परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर के कार्य को जानना | अंश 185
अब मोआब के वंशजों पर कार्य करना उन लोगों को बचाना है, जो सबसे गहरे अँधेरे में गिर गए हैं। यद्यपि वे शापित थे, फिर भी परमेश्वर उनसे महिमा...
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तुम्हें भविष्य में आशीष दिया जाएगा या शाप, इसका निर्णय तुम्हारे आज के कार्य और व्यवहार के आधार पर किया जाएगा। यदि तुम्हें परमेश्वर द्वारा पूर्ण किया जाना है, तो यह बिलकुल अभी होना चाहिए, इसी युग में; भविष्य में दूसरा कोई अवसर नहीं होगा। परमेश्वर तुम लोगों को सच में अभी पूर्ण करना चाहता है, और यह बस कहने की बात नहीं है। भविष्य में चाहे कोई भी परीक्षण तुम पर आकर पड़े, चाहे कैसी भी घटनाएँ घटें, या तुम्हें कैसी भी आपदाओं का सामना करना पड़े, परमेश्वर तुम लोगों को पूर्ण करना चाहता है; यह एक निश्चित और निर्विवाद तथ्य है। इसे कहाँ देखा जा सकता है? इसे इस तथ्य में देखा जा सकता है कि युगों और पीढ़ियों से परमेश्वर के वचन ने ऐसी महान ऊँचाई कभी प्राप्त नहीं की, जैसी आज प्राप्त की है। यह उच्चतम क्षेत्र में प्रविष्ट हो चुका है, और पूरी मानवजाति पर पवित्र आत्मा का कार्य आज बेमिसाल है। पिछली पीढ़ियों में से शायद ही किसी ने ऐसा अनुभव किया होगा; यहाँ तक कि यीशु के युग में भी आज के प्रकाशन विद्यमान नहीं थे। तुम लोगों से बोले गए वचन, तुम्हारी समझ और तुम्हारे अनुभव, सब एक नए शिखर पर पहुँच गए हैं। तुम लोग परीक्षणों और ताड़नाओं के मध्य से हटते नहीं हो, और यह इस बात का पर्याप्त प्रमाण है कि परमेश्वर के कार्य ने एक अभूतपूर्व वैभव प्राप्त कर लिया है। यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसे मनुष्य कर सकता है, न ही यह कोई ऐसी बात है जिसे मनुष्य बनाए रखता है; बल्कि यह स्वयं परमेश्वर का कार्य है। इसलिए, परमेश्वर के कार्य की अनेक वास्तविकताओं से यह देखा जा सकता है कि परमेश्वर मनुष्य को पूर्ण करना चाहता है, और वह निश्चित रूप से तुम लोगों को पूर्ण करने में सक्षम है। यदि तुम लोगों में यह अंतर्दृष्टि है और तुम यह नई खोज करते हो, तो तुम यीशु के दूसरे आगमन की प्रतीक्षा नहीं करोगे, बल्कि तुम सब परमेश्वर को इसी युग में स्वयं को पूर्ण करने दोगे। इसलिए, तुम लोगों में से प्रत्येक को अपना अधिकतम प्रयास करना चाहिए, कोई प्रयास नहीं छोड़ना चाहिए, ताकि तुम परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जा सको।
अब तुम्हें नकारात्मक चीज़ों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। पहले, हर उस चीज़ को अलग रख दो और उसकी उपेक्षा करो, जो तुम्हें नकारात्मक महसूस कराए। जब तुम कामकाज सँभाल रहे होते हो, तो ऐसे दिल से सँभालो, जो खोज करता हो और सावधानी से आगे बढ़ता हो, ऐसा दिल जो परमेश्वर के प्रति समर्पित होता हो। जब कभी तुम लोगों को अपने भीतर किसी कमजोरी का पता चले, पर तुम उसे खुद पर काबू न पाने दो, और उसके बावजूद तुम वे कार्य करो, जो तुम्हें करने चाहिए, तो तुमने एक सकारात्मक कदम आगे बढ़ा लिया। उदाहरण के लिए, तुम वृद्ध भाई-बहनों की धार्मिक धारणाएँ हैं, फिर भी तुम प्रार्थना कर सकते हो, समर्पण कर सकते हो, परमेश्वर के वचन खा-पी सकते हो, और भजन गा सकते हो...। दूसरे शब्दों में, तुम जो कुछ भी करने में सक्षम हो, जो कोई भी कार्य तुम कर सकते हो, तुम्हें अपनी पूरी शक्ति के साथ उसके प्रति समर्पित हो जाना चाहिए। निष्क्रियता से प्रतीक्षा न करो। अपने कर्तव्य के निर्वहन में परमेश्वर को संतुष्ट करने में सक्षम होना पहला कदम है। फिर, एक बार जब तुम सत्य को समझने में सक्षम हो जाओगे और परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश हासिल कर लोगे, तब तुम परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जा चुके होगे।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सभी के द्वारा अपना कार्य करने के बारे में
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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