सत्य का अनुसरण कैसे करें (13) भाग पाँच
क्या तुम सभी लोग दानवों से पुनर्जन्म लिए हुए लोगों की “विकृति” वाली विशेषता की एक अभिव्यक्ति—यानी कुटिलता—का भेद पहचानने में कुछ हद तक समर्थ हो? (हाँ।) इस प्रकार का व्यक्ति विशेष रूप से धोखेबाज, विशेष रूप से कुटिल और विशेष रूप से कपटी और मक्कार होता है। अगर तुम अभी भी उसकी अभिव्यक्तियों को भ्रष्टता के सामान्य प्रकाशन मानते हो और अभी भी भाई-बहनों के रूप में उसकी मदद करते हो और उसे सहारा देते हो तो क्या यह बेवकूफी की अभिव्यक्ति नहीं है? (हाँ।) तुम्हें भविष्य में ये बेवकूफी भरी चीजें दोबारा बिल्कुल नहीं करनी चाहिए; वह मनुष्य नहीं बल्कि दानव है और वह कोई ऐसा नहीं है जिसकी तुम मदद करो और जिसे सहारा दो। वह अपने दिल में जानता है कि सत्य क्या है, और यह कि ईमानदार व्यक्ति होना अच्छा है। लेकिन जानना एक बात है; उसकी अपने से ऐसी कोई अपेक्षा नहीं है और वह कभी भी ईमानदार व्यक्ति होने का अभ्यास नहीं करता है। ऐसा नहीं है कि वह इसका अभ्यास करना चाहता है लेकिन कर नहीं सकता; बल्कि इस तरीके से अभ्यास करने का उसका कभी इरादा ही नहीं होता। इस बारे में सोचो—वह अपने दिल में क्या साजिशें रचता है और क्या योजनाएँ बनाता है? एक भी चीज सकारात्मक चीजों से संबंधित नहीं है और एक भी विचार सकारात्मक विचारों और नजरियों से संबंधित नहीं है। वह सत्य का अभ्यास करने का इरादा नहीं रखता और न ही सही मार्ग पर चलने का इरादा रखता है, और इसलिए वह अपने दिल में सत्य सिद्धांतों की कभी भी तलाश नहीं करता और न ही यह तलाश करता है कि परमेश्वर के इरादों के अनुसार कैसे कार्य करना है। वह एक सृजित प्राणी का कर्तव्य पूरा करने या समर्पित होने और अपनी ईमानदारी अर्पित करने का इरादा भी नहीं रखता। वह जिन चीजों का जोड़-भाग करता है वे सब कुटिल चीजें हैं। कुछ लोग कहते हैं, “वह जो भी जोड़-भाग करता है, वह उसकी आंतरिक दुनियाओं का मामला है—उसका भेद पहचानना आसान नहीं है। जब वह इस बारे में खुलकर बात ही नहीं करता और इस पर संगति ही नहीं करता तब दूसरे लोग यह कैसे जान सकते हैं कि वह क्या सोच रहा है? वह बाहर से काफी अच्छा व्यवहार करता है और फिलहाल चल रहे कामों में खुद को व्यस्त भी रखता है। तुम यह क्यों कहते हो कि वह कुटिल है और उसे दानवों के रूप में क्यों निरूपित करते हो?” दूसरे लोग कहते हैं, “वह बस जरा-सी दुष्ट नजर और जरा-सी मक्कारी भरी मुस्कान प्रकट करता है; हम अभी भी इस चीज की असलियत नहीं देख सकते कि वह अपनी आंतरिक दुनियाओं में क्या सोच रहा है।” तो यह भेद कैसे पहचाना जा सकता है कि वह दानव है? व्यक्ति के विचार अमूर्त होते हैं; अगर वह उन्हें व्यक्त नहीं करता है तो तुम उसे नहीं देख सकते या उसका पता नहीं लगा सकते और तुम उसका भेद नहीं पहचान पाओगे। हालाँकि, किसी व्यक्ति के विचार और नजरिए चाहे जो भी हों, वह अपनी आंतरिक दुनिया में चाहे किसी भी चीज की लालसा या जोड़-भाग करता हो, वह अपने उद्देश्य हासिल करने के लिए निश्चित रूप से कार्य करेगा और इसलिए उसके पास हमेशा कुछ ऐसी चीजें होंगी जिन्हें वह जीता है, कुछ अभिव्यक्तियाँ होंगी। जब तक वह लोगों के बीच रहेगा तब तक दूसरे लोग उन चीजों को देखने या उनके संपर्क में आने में समर्थ होंगे जिन्हें वह करता है। हो सकता है कि तुम्हें पता न हो कि वह अपने दिल की गहराइयों में क्या जोड़-भाग कर रहा है, क्या साजिश रच रहा है और क्या योजना बना रहा है, लेकिन वह जो भी साजिश रचता है, योजना बनाता है और जोड़-भाग करता है, वे सब एक दिन उसके द्वारा बेनकाब और अभिव्यक्त हो जाएँगे; वह उन्हें वास्तविकता में बदल देगा और वह लोगों के बीच कुछ क्रियाकलाप करेगा। जब ये चीजें तुम्हारी आँखों के सामने घटित होंगी तब क्या तुम उन्हें देखने में समर्थ नहीं होगे? क्या तुम उस व्यक्ति का भेद पहचानने में समर्थ नहीं होगे? कुछ लोग कहते हैं, “अगर मैं उसकी अभिव्यक्तियाँ देख लूँ तो भी मुझे नहीं पता होता कि इस प्रकार के व्यक्ति का भेद कैसे पहचानना है या उसे कैसे निरूपित करना है।” इसे सँभालना आसान है; इस प्रकार के व्यक्ति में कई विशेषताएँ होती हैं और तुम इन विशेषताओं के जरिए उसका भेद पहचान सकते हो। पहली विशेषता यह है कि वह हमेशा अपनी खुद की मर्जी के अनुसार कार्य करता है और कभी भी सत्य सिद्धांतों की तलाश नहीं करता। वह चाहे कुछ भी करे, उसकी योजना वह स्वयं पहले ही बना लेता है और पूरी तरह से अपनी खुद की योजनाओं, सोचने के तरीकों और इरादों के अनुसार, पूरी तरह से अपनी इच्छानुसार कार्य करता है। वह सबकी राय नहीं पूछता और यकीनन इससे भी ज्यादा वह सत्य सिद्धांतों की तलाश नहीं करता या कार्य-व्यवस्थाओं के अनुसार कार्य नहीं करता। अगर तुम इन अभिव्यक्तियों को देख सकते हो तो क्या फिर दानव पूरी तरह से उजागर नहीं हो जाते हैं? (हाँ।) कुछ लोग कहते हैं, “शायद वे सत्य समझते हैं और सत्य सिद्धांत जानते हैं, इसलिए वे दूसरों से चर्चा किए बिना ही जानते हैं कि क्या करना है।” यह कथन फिर से गलत है; यह चीजों की असलियत देखने में असमर्थता को दर्शाता है। तुम लोगों के लिए, दानव जो चीजें कहते हैं और करते हैं, वे मुश्किल रुकावटों की एक श्रृंखला हैं। चाहे उन्होंने भाई-बहनों की राय माँगी हो या नहीं, तुम्हें स्पष्ट रूप से यह देखना चाहिए कि उनके क्रियाकलापों का उद्देश्य, मकसद, शुरुआती बिंदु और सिद्धांत उनकी अपनी प्रतिष्ठा, रुतबे और सम्मान को बचाने के लिए हैं या कलीसिया के कार्य को बचाने के लिए हैं, और इससे जो अंतिम प्रभाव हासिल हुआ, क्या वह परमेश्वर के घर के हितों को बचाता है, और क्या यह ज्यादातर लोगों के लिए हानि, नुकसान और अहित का कारण बनता है या लाभ का। दानवों से पुनर्जन्म लिए हुए लोग चाहे कुछ भी करें, यह हमेशा अपने खुद के हितों को बचाने के लिए होता है; यह दानवों से पुनर्जन्म लिए हुए लोगों की एक और विशेषता है। उनकी नजर में उनके हित सभी चीजों से ऊपर हैं, ठीक किसी व्यापार करने वाले व्यापारी की तरह : हित सर्वोपरि हैं। किसके हित सर्वोपरि हैं? दानवों के अपने हित सर्वोपरि हैं। अगर किसी चीज को करने से उनके हित, सम्मान, रुतबा, प्रतिष्ठा या भौतिक संपत्तियाँ और धन सुरक्षित रह सकते हैं तो वे खुद को बिल्कुल भी रोकेंगे नहीं, बल्कि इसे अंत तक पूरा करेंगे। भले ही ऊपरी स्तर के अगुआ या भाई-बहन इसका विरोध करें और इसे आगे पूरा न किया जा सके और वे सामने रुकावट की दीवार खड़ी पाएँ, तो भी वे गोलमोल युक्तियाँ अपनाएँगे, सभी विरोधियों को हटाने और सभी बाधाओं को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे ताकि वे जो करना चाहते हैं उसे जारी रख सकें। वे बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेंगे; वे सिर्फ अपने हितों का बचाव करते हैं। अब तुम इसे स्पष्ट रूप से देख सकते हो : चाहे वे योजनाएँ हों, साधन हों, उपाय हों या वे कदम हों जिनके बारे में वे साजिश रचते हैं, योजना बनाते हैं और उपाय करते हैं, वे अपने मन में इन सारी चीजों का जोड़-भाग कर चुके होते हैं; वे सिर्फ हितों के बारे में सोचते हैं और उनके मन हितों के विचारों से भरे होते हैं; किसका उपयोग करना है, किसके करीब जाना है, किससे दूर रहना है, किसका समर्थन करना है, किसका विरोध करना है, किसे बर्खास्त करवाना है—वे अपने हितों के अनुसार इन सब चीजों की रणनीति बनाते हैं। अगर कार्य करने और अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में वे इस बिंदु तक पहुँच जाते हैं तो वे मसीह-विरोधी हैं, दानव हैं जो अपना असली रूप प्रकट कर रहे हैं। ऐसे लोग बेहद रहस्यमय और जोड़-भाग करने वाले होते हैं; वे हर रोज इन चीजों पर चिंतन करते हैं। अगर उन्हें कलीसिया के सभी लोगों को पूरी तरह से समझना हो तो कितना समय लगेगा? जब वे कलीसिया के सभी सदस्यों की स्थिति पर, हर व्यक्ति की वास्तविक समस्याओं और असली कठिनाइयों पर स्पष्ट पकड़ बना लेते हैं और सही समय आ गया होता है, सिर्फ तभी वे कार्य करना शुरू करते हैं, जो चाहें करते हैं—वे किसी के प्रति ढील नहीं दिखाते हैं और कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता है। वे कलीसियाई कार्य करने की आड़ में अपने खुद के उद्यम चलाते हैं, अपने खुद के लिए लाभ हासिल करने का प्रयास करते हैं। अंततः नुकसान कलीसिया के कार्य और भाई-बहनों के जीवन-प्रवेश को होता है। वे सभी भाई-बहनों के जीवन-प्रवेश और परमेश्वर के घर के हितों की बलि चढ़ाने की कीमत पर अपने व्यक्तिगत हितों की पूर्ति को सर्वोपरि रखने का अपना लक्ष्य हासिल करते हैं। इस बिंदु पर क्या तुम उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते? वे जिस तरीके से चीजें करते हैं उसे और अंतिम नतीजों को देखा जाए तो वे दानव हैं; वे मनुष्य नहीं हैं। वे दिन भर बहुत कम बोलते हैं और मुश्किल से ही कभी अपने विचार व्यक्त करते प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तव में वे हर रोज यही जोड़-भाग करते हुए बिताते हैं कि कैसे कार्य करना है ताकि वे लाभ हासिल कर सकें। हालाँकि बाहर से वे काफी शांत, काफी परिष्कृत, काफी नाजुक और काफी शिष्ट दिखाई पड़ते हैं और बातूनी नहीं दिखाई पड़ते, लेकिन भीतर से उनके दिल उफनते हुए सागर की तरह अशांत होते हैं। वे इन चीजों पर पूरी पकड़ बना लेते हैं और फिर वे उन योजनाओं को कार्यान्वित करते हैं जिन्हें उन्होंने सोच रखा है, और अंतिम नतीजा यह होता है कि वे ठीक अपनी साजिश के अनुसार सफल होते हैं। क्या यह दानव का कार्य नहीं है? (हाँ।) यह दानव का कार्य है। इस बिंदु पर क्या तुम उनकी असलियत नहीं देख सकते?
पिछले वर्ष के सुसमाचार कार्य में उत्पन्न हुई एक बहुत ही बड़ी समस्या सीधे कुछ दानवों से संबंधित थी, यह सीधे दानवों के क्रियाकलापों से संबंधित थी। उन दानवों ने जब कार्य किया तब उन्होंने सत्य सिद्धांतों की कभी भी तलाश नहीं की। ऊपरवाले द्वारा कार्य सौंपे जाने के बाद उन्होंने उसे व्यक्तिगत रूप से तत्परता से स्वीकार तो कर लिया, लेकिन जब वे कलीसियाओं में कार्य करने गए तब वे बस बेतहाशा बुरी चीजें करने लगे। उन्होंने परमेश्वर के घर के हितों का बचाव नहीं किया और नतीजतन परमेश्वर के चढ़ावों का नुकसान हुआ, सुसमाचार कार्य में नुकसान हुआ और कलीसियाई जीवन को नुकसान हुआ; कई क्षेत्रों में नुकसान हुए और उन्होंने कलीसिया के कार्य में भी अराजकता उत्पन्न की। हो सकता है कि तुम यह असलियत नहीं देखो कि दानव क्या सोच रहा है और न ही तुम यह जानो कि उन्होंने सिद्धांतों की तलाश की है या नहीं। लेकिन जब वे कार्य करते हैं और तुम पहले संकेत देखते हो तब तुम जानोगे कि उनके क्रियाकलापों की विधि और स्रोत गलत हैं, वे पूरी तरह से अपना दिखावा कर रहे हैं, अपनी खुद की इच्छानुसार चीजें कर रहे हैं, मनमाने ढंग से और मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं और एक स्वतंत्र राज्य स्थापित कर रहे हैं। इसके अलावा, दानवों के गिरोह एक-दूसरे की रक्षा करते हैं; उनमें से कोई भी परमेश्वर के घर के हितों का बचाव नहीं करता है। बड़े दानव चाहे कुछ भी करें, अनुयायी और छोटे दानव उनकी चापलूसी करने और तलवे चाटने में एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। बड़े दानव लापरवाही से और मनमर्जी से कार्य करते हैं और छोटे दानव उनकी देखादेखी करते हैं और उनकी खुशामद करते हैं—वे एक-दूसरे के साथ घनिष्ठता से कार्य करते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि वे अभी भी इस तथ्य की असलियत नहीं देख सकते कि किसी व्यक्ति का सार दानव का सार है। ऐसे में वे जो कुछ करते हैं उसकी प्रकृति और उसके नतीजों को देखो। अगर प्रकृति और नतीजे बहुत गंभीर हैं तो यह निश्चित किया जा सकता है कि यह किसी दानव का कार्य है। उदाहरण के लिए, सुसमाचार का प्रचार करने में प्राप्त लोगों की झूठी संख्याएँ रिपोर्ट करने के मामले में कुछ लोगों ने कहा, “क्या झूठी संख्याएँ रिपोर्ट करना सिद्धांतों के खिलाफ नहीं है? हमें वास्तविक संख्याएँ रिपोर्ट करनी चाहिए; जितने भी लोग प्राप्त हुए हैं, हमें उतने लोग ही रिपोर्ट करने चाहिए। हम अपनी रिपोर्ट में झूठ कैसे बोल सकते हैं? जब सौ लोग प्राप्त हुए तब हम एक हजार लोग कैसे रिपोर्ट कर सकते हैं या जब एक हजार लोग प्राप्त हुए तब हम दस हजार लोग कैसे रिपोर्ट कर सकते हैं?” इन नकली अगुआओं में से एक ने क्या कहा? “तुम्हें इसकी रिपोर्ट इसी तरीके से करनी चाहिए; हर कोई इसकी रिपोर्ट इसी तरीके से करता है। यही पवित्र आत्मा का प्रवाह है!” क्या तुम लोग इस कथन का भेद पहचान सकते हो? झूठी और मनगढ़ंत संख्याएँ रिपोर्ट करना स्पष्ट रूप से परमेश्वर को धोखा देने का प्रयास है। यह पवित्र आत्मा का प्रवाह कैसे हो सकता है? यह एक बुरा चलन है। पवित्र आत्मा ने लोगों से झूठ बोलने या झूठी संख्याएँ रिपोर्ट करने के लिए कभी नहीं कहा है; सिर्फ दानव ही ऐसी चीजें कह सकते हैं। क्या तुम लोग इसका भेद पहचान सकते हो? चूँकि वह नकली अगुआ ऐसे बेतुके शब्द बोल पाया, इसलिए वह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है; वह नकली अगुआ भी दानवों की श्रेणी का है। क्या तुम लोग इस मामले की असलियत देख सकते हो? क्या तुम लोग यह भेद पहचान सकते हो कि ऐसे शब्द दानवों द्वारा बोले जाते हैं? सिर्फ दानव और शैतान ही ऐसी चीजें कह सकते हैं। अगर तुम लोग इस मामले की असलियत नहीं देख सकते तो तुम लोगों में भेद पहचानने की क्षमता की बहुत ही ज्यादा कमी है। अगर जानवरों से पुनर्जन्म लिए हुए लोग इसकी असलियत नहीं देख सकते तो यह कुछ हद तक क्षम्य है क्योंकि वे मनुष्य नहीं हैं; उनमें मानवीय आत्मा नहीं है। अगर तुममें सच में भेद पहचानने की क्षमता है और तुम इस मामले की असलियत देख सकते हो तो क्या तुमने अपनी जिम्मेदारी पूरी की है? क्या तुम इस मामले को रोकने और उजागर करने के लिए उठ खड़े हुए हो? मान लो कि तुम कहते हो, “मैंने इसकी असलियत देखी है, लेकिन मेरे साधारण रुतबे के कारण मेरे शब्द कम महत्व रखते हैं और मैं कमजोर और अकेला हूँ; मैं इसे रोकने या उजागर करने की हिम्मत नहीं कर सकता!” ऐसे में तुम एक निकम्मे कायर हो! तुम अपनी बात पर अड़े नहीं रहे और तुम अपनी गवाही में डटे नहीं रहे; तुम परमेश्वर के वफादार सेवक नहीं हो, तुमने एक व्यक्ति की जिम्मेदारी पूरी नहीं की है। तुम बस एक भ्रमित व्यक्ति हो, एक निकम्मे कायर हो। मुझे बताओ, क्या परमेश्वर निकम्मे कायरों को पसंद करता है? (नहीं।) परमेश्वर तुम्हें जीवन प्रदान करता है, तुम्हें सत्य की आपूर्ति करता है और तुम्हारे दैनिक जीवन में शैतान के नुकसान से तुम्हारी रक्षा करता है। लेकिन यह पता चलता है कि तुम सत्य स्वीकार नहीं करते हो, बल्कि बुराई करने के लिए शैतान का अनुसरण करते हो, दानवों के बीच रहते हो और शैतान को तुम्हें नुकसान पहुँचाने की अनुमति देते हो। तुम शैतानों के वास्तविक चेहरों को स्पष्ट रूप से देखते हो, लेकिन फिर भी उन्हें उजागर नहीं करते। यह मुसीबत को दावत देना है; तुम शैतान द्वारा बेवकूफ बनाए जाने के लायक हो। परमेश्वर तुम्हें सत्य की आपूर्ति करता है ताकि तुम्हारी भेद पहचानने की क्षमता बढ़ाने में तुम्हें सक्षम कर सके। अगर तुममें भेद पहचानने की क्षमता है लेकिन फिर भी तुम मूक-बधिर होने का ढोंग करते हो, नकली अगुआओं और मसीह-विरोधियों को उजागर करने के लिए उठ खड़े नहीं होते तो तुम एक निकम्मे कायर हो! तुमने वह जिम्मेदारी पूरी नहीं की है जो एक व्यक्ति को करनी चाहिए; तुम अपनी जिम्मेदारी में लापरवाह हो, तुम कचरा हो, निकम्मे कायर हो, मुफ्तखोर हो, बेकार हो! दानवों का लोगों को सुसमाचार का प्रचार करने में झूठे आँकड़ों की रिपोर्ट करने के लिए मजबूर करना—यह अभ्यास बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए और इसका भेद पहचानना मुश्किल नहीं होना चाहिए। मान लो कि कोई तुम्हें लात या घूँसा मारता है। तुम्हें नहीं पता कि वह तुमसे इस तरह से क्यों पेश आ रहा है और तुम यह भेद नहीं पहचान सकते कि इससे उसका क्या मतलब है। फिर वह तुम्हारी गर्दन पर चाकू घोंप देता है और तब जाकर तुम्हें एहसास होता है, “वह मेरी जान लेने का प्रयास कर रहा है!” मुझे बताओ, आखिर तुम कितने बेवकूफ हो? वह दुर्भावनापूर्ण इरादे से तुम्हें लात मारता है, लेकिन फिर भी तुम यह तक नहीं पहचान सकते कि वह एक दुष्ट व्यक्ति है और तुम अभी भी उससे तर्क करने का प्रयास करते हो, “मैंने तुम्हें नाराज तो नहीं किया, फिर तुम क्यों मुझे लात मार रहे हो? क्या तुममें मानवता है?” अगर वह तुम्हें बिना किसी कारण के लात मारता है तो क्या वह दुष्ट व्यक्ति नहीं है? क्या दुष्ट व्यक्ति से तर्क करने का कोई फायदा है? अगर वह चाकू लेकर तुम पर झपट पड़े तो पछतावों के लिए बहुत देर हो चुकी होगी। जब तक तुम मदद के लिए चिल्लाओगे तब तक बहुत ही ज्यादा देर हो चुकी होगी; तुम्हारी जीवनलीला समाप्त हो चुकी होगी। देखो तुम आध्यात्मिक कद में कितने छोटे हो, तुम कितने बेवकूफ हो! शैतानों का सामना करते समय तुम्हें हमला करने की पहल करनी चाहिए, निष्क्रिय मत बनो। अगर तुम हमेशा निष्क्रिय रहते हो, जब शैतान तुम्हारी जान लेने वाले होते हैं सिर्फ तभी प्रतिक्रिया करते हो और परमेश्वर से तुम्हें बचाने की गुहार लगाते हो तो यह बहुत ही ज्यादा निष्क्रिय होना है, बहुत ही ज्यादा मंदबुद्धि होना है! परमेश्वर ऐसे लोगों को पसंद नहीं करता।
कुछ लोग नकली अगुआओं और मसीह-विरोधियों से संबंधित समस्याओं की रिपोर्ट बहुत ही घुमा-फिराकर करते हैं। वे अपनी स्थानीय कलीसिया में उनकी रिपोर्ट करने की हिम्मत नहीं करते, बल्कि ऐसा करने के लिए दूसरे इलाकों की कलीसियाओं में जाते हैं, वे डरते हैं कि उनके स्थानीय इलाके में कोई यह खबर फैला देगा और बुरे लोग पता लगा लेंगे और उन्हें सताएँगे। इन लोगों का आध्यात्मिक कद इतना छोटा होता है। तुम परमेश्वर में विश्वास रखते हो, फिर भी तुम बुरे लोगों और दानवों से इतना डरते हो? क्या दानवों में इतनी बड़ी शक्ति होती है? क्या दानव तुम्हारी जान ले सकते हैं? क्या तुम्हारा भाग्य दानवों के हाथ में है? तुम उनसे इतना क्यों डरते हो? वे बस बुरे लोग हैं; वे तुम्हारे साथ क्या कर सकते हैं? सबसे बदतर परिदृश्य में भी, इस देश में कानून हैं—तुम किस चीज से डरते हो? यह चीन नहीं है जहाँ दानव बेलगाम घूमते हैं; यह एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ कानून का राज है। और इसके अलावा यह तथ्य बताने की जरूरत नहीं है कि कलीसिया में तुम्हारे भाई-बहन हैं—वे बुरे लोग तुम्हारे साथ क्या कर सकते हैं? कुछ लोग अगुआओं और कार्यकर्ताओं से जुड़े मुद्दों की रिपोर्ट करते हुए ही इतने डर जाते हैं। यह उनमें कम आस्था होने की समस्या नहीं है; ये तो निकम्मे कायर और डरपोक लोग हैं जो जीने तक के लायक नहीं हैं! परमेश्वर ने तुम्हें जो साँस दी, वह तुम पर बर्बाद हो गई है; इसे किसी पशु को देना बेहतर होता। पशु भी दबाए जाने पर व्यक्ति को काट सकता है। तुम जीवित हो, फिर भी तुममें इतनी-सी भी हिम्मत नहीं है; तुम बहुत ही ज्यादा कायर हो! हालाँकि कुछ लोग बुरे लोगों से सामना होने पर उनसे सामने से लड़ने की हिम्मत नहीं करते, लेकिन वे कलीसिया के कार्य का बचाव करने के लिए बुद्धिमानी का उपयोग करते हैं। वे बुरे लोगों के मुद्दों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को करते हैं और सत्य से प्रेम करने वाले लोगों के साथ मिलकर उन बुरे लोगों को उनके पदों से हटाने के लिए एकजुट हो जाते हैं। उनमें इस तरह का संकल्प होता है : “तुम बुरे व्यक्ति हो, लेकिन मैं तुमसे नहीं डरता। मैं तुम्हें परमेश्वर के घर के कार्य में बाधा डालने और तोड़-फोड़ करने के लिए कोई बुराई नहीं करने दूँगा। मैं तुम्हारी मर्जी नहीं चलने दूँगा। मैं तुमसे लड़ने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दूँगा—तुम मेरे साथ क्या कर सकते हो? सबसे बुरा यही होगा कि तुम मेरी जान ले लोगे, लेकिन जब तक मुझमें साँस है, मैं अंत तक तुमसे लड़ूँगा!” क्या तुम लोगों में यह आस्था है? उन निकम्मे कायरों में ऐसी आस्था नहीं है। जब वे दानवों को कलीसिया के कार्य में बाधा डालते देखते हैं तब वे अपने दिलों में जानते हैं कि यह गलत है, ये दानव और मसीह-विरोधी हैं जो बुराई कर रहे हैं। लेकिन वे सोचते हैं, “मैं उन्हें उजागर नहीं कर सकता और न ही उनकी रिपोर्ट कर सकता हूँ; मुझे अपने लिए कोई मुसीबत नहीं खड़ी करनी चाहिए। मुसीबत जितनी कम हो, उतना ही अच्छा है; अपनी रक्षा करना अत्यंत जरूरी है। अगर बुरे लोगों को उजागर करने के कारण मुझे कलीसिया से निष्कासित कर दिया जाता है और मैं परमेश्वर में विश्वास रखने और उद्धार पाने के मौके तक से वंचित रह जाता हूँ और मैं अपना कर्तव्य तक पूरा नहीं कर सकता तो क्या मुझे पूरी तरह से हटा नहीं दिया गया होगा?” वे बुरे लोगों को उजागर करने की हिम्मत नहीं करते, वे उनके प्रतिशोध से बहुत डरते हैं। इसलिए, जब बड़ा लाल अजगर परमेश्वर के चुने हुए लोगों का पागलों की तरह दमन और उत्पीड़न करता है तब वे भी निश्चित रूप से डर जाते हैं और अगर वे गिरफ्तार हो गए तो वे निश्चित रूप से यहूदा बन जाएँगे और परमेश्वर को धोखा देंगे। इसलिए अगर तुम कलीसिया में बुरे लोगों से डरते हो और जब उन्हें बुराई करते देखते हो तब तुम उन्हें उजागर करने की हिम्मत नहीं करते तो क्या यह शैतान के आगे आत्मसमर्पण करना नहीं है? परमेश्वर तुम्हें सत्य की आपूर्ति करता है, तुम्हें आस्था देता है और उसने अब तक तुम्हारी रक्षा की है और तुम्हें जीवित रखा है। तुम वही साँस लेते हो जो परमेश्वर ने तुम्हें दी है, उसी सत्य का आनंद लेते हो जिसकी वह तुम्हें आपूर्ति करता है, और उसके अनुग्रह का आनंद लेते हो। तुम्हारे पास कलीसियाई जीवन की इतनी अच्छी स्थितियाँ हैं और तुम काफी आराम से रहते हो। लेकिन जब बुरे लोग परमेश्वर के घर में विघ्न उत्पन्न करते हैं तब तुम इसे देखते हो और इसका भेद पहचान लेते हो, लेकिन फिर भी तुम एक शब्द तक कहने की हिम्मत नहीं करते, यहाँ तक कि तुम जोर से साँस लेने की भी हिम्मत नहीं करते—तुम किस तरह के प्राणी हो? तुम जीने तक के लायक नहीं हो! तुम अपनी स्थानीय कलीसिया के मुद्दों की रिपोर्ट स्थानीय अगुआओं को नहीं करते, बल्कि उनकी रिपोर्ट करने के लिए दूसरे इलाकों की कलीसियाओं में जाते हो। इस तरह की ओछी, कायर मानसिकता के चलते क्या तुम महान चीजें पूरी कर सकते हो? और फिर भी तुम कहते हो कि तुम परमेश्वर की गवाही देना चाहते हो और विजेता बनना चाहते हो—तुम कुछ भी नहीं हो, तुम एक जानवर से भी बदतर हो! कुत्ता तक अपने मालिक की रक्षा करना जानता है। अगर कोई अजनबी आ जाता है तो कुत्ता अपनी पूरी ताकत लगाकर भौंकता है, क्योंकि उसे अपने मालिक की सुरक्षा को खतरा महसूस होता है। कुछ कुत्ते बड़े नहीं होते और उन्हें एक ही लात से जमीन पर गिराया जा सकता है, लेकिन वे डरते नहीं हैं और तब भी अपनी पूरी ताकत लगाकर भौंकते हैं—वे ऐसा अपने मालिकों की रक्षा करने के लिए करते हैं। कुछ कुत्ते तो अपने मालिकों की रक्षा करने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं। इन लोगों में इतनी-सी आस्था तक नहीं है और ये इतने भी वफादार नहीं हैं जितना कि अपने मालिक के प्रति एक पहरेदार कुत्ता होता है—ये सब निकम्मे नीच हैं! वे परमेश्वर के अनुग्रह और भरण-पोषण का मुफ्त में आनंद लेते हैं, बदले में कुछ नहीं देते और यहाँ तक कि यह भी मानकर चलते हैं कि परमेश्वर को लोगों से प्रेम करना ही चाहिए और उन पर दया दिखानी ही चाहिए। जब वे देखते हैं कि कलीसिया के कार्य में बाधा डाली जा रही है और तोड़-फोड़ की जा रही है, तब वे अपने दिलों में कोई दुःख महसूस नहीं करते। इसका मतलब है कि वे एक जानवर से भी बदतर हैं, एक पहरेदार कुत्ते से भी कहीं ज्यादा बदतर हैं। भविष्य में जब फिर से तुम्हारा सामना दानवों से हो तब तुम्हें क्या करना चाहिए? अगर तुम उनकी असलियत नहीं देख पा रहे हो और यह नहीं जानते कि जब वे मुस्कुराते हैं तब वे क्या बुरी चीजें करने की योजना बनाते हैं या उनकी आँखों के भावों में कौन-से दुष्ट इरादे छिपे हैं तो पहले तुम उनकी जाँच-परख कर सकते हो। उनका पर्यवेक्षण करने के लिए एक विश्वसनीय व्यक्ति ढूँढ़ो और देखो कि वे गुप्त रूप से क्या कहते और करते हैं और अपने साथियों के साथ मिलकर क्या साजिश रचते हैं। तुम्हें उनकी सभी साजिशों और योजनाओं को शुरू में ही नष्ट कर देना चाहिए, उन्हें कामयाब नहीं होने देना चाहिए और परमेश्वर के घर के हितों को नुकसान नहीं पहुँचने देना चाहिए। कुछ लोगों में इस तरह का संकल्प होता है : “मुझे परमेश्वर के घर के द्वार की अच्छी तरह से रखवाली करनी है, मुझे एक अच्छा पहरेदार कुत्ता बनना है। मुझे नहीं पता कि दूसरे लोग इस मामले से कैसे पेश आएँगे, लेकिन जहाँ तक मेरी बात है, मैं इसे यूँ ही नहीं जाने दूँगा; मैं दानवों से अंत तक लड़ूँगा!” इसे ही परमेश्वर के प्रति वफादारी कहते हैं; यह उनके द्वारा यह प्रमाणित करने का प्रयास नहीं है कि वे कितने सक्षम हैं। “मैं ऐसा करने के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखूँगा; मेरे यहाँ रहते किसी भी दानव के पास अपनी मर्जी चलाने या कामयाब होने का कोई मौका नहीं है! मैं परमेश्वर के घर के द्वार की रखवाली करूँगा, भाई-बहनों की रक्षा करूँगा, परमेश्वर के घर के हितों की रक्षा करूँगा और परमेश्वर के घर के कार्य का बचाव करूँगा। किसी के पास बाधा डालने या तोड़-फोड़ करने का कोई मौका नहीं है—अगर मैंने किसी को ऐसी चीजें करते देखा तो मैं उसके साथ नरमी नहीं बरतूँगा। अगर उसे बर्खास्त किया जाना चाहिए तो उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा, अगर उसे निष्कासित किया जाना चाहिए तो उसे निष्कासित कर दिया जाएगा और अगर उसे बाहर निकाल दिया जाना चाहिए तो उसे बाहर निकाल दिया जाएगा। मैं बिल्कुल भी पीछे नहीं हटूँगा!” क्या तुम लोगों में यह आस्था है? (हाँ।) जब मनुष्यों से या पशुओं से लड़ने की बात आती है तब अगर तुम काफी सक्षम हो, लेकिन जब तुम्हें दानवों से लड़ना पड़ता है तब तुम दब्बू बन जाते हो, डर जाते हो और एक कछुए की तरह अपनी खोल में सिमट जाते हो तो परमेश्वर कहता है कि तुम्हारा काम तमाम हो गया है, तुम नाकारा हो, तुम सत्य प्राप्त नहीं कर पाओगे और तुम्हें उद्धार नहीं मिल सकता। दानवों से लड़ना एक सच्ची लड़ाई है; यह परमेश्वर के लिए गवाही देने की लड़ाई है। यह एक ऐसी लड़ाई है जो विजेताओं, संतों और परमेश्वर के अनुयायियों को लड़नी ही पड़ेगी, यह वह रुख है जो उन्हें अपनाना ही पड़ेगा और यह वह दृढ़ निश्चय और संकल्प है जो उनमें होना ही चाहिए। “दानवों से अंत तक लड़ो! या तो वे हैं या मैं! मैं बिल्कुल भी नहीं डरूँगा, मैं बिल्कुल भी सहमकर पीछे नहीं हटूँगा और मैं बिल्कुल भी हतोत्साहित नहीं होऊँगा!” क्या तुम लोगों में यह दृढ़ निश्चय है? (अब हममें है।)
कुछ लोग आध्यात्मिक कद में बहुत ही छोटे होते हैं। जब उनका सामना शक्ति और रुतबे वाले लोगों से होता है, विशेष रूप से उन लोगों से जो भयानक दिखने वाले, घाघ और बेहद शातिर और साथ ही धूर्त और चालाक भी होते हैं तब उन्हें अपने दिलों में डर महसूस होता है। यह बात बहुत अच्छी तरह से जानते हुए भी कि ये लोग दानव हैं, वे उनकी झूठी तारीफ करने, उन्हें मनाने और उन्हें जगह देने पर अड़े रहते हैं और उन्हें रत्ती भर भी नाराज करने की हिम्मत नहीं करते, उन्हें उजागर करने की तो बात ही छोड़ दो। जब वे दानवों और शैतानों को देखते हैं तब वे किसी भी सिद्धांत को कायम रखने की हिम्मत नहीं करते और न ही उनमें संतों जैसी कोई मर्यादा होती है। कुछ तो यहाँ तक कहते हैं, “हमें इन लोगों के साथ तालमेल बिठाना चाहिए और उनके साथ अच्छे रिश्ते बनाने चाहिए, नहीं तो कलीसिया का कार्य आगे नहीं बढ़ सकता।” स्पष्ट रूप से ये लोग परमेश्वर के घर में कोई अच्छा प्रयोजन पूरा नहीं करते हैं और स्पष्ट रूप से ये वही लोग हैं जिन्हें दानवों और मसीह-विरोधियों के रूप में निरूपित किया जाता है और जिन्हें निष्कासित या बहिष्कृत कर दिया जाना चाहिए, लेकिन फिर भी कुछ लोग उन्हें बर्दाश्त करते हैं। इन व्यक्तियों को लगता है कि वे उन लोगों को नहीं हरा सकते; वे अपने दिलों में भयभीत और आतंकित हैं, अपनी स्वयं की स्थिति के बारे में चिंतित हैं और उनके द्वारा अलग-थलग कर दिए जाने या मजाक उड़ाए जाने के बारे में चिंतित हैं। उनमें उनसे निपटने की बुद्धिमानी नहीं है, उनमें उनसे लड़ने के लिए पर्याप्त आध्यात्मिक कद की कमी है और वे बार-बार सहमकर पीछे हट जाते हैं, बार-बार हार मान लेते हैं और समझौता कर लेते हैं। नतीजतन, तीन महीने और फिर छह महीने बीत जाते हैं और अंत में कलीसिया का कार्य ठप हो जाता है और कलीसियाई जीवन अस्त-व्यस्त। वे इन बुरे लोगों और दानवों को विघ्न उत्पन्न करते हुए स्पष्ट रूप से देखते हैं, वे इन स्थानीय गुंडों को कलीसिया में बेलगाम ऊधम मचाते देखते हैं, लेकिन फिर भी वे अपनी सुरक्षा, रुतबे, प्रतिष्ठा और हितों पर आँच आने के डर से उन्हें उजागर करने या उनसे निपटने की हिम्मत नहीं करते हैं। तुम्हारा रुतबा, तुम्हारी प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत सुरक्षा इतनी महत्वपूर्ण कैसे हो सकती है? क्या परमेश्वर के घर के कार्य की कोई भी मद तुम्हारे उस तुच्छ जीवन से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है? बुरे से बुरे परिदृश्य में, अगर तुम परमेश्वर के प्रति वफादारी के कारण कुछ जोखिम उठा भी लेते हो तो क्या परमेश्वर तुम्हारी रक्षा नहीं करेगा? अगर तुम परमेश्वर के घर के हितों का बचाव करने के लिए बुद्धिमानी का उपयोग करते हो और सिद्धांतों के अनुसार कार्य करते हो तो क्या परमेश्वर तुम्हें शैतानों के हवाले कर देगा ताकि वे जब चाहें तब तुम्हारे साथ दुर्व्यवहार करें और तुम्हें कष्टदायक ढंग से नुकसान पहुँचाएँ? (नहीं।) परमेश्वर ऐसे लोगों को बहुत ही संजोकर रखता है, उसके लिए उन्हें संजोकर रखना कभी पर्याप्त नहीं होता है; तो फिर वह तुम्हें शैतानों के हवाले कैसे कर सकता है? तुम्हारी आस्था बहुत ही छोटी है। तुम ठीक उस समय के पतरस की तरह हो—प्रभु यीशु ने उसे समुंदर से पुकारा, “आओ,” जिसका अर्थ था कि पतरस समुंदर पर ऐसे चले जैसे वह कोई समतल जमीन हो, लेकिन पतरस जितना ज्यादा चला, वह उतना ही ज्यादा डरता गया और उसने परमेश्वर में आस्था खो दी। अगर परमेश्वर तुम्हें आने के लिए कहता है तो इसका मतलब है कि उसने तुमसे एक वादा किया है और वह निश्चित रूप से तुम्हारी रक्षा कर सकता है; वह तुम्हें खतरे का सामना नहीं करने देगा। अगर तुम्हारा जीवन खतरे में हो तो भी तुम्हें इसे कैसे सँभालना चाहिए? क्या तुम्हें बस खुशी से अपना जीवन परमेश्वर को नहीं सौंप देना चाहिए? इसमें क्या बड़ी बात है? क्या दानव वास्तव में इतने भयानक हैं? बड़ा लाल अजगर विश्वासियों का दमन करता है और उन्हें गिरफ्तार करता है और फिर भी तुम अपनी आस्था में डटे रह पाते हो; ऐसा कठोर परिवेश तुम्हें भयभीत नहीं करता है। लेकिन जब कलीसिया में कुछ छोटे-मोटे दानव दिखाई देते हैं, तब तुम इतना डर जाते हो कि सहमकर तुरंत वापस अपनी खोल में सिमट जाते हो और बुराई करने में उनका अनुसरण करने के लिए विवश महसूस करते हो। क्या यह तुम्हारी गवाही खोना नहीं है? (हाँ।) यह कहा जा सकता है कि कुछ कलीसियाओं और निश्चित कार्य परिवेशों में दानवों का अपनी मर्जी चलाना, कलीसिया के कार्य को अराजकता में झोंक देना और उसे ठीक जैसे वे चाहते थे वैसे बर्बाद कर देना जिससे भाई-बहनों को अपने कर्तव्य करने के लिए उपयुक्त परिवेश न मिले, यह कुछ लोगों द्वारा इन दानवों की असलियत देख लेने के बावजूद उनसे लड़ने के लिए नहीं उठ खड़े होने, बल्कि अपनी रक्षा करने के लिए इन दानवों और शैतानों से समझौता कर लेने से संबंधित है। यह कहा जा सकता है कि ये लोग जानबूझकर दानवों को बुराई करने और कलीसिया के कार्य में बाधा डालने की अनुमति देते हैं। अगर तुम कलीसिया के कार्य में बाधा डालने वाले दानवों की असलियत देख लेते हो, लेकिन फिर भी उनसे नहीं लड़ते हो या उन्हें उजागर नहीं करते हो तो क्या यह दानवों को बुराई करने की अनुमति देना नहीं है? अगर दानवों द्वारा बुराई करने का पता लगने पर तुम तुरंत उन्हें उजागर कर देते हो, उन्हें सँभालते हो और उन्हें रोकते हो तो कुछ हद तक नुकसानों में कमी लाई जा सकती है और अराजकता कम की जा सकती है। क्या यह परमेश्वर के घर के कार्य और भाई-बहनों के जीवन प्रवेश दोनों के लिए फायदेमंद नहीं है? तो तुम ऐसा क्यों नहीं करते? अगर तुम ऐसा नहीं करते हो तो इसका मतलब है कि तुममें परमेश्वर के प्रति कोई निष्ठा नहीं है। भले ही तुम किसी भी स्तर के अगुआ या कार्यकर्ता हो या कोई साधारण अनुयायी हो, जब तक तुम बुराई करने वाले और कलीसिया के कार्य में बाधा डालने वाले दानवों की असलियत देख लेने पर भी परमेश्वर के घर के हितों की रक्षा करने के लिए उन्हें उजागर नहीं करते हो तब तक तुम अपनी गवाही में दृढ़ता से डटे हुए नहीं हो, तुम एक भ्रमित व्यक्ति हो और तुम जीने के लायक नहीं हो! तुमने एक मनुष्य होने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की है, इसलिए तुम उस साँस को लेने के हकदार नहीं हो जो परमेश्वर ने तुम्हें दी है। तुम समझ रहे हो? (हम समझ रहे हैं।) इस मामले में लोगों को क्या करना चाहिए? तुम चाहे किसी भी तरह के दानव का सामना करो—चाहे वह विकृत हो, बुरा हो, कपटी हो, निष्ठुर हो या शातिर हो—और चाहे उसका उद्देश्य कुछ भी हो, यदि तुम उसे कलीसिया के कार्य में बाधा डालते देखते हो और तुम उसका भेद पहचान लेते हो तो तुम्हें उसे उजागर करने और रोकने के लिए उठ खड़े होना चाहिए। यहीं पर तुम्हारी जिम्मेदारी निहित है। कुछ लोग कहते हैं, “मुझे नहीं पता कि उन्हें रोकने के लिए क्या कहना है।” तो फिर परमेश्वर से प्रार्थना करो और बुद्धिमानी भरी विधियों का उपयोग करते हुए उनसे पेश आओ। अभी के लिए उसे मत उकसाओ; उसे सीधे उजागर करके मत उकसाओ। बल्कि उसे उसकी योजनाओं और उद्देश्यों में सफल होने से रोकने के लिए हर तरीका आजमाओ। सबसे पहले कलीसिया के कार्य का जितना हो सके उतना बचाव करो और सुनिश्चित करो कि परमेश्वर के घर के हित सुरक्षित रहें। फिर उस दानव से निपटने के सबसे उपयुक्त तरीके के बारे में सत्य समझने वालों या अगुआओं और कार्यकर्ताओं से परामर्श करने का अवसर ढूँढ़ो। यह कार्य बुद्धिमानी से किया जाना चाहिए। एक तरफ तुम्हें शैतान से लड़ना होगा, शैतानों और दानवों के बुरे कर्मों को रोकना होगा, भेद पहचानने की क्षमता प्राप्त करने में भाई-बहनों की मदद करनी होगी, और भाई-बहनों की और साथ ही परमेश्वर के घर के कार्य की रक्षा करनी होगी। दूसरी तरफ जितना हो सके, तुम्हें अपनी भी रक्षा करनी होगी। अगर तुम्हारे लिए खतरे या विपत्ति का सामना करना सच में जरूरी हो जाए तो तुम्हें अपने बचाव के रास्ते या सुरक्षा के बारे में सोचे बिना, इसे अपना परम कर्तव्य मानकर करना चाहिए। यह कलीसिया के कार्य की जरूरतों के कारण है और यहीं पर तुम्हारी जिम्मेदारी निहित है। तुम्हें यह करना होगा और तुम्हें यह करना चाहिए; नहीं तो तुम उस जीवन के अयोग्य होगे जो परमेश्वर ने तुम्हें दिया है और उस भरण-पोषण के अयोग्य होगे जिसकी उसने तुम्हें इतने वर्षों से आपूर्ति की है। क्या ऐसा नहीं है? (ऐसा ही है।) दानवों से पेश आने के मामले में सभी को यही रुख अपनाना चाहिए। तुम परमेश्वर के हाथों बनाए गए सृजित प्राणी हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम मनुष्यों की श्रेणी से संबंधित हो या जीवित प्राणियों की किसी और श्रेणी से, जब तक तुम्हारी मौजूदा पहचान मानव है, एक सृजित मनुष्य है, तब तक तुम्हें सृजित मनुष्य की जिम्मेदारियाँ उठानी चाहिए, तुम उनसे बच नहीं सकते। मान लो कि तुम जानते हो कि कोई व्यक्ति चढ़ावे चुरा रहा है, लेकिन तुम न तो इसकी परवाह करते हो और न ही इसके बारे में पूछते हो, कहते हो, “मैं डरता हूँ कि कहीं वह नाराज न हो जाए। अगर मैं उसे उजागर कर देता हूँ और उसे नाराज कर देता हूँ तो वह न सिर्फ मेरे पीठ पीछे मेरे लिए चीजें मुश्किल बना देगा, बल्कि वह इसे कभी जाने भी नहीं देगा। वह एक दुष्ट व्यक्ति है! मैं उसे उजागर करने या उसकी रिपोर्ट करने की हिम्मत नहीं कर सकता!” ऐसे में तुम्हारा काम तमाम हो चुका है, तुम एक नाकारा कायर हो और तुम अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में विफल हो गए हो। तो अगर तुम अपनी जिम्मेदारी पूरी करना चाहो तो तुम्हें क्या करना चाहिए? अपने अगुआ को एक संदेश लिखने का मौका ढूँढ़ो, उस पर अपने नाम मत लिखो, और तथ्यों को स्पष्ट रूप से बताओ ताकि अगुआ जान जाए और वह इसे तुरंत सँभाल सके और इसे रोक सके, इस प्रकार चढ़ावों को नुकसानों से बचा सके। अगुआ को यह जानने की जरूरत नहीं है कि इसकी रिपोर्ट किसने की; यह पर्याप्त है कि परमेश्वर जानता है। तो चढ़ावों की रक्षा करने के मामले में किस सिद्धांत को कायम रखा जाना चाहिए? सही मानसिकता क्या है? यह चढ़ावों की नुकसानों से रक्षा करना और बुरे लोगों को कामयाब नहीं होने देना है। यह तुम्हारी जिम्मेदारी है। परमेश्वर का घर सभी से उसके हितों की रक्षा करने, भाई-बहनों की रक्षा करने, अपने कार्य का बचाव करने और परमेश्वर के चढ़ावों की रक्षा करने के लिए जोखिम उठाने के लिए नहीं कह रहा है; वह इसकी खातिर तुम सभी से दूसरे लोगों को नाराज करने या खुद को मुश्किल परिस्थितियों में डालने के लिए नहीं कह रहा है। परमेश्वर के घर का यह मतलब नहीं है। अगर तुम बुरे लोगों से डरते हो या लोगों को नाराज करने से डरते हो तो तुम गुमनाम रूप से समस्याओं की रिपोर्ट कर सकते हो; तुम गुमनाम रूप से बुरे लोगों और दानवों को उजागर भी कर सकते हो। इस तरीके से, हालाँकि तुमने अपने हस्ताक्षर नहीं किए हैं, फिर भी तुमने अपनी जिम्मेदारी और दायित्व पूरे कर दिए हैं और तुम अपनी जिम्मेदारी से नहीं भागे हो। अगर तुम ऐसा कर सकते हो तो इसका मतलब है कि तुम अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल नहीं हुए हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम्हारे पास यह दिल है, जो महसूस करता है कि यहीं पर तुम्हारी जिम्मेदारी निहित है और तुम्हें यह जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए, परमेश्वर के घर के कार्य का बचाव करना चाहिए और उसके हितों की रक्षा करनी चाहिए। यह अच्छा कर्म है और परमेश्वर इसे याद रखेगा। तुम लोगों के लिए स्पष्ट सत्य यहाँ दिया गया है : दानवों से लड़ने के लिए कोई निर्धारित तरीका नहीं है; दानवों को हराने में समर्थ होना, परमेश्वर के घर के हितों का बचाव करना, कलीसियाई कार्य की विभिन्न मदों की रक्षा करना, कलीसियाई जीवन की रक्षा करना और भाई-बहनों के जीवन प्रवेश का बचाव करना—यही सर्वोच्च सिद्धांत है। तुम समझ रहे हो? (हम समझ रहे हैं।) दानवों से लड़ने के लिए कोई निर्धारित तरीका नहीं है; तुम उनकी काट-छाँट करने की विधि का उपयोग कर सकते हो, तुम उन्हें उजागर करने की विधि का उपयोग कर सकते हो और यकीनन तुम उन्हें बर्खास्त करने और उनके कर्तव्यों को फिर से सौंपने की विधि का भी उपयोग कर सकते हो, और इसके अलावा तुम उन्हें रोके रखने के लिए उनसे चीजों पर सावधानी से चर्चा करने और उन्हें आश्वासन देने की विधि का भी उपयोग कर सकते हो—दानवों को रोकने के लिए विभिन्न बुद्धिमानी भरी विधियों का उपयोग करो और साथ ही कलीसियाई कार्य की विभिन्न मदों का बचाव भी करो। यह बुद्धिमान होना है। तुम अपने दिल में जानते हो कि ये लोग दानव हैं और तुम उनसे चाहे कैसे भी पेश आओ, यह गलत नहीं है क्योंकि वे सच्चे भाई-बहन नहीं हैं, वे सच्चे मनुष्य नहीं हैं और वे परमेश्वर द्वारा नहीं चुने गए हैं। वे परमेश्वर के घर में शैतान के सेवक के रूप में कलीसिया में बाधा डालने के लिए आए हैं। दानवों के प्रति तुम्हारा ऐसा रवैया होना चाहिए : “अगर तुम यहाँ विघ्न उत्पन्न करने आए हो तो मैं तुम्हारे साथ नरमी नहीं बरतूँगा। अगर तुम यहाँ तोड़-फोड़ करने आए हो तो इसकी बिल्कुल भी अनुमति नहीं है! अगर तुम विघ्न उत्पन्न नहीं करते हो या तोड़-फोड़ नहीं करते हो और चुपचाप कलीसिया में अपनी सीमा में रहते हो तो मैं तुम्हें नजरअंदाज कर दूँगा। लेकिन जैसे ही तुमने कोई हरकत की या कुछ कहा, बुराई करने का इरादा किया तो मैं तुम्हारे साथ नरमी नहीं बरतूँगा! तुम चाहे जो भी बुरी चीजें करना चाहो, तुम चाहे जो भी भ्रांतियाँ फैलाना चाहो, पहले तुम्हें मुझे हराना होगा—देखना कि मैं तुम्हें छोड़ता हूँ या नहीं। नहीं तो कलीसिया के कार्य में बाधा डालने के बारे में सोचना भी मत!” दानवों से पेश आने में लोगों को यही रवैया और सिद्धांत अपनाना चाहिए और यही वह गवाही भी है जो लोगों को देनी चाहिए।
परमेश्वर सत्य क्यों व्यक्त करता है और लोगों को सत्य की आपूर्ति क्यों करता है? वह इसलिए ताकि परमेश्वर में विश्वासी लोग सत्य को अपने जीवन के रूप में प्राप्त कर सकें और ताकि लोग दानवों का भेद पहचान सकें, दानवों से छुटकारा पा सकें और दुष्ट दानव यानी शैतान के खिलाफ पूरी तरह से विद्रोह कर सकें। लोगों ने बहुत सारे सत्य सुने हैं और सत्य का बहुत सारा प्रावधान प्राप्त किया है, फिर भी अंततः जब उनका सामना बुराई करते हुए और विघ्न उत्पन्न करते हुए दानवों से होता है तब वे उनका भेद पहचानने में विफल हो जाते हैं। कुछ लोगों में दानवों का भेद पहचानने की कुछ क्षमता होती है, लेकिन वे उन्हें उजागर करने की हिम्मत नहीं करते और उनसे निपटने की हिम्मत तो और भी नहीं करते—इस किस्म के लोग नाकारा होते हैं। तुम्हारे पास कोई गवाही नहीं है और तुम परमेश्वर के पक्ष में नहीं खड़े हुए हो—तुमने परमेश्वर का दिल तोड़ दिया है। लोगों द्वारा सत्य का अनुसरण करने और उसे समझने का उद्देश्य यह है कि वे दानवों से दूर रहें, दानवों को अस्वीकार करें और परमेश्वर के प्रति सच्चा समर्पण प्राप्त करने, परमेश्वर के पक्ष में खड़े होने और परमेश्वर का आदेश पूरा करने में समर्थ हों। दानवों की बात करें तो, जब भी एक दानव का पता लगता है तब उस एक को बाहर निकाल दो और जब भी दो दानवों का पता लगता है तब उस जोड़े को बाहर निकाल दो ताकि कलीसिया शुद्ध बनी रहे। इस तरीके से शैतान और दानव पूरी तरह से शर्मसार हो जाएँगे और फिर कलीसिया के कार्य में और बाधा नहीं डाल पाएँगे। वे सांसारिक दुनिया में कैसे विघ्न-बाधाएँ उत्पन्न करते हैं, यह हमारे सोचने का विषय नहीं है; वे कौन-से गैर-कानूनी कार्य करते हैं, कौन-सी बुरी चीजें करते हैं और वे सांसारिक दुनिया में किससे लड़ते हैं, इन सबका हमसे कोई लेना-देना नहीं है। हम न तो इसमें दखल देते हैं और न ही इसके बारे में पूछताछ करते हैं और हम इसकी परवाह भी नहीं करते। लेकिन बस एक चीज है : परमेश्वर के घर में उनका इस तरह से विघ्न उत्पन्न करना स्वीकार्य नहीं है और उन्हें सँभाला जाना चाहिए, रोका जाना चाहिए और बाहर निकाल दिया जाना चाहिए। सबसे पहले अगुआओं और कार्यकर्ताओं को इस कार्य को करने में अगुआई करनी चाहिए; उन्हें इसे अपनी अनिवार्य जिम्मेदारी समझना चाहिए। दूसरा, सभी पर्यवेक्षकों, टीम अगुआओं और साधारण भाई-बहनों में यह आध्यात्मिक कद होना चाहिए और यह गवाही भी होनी चाहिए। कुछ लोग कहते हैं, “क्या परमेश्वर का घर किसी तरह का आंदोलन शुरू कर रहा है? क्या यह लोगों को सताना है?” यह लोगों को सताना नहीं है; यह दानवों को सताना है। दानवों को ही सताया जाना चाहिए; हम लोगों को नहीं सताते। भाई-बहनों में भ्रष्टता के खुलासे होते हैं, लेकिन वे सामान्य लोग हैं, उनमें जमीर और विवेक है और साथ ही उनके क्रियाकलापों और स्व-आचरण में न्यूनतम मानक भी हैं। अगर सत्य और जीवन प्रवेश का उनका अनुसरण कुछ हद तक खराब भी हो और वे आध्यात्मिक कद में छोटे भी हों और उनमें ज्यादा सत्य वास्तविकता न भी हो तो भी हमें उनके प्रति सहनशील और धैर्यवान होना चाहिए, उनसे सही ढंग से पेश आना चाहिए और उन्हें सिद्धांतों के अनुसार सँभालना चाहिए। लेकिन दानवों से कैसे पेश आना है इसके लिए सिद्धांत अलग है। अगर वे सेवा करने को तैयार हैं तो हम सेवा करने के लिए उनका उपयोग कर सकते हैं। अगर वे सेवा करने को तैयार नहीं हैं तो हमें उन्हें बाहर निकालकर उन्हें सँभालना चाहिए; हमें उनके साथ बिल्कुल भी नरमी नहीं बरतनी चाहिए! दानवों से पेश आने के लिए यही सिद्धांत है। जब भाई-बहनों में कमजोरियाँ होती हैं या भ्रष्ट स्वभाव के प्रकाशन होते हैं तब उन्हें क्षमा किया जा सकता है और माफी दी जा सकती है और उनसे सहनशीलता और समझदारी से पेश आया जा सकता है। लेकिन दानव भाई-बहन नहीं हैं। अगर वे सिर्फ कुछ नकारात्मक या गैर-जिम्मेदाराना चीजें कहते हैं, लेकिन वे लोगों को गुमराह करने के लिए पाखंड या भ्रांतियाँ नहीं फैला रहे हैं और उन्होंने कोई गड़बड़ी या विघ्न-बाधा उत्पन्न नहीं की है तो फिर उन्हें बख्शा जा सकता है और तुम उन्हें जानबूझकर अनदेखा कर सकते हो। अगर तुम देखते हो कि वे कुछ समस्याएँ उत्पन्न करने और बुराई करने वाले हैं और यह एक खास पैमाने तक पहुँच रहा है तो उन्हें उजागर कर देना चाहिए और प्रतिबंधित कर देना चाहिए। अगर उन्हें प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता तो उन्हें सीधे बाहर निकाल दो। दानवों को लगता है कि दिन काटने के लिए कलीसिया एक आसान जगह है; उन्हें लगता है कि कलीसिया में कोई भी तूफान उठा सकता है, ठीक वैसे जैसे समाज में होता है। उनका इस तरीके से सोचना गलत है। कलीसिया परमेश्वर के चुने हुए लोगों के लिए सत्य का अनुसरण करने और उद्धार प्राप्त करने की जगह है, दानवों के लिए तूफान उठाने की जगह नहीं है और न ही दानवों के लिए अपने खुद के उद्यम चलाने या अपने सपने साकार करने की जगह है और न ही यह दानवों के लिए अपनी महत्वाकांक्षाएँ और इच्छाएँ पूरी करने की जगह है। जब दानव अपना असली रूप दिखा देते हैं और अपने खुद के उद्यमों को अंजाम देने, अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित करने और कलीसिया के कार्य में बाधा डालने और तोड़-फोड़ करने ही वाले होते हैं—जैसे ही उनके दो-मुँहे खुर प्रकट हो जाते हैं—तो तुम्हें ऐसे समय में क्या करना चाहिए? सिद्धांतों के अनुसार कार्य करो; भाई-बहनों को इन दानवों के खिलाफ उठ खड़ा होना चाहिए और लड़ना चाहिए और उन्हें बिल्कुल भी दया नहीं दिखानी चाहिए या नरमी नहीं बरतनी चाहिए। अगर तुम दानवों के साथ हमेशा नरमी बरतते हो तो तुम अपने प्रति बेरहम हो रहे हो। वे कलीसिया में लोगों को हमेशा गुमराह और परेशान करते रहते हैं और कलीसिया के कार्य में तोड़-फोड़ करते रहते हैं। ऐसे हालातों में तुमने विश्वास के बहुत-से वर्षों में परमेश्वर के प्रति जो आस्था और ज्ञान प्राप्त किया है, वह इन दानवों के गुमराह करने और परेशान करने के कारण कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएगा। इसलिए, अगर तुम सत्य प्राप्त करना चाहते हो तो तुम्हें दानवों से लड़ने और उनका विरोध करने के लिए अग्रसक्रिय रूप से उठ खड़ा होना पड़ेगा। जब तुम उनके दो-मुँहे खुरों को पूरी तरह से उजागर हुए और उनके वीभत्स चेहरे को पूरी तरह से बेनकाब हुआ देखते हो तब तुम्हें उन्हें उजागर करना चाहिए, उनके सार को निरूपित करना चाहिए और फिर उन्हें दूर कर देना चाहिए। क्या परमेश्वर के चुने हुए लोगों को यही चीज नहीं करनी चाहिए और उन्हें यही जिम्मेदारी पूरी नहीं करनी चाहिए? (हाँ।) ठीक यही वह गवाही है जो विजेताओं के पास होनी चाहिए। सभी को इसे समझना चाहिए और इसे कभी नहीं भूलना चाहिए। शैतानों और दानवों से नहीं डरने का मतलब औपचारिकता के तौर पर उनसे संबंध तोड़ देना नहीं है, बल्कि इसका मतलब है सही-गलत के बड़े मुद्दों के सामने, सिद्धांत के मामलों के सामने, अपना मार्ग चुनने के मामले के सामने और परमेश्वर के घर के हितों से जुड़े मामलों में दानवों के खिलाफ लड़ने के लिए उठ खड़े होना, उनके बुरे कर्मों को रोकना, परमेश्वर के घर के हितों की रक्षा करना और भाई-बहनों के अपने कर्तव्य करने के लिए सामान्य परिवेश का बचाव करना। परमेश्वर के चुने हुए हर व्यक्ति का यही दायित्व है।
क्या हमने दानव के सार वाले लोगों की इन दो अभिव्यक्तियों—आदतन झूठ बोलना और विकृति—पर अपनी संगति लगभग पूरी नहीं कर ली है? इस प्रकार के व्यक्ति के प्रति लोगों को जो नजरिया और रुख रखने चाहिए वे स्पष्ट हैं और लोगों को जो जिम्मेदारियाँ पूरी करनी चाहिए वे भी स्पष्ट हैं। तो आगे तुम्हारे सामने कौन-सा मुद्दा है? वह यह है कि हमने जिन अभिव्यक्तियों और प्रकाशनों पर संगति की है, उन्हें कैसे लिया जाए और कैसे उन्हें इन लोगों के साथ जोड़ा जाए और फिर उनका भेद पहचाना जाए और कैसे इस प्रकार के व्यक्ति के सार की असलियत देखी जाए। जैसे ही तुम्हारे पास भेद पहचानने की क्षमता होगी, तुम्हारे दिल में यह स्पष्ट हो जाएगा कि विभिन्न प्रकार के लोगों के सही मायने में क्या गुण होते हैं, लोगों से पेश आने के तुम्हारे सिद्धांत ज्यादा सटीक होंगे और तुम मूर्खतापूर्ण या बेवकूफी भरी चीजें नहीं करोगे या तुम उन्हें उतनी ज्यादा नहीं करोगे। आज हमारी संगति के लिए बस इतना ही। अलविदा।
27 जनवरी 2024
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?