परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज्ञाओं का पालन करना और सत्य का अभ्यास करना" | अंश 426

नए युग में आज्ञाओं की घोषणा उस तथ्य की एक गवाही है कि इस धारा के सभी लोग, वे सभी जो आज परमेश्वर की वाणी को सुनते हैं, एक नए युग में प्रवेश कर चुके हैं। यह परमेश्वर के कार्य के लिए एक नई शुरुआत है, साथ ही यह परमेश्वर की छः हज़ार वर्षों की प्रबंधकीय योजना के कार्य के अंतिम भाग का आरम्भ भी है। नए युग की आज्ञाएँ इस बात की प्रतीक हैं कि परमेश्वर और मनुष्य नए स्वर्ग और नई पृथ्वी के क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं, और जैसे यहोवा ने इस्रालियों के बीच कार्य किया था और यीशु ने यहूदियों के बीच कार्य किया था, वैसे ही परमेश्वर पृथ्वी पर और अधिक व्यवहारिक कार्य तथा और अधिक बड़े काम करेगा। ये इस बात की भी प्रतीक हैं कि लोगों का यह समूह परमेश्वर से और अधिक एवं और बड़े आदेश प्राप्त करेगा, तथा परमेश्वर से व्यवहारिक तरीके से आपूर्ति, पोषण, सहारा, देखरेख और सुरक्षा प्राप्त करेगा, उसे परमेश्वर के द्वारा और अधिक व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, परमेश्वर के वचन द्वारा उससे निपटा जाएगा, तोड़ा जाएगा और परिशुद्ध किया जाएगा। नए युग की आज्ञाओं का अर्थ बहुत गहरा है। उनसे संकेत मिलता है कि परमेश्वर वास्तव में पृथ्वी पर प्रकट होगा, जहाँ से वो देह में अपनी सम्पूर्ण महिमा को प्रकट करते हुए समूचे विश्व को जीत लेगा। वे यह भी संकेत करती हैं कि व्यवहारिक परमेश्वर अपने चुने हुए सभी लोगों को पूर्ण बनाने के लिए, पृथ्वी पर और भी अधिक व्यवहारिक कार्य करने जा रहा है। इसके अलावा, परमेश्वर पृथ्वी पर वचनों से सब कुछ निष्पादित करेगा और उस आज्ञप्ति को प्रकट करेगा कि “देहधारी परमेश्वर सबसे ऊँचा उठकर आवर्धित होगा, और सभी लोग एवं सभी देश परमेश्वर—जो महान है—उसकी आराधना करने के लिए घुटनों के बल बैठेंगे।” हालाँकि नए युग की आज्ञाएँ मनुष्य द्वारा पालन करने के लिए हैं, भले ही ऐसा करना मनुष्य का कर्तव्य और उसका दायित्व है, लेकिन वे जिस अर्थ का प्रतिनिधित्व करती हैं, वो इतना अगाध है कि उसे एक या दो शब्दों में पूरी तरह से अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता। यहोवा और यीशु के द्वारा घोषित की गईं पुराने नियमों की व्यवस्थाओं और नए नियमों के अध्यादेशों का स्थान नए युग की आज्ञाओं ने ले लिया। यह एक गहरी शिक्षा है, यह उतना सरल विषय नहीं है जितना लोग सोचते हैं। नए युग की आज्ञाओं में व्यवहारिक अर्थ का एक पहलू है : वे अनुग्रह के युग और राज्य के युग के बीच एक अंतराफलक की भूमिका निभाते हैं। नए युग की आज्ञाएँ पुराने युग की प्रथाओं और अध्यादेशों को समाप्त करती हैं, साथ ही यीशु के युग की और उससे पहले की सभी प्रथाओं को भी समाप्त करती हैं। वे मनुष्य को अधिक व्यवहारिक परमेश्वर की उपस्थिति में लाती हैं, मनुष्य को परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से पूर्णता प्राप्त करना शुरू करने देती हैं; वे पूर्ण बनाए जाने के मार्ग का आरम्भ हैं। इसलिए, नए युग की आज्ञाओं के प्रति तुम लोगों का रवैया सही होना चाहिए, और उनका अनुसरण लापरवाही से नहीं करना चाहिए, न ही उनका तिरस्कार करना चाहिए। नए युग की आज्ञाएँ एक बिंदु विशेष पर ज़ोर देती हैं : वो यह कि मनुष्य आज के व्यवहारिक स्वयं परमेश्वर की आराधना करेगा, जिसमें आत्मा के सार के प्रति और अधिक व्यवहारिक रूप से समर्पित होना शामिल है। आज्ञाएँ उस सिद्धान्त पर भी जोर देती हैं जिसके द्वारा धार्मिकता के सूर्य के रूप में प्रकट होने के बाद परमेश्वर, मनुष्य का न्याय करेगा कि वे दोषी हैं या धार्मिक। आज्ञाएँ अभ्यास में लाने की अपेक्षा समझने में अधिक आसान हैं। इससे यह देखा जा सकता है कि यदि परमेश्वर मनुष्य को पूर्ण बनाना चाहता है, तो उसे ऐसा अपने वचनों और मार्गदर्शन से करना होगा, मनुष्य केवल अपनी स्वाभाविक बुद्धिमत्ता से पूर्णता हासिल नहीं कर सकता। मनुष्य नए युग की आज्ञाओं का पालन कर सकता है या नहीं, इस बात का संबंध इंसान के व्यवहारिक परमेश्वर के ज्ञान से है। इसलिए, तुम आज्ञाओं का पालन कर सकते हो या नहीं, यह ऐसा प्रश्न नहीं है जिसका समाधान कुछ ही दिनों में कर लिया जायेगा। यह सीखने के लिए एक गहरा सबक है।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

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