परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम विश्वास के बारे में क्या जानते हो?" | अंश 465

अब क्या तू सचमुच में जान गया कि तू क्यों मुझ पर विश्वास करता है? क्या तू सचमुच में मेरे कार्य के उद्देश्य और महत्व को जानता है? क्या तू सचमुच में अपने कर्तव्य को जानता है? क्या तू सचमुच में मेरी गवाही को जानता है? यदि तू मात्र मुझ में विश्वास करता है, फिर भी न तो मेरी महिमा और न ही मेरी गवाही तुझमें देखी जा सकती है, उस दशा में मैंने तुझे बहुत पहले ही फेंक दिया है। जहाँ तक उनकी बात है जो सब कुछ जानते हैं, वे मेरी आँखों में ढ़ेर सारे काँटों के समान हैं, और मेरे घराने में वे केवल ठोकर खाने की बाधाएं हैं। वे जंगली घास पात हैं जिन्हें मेरे कार्य से पूरी तरह हटा देना चाहिए, जो किसी भी काम के नहीं हैं और जिस में कोई वज़न नहीं है; मैंने लम्बे समय से उनसे घृणा की है। उनके लिए जिनके पास गवाही नहीं है, मेरा क्रोध सर्वदा उन पर बना रहेगा, और मेरी लाठी कभी उन पर से नहीं हटेगी। मैंने बहुत पहले से ही उन्हें उस दुष्ट के हाथों में दे दिया है, और उनके पास मेरा कोई अनुग्रह नहीं है। उस दिन, उनका दण्ड मूर्ख स्त्रियों के दण्ड से कहीं ज़्यादा पीड़ादायक होगा। अब मैं अपने कर्तव्य को निभाने का काम कर रहा हूँ; मैं उन जंगली घास पात के साथ सारे गेहूँ को गठरी में बाँधूंगा। अब यह मेरा कार्य है। जब हटा देने का मेरा समय आएगा तब इन जंगली घास पात हटाया जाएगा, तब गेहूँ के दानों को भण्डार गृह में इकट्ठा किया जाएगा, और जिन जंगली घास पात को हटाया गया है उन्हें जलाकर राख करने के लिए आग में डाल दिया जाएगा। अब मेरा कार्य मात्र सभी मनुष्यों को एक गठरी में बांधना है, अर्थात्, पूरी तरह उन पर विजयी होना है। तब सभी मनुष्यों के अंत को प्रकट करने के लिए मैं हटाना शुरू करूँगा। अतः तुझे जानना ही होगा कि अब तू मुझे कैसे संतुष्ट कर सकता है और तुझे किस तरह मेरे प्रति विश्वास में सही पथ पर आना होगा। जो मैं खोजता हूँ वह इस समय तेरी निष्ठा और आज्ञाकारिता है, और तेरा प्रेम और गवाही है। यद्यपि इस समय तू नहीं समझता है कि गवाही क्या है या प्रेम क्या है, फिर भी तुझे अपना सब कुछ मेरे पास लाना चाहिए, और जो एकमात्र ख़जाना तेरे पास है उसे मुझे सौंप दोः तेरी निष्ठा और आज्ञाकारिता। तुझे जानना चाहिए, कि मेरे द्वारा शैतान को हराने की गवाही मनुष्य की निष्ठा और आज्ञाकारिता में निहित है, जैसे यह मनुष्य के ऊपर मेरी सम्पूर्ण विजय की गवाही है। मेरे प्रति तेरे विश्वास का कर्तव्य है कि तू मेरी गवाही दे, मेरे प्रति विश्वासयोग्य बना रहे किसी और के प्रति नहीं, और अंत तक आज्ञाकारी बना रहे। इस से पहले कि मैं अपने कार्य का अगला चरण आरंभ करूँ, तू मेरी गवाही कैसे देगा? तू मेरे प्रति निष्ठावान और विश्वासयोग्य कैसे बना रहेगा? क्या तू अपनी सारी निष्ठा अपने कार्य के लिए समर्पित करता है या यों ही हिम्मत हार जाएगा? क्या तू उसके बजाए मेरे प्रत्येक आयोजनों के आधीन होगा (चाहे मृत्यु हो या विनाश) या मेरी ताड़ना से बचने के लिए दूर भाग जाएगा? मैं तेरी ताड़ना करता हूँ ताकि तू मेरी गवाही देगा, और मेरे प्रति निष्ठावान और आज्ञाकारी होगा। साथ ही, ताड़ना वर्तमान में मेरे कार्य के अगले कदम को प्रकट करने के लिए है और उस कार्य के निर्बाध प्रगति की अनुमति देने के लिए है। अतः मैं तुझे समझाता हूँ कि तू बुद्धिमान हो जा और अपने जीवन या अपने अस्तित्व के महत्व के साथ ऐसा व्यवहार न कर कि मानो कोई बेकार रेत हो। क्या तू स्पष्टता से जान सकता है कि मेरा आनेवाला काम क्या होगा? क्या तू जानता है कि आनेवाले दिनों में मैं कैसे काम करूँगा और मेरा कार्य कैसे प्रकट होगा? तुझे मेरे कार्य के प्रति अपने अनुभव का महत्व जानना चाहिए, और उससे बढ़कर, मेरे प्रति अपने विश्वास का महत्व जानना चाहिए। मैंने बहुत कुछ किया है; तेरी कल्पना के अनुसार मैं बीच में कैसे हिम्मत हार सकता हूँ? मैंने ऐसा विस्तृत काम किया है; मैं इसे कैसे नष्ट कर सकता हूँ? वास्तव में, मैं इस युग को समाप्त करने आया हूँ। यह सही है, परन्तु इसके अतिरिक्त तुझे जानना होगा कि मैं एक नए युग का आरंभ करनेवाला हूँ, एक नया कार्य आरंभ करने के लिए, और, सब से बढ़कर, राज्य के सुसमाचार को फैलाने के लिए। अतः तुझे जानना चाहिए कि अब यह कार्य केवल एक युग का आरंभ के लिए है, और सुसमाचार को फैलाने की नींव डालने और आने वाले समय में उस युग को समाप्त करने के लिए है। मेरा कार्य उतना सरल नहीं है जितना तू समझता है, और न ही बेकार और अर्थहीन है जैसा शायद तू विश्वास करता है। इसलिए, पहले की तरह मैं तुझसे कहता हूँ: तुझे मेरे कार्य के लिए अपना जीवन देना ही होगा, और उसके अतिरिक्त, तुझे मेरी महिमा के लिए अपने आपको समर्पित करना ही होगा। और, कि तू जो मेरी गवाही दे रहा है उसका मैंने लम्बे समय से इन्तज़ार किया है, और फिर भी उससे अधिक मैंने तेरे लिए लालसा की है कि तू मेरे सुसमाचार को फैलाए। तुझे समझना ही होगा कि मेरे हृदय में क्या है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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