परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 592

जब मनुष्य पृथ्वी पर मनुष्य के असली जीवन को हासिल करता है, तो शैतान की सारी ताकतों को बांध दिया जाएगा, और मनुष्य आसानी से पृथ्वी पर जीवन यापन करेगा। परिस्थितियां उतनी जटिल नहीं होंगी जितनी आज हैं: मानवीय रिश्ते, सामाजिक रिश्ते, जटिल पारिवारिक रिश्ते..., वे इस प्रकार परेशान करने वाले और कितने दुखदायी हैं! यहाँ पर मनुष्य का जीवन कितना दयनीय है! एक बार मनुष्य पर विजय प्राप्त कर ली जाए तो, उसका दिल और दिमाग बदल जाएगा: उसके पास ऐसा हृदय होगा जो परमेश्वर पर श्रद्धा रखता है और ऐसा हृदय होगा जो परमेश्वर से प्रेम करता है। जब एक बार ऐसे लोग जो इस विश्व में हैं जो परमेश्वर से प्रेम करने की इच्छा रखते हैं उन पर विजय पा ली जाती है, कहने का तात्पर्य है, जब एक बार शैतान को हरा दिया जाता है, और जब एक बार शैतान को—अंधकार की सारी शक्तियों को बांध लिया जाता है, तो फिर पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन कष्टरहित होगा, और वह पृथ्वी पर आज़ादी से जीवन जीने में सक्षम होगा। यदि मनुष्य का जीवन शारीरिक रिश्तों के बगैर हो, और देह की जटिलताओं के बगैर हो, तो यह कितना अधिक आसान होगा। मनुष्य के देह के रिश्ते बहुत ही जटिल होते हैं, और मनुष्य के लिए ऐसे रिश्तों का होना इस बात का प्रमाण है कि उसने स्वयं को अभी तक शैतान के प्रभाव से स्वतन्त्र नहीं कराया है। यदि आपका भाइयों एवं बहनों के साथ ऐसा ही रिश्ता होता, यदि आपका अपने नियमित परिवार के साथ ऐसा ही रिश्ता होता, तो आपके पास कोई चिंता नहीं होती, और किसी के भी विषय में चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इस से बेहतर और कुछ नहीं हो सकता था, और इस रीति से मनुष्य को उसकी आधी तकलीफों से मुक्ति मिल गई होती। पृथ्वी पर एक सामान्य मानवीय जीवन जीने से, मनुष्य स्वर्गदूत के समान होगा: हालाँकि अभी भी देह का प्राणी होगा, फिर भी वह काफी हद तक स्वर्गदूत के समान होगा। यही वह अंतिम प्रतिज्ञा है, यह वह अंतिम प्रतिज्ञा है जो मनुष्य को प्रदान की गई है। आज मनुष्य ताड़ना एवं न्याय से होकर गुज़रता है; क्या आप सोचते हैं कि ऐसी चीज़ों के विषय में मनुष्य का अनुभव अर्थहीन है? क्या ताड़ना एवं न्याय के कार्य को बिना किसी कारण के किया जा सकता है? पहले ऐसा कहा गया है कि मनुष्य को ताड़ना देना और उसका न्याय करना उसे अथाह कुंड में डालना है, जिसका अर्थ है कि उसकी नियति और उसके भविष्य की संभावनाओं का ले लिया जाना। यह एक चीज़ के लिए हैः मनुष्य का शुद्धिकरण। मनुष्य को जानबूझकर अथाह कुंड में नहीं डाला जाता है, जिसके बाद परमेश्वर उससे अपना पीछा छुड़ा लेता है। इसके बजाय, यह मनुष्य के भीतर के विद्रोहीपन से निपटने के लिए है, ताकि अन्त में मनुष्य के भीतर की चीज़ों को शुद्ध किया जा सके, ताकि उसके पास परमेश्वर का सच्चा ज्ञान हो सके, और वह एक पवित्र इंसान के समान हो सके। यदि इसे कर लिया जाता है, तो सब कुछ पूरा हो जाएगा। वास्तव में, जब मनुष्य के भीतर की उन चीज़ों से निपटा जाता है जिनसे निपटा जाना है, और मनुष्य ज़बर्दस्त गवाही देता है, तो शैतान भी हार जाएगा, और यद्यपि उन चीज़ों में से कुछ चीज़ें हो सकती हैं जो मूल रूप से मनुष्य के भीतर हैं जिन्हें पूरी तरह से शुद्ध नहीं किया गया है, तो जब एक बार शैतान को हराया जाता है, तो वह आगे से समस्या खड़ी नहीं करेगा, और उस समय मनुष्य को पूरी तरह से शुद्ध कर लिया जाएगा। मनुष्य ने कभी ऐसे जीवन का अनुभव नहीं किया है, परन्तु जब शैतान को हराया जाता है, तब सब कुछ ठीक कर दिया जाएगा और मनुष्य के भीतर की उन सभी छोटी-मोटी चीज़ों का समाधान कर दिया जाएगा; अन्य सभी परेशानियां समाप्त हो जाएंगी जब एक बार मुख्य समस्या को सुलझा दिया जाता है। पृथ्वी पर परमेश्वर के इस देहधारण के दौरान, जब वह मनुष्य के बीच व्यक्तिगत तौर पर अपना कार्य करता है, तो वह सब कार्य जिसे वह करता है वह शैतान को हराने के लिए है, और वह मनुष्य पर विजय पाने एवं तुम लोगों को पूर्ण करने के माध्यम से शैतान को हराएगा। जब तुमसब ज़बर्दस्त गवाही देते हो, तो यह भी शैतान की हार का एक चिन्ह होगा। मनुष्य पर सबसे पहले विजय पाई जाती है और अन्ततः शैतान को हराने के लिए उसे पूरी तरह से पूर्ण बनाया जाता है। सार यह कि शैतान की हार के साथ-साथ यह ठीक उसी समय कष्ट के इस खोखले सागर से सम्पूर्ण मानवजाति का उद्धार भी है। इसकी परवाह किये बगैर कि इस कार्य को सम्पूर्ण जगत में क्रियान्वित किया जाता है या चीन में, यह सब कुछ शैतान को हराने और समूची मानवजाति का उद्धार करने के लिए है ताकि मनुष्य विश्राम के स्थान में प्रवेश कर सके। देखिये, देहधारी परमेश्वर का सामान्य शरीर बिलकुल शैतान को हराने के लिए है। देह के परमेश्वर के कार्य को उन सभी लोगों का उद्धार करने के लिए उपयोग किया जाता है जो स्वर्ग के नीचे हैं जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं, यह सम्पूर्ण मानवजाति पर विजय पाने के लिए है और इसके अतिरिक्त, शैतान को हराने के लिए है। परमेश्वर के प्रबधंकीय कार्य का मर्म सम्पूर्ण मानवजाति का उद्धार करने के लिए शैतान की पराजय से अभिन्न है। इस कार्य के विषय में अधिकांशतः, आप लोगों के लिए हमेशा क्यों कहा जाता है कि गवाही दें? और इस गवाही को किस की ओर निर्देशित किया गया है? क्या इसे शैतान की ओर निर्देशित नहीं किया गया है? इस गवाही को परमेश्वर के लिए दिया गया है, और इसे यह प्रमाणित करने के लिए दिया गया है कि परमेश्वर के कार्य ने अपने प्रभाव को हासिल कर लिया है। गवाही देना शैतान को हराने के कार्य से सम्बन्धित है; यदि शैतान के साथ कोई युद्ध न हुआ होता, तो मनुष्य से गवाही देने की अपेक्षा नहीं की गई होती। यह इसलिए है क्योंकि शैतान को हराना ही होगा, ठीक उसी समय मनुष्य को बचाते हुए, परमेश्वर चाहता है कि मनुष्य शैतान के सामने उसकी गवाही दे, जिसे वह मनुष्य का उद्धार करने और शैतान के साथ युद्ध करने के लिए उपयोग करता है। परिणामस्वरूप, मनुष्य उद्धार का लक्ष्य और शैतान को हराने के लिए एक यन्त्र दोनों है, और इस प्रकार मनुष्य परमेश्वर के सम्पूर्ण प्रबधंन के कार्य के केन्द्रीय भाग में है, और शैतान महज विनाश का लक्ष्य है और शत्रु है। शायद आप महसूस करते हैं कि आपने कुछ भी नहीं किया है, परन्तु आपके स्वभाव में बदलावों के कारण, ऐसी गवाही दी गई है, और इस गवाही को शैतान की ओर निर्देशित किया गया है और इसे मनुष्य के लिए नहीं दिया गया है। मनुष्य एक ऐसी गवाही का आनन्द लेने के लिए उपयुक्त नहीं है। वह परमेश्वर के द्वारा किए गए कार्य को किस प्रकार समझ सकता है? परमेश्वर की लड़ाई का लक्ष्य शैतान है; इसी बीच मनुष्य केवल उद्धार का लक्ष्य है। मनुष्य के पास भ्रष्ट शैतानी स्वभाव है, और वह इस कार्य को समझने में असमर्थ है। यह शैतान की भ्रष्टता के कारण है। यह स्वभाविक रूप से मनुष्य के भीतर नहीं होता है, परन्तु इसे शैतान के द्वारा निर्देशित किया जाता है। आज, परमेश्वर का मुख्य कार्य शैतान को हराना है, अर्थात्, मनुष्य पर पूरी तरह से विजय पाना है, ताकि मनुष्य शैतान के सामने परमेश्वर की अंतिम गवाही दे सके। इस रीति से, सभी चीज़ों को पूरा कर लिया जाएगा। बहुत से मामलों में, आपकी खुली आंखों को प्रतीत होता है कि कुछ भी नहीं किया गया है, किन्तु वास्तव में, उस कार्य को पहले से ही पूरा किया जा चुका है। मनुष्य अपेक्षा करता है कि पूर्णता का सम्पूर्ण कार्य दृश्यमान हो, फिर भी आपके लिए इसे दृश्यमान किये बिना ही, मैंने अपने कार्य को पूरा कर लिया है, क्योंकि शैतान ने समर्पण कर दिया है, जिसका मतलब है कि उसे पूरी तरह से पराजित किया जा चुका है, यह कि परमेश्वर की सम्पूर्ण बुद्धि, सामर्थ एवं अधिकार ने शैतान को परास्त कर दिया है। यह बिलकुल वही गवाही है जिसे दिया जाना चाहिए, और हालाँकि मनुष्य में इसकी कोई स्पष्ट अभिव्यक्ति नहीं है, हालाँकि यह खुली आंखों के लिए दृश्यमान नहीं है, फिर भी शैतान को पहले से ही पराजित किया जा चुका है। इस कार्य की सम्पूर्णता को शैतान के विरुद्ध निर्देशित किया गया है, एवं शैतान के साथ युद्ध के कारण सम्पन्न किया गया है। और इस प्रकार, ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं जिन्हें मनुष्य इस रूप में नहीं देखता है कि वे सफल हो चुकी हैं, परन्तु उन्हें देखता है जो, परमेश्वर की नज़रों में, बहुत समय पहले ही सफल हो गई थीं। यह परमेश्वर के सम्पूर्ण कार्य की एक भीतरी सच्चाई है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

इंसान से परमेश्वर का आखिरी वादा

जब इंसान पाता है धरती पर सच्चा जीवन, शैतान की सभी शक्तियां जाती हैं बंध। इंसान जिएगा पृथ्वी पर आराम से। उलझनें हो जाएंगी ग़ायब। इंसानी, सामाजिक और पारिवारिक बंधन कर सकते हैं परेशान, हो सकते हैं दर्द से भरे। पर एक बार जब इंसान जीत लिया जाएगा पूरी तरह से, पूरी तरह से, तो बदल जाएगा उसका दिल और दिमाग़। एक बार जब इंसान जीत लिया जाएगा पूरी तरह से, बदल जाएगा उसका दिल और दिमाग़।

इंसान का दिल करेगा परमेश्वर का आदर। इंसान का दिल करेगा परमेश्वर से प्रेम। दुनिया के सभी लोग जो चाहते हैं करना परमेश्वर से प्रेम, परमेश्वर से प्रेम, एक बार जब उन पर जीत हासिल कर ली जाएगी, एक बार जब शैतान हरा दिया जाएगा, हरा दिया जाएगा, एक बार जब अंधेरी शक्तियों को दिया जाएगा बांध, तो पृथ्वी पर इंसान का जीवन होगा परेशानियों से आज़ाद। जिएगा वो आज़ादी से इस धरती पर, देह की उलझनें हो जाएंगी ग़ायब। इंसान हो जाएगा शैतान की शक्तियों से आज़ाद, हो जाएगा आज़ाद।

अगर परिवार में सबके प्रति तुम्हारा बर्ताव हो एकसमान, और कलीसिया के भाइयों और बहनों के लिए भी, चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं, तुम्हारी तकलीफ़ें हो जाएगीं आधी। इंसान बिता पाएगा एक सामान्य जीवन, फ़रिश्ते की तरह खड़ा रहेगा वो। और यह होगा अंतिम वादा जो परमेश्वर देगा इंसान को। एक बार जब इंसान जीत लिया जाएगा पूरी तरह से, पूरी तरह से, बदल जाएगा उसका दिल और दिमाग़। एक बार जब इंसान जीत लिया जाएगा पूरी तरह से, बदल जाएगा उसका दिल और दिमाग़। इंसान का दिल करेगा परमेश्वर का आदर। इंसान का दिल करेगा परमेश्वर से प्रेम।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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