परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 24

यहोवा के कार्य के बाद, यीशु मनुष्यों के बीच में अपना कार्य करने के लिये देहधारी हो गया। उसका कार्य एकाकीपन में नहीं किया गया, बल्कि यहोवा के कार्य पर किया गया। यह नये युग के लिये एक कार्य था जब परमेश्वर ने व्यवस्था के युग का समापन कर दिया था। इसी प्रकार, यीशु का कार्य समाप्त हो जाने के बाद, परमेश्वर ने तब भी अगले युग के लिये अपने कार्य को जारी रखा, क्योंकि परमेश्वर का सम्पूर्ण प्रबंधन सदैव आगे बढ़ता है। जब पुराना युग बीत जाएगा, उसके स्थान पर नया युग आ जाएगा, और एक बार जब पुराना कार्य पूरा हो जाएगा, तो एक नया कार्य परमेश्वर के प्रबंधन को जारी रखेगा। यीशु के कार्य के पूरा होने के बाद यह देहधारण परमेश्वर का दूसरा देहधारण है। निस्संदेह, यह देहधारण अकेले नहीं हुआ है, बल्कि यह व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के बाद कार्य का तीसरा चरण है। परमेश्वर के कार्य का प्रत्येक नया चरण सदैव एक नया आरंभ और एक नया युग लाता है। इसलिए परमेश्वर के स्वभाव में, उसके कार्य करने के तरीके में, उसके कार्य के स्थल में, और उसके नाम में भी परिवर्तन होते हैं। तब कोई आश्चर्य नहीं कि मनुष्य के लिये नये युग में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करना कठिन है। परंतु इस बात की परवाह किए बिना कि मनुष्य द्वारा उसका कितना विरोध किया जाता है, परमेश्वर सदैव अपना कार्य करता रहता है, और सदैव समस्त मानवजाति को आगे बढ़ने में अगुवाई करता रहता है। जब यीशु मनुष्य के संसार में आया, तो वह अनुग्रह का युग लाया, और उसने व्यवस्था का युग समाप्त किया। अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर एक बार फिर देहधारी बन गया, और इस बार जब उसने देहधारण किया, तो उसने अनुग्रह का युग समाप्त किया और परमेश्वर के राज्य का युग ले आया। उन सब को जो परमेश्वर के दूसरे देहधारण को स्वीकार करते हैं, राज्य के युग में ले जाया जाएगा, और वे व्यक्तिगत रूप से परमेश्वर का मार्गदर्शन स्वीकार करने में सक्षम होंगे। यद्यपि यीशु ने मनुष्यों के बीच अधिक कार्य किया है, उसने केवल समस्त मानवजाति के छुटकारे के कार्य को पूरा किया और वह मनुष्य की पाप-बलि बना, मनुष्य को उसके भ्रष्ट स्वभाव से छुटकारा नहीं दिलाया। शैतान के प्रभाव से मनुष्य को पूरी तरह बचाने के लिये यीशु को न केवल पाप-बलि के रूप में मनुष्यों के पापों को लेना आवश्यक था, बल्कि मनुष्य को उसके भ्रष्ट स्वभाव से पूरी तरह मुक्त करने के लिए परमेश्वर को और भी बड़े कार्य करने की आवश्यकता थी जिसे शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया था। और इसलिए, मनुष्य को उसके पापों के लिए क्षमा कर दिए जाने के बाद, एक नये युग में मनुष्य की अगुवाई करने के लिए परमेश्वर वापस देह में लौटा, और उसने ताड़ना एवं न्याय के कार्य को आरंभ किया, और इस कार्य ने मनुष्य को एक उच्चतर क्षेत्र में पहुँचा दिया। वे सब जो परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन समर्पण करेंगे उच्चतर सत्य का आनंद लेंगे और अधिक बड़ी आशीषें प्राप्त करेंगे। वे वास्तव में ज्योति में निवास करेंगे, और सत्य, मार्ग और जीवन को प्राप्त करेंगे।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

Christ of the Last Days Has Brought the Age of Kingdom

I

When Jesus came to the world of man, He ended the Age of Law, and He brought the Age of Grace. In the last days God became flesh once more, He ended the Age of Grace and He brought the Age of Kingdom. Those who accept the second incarnation of God will be led to the Kingdom Age and accept God’s guidance. After man was forgiven his sins, God returned to flesh to lead him. He will lead man into the new age. He’s begun the work of judgment to bring man to a higher realm. Those who submit enjoy higher truth, will receive much greater blessings, truly living in the light. They will gain the truth, way and life.

II

Jesus did much work among man. Redemption of all mankind was the only work He completed. He became man’s offering for sin, yet He did not rid man of all his corrupt disposition, all man’s corruption. Saving man from Satan meant Jesus had to take on man’s sins, but God’s greater work required to rid man of Satan’s corruption. After man was forgiven his sins, God returned to flesh to lead him. He will lead man into the new age. He’s begun the work of judgment to bring man to a higher realm. Those who submit enjoy higher truth, will receive much greater blessings, truly living in the light. They will gain the truth, way and life.

from Follow the Lamb and Sing New Songs

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