परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 11" | अंश 60

मानवजाति में प्रत्येक व्यक्ति को मेरे आत्मा के अवलोकन को स्वीकार करना चाहिए, अपने हर वचन और कार्य की बारीकी से जाँच करनी चाहिए, और इसके अलावा, मेरे चमत्कारिक कर्मों पर विचार करना चाहिए। पृथ्वी पर राज्य के आगमन के समय तुम लोग कैसा महसूस करते हो? जब मेरे पुत्र एवं लोग मेरे सिंहासन की ओर वापिस प्रवाहित होते हैं, तो मैं महान सफेद सिंहासन के सम्मुख औपचारिक रूप से न्याय आरम्भ करता हूँ। जिसका अर्थ है कि, जब मैं पृथ्वी पर व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य आरम्भ करता हूँ, और जब न्याय का युग अपने समापन के समीप होता है, तो मैं अपने वचनों को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की ओर निर्देशित करना आरम्भ करता हूँ और अपनी आत्मा की आवाज़ को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में जारी करता हूँ। मेरे वचनों के माध्यम से, मैं उनमें से सभी लोगों और चीज़ों को धो कर साफ कर दूँगा जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर हैं, ताकि भूमि अब और अधिक गंदी और व्यभिचारी नहीं हो, बल्कि एक पवित्र राज्य हो। मैं सभी चीज़ों को नया कर दूँगा, ताकि वे मेरे उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएँगी, ताकि वे अब फिर से पार्थिव श्वास को धारण नहीं करेंगी, और धरती की गंध से अब और दूषित नहीं होंगी। पृथ्वी पर, मनुष्य ने मेरे वचनों के लक्ष्य और मूल को टटोला है, और मेरे कर्मों को देखा है, फिर भी किसी ने भी वास्तव में मेरे वचनों के मूल को नहीं जाना है, और किसी ने भी कभी भी वास्तव में मेरे कर्मों की चमत्कारिकता को नहीं देखा है। यह केवल आज है, जब मैं व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के बीच में आकर अपने वचनों को कहता हूँ, कि मनुष्यों को मेरे बारे में अल्पज्ञान है, अपने विचारों में “मेरे” लिए स्थान को हटा रहे हैं, उसके बदले अपनी चेतना में व्यवहारिक परमेश्वर के लिए स्थान बना रहे हैं। मनुष्य की धारणाएँ हैं और उत्सुकता से भरा है; परमेश्वर को कौन नहीं देखना चाहेगा? कौन परमेश्वर का सामना नहीं करना चाहेगा? फिर भी केवल एक चीज जो मनुष्य के हृदय में एक निश्चित स्थान धारण किए हुए है वह है परमेश्वर जिसे मनुष्य महसूस करता है कि अज्ञात और अमूर्त है। यदि मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं बताया होता तो किसने इसे महसूस किया होता? किसने सच में विश्वास किया होता कि मैं वास्तव में विद्यमान हूँ? निश्चित रूप से जरा सी भी शंका के बिना? मनुष्य के हृदय में “स्वयं” और वास्तविकता में “स्वयं” के बीच एक बहुत ही विशाल अंतर है, और उनके बीच तुलना करने में कोई भी सक्षम नहीं है। यदि मैं देहधारी नहीं होता, तो मनुष्य ने मुझे कभी भी नहीं जाना होता, और यहाँ तक कि उसने मुझे जान भी लिया होता, तो क्या इस प्रकार का ज्ञान अभी भी एक धारणा नहीं होता? प्रत्येक दिन मैं लोगों के अनवरत प्रवाह के बीच चलता हूँ, और प्रत्येक दिन मैं प्रत्येक व्यक्ति के भीतर कार्य करता हूँ। जब मनुष्य मुझे वास्तव में देख लेगा, तो वह मुझे मेरे वचनों में जानने में समर्थ बन जाएगा, और उस उपाय को जिसके माध्यम से मैं बोलता हूँ और साथ ही मेरे इरादों को समझ जाएगा।

जब राज्य औपचारिक तौर पर पृथ्वी पर आता है, तो सभी चीजों में से कौन शान्त नहीं होती है? सभी मनुष्यों में से कौन भयभीत नहीं होता है? मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हर जगह चलता हूँ, और प्रत्येक चीज मेरे ही द्वारा व्यक्तिगत रूप से व्यवस्थित की जाती है। इस समय, कौन नहीं जानता है कि मेरे कार्य अद्भुत हैं? मेरे हाथ सभी चीजों को थामते हैं, फिर भी मैं सभी चीजों से ऊपर हूँ। क्या आज मनुष्यों के बीच मेरा देहधारण और मेरी व्यक्तिगत उपस्थिति मेरी विनम्रता और प्रच्छन्नता का सच्चा अर्थ नहीं है? बाहरी तौर पर, कई लोग मेरी अच्छे के रूप में सराहना करते हैं, और खूबसूरत के रूप में मेरी प्रशंसा करते हैं, किन्तु कौन मुझे वास्तव में जानता है? आज, मैं क्यों कहता हूँ कि तुम लोग मुझे जानते हो? क्या मेरा लक्ष्य बड़े लाल अजगर को शर्मिन्दा करना नहीं है? मैं मनुष्य को मेरी प्रशंसा करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहता हूँ, बल्कि चाहता हूँ कि वह मुझे जाने, जिसके माध्यम से वह मुझे प्रेम करने लगेगा, और इस प्रकार से मेरी प्रशंसा करने लगेगा। ऐसी प्रशंसा अपने नाम के योग्य है और एक खोखली बात नहीं है; केवल इस प्रकार की प्रशंसा ही मेरे सिंहासन तक पहुँच सकती है और आसमान में ऊँची उड़ान भर सकती है। क्योंकि मनुष्य को शैतान के द्वारा प्रलोभित और भ्रष्ट किया गया है, क्योंकि उस पर धारणाओं की सोच द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया है, इसलिए सम्पूर्ण मानवजाति को जीतने, मनुष्य की सम्पूर्ण धारणाओं को उजागर करने, और मनुष्य की सोच की धज्जियाँ उड़ाने के उद्देश्य से मैं देह बन गया हूँ। परिणामरूवरूप, मनुष्य मेरे सामने अब और आडंबर नहीं करता है, और अपनी स्वयं की धारणाओं का उपयोग करके मेरी सेवा अब और नहीं करता है, और इस प्रकार मनुष्य की धारणाओं में “मैं” पूरी तरह से तितर-बितर हो जाता है। जब राज्य आता है, तो मैं सबसे पहले इस चरण के कार्य को आरम्भ करता हूँ, और मैं ऐसा अपने लोगों के बीच करता हूँ। मेरे लोग होने के नाते जो कि बड़े लाल अजगर के देश में पैदा हुए हैं, निश्चित रूप से तुम लोगों के भीतर केवल थोड़ा सा, या अंश भी, बड़े लाल अजगर का ज़हर नहीं है। इस प्रकार, मेरे कार्य का यह चरण मुख्य रूप से तुम लोगों के ऊपर केन्द्रित है, और चीन में मेरे देहधारण के महत्व का एक पहलू है। अधिकांश लोग यहाँ तक कि मेरे द्वारा बोले गए वचनों के एक अंश को भी समझने में असमर्थ रहते हैं, और जब वे समझते भी हैं, तो उनकी समझ धुँधली और संभ्रमित होती है। यह उस विधि के महत्वपूर्ण बिन्दुओं में से एक है जिसके द्वारा मैं बोलता हूँ। यदि सभी लोग मेरे वचनों को पढ़ने में समर्थ थे और उनके अर्थ को समझ रहे थे, तो मनुष्यों में से किसे बचाया जा सकता था, और अधोलोक में नहीं डाला जा सकता था? जब मनुष्य मुझे जान लेगा और मेरा आज्ञापालन करेगा तभी मैं आराम करूँगा, और यही वह समय होगा जब मनुष्य मेरे वचनों के अर्थ को समझने में समर्थ होगा। आज, तुम लोगों की कद-काठी बहुत छोटी है, यह लगभग दयनीय रूप से छोटी है, यहाँ तक कि यह उल्लेख करने के योग्य भी नहीं है—मेरे बारे में तुम्हारे ज्ञान के बारे में तो कहने के लिए कुछ नहीं है।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

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