परमेश्वर के दैनिक वचन : जीवन में प्रवेश | अंश 471

अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य के लिए असाधारण आत्मविश्वास की आवश्यकता है, अय्यूब से भी अधिक आत्मविश्वास की। आत्मविश्वास के बिना लोग अनुभव प्राप्त करते रहने में सक्षम नहीं होंगे और न ही वे परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए जाने में सक्षम होंगे। जब बड़े परीक्षणों का दिन आएगा, तो कई लोग कलीसियाओं को छोड़ देंगे—कुछ यहाँ, कुछ वहाँ। कुछ ऐसे लोग होंगे, जो पिछले दिनों में अपनी खोज में काफी अच्छा कर रहे थे और यह स्पष्ट नहीं होगा कि वे अब विश्वास क्यों नहीं करते। बहुत-सी चीजें होंगी, जिन्हें तुम नहीं समझ पाओगे, और परमेश्वर कोई चिह्न या चमत्कार प्रकट नहीं करेगा, न कुछ अलौकिक ही करेगा। यह इस बात को देखने के लिए है कि क्या तुम दृढ़ खड़े रह सकते हो—परमेश्वर लोगों को शुद्ध करने के लिए तथ्यों का उपयोग करता है। तुमने अभी तक बहुत ज्यादा कष्ट नहीं भोगे हैं। भविष्य में जब बड़े परीक्षण आएँगे, तो कुछ जगहों पर कलीसिया में से हर एक व्यक्ति चला जाएगा, और जिन लोगों के साथ तुम्हारा अच्छा संबंध रहा था, वे छोड़ जाएँगे और अपना विश्वास त्याग देंगे। क्या तुम तब मजबूती से खड़े रह पाओगे? अभी तक तुमने जिन परीक्षणों का सामना किया है, वे मामूली परीक्षण रहे हैं, और तुम शायद उनका मुश्किल से सामना कर पाए हो। इस चरण में केवल वचनों के माध्यम से शुद्धिकरण और पूर्ण बनाया जाना शामिल है। अगले चरण में, तुम्हें शुद्ध करने के लिए तुम पर तथ्य आएँगे, और तब तुम संकट के बीच में होगे। एक बार जब यह वास्तव में गंभीर हो जाएगा, तो परमेश्वर तुम्हें जल्दी करने और छोड़ने की सलाह देगा, और धार्मिक लोग तुम्हें अपने साथ चलने के लिए ललचाने का प्रयास करेंगे। यह, यह देखने के लिए है कि क्या तुम मार्ग पर चलते रह सकते हो, और ये सब चीज़ें परीक्षण हैं। वर्तमान परीक्षण मामूली हैं, लेकिन एक दिन आएगा, जब कुछ घर ऐसे होंगे, जहाँ माता-पिता अब और विश्वास नहीं करेंगे और कुछ घर ऐसे होंगे, जहाँ बच्चे अब और विश्वास नहीं करेंगे। क्या तुम जारी रख पाओगे? जितना आगे तुम जाओगे, तुम्हारे परीक्षण उतने बड़े होते जाएँगे। परमेश्वर लोगों की आवश्यकताओं और उनकी कद-काठी के अनुसार उन्हें शुद्ध करने का अपना कार्य करता है। परमेश्वर द्वारा मनुष्य को पूर्ण बनाने के चरण के दौरान यह असंभव है कि लोगों की संख्या बढ़ती रहेगी—वह केवल कम होगी। केवल इन्हीं शुद्धिकरणों के माध्यम से लोगों को पूर्ण बनाया जा सकता है। निपटा जाना, अनुशासित किया जाना, परीक्षण किया जाना, ताड़ना दिया जाना, श्राप दिया जाना—क्या तुम यह सब सहन कर सकते हो? जब तुम किसी ऐसी कलीसिया को देखते हो, जो विशेष रूप से अच्छी स्थिति में है, जिसमें बहनें और भाई सभी महान ऊर्जा के साथ खोज करते हैं, तो तुम स्वयं को उत्साहित महसूस करते हो। जब वह दिन आता है कि वे सब चले गए होते हैं, उनमें से कुछ अब और विश्वास नहीं करते, कुछ व्यवसाय करने या विवाह करने के लिए चले गए होते हैं और कुछ धर्म में शामिल हो गए होते हैं, तब भी क्या तुम मजबूती से खड़े रह पाओगे? क्या तुम अंदर से अप्रभावित रह पाओगे? परमेश्वर द्वारा मनुष्य को पूर्ण बनाना इतनी आसान बात नहीं है! वह लोगों को शुद्ध करने के लिए कई चीजों का उपयोग करता है। लोग इन्हें तरीकों के रूप में देखते हैं, लेकिन परमेश्वर के मूल इरादे में ये तरीके बिलकुल भी नहीं हैं, बल्कि तथ्य हैं। अंत में, जब वह लोगों को एक निश्चित बिंदु तक शुद्ध कर लेगा और उनमें कोई शिकायतें नहीं रहेंगी, तो उसके कार्य का यह चरण पूरा हो जाएगा। पवित्र आत्मा का महान कार्य तुम्हें पूर्ण बनाना है, और जब वह कार्य नहीं करता और स्वयं को छिपाता है, तो यह और भी ज्यादा तुम्हें पूर्ण बनाने के उद्देश्य से होता है, और विशेष रूप से इस तरह यह देखा जा सकता है कि क्या लोगों में परमेश्वर के लिए प्यार है, क्या उनका परमेश्वर में सच्चा विश्वास है। जब परमेश्वर स्पष्ट रूप से बोलता है, तो तुम्हें खोज करने की कोई आवश्यकता नहीं होती; केवल जब वह छिपा होता है, तभी तुम्हें खोजने और अपना रास्ता महसूस करने की आवश्यकता होती है। तुम्हें एक सृजित प्राणी का कर्तव्य पूरा करने में सक्षम होना चाहिए, और चाहे तुम्हारा भावी परिणाम और तुम्हारी मंजिल कुछ भी हो, तुम्हें अपने आजीवन ज्ञान और परमेश्वर के प्रति प्रेम का अनुसरण कर पाने में सक्षम होना चाहिए, और चाहे परमेश्वर तुम्हारे साथ कैसा भी व्यवहार करे, तुम्हें शिकायत करने से बचने में सक्षम होना चाहिए। लोगों के भीतर पवित्र आत्मा के कार्य करने की एक शर्त है। उनमें प्यास होनी चाहिए और उन्हें खोज करनी चाहिए तथा उन्हें परमेश्वर के कार्यकलापों के बारे में आधे-अधूरे मन वाले या संशययुक्त नहीं होना चाहिए, और उन्हें हर समय अपना कर्तव्य निभाने में सक्षम होना चाहिए; केवल इसी तरह से वे पवित्र आत्मा का कार्य प्राप्त कर सकते हैं। परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक चरण में मानवजाति से जो अपेक्षित है, वह है आसाधारण आत्मविश्वास और खोजने के लिए परमेश्वर के सामने आना—केवल अनुभव के माध्यम से ही लोग यह पता कर सकते हैं कि परमेश्वर कितना प्यारा है और पवित्र आत्मा लोगों में कैसे कार्य करता है। यदि तुम अनुभव नहीं करते, यदि तुम उसके माध्यम से अपना रास्ता महसूस नहीं करते, यदि तुम तलाश नहीं करते, तो तुम्हें कुछ प्राप्त नहीं होगा। तुम्हें अपने अनुभवों के माध्यम से अपना रास्ता महसूस करना चाहिए, और केवल अपने अनुभवों के माध्यम से ही तुम परमेश्वर के कार्यों को देख सकते हो और यह पहचान सकते हो कि वह कितना चमत्कारी और अथाह है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, तुम्हें परमेश्वर के प्रति अपनी भक्ति बनाए रखनी चाहिए

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