परमेश्वर के दैनिक वचन : मंज़िलें और परिणाम | अंश 583

मेरे प्रकाश में, लोग फिर से रोशनी देखते हैं। मेरे वचन में, लोग उन चीज़ों को देखते हैं जिनसे उन्हें आनंद मिलता है। मैं पूरब से आया हूँ, मैं पूरब से हूँ। जब मेरी महिमा चमकती है, तो सभी देश प्रकाशित हो उठते हैं, सभी रोशनी में ले आए जाते हैं, एक भी चीज़ अंधकार में नहीं रहती। राज्य में, परमेश्वर के साथ परमेश्वर के लोग जो जीवन जीते हैं, वह अत्यंत उल्लासमय है। सागर लोगों के आशीषित जीवन पर आनंद से नृत्य करते हैं, पर्वत लोगों के साथ मेरी प्रचुरता का आनंद लेते हैं। सभी लोग प्रयास कर रहे हैं, मेहनत कर रहे हैं, मेरे राज्य में अपनी निष्ठा दिखा रहे हैं। राज्य में, अब न विद्रोह है, न प्रतिरोध है; स्वर्ग और धरती एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इंसान और मैं गहरी भावना के साथ निकट आते हैं, जीवन के मधुर सुख-चैन के माध्यम से, एक-दूसरे की ओर झुक रहे हैं... इस समय, मैं औपचारिक रूप से स्वर्ग में अपना जीवन आरंभ करता हूँ। अब शैतान का व्यवधान नहीं है, और लोग विश्राम में प्रवेश करते हैं। पूरी कायनात में, मेरे चुने हुए लोग मेरी महिमा में जीते हैं, अतुलनीय रूप से आशीषित हैं, लोग ऐसे नहीं रहते जैसे इंसानों के बीच रहते हैं, बल्कि ऐसे रहते हैं जैसे परमेश्वर के साथ रहते हैं। हर इंसान शैतान की भ्रष्टता से गुज़रा है, और उसने पूरी तरह से जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव लिए हैं। अब, मेरी रोशनी में रहते हुए, कोई आनंद कैसे न उठाएगा? कोई इस खूबसूरत पल को यों ही कैसे छोड़ देगा और हाथ से कैसे जाने देगा? तुम लोग! मेरे लिए अपने दिलों के गीत गाओ और खुशी से नाचो! अपने सच्चे दिलों को उन्नत करो और उन्हें मुझे अर्पित करो! ढोल बजाओ और मेरे लिए खुशी से क्रीड़ा करो! मैं पूरी कायनात भर में अपनी प्रसन्नता बिखेरता हूँ! मैं सभी लोगों के सामने अपना महिमामय चेहरा प्रकट करता हूँ! मैं ऊँची आवाज़ में पुकारूँगा! मैं कायनात की सीमाओं के परे जाँऊगा! मैं पहले ही लोगों के मध्य शासन करता हूँ! लोगों ने मेरा उत्कर्ष किया है! मैं ऊपर नीले आसमान में बहता हूँ और लोग मेरे साथ चलते हैं। मैं लोगों के मध्य चलता हूँ और मेरे लोग मुझे घेर लेते हैं! लोगों के दिल प्रसन्नचित्त हैं, उनके गीत कायनात को हिलाते हैं, आकाश फाड़ देते हैं! अब कायनात धुंध से घिरी हुई नहीं है; अब न कीचड़ है, न मल का जमाव है। कायनात के पवित्र लोगो! मेरी निगरानी में, तुम अपना असली चेहरा दिखाते हो। तुम लोग मल से ढके हुए इंसान नहीं हो, बल्कि हरिताश्म की तरह निर्मल संत हो, तुम सब लोग मेरे प्रिय हो, तुम सब लोग मेरा आनंद हो! हर चीज़ पुन: जीवन को प्राप्त होती है! सभी संत स्वर्ग में मेरी सेवा के लिए लौट आए हैं, मेरे स्नेहपूर्ण आलिंगन में प्रवेश कर रहे हैं, अब वे विलाप नहीं कर रहे, अब वे बेचैन नहीं हैं, वे स्वयं को मुझे अर्पित कर रहे हैं, मेरे घर वापस आ रहे हैं, और वे अपनी जन्मभूमि में बिना रुके मुझसे प्रेम करेंगे! यह अनंतकाल तक अपरिवर्तनीय होगा! कहाँ है दुख! कहाँ हैं आँसू! कहाँ है देह! धरती गुज़र जाती है, मगर स्वर्ग सदा के लिए हैं। मैं सभी लोगों के समक्ष प्रकट होता हूँ, और सभी लोग मेरी स्तुति करते हैं। यह जीवन, यह सुंदरता, चिरकाल से समय के अंत तक, बदलेगी नहीं। यही राज्य का जीवन है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

राज्य गान (III) सभी जन आनंद के लिये जयकार करते हैं

हर इंसान देखता है प्रकाश फिर परमेश्वर के प्रकाश में, हर इंसान लेता है आनंद अच्छी चीज़ों का, परमेश्वर के वचनों में। पूरब से आता है परमेश्वर, वहीं से है परमेश्वर। चमकाता है अपनी गौरवमय ज्योति परमेश्वर और चमकते हैं सभी देश रोशनी में। सभी लाये गए हैं रोशनी में, अंधकार में कोई रहा नहीं है। राज्य में मानव और परमेश्वर, अपार आनंद में रहते हैं। मानव के धन्य जीवन के लिए, जलस्रोत नृत्य करते हैं। परमेश्वर की बहुलता का, मानव संग पर्वत आनंद लेते हैं। मानव सभी पूरी मेहनत और निष्ठा से, सेवा परमेश्वर की करते हैं। न अब कोई विद्रोह है, न अब कोई विरोध है। स्वर्ग और धरती दोनों, एक-दूजे पर निर्भर हैं। मानव और परमेश्वर करीब हैं, दोनों में गहरा एहसास है। कितना मधुर-जीवन है! यही पल है, जीवन अपना आरम्भ कर दिया है स्वर्ग में परमेश्वर ने। परेशान करता नहीं शैतान अब, विश्राम में हैं परमेश्वर-जन, उसके राज्य में।

इस कायनात में, रहते हैं परमेश्वर के चुने हुए जन, परमेश्वर की महिमामय ज्योति में। उसके राज्य में जीते हैं वे अपना जीवन, अतुल्य हर्ष में। ये मानव संग मानव का जीवन नहीं है, बल्कि जीवन है परमेश्वर का अपने लोगों के संग। दूषित हुआ, स्वाद लिया गम और ख़ुशी का हर इंसान ने। परमेश्वर की रोशनी में अब वे, कैसे न आनंद मनाएं। इन संजोये पलों को कैसे वे जानें दें। नाचो, गाओ लोगों, उन्नत करो हृदय अपना, करो समर्पित इसे परमेश्वर को। ढोल बजाओ, खेलो परमेश्वर की ख़ातिर। परमेश्वर खुश है सारी कायनात पर। दिखलाता है अपना चेहरा, अपने लोगों को परमेश्वर। ऊंची आवाज में पुकारता है परमेश्वर, जगत के परे जाता है परमेश्वर। हर कोई गुणगान करता है उसका, राजा बन गया है परमेश्वर।

परमेश्वर-जन अनुसरण करते हैं उसका, जब घूमता-फिरता है नीले आकाश में परमेश्वर। हर्षित मन लेकर घेर लेते हैं सब जन। आंदोलित करती हैं बादलों को आवाज़ें। अब न धुंध है, न पंक है, न मल का जमाव है कायनात में। परमेश्वर की निगरानी में उजागर करते हैं चेहरा अपना, कायनात के पावन लोग। मलयुक्त नहीं हैं लोग वे, बल्कि संत हैं शुद्ध हरिताश्म की तरह। प्रिय हैं परमेश्वर के, खुशियाँ हैं परमेश्वर की।

होता है हर सृजन जीवित फिर से। करता है सेवा हर संत स्वर्ग में। परमेश्वर के आलिंगन में, वे न विलाप करते हैं, न फ़िक्र है उन्हें, देकर ख़ुद को परमेश्वर को। लौटते हैं वे परमेश्वर के धाम में, अपनी जन्म-भूमि में। अविरल करेंगे प्रेम वो परमेश्वर को। न दर्द है, न आँसूं हैं, न अब तन ही शेष है। धरती का अस्तित्व नहीं मगर, स्वर्ग का वजूद है। प्रकट होता है परमेश्वर सम्मुख सबके, करता है गुणगान हर जन उसका। ऐसा जीवन, ऐसा सौंदर्य, बदलेगा न कभी। यही जीवन है राज्य में।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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