परमेश्वर के दैनिक वचन | "सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है" | अंश 474

अधिकांश लोग अपनी भविष्य की नियति के लिए, या अल्पकालिक आनन्द के लिए परमेश्वर में विश्वास करते हैं। क्योंकि ऐसे लोग जो किसी व्यवहार से होकर नहीं गुज़रे हैं, परमेश्वर में उनका विश्वास स्वर्ग में प्रवेश करने के लिए, एवं प्रतिफल अर्जित करने के लिए होता है। यह सिद्ध किए जाने के लिए, या परमेश्वर के किसी प्राणी के कर्तव्य को निभाने के लिए नहीं होता है। कहने का तात्पर्य है कि अधिकांश लोग अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए, या अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए परमेश्वर में विश्वास नहीं करते हैं। अर्थपूर्ण ज़िन्दगियों को जीने के लिए बिरले ही लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, और न ही ऐसे लोग हैं जो विश्वास करते हैं कि जबसे मनुष्य जीवित है, उन्हें परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए क्योंकि यह स्वर्ग की व्यवस्था है और पृथ्वी का सिद्धान्त है कि ऐसा करें, और यह मनुष्य का स्वाभाविक पेशा है। इस रीति से, यद्यपि विभिन्न लोग अपने स्वयं के लक्ष्यों का अनुसरण करते हैं, फिर भी इसके पीछे उनके अनुसरण एवं प्रेरणा का उद्देश्य सब एक जैसा है, और, इससे अधिक क्या, उनमें से अधिकांश लोगों के लिए उनकी आराधना के विषय लगभग एक समान हैं। पिछले कई हज़ार वर्षों से, बहुत से विश्वासी मर चुके हैं, और बहुत से लोग मर चुके हैं और बहुत से लोगों ने नया जन्म प्राप्त किया है। ये बस एक या दो लोग ही नहीं हैं जो परमेश्वर की खोज करते हैं, न ही एक या दो हज़ार हैं, फिर भी इन लोगों में से अधिकांश लोगों का अनुसरण उनकी स्वयं की भावी संभावनाओं या भविष्य के लिए उनकी महिमामय आशाओं के खातिर होती है। ऐसे लोग जो मसीह के लिए समर्पित हैं वे कभी कभार ही ऐसा करते हैं। अब भी अनेक भक्त विश्वासी अपने स्वयं के जालों में फंसकर मर चुके हैं, और, इसके अतिरिक्त, उन लोगों की संख्या जिन्होंने सफलता हासिल की है वह महत्वहीन रूप से कम है। आज के दिन तक, वे कारण कि क्यों लोग असफल होते हैं, या उनकी सफलता के रहस्य, अभी भी अज्ञात हैं। ऐसे लोग जो मसीह को खोजते खोजते मानसिक रूप से बोझिल हो गए हैं उन्होंने अभी भी त्वरित अन्तःदृष्टि के अपने पल को प्राप्त नहीं किया है, वे इन रहस्यों के तल तक नहीं पहुंच पाए हैं, क्योंकि वे तो महज जानते ही नहीं हैं। यद्यपि वे अपने अनुसरण में कष्टसाध्य प्रयास तो करते हैं, फिर भी ऐसा पथ जिस पर वे चलते हैं वह असफलता का पथ है जिस पर उनके पूर्वजों के द्वारा चला गया था, और सफलता का एक पथ नहीं है। इस रीति से, इसकी परवाह किए बगैर कि वे किस प्रकार खोज करते हैं, क्या वे उस पथ पर नहीं चलते हैं जो अंधकार की ओर ले जाता है? जो वे अर्जित करते हैं क्या वह कड़वा फल नहीं है? यह भविष्यवाणी करना काफी कठिन है कि ऐसे लोग जो उन लोगों का अनुकरण करते हैं जो बीते समयों में सफल हुए थे वे अन्ततः सौभाग्य की ओर आएंगे या आपदा की ओर। तो उन लोगों के लिए वे विचित्र लोग कितने बदतर हैं जो ऐसे लोगों के पदचिन्हों के पीछे पीछे चलने के द्वारा खोज करते हैं जो असफल हो गए थे? क्या वे असफलता के एक बहुत बड़े अवसर की स्थिति में नहीं खड़े हैं? वह पथ जिस पर वे चलते हैं उसका क्या मूल्य है? क्या वे अपना समय बर्बाद नहीं कर रहे हैं? इस बात पर विचार किए बिना कि लोग अपने अनुसरण में सफल होते हैं या असफल, संक्षेप में, इसका एक कारण है कि वे ऐसा क्यों करते हैं, और स्थिति यह नहीं है कि जैसा उनको अच्छा लगता है उसके अनुसार खोज करने के द्वारा उनकी सफलता या असफलता का निर्धारण किया जाता है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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