परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या : अध्याय 18" | अंश 230

परमेश्वर के सभी वचनों में उसके स्वभाव का एक हिस्सा समाहित होता है। परमेश्वर के स्वभाव को वचनों में पूरी तरह से व्यक्त नहीं किया जा सकता है, जो यह दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि उसमें कितनी प्रचुरता है। आखिरकार, जिसे लोग देख और स्पर्श कर सकते हैं, वो उतना ही सीमित है जितनी कि लोगों की क्षमता है। यद्यपि परमेश्वर के वचन स्पष्ट हैं, तब भी लोग इसे पूरी तरह से समझने में असमर्थ हैं। उदाहरण के लिए इन वचनों को लो: "बिजली की एक चमक पर, प्रत्येक जानवर अपने असली स्वरूप में प्रकट हो जाता है। इसी प्रकार, मेरे प्रकाश से रोशन हो कर मनुष्यों ने भी उस पवित्रता को पुनः प्राप्त कर लिया है जो उनके पास पहले कभी थी। ओह, अतीत का वह भ्रष्ट संसार! अंतत: यह गंदे पानी में पलट गया है, और सतह के नीचे डूब कर कीचड़ में घुल गया है!" परमेश्वर के सभी वचनों में उसके अस्तित्व का समावेश है, और भले ही सभी लोग इन वचनों से अवगत हों, फिर भी उन्होंने कभी उनके अर्थ को नहीं जाना है। परमेश्वर की दृष्टि में, वे सभी जो उसका विरोध करते हैं, उसके शत्रु हैं अर्थात् जो लोग दुष्टात्माओं से संबंधित हैं, वे पशु हैं। इस से कलीसिया की वास्तविक स्थिति को देखा जा सकता है। सभी लोग परमेश्वर के वचनों द्वारा रोशन होते हैं, और इस रोशनी में, वे फटकार, ताड़ना या दूसरों द्वारा सीधी उपेक्षा के बिना, चीज़ों के करने के अन्य मानवीय तरीकों के अधीन हुए बिना, और दूसरों की हिदायत बिना, स्वयं को जाँचते हैं। "सूक्ष्मदर्शी परिप्रेक्ष्य" से, वे बहुत स्पष्ट रूप से देखते हैं कि उनके भीतर वास्तव में कितनी बीमारी है। परमेश्वर के वचनों में, हर प्रकार की आत्मा को वर्गीकृत किया जाता है और उसे उसके मूल रूप में प्रकट किया जाता है। स्वर्गदूतों की आत्माएँ अधिक रोशन और प्रबुद्ध हो जाती हैं, इसलिए परमेश्वर के वचन हैं, कि "मनुष्यों ने भी उस पवित्रता को पुनः प्राप्त कर लिया है जो उनके पास पहले कभी थी।" ये वचन परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए गए अंतिम परिणामों पर आधारित हैं। फिलहाल, निस्संदेह, इस परिणाम को पूरी तरह से हासिल नहीं किया जा सकता है—यह सिर्फ एक पूर्वानुभव है, जिसके माध्यम से परमेश्वर की इच्छा देखी जा सकती है। ये वचन इस बात को दर्शाने के लिए पर्याप्त हैं कि बहुत से लोग परमेश्वर के वचनों के भीतर चूर-चूर हो जाएंगे और सभी लोगों के पवित्रीकरण की उत्तरोत्तर प्रक्रिया में पराजित हो जाएँगे। यहाँ, "यह कीचड़ में घुल गया है" परमेश्वर का आग से दुनिया को नष्ट करने का विरोध नहीं करता है, और "बिजली" परमेश्वर के कोप की ओर संकेत करती है। जब परमेश्वर अपने महान कोप को बंधन से मुक्त करेगा, तो परिणामस्वरूप, पूरी दुनिया, ज्वालामुखी के फटने की तरह, सभी प्रकार की आपदाओं का अनुभव करेगी। आकाश में ऊपर खड़े हो कर, यह देखा जा सकता है कि पृथ्वी पर सभी प्रकार की आपदाएँ, दिन प्रति दिन मानवजाति को घेर रही हैं। ऊपर से नीचे देखने पर, पृथ्वी भूकंप से पहले के विभिन्न दृश्यों को प्रदर्शित करती है। तरल अग्नि अनियंत्रित बहती है, लावा बेरोकटोक बहता है, पहाड़ सरकते हैं, और हर जगह उदासीन प्रकाश चमकता है। पूरी दुनिया आग में डूब गई है। यह परमेश्वर के कोप के उत्सर्जन का दृश्य है, और यह उसके न्याय का समय है। वे सभी जो मांस और रक्त वाले हैं भागने में असमर्थ होंगे। इस प्रकार, पूरी दुनिया को नष्ट करने के लिए देशों के बीच युद्ध और लोगों के बीच संघर्ष की आवश्यकता नहीं होगी; इसके बजाय दुनिया परमेश्वर की ताड़ना के पालने में "स्वयं का होशहवास में आनंद" लेगी। कोई भी बच निकलने में सक्षम नहीं होगा; हर एक व्यक्ति को, एक के बाद एक, इस कठिन परीक्षा से गुजरना होगा। इसके बाद संपूर्ण ब्रह्माण्ड एक बार पुनः पवित्र कांति से जगमगाएगा और समस्त मानवजाति एक बार पुनः एक नया जीवन शुरू करेगी। और परमेश्वर ब्रह्मांड के ऊपर आराम करेगा और हर दिन मानवजाति को आशीष देगा। स्वर्ग असहनीय ढंग से उजाड़ नहीं होगा, किन्तु उस जीवन-शक्ति को पुनःप्राप्त करेगा जो दुनिया की सृष्टि के बाद से उसके पास नहीं है, और "छठे दिन" का आगमन तब होगा जब परमेश्वर एक नया जीवन शुरू करेगा। परमेश्वर और मनुष्यजाति दोनों विश्राम में प्रवेश करेंगे और ब्रह्मांड अब गंदा या मैला नहीं रहेगा, बल्कि नवीनीकरण को प्राप्त करेगा। यही कारण है कि परमेश्वर ने कहा: "पृथ्वी अब निष्प्राण रूप से स्थिर और मूक नहीं है, स्वर्ग अब उजाड़ और दुःखी नहीं है।" स्वर्ग के राज्य में अधार्मिकता या मानवीय भावनाएँ, या मानवजाति का कोई भी भ्रष्ट स्वभाव कभी नहीं रहा है क्योंकि वहाँ शैतान का उपद्रव मौजूद नहीं है। सभी "लोग" परमेश्वर के वचनों को समझने में सक्षम हैं, और स्वर्ग का जीवन खुशी से भरा जीवन है। स्वर्ग में सभी लोगों के पास परमेश्वर की बुद्धि और गरिमा है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

परमेश्वर के कोप का दृश्य

Verse 1

जब परमेश्वर करेगा क्रोध, तो आयेंगी आपदाएं कई, वैसे ही जैसे फूटता है ज्वालामुखी। ऊपर से जो देखो धरा पर, दिखे आपदा मानव को घेरती हुई। ऊपर से जो देखो नज़ारा तो लगता कोई भूकम्प है आने वाला। लावा बह रहा सब ओर। देह युक्त कोई प्राणी नहीं बचेगा। पहाड़ सरक रहे, ठंडी रोशनी चमक रही, ये दुनिया तो आग में समा रही। परमेश्वर का न्याय आ पहुँचा है। यह उसके कोप का नज़ारा है। यह उसके कोप का नज़ारा है।

Verse 2

संसार के विनाश के लिए जंग या द्वंद ज़रूरी नहीं, सभी लेटेंगे परमेश्वर की ताड़ना में ही। एक-एक कर इससे वे सब गुज़रेंगे। उसकी ताड़ना से न बचेगा कोई। ऊपर से जो देखो नज़ारा तो लगता कोई भूकम्प है आने वाला। लावा बह रहा सब ओर। देह युक्त कोई प्राणी नहीं बचेगा। पहाड़ सरक रहे, ठंडी रोशनी चमक रही, ये दुनिया तो आग में समा रही। परमेश्वर का न्याय आ पहुँचा है। यह उसके कोप का नज़ारा है। यह उसके कोप का नज़ारा है। यह उसके कोप का नज़ारा है। यह उसके कोप का नज़ारा है।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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