परमेश्वर के दैनिक वचन | "अभ्यास (6)" | अंश 440

जब तुम थोड़ी सी बाधा या कठिनाई से पीड़ित होते हो, तो ये तुम लोगों के लिए अच्छा है; यदि तुम लोगों को एक मौज करने का समय दिया गया होता, तो तुम लोग बर्बाद हो जाते, और तब तुम्हारी रक्षा कैसे की जाती? आज तुम लोगों को इसलिए सुरक्षा दी जाती है क्योंकि तुम लोगों को दंडित किया जाता है, शाप दिया जाता है, तुम लोगों का न्याय किया जाता है। क्योंकि तुम लोगों ने काफी कष्ट उठाया है इसलिए तुम्हें संरक्षण दिया जाता है। नहीं तो, तुम लोग बहुत समय पहले ही दुराचार में गिर गए होते। यह जानबूझ कर तुम लोगों के लिए चीज़ों को मुश्किल बनाना नहीं है—मनुष्य की प्रकृति को बदलना मुश्किल है, और उनके स्वभाव को बदलना भी ऐसा ही है। आज, तुम लोगों के पास वो समझ भी नहीं है जो पौलुस के पास थी, और न ही तुम लोगों के पास उसका आत्म-बोध है। तुम लोगों की आत्माओं को जगाने के लिए तुम लोगों पर हमेशा दबाव डालना पड़ता है, और तुम लोगों को हमेशा ताड़ना देनी पड़ती है और तुम्हारा न्याय करना पड़ता है। ताड़ना और न्याय ही वह चीज़ हैं जो तुम लोगों के जीवन के लिए सर्वोत्तम हैं। और जब आवश्यक हो, तो तुम पर आ पड़ने वाले तथ्यों की ताड़ना भी होनी ही चाहिए; केवल तभी तुम लोग पूरी तरह से समर्पण करोगे। तुम लोगों की प्रकृतियाँ ऐसी हैं कि ताड़ना और शाप के बिना, तुम लोग अपने सिरों को झुकाने और समर्पण करने के अनिच्छुक होगे। तुम लोगों की आँखों के सामने तथ्यों के बिना, तुम पर कोई प्रभाव नहीं होगा। तुम लोग चरित्र से बहुत नीच और बेकार हो। ताड़ना और न्याय के बिना, तुम लोगों पर विजय प्राप्त करना कठिन होगा, और तुम लोगों की अधार्मिकता और अवज्ञा को जीतना मुश्किल होगा। तुम लोगों का पुराना स्वभाव बहुत गहरी जड़ें जमाए हुए है। यदि तुम लोगों को सिंहासन पर बिठा दिया जाए, तो तुम लोगों को स्वर्ग की ऊँचाई और पृथ्वी की गहराई के बारे में कोई अंदाज़ा न हो, तुम लोग किस ओर जा रहे हो इसके बारे में तो बिल्कुल भी अंदाज़ा न हो। यहाँ तक कि तुम लोगों को यह भी नहीं पता कि तुम सब कहाँ से आए हो, तो तुम लोग सृष्टि के प्रभु को कैसे जान सकते हो? आज की समयोचित ताड़ना और शाप के बिना तुम लोगों के अंतिम दिन बहुत पहले आ चुके होते। तुम लोगों के भाग्य के बारे में तो कुछ कहना ही नहीं—क्या यह और भी निकटस्थ खतरे की बात नहीं है? इस समयोचित ताड़ना और न्याय के बिना, कौन जाने कि तुम लोग कितने घमंडी हो गए होते, और कौन जाने तुम लोग कितने पथभ्रष्ट हो जाते। इस ताड़ना और न्याय ने तुम लोगों को आज के दिन तक पहुँचाया है, और इन्होंने तुम लोगों के अस्तित्व को संरक्षित रखा है। जिन तरीकों से तुम लोगों के "पिता" को "शिक्षित" किया गया था, यदि उन्हीं तरीकों से तुम लोगों को भी "शिक्षित" किया जाता, तो कौन जाने तुम लोग किस क्षेत्र में प्रवेश करते! तुम लोगों के पास स्वयं को नियंत्रित करने और आत्म-चिंतन करने की बिलकुल कोई योग्यता नहीं है। तुम जैसे लोग, अगर कोई हस्तक्षेप या गड़बड़ी किए बगैर मात्र अनुसरण करें, आज्ञापालन करें, तो मेरे उद्देश्य पूरे हो जाएंगे। क्या तुम लोगों के लिए बेहतर नहीं होगा कि तुम आज की ताड़ना और न्याय को स्वीकार करो? तुम लोगों के पास और क्या विकल्प हैं?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

You’re Protected Because You’re Chastised and Judged

I

You lack the self-knowledge of Paul, always needing to be chastised; you need judgment to awaken. Chastisement is best for your lives. And when it is necessary, then there has to be chastisement of the arrival of the facts, for then you will fully submit. Without being chastised and cursed, you would refuse bowing your head, you’d be unwilling to submit. If there’s no facts, there’s no effect. You are given protection today because you’re chastised, cursed and judged. You are given protection today because you have suffered so much. If not, you’d have become depraved. God doesn’t mean to give you a hard time, man’s nature is firmly entrenched. For man’s disposition to change, that’s how it must be.

II

You are worthless and too lowly. Without chastisement and judgment, it would be hard to conquer you, your unrighteousness couldn’t be suppressed. Your old nature’s deeply rooted. If you were placed upon the throne, the height of heaven and earth’s depth, you’d have no clue, nor where to go. You don’t even know where you’re from, how could you know the Creator? Without today’s timely judgment, your last day would have long appeared, long appeared. You are given protection today because you’re chastised, cursed and judged. You are given protection today because you have suffered so much. If not, you’d have become depraved. God doesn’t mean to give you a hard time, man’s nature is firmly entrenched. For man’s disposition to change, that’s how it must be.

III

Without this timely chastisement, your fate would surely be at risk, and who knows how arrogant and how degenerate you would be. You are unable to control and to reflect upon yourselves. Judgment has brought you to today, and has preserved your existence. You should do better to accept judgment and chastisement today. What other choices do you have than to submit and be this way, be this way? You are given protection today because you’re chastised, cursed and judged. You are given protection today because you have suffered so much. If not, you’d have become depraved. God doesn’t mean to give you a hard time, man’s nature is firmly entrenched. For man’s disposition to change, that’s how it must be, that’s how it must be.

from Follow the Lamb and Sing New Songs

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