, और तू बड़ी परीक्षाओं को सहने के योग्य नहीं है। यदि आज, तू आगे नहीं बढेगा, यदि तू एक ही स्थान पर खड़ा रहेगा, तो जब तेज़ हवा बहेगी तो तू गिर जाएगा। तुम लोगों को अकसर देखना चाहिए कि तुम लोगों की कद-काठी कितनी छोटी है; केवल इसी प्रकार से तुम लोग विकास कर पाओगे। यदि यह केवल परीक्षण के दौरान तू देखता है कि तेरी कद-काठी बहुत ही छोटी है, कि तेरी इच्छाशक्ति बहुत ही कमज़ोर है, कि तेरे भीतर बहुत ही कम चीज वास्तविक है, और कि तू परमेश्वर की इच्छा के लिए अपर्याप्त है—और यदि तू केवल इन बातों को महसूस करेगा, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

यदि तू परमेश्वर के स्वभाव को नहीं जानता है, तो तू इन परीक्षणों के दौरान निश्चित तौर पर गिरेगा, क्योंकि तू इस बात से अनजान है कि परमेश्वर लोगों को पूर्ण कैसे बनाता है, और किस माध्यम से वह उन्हें पूर्ण बनाता है, और जब परमेश्वर की परीक्षाएं तेरे ऊपर आएंगी और वे तेरी धारणाओं से मेल नहीं खाएंगी, तो तू दृढ़ खड़ा नहीं रह पाएगा। परमेश्वर का सच्चा प्रेम उसके सम्पूर्ण स्वभाव में निहित है, और जब परमेश्वर का सम्पूर्ण स्वभाव तेरे ऊपर प्रकट होता है, तो यह तेरे देह पर क्या लेकर आता है? जब परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव तुझे दिखाया जाता है, तेरा देह अनिवार्य रूप से अत्यधिक कष्ट सहेगा। यदि तू इस पीड़ा को नहीं सहेगा, तो तुझे परमेश्वर के द्वारा पूर्ण नहीं बनाया जा सकता है, न ही तू परमेश्वर को सच्चा प्रेम अर्पित कर पाएगा। यदि परमेश्वर तुझे पूर्ण बनाता है, तो वह तुझे निश्चय ही अपना सम्पूर्ण स्वभाव दिखाएगा। सृष्टि की रचना के बाद से आज तक, परमेश्वर ने अपने सम्पूर्ण स्वभाव को कभी भी नहीं दिखाया है—परन्तु अंतिम दिनों में वह इसे उस समूह के लोगों को प्रकट करता है जिन्हें उसने पूर्व निर्धारित किया है और चुना है, और मनुष्यों को पूर्ण बनाने के द्वारा वह अपने स्वभाव को खुला प्रकट करता है, जिसके माध्यम से वह एक समूह के लोगों को पूर्ण बनाता है। लोगों के लिए ऐसा है परमेश्वर का सच्चा प्रेम। उनको परमेश्वर के सच्चे प्रेम को अनुभव करने के लिए उन्हे अत्यधिक पीड़ा को सहना और एक अधिकतम मूल्य चुकाना आवश्यक है। केवल इसके बाद ही वे परमेश्वर के द्वारा प्राप्त किए जाएंगे और परमेश्वर को अपना प्रेम वापस चुका पाएँगे और केवल इस के बाद ही परमेश्वर का हृदय संतुष्ट होगा। यदि लोग परमेश्वर के द्वारा पूर्ण बनाए जाने की इच्छा रखते हैं और यदि वे उसकी इच्छा को पूरा करना चाहते हैं और पूरी तरह से परमेश्वर को प्रेम करने के लिए अपना हृदय दे देते हैं, तो उन्हें मृत्यु से भी भयंकर कष्ट सहने के लिए अत्यधिक कष्ट और कई परिस्थितियों की पीड़ाओं से होकर गुजरना होगा, अंततः उन्हें परमेश्वर को अपना वास्तविक हृदय देना ही पड़ेगा। कोई व्यक्ति परमेश्वर से वास्तव में प्रेम करता है या नहीं यह कठिनाई और शुद्धिकरण के समय प्रकट होता है। परमेश्वर लोगों के प्रेम को शुद्ध करता और यह केवल कठिनाई और शुद्धिकरण के मध्य ही प्राप्त किया जा सकता है।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

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