परमेश्वर के दैनिक वचन | "बाइबल के विषय में (4)" | अंश 274

बहुत से लोग मानते हैं कि बाइबल को समझना और उसकी व्याख्या कर पाना सच्चे मार्ग की खोज करने के समान है—परन्तु वास्तव में, क्या बात इतनी सरल है? बाइबल की इस वास्तविकता को कोई नहीं जानता कि यह परमेश्वर के कार्य के ऐतिहासिक अभिलेख और उसके कार्य के पिछले दो चरणों की गवाही से बढ़कर और कुछ नहीं है, और इससे तुम्हें परमेश्वर के कार्य के लक्ष्यों की कोई समझ हासिल नहीं होती। बाइबल पढ़ने वाला हर व्यक्ति जानता है कि यह व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य के दो चरणों को लिखित रूप में प्रस्तुत करता है। पुराने नियम सृष्टि के समय से लेकर व्यवस्था के युग के अंत तक इस्राएल के इतिहास और यहोवा के कार्य को लिपिबद्ध करता है। पृथ्वी पर यीशु के कार्य को, जो चार सुसमाचारों में है, और पौलुस के कार्य नए नियम में दर्ज किए गए हैं; क्या ये ऐतिहासिक अभिलेख नहीं हैं? अतीत की चीज़ों को आज सामने लाना उन्हें इतिहास बना देता है, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितनी सच्ची और यथार्थ हैं, वे हैं तो इतिहास ही—और इतिहास वर्तमान को संबोधित नहीं कर सकता, क्योंकि परमेश्वर पीछे मुड़कर इतिहास नहीं देखता! तो यदि तुम केवल बाइबल को समझते हो और परमेश्वर आज जो कार्य करना चाहता है, उसके बारे में कुछ नहीं समझते और यदि तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, किन्तु पवित्र आत्मा के कार्य की खोज नहीं करते, तो तुम्हें पता ही नहीं कि परमेश्वर को खोजने का क्या अर्थ है। यदि तुम इस्राएल के इतिहास का अध्ययन करने के लिए, परमेश्वर द्वारा समस्त लोकों और पृथ्वी की सृष्टि के इतिहास की खोज करने के लिए बाइबल पढ़ते हो, तो तुम परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते। किन्तु आज, चूँकि तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो और जीवन का अनुसरण करते हो, चूँकि तुम परमेश्वर के ज्ञान का अनुसरण करते हो और मृत पत्रों और सिद्धांतों या इतिहास की समझ का अनुसरण नहीं करते हो, इसलिए तुम्हें परमेश्वर की आज की इच्छा को खोजना चाहिए और पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा की तलाश करनी चाहिए। यदि तुम पुरातत्ववेत्ता होते तो तुम बाइबल पढ़ सकते थे—लेकिन तुम नहीं हो, तुम उनमें से एक हो जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं। अच्छा होगा तुम परमेश्वर की आज की इच्छा की खोज करो। बाइबल को पढ़कर तुम अधिक से अधिक इस्राएल के इतिहास को थोड़ा-बहुत समझ जाओगे, तुम इब्राहिम, दाऊद और मूसा के जीवन के बारे में जानोगे तो तुम्हें पता चलेगा कि वे किस प्रकार यहोवा का आदर करते थे, यहोवा किस प्रकार अपने विरोधियों को जला देता था और वह उस युग के लोगों से किस प्रकार बात करता था। तुम केवल अतीत में किए गए परमेश्वर के कार्य के बारे में जानोगे। बाइबल के अभिलेखों का सम्बन्ध इस बात से है कि इस्राएल के आदिम लोग किस प्रकार यहोवा का आदर करते थे और यहोवा के मार्गदर्शन में रहते थे। चूंकि इस्राएली परमेश्वर के चुने हुए लोग थे, इसलिए पुराने नियम में तुम यहोवा के प्रति इस्राएल के सभी लोगों की वफादारी देख सकते हो, कैसे लोग यहोवा की आज्ञा मानते थे, यहोवा किस प्रकार उन सबकी परवाह करता था और उन्हें आशीष देता था; तुम जान सकते हो कि जब परमेश्वर ने इस्राएल में कार्य किया तो वह दया और प्रेम से भरपूर था और भस्मकारी ज्वालाएँ उसके वश में थीं, दीन-हीन से लेकर शक्तिशाली तक, सभी इस्राएली यहोवा का आदर करते थे, और इस तरह सारे देश को परमेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त था। ऐसा है इस्राएल का इतिहास, जो पुराने नियम में दर्ज है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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