परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है" | अंश 132

इस बार, परमेश्वर कार्य करने आत्मिक देह में नहीं, बल्कि एक एकदम साधारण देह में आया है। यह न केवल परमेश्वर के दूसरी बार देहधारण की देह है, बल्कि यह वही देह है जिसमें वह लौटकर आया है। यह बिलकुल साधारण देह है। इस देह में दूसरों से अलग कुछ भी नहीं है, परंतु तुम उससे वह सत्य ग्रहण कर सकते हो जिसके विषय में तुमने पहले कभी नहीं सुना होगा। यह तुच्छ देह, परमेश्वर के सभी सत्य-वचन का मूर्त रूप है, जो अंत के दिनों में परमेश्वर का काम करती है, और मनुष्यों के जानने के लिये यही परमेश्वर के संपूर्ण स्वभाव की अभिव्यक्ति है। क्या तुमने परमेश्वर को स्वर्ग में देखने की प्रबल अभिलाषा नहीं की? क्या तुमने स्वर्ग में परमेश्वर को समझने की प्रबल अभिलाषा नहीं की? क्या आपने मनुष्यजाति गंतव्य को जानने या समझने की प्रबल अभिलाषा नहीं की? वह तुम्हें वो सभी अकल्पनीय रहस्य बतायेगा, जो कभी कोई इंसान नहीं बता सका, और तुम्हें वो सत्य भी बतायेगा जिन्हें तुम नहीं समझते। वह परमेश्वर के राज्य में तुम्हारे लिये द्वार है, नये युग में तुम्हारा मार्गदर्शक है, ऐसा साधारण देहधारी असीम, अथाह रहस्यों को समेटे हुये है। संभव है कि उसके कार्यों को तुम समझ न पाओ, परंतु उसके सभी कामों का लक्ष्य, तुम्हें इतना बताने के लिये पर्याप्त है कि वह कोई साधारण देह नहीं है, जैसा लोग मानते हैं। क्योंकि वह परमेश्वर की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही साथ अंत के दिनों में मानवजाति के प्रति परमेश्वर की परवाह को भी दर्शाता है। यद्यपि तुम उसके द्वारा बोले गये उन शब्दों को नहीं सुन सकते, जो आकाश और पृथ्वी को कंपाते से लगते हैं, या उसकी ज्वाला सी धधकती आंखों को नहीं देख सकते, और यद्यपि तुम उसके लौह दण्ड के अनुशासन का अनुभव नहीं कर सकते, तुम उसके शब्दों में परमेश्वर के क्रोध को सुन सकते हो, और जान सकते हो कि परमेश्वर समस्त मानवजाति पर दया दिखाता है; तुम परमेश्वर के धार्मिकतायुक्त स्वभाव और उसकी बुद्धि को समझ सकते हो, और इसके अलावा, समस्त मानवजाति के लिये परमेश्वर की चिंता और परवाह को समझ सकते हो। अंत के दिनों में परमेश्वर के काम का उद्देश्य स्वर्ग के परमेश्वर को मनुष्यों के बीच पृथ्वी पर रहते हुये दिखाना है, और मनुष्यों को इस योग्य बनाना है कि वे परमेश्वर की आज्ञा मानें, आदर करें, और परमेश्वर से प्रेम करना जानें। यही कारण है कि वह देह में लौटकर आया है। यद्यपि आज मनुष्य देखता है कि परमेश्वर मनुष्यों के समान है, उसकी एक नाक और दो आंखें हैं और वह साधारण परमेश्वर है, अंत में परमेश्वर उन्हें दिखाएगा कि इस मनुष्य के अस्तित्व के बिना, स्वर्ग और पृथ्वी एक अभूतपूर्व बदलाव से होकर गुज़रेंगे; इस मनुष्य के अस्तित्व के बिना, स्वर्ग मद्धिम हो जायेगा, पृथ्वी पर संकट छा जायेगा, समस्त मानवजाति अकाल और महामारियों का शिकार बन जाएगी, परमेश्वर तुम लोगों को दर्शायेगा कि अंतिम दिनों में देहधारी परमेश्वर के उद्धार के बिना परमेश्वर ने समस्त मानवजाति को बहुत पहले ही नर्क में नष्ट कर दिया होता; इस देह के अस्तित्व के बिना तुम सब सदैव ही पापियों और अपराधियों में प्रमुख और शव समान होते। तुम सबको यह जानना चाहिये कि बिना इस देह के अस्तित्व के समस्त मानवजाति को एक अवश्यंभावी संकट का सामना करना होगा, और अंत के दिनों में मानवजाति के लिये परमेश्वर के कठोर दण्ड से बच पाना कठिन होगा। इस साधारण शरीर के जन्म के बिना तुम सबकी दशा ऐसी होगी जिसमें न जीवन होगा और न मौत आयेगी, तुम लोग चाहे उसकी कितनी भी खोज करो; इस शरीर के अस्तित्व के बिना, तुम सब आज इस सत्य को नहीं पा सकोगे और न परमेश्वर के सिंहासन के पास आ पाओगे। बल्कि तुम सभी परमेश्वर से दण्ड पाओगे क्योंकि आपने जघन्य पाप किये हैं। क्या तुम सब जानते हो? यदि परमेश्वर का वापस देह में लौटना न हो, तो किसी को भी उद्धार का अवसर नहीं मिलेगा; और यदि इस देह का आगमन न होता, तो उसने बहुत पहले पुराने युग को समाप्त कर दिया होता। इस प्रकार से सोचो, क्या तुम लोग परमेश्वर के दूसरी बार देहधारण को नकार सकते हो? तुम सब जबकि इस साधारण मनुष्य से बहुत अधिक बड़ा लाभ प्राप्त कर सकते हो, तब तुम लोग उसे स्वीकार करने के लिये तैयार क्यों नहीं हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

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