परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 10" | अंश 224

जब राज्य की सलामी गूंजती है-जो तब भी होता है जब सात बार मेघों की गड़गड़ाहट होती है-यह ध्वनि स्वर्ग और पृथ्वी को झंझोर देती है, और उच्चतम स्वर्ग को कम्पित करती है और हर एक मानव के हृदय के तारों को कंपाती है। उस बड़े लाल अजगर के राष्ट्र में सम्मान के साथ राज्य का स्तुति गान हवा में गूंजने लगता है, इस बात को साबित करते हुए कि मैंने उस बड़े लाल अजगर के राष्ट्र को नष्ट कर दिया है और तब मेरा राज्य स्थापित हो जाता है। उस से भी अधिक महत्वपूर्ण, मेरा राज्य पृथ्वी पर स्थापित हो जाता है। इस समय, मैं अपने स्वर्गदूतों को संसार के राष्ट्रों में भेजना प्रारम्भ करता हूँ ताकि वे मेरे पुत्रों, अर्थात् मेरी प्रजा की चरवाही कर सकें; यह मेरे काम के अगले कदम की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी है। लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से उस स्थान में जाता हूँ जहाँ वह बड़ा लाल अजगर दुबककर बैठा है, जिससे उससे युद्ध कर सकूँ। और जब सारी मानवता मुझे देह में पहचान जाती है, और मेरे देह के द्वारा किए गए कार्यों को देखने के योग्य हो जाती है, तब उस बड़े लाल अजगर की मांद राख में बदल जाती है और बिना किसी नामों निशान के विलुप्त हो जाती है। मेरे राज्य की प्रजा के रूप में, चूँकि तुम लोग उस बड़े लाल अजगर से गहराई से घृणा करते हो, तुम लोगों को अपने कार्यों से मेरे हृदय को संतुष्ट करना होगा और इस रीति से तुम लोग उस अजगर को लज्जित करते हो। क्या तुम लोग सचमुच में महसूस करते हो कि वह बड़ा लाल अजगर घृणास्पद है? क्या तुम लोग सचमुच में महसूस करते हो कि वह राज्य के राजा का शत्रु है? क्या तुम लोगों में वास्तव में ऐसा विश्वास है कि तुम लोग मेरे लिए बेहतरीन गवाही दे सकते हो? क्या तुम लोगों में सचमुच में ऐसा विश्वास है कि तुम लोग उस अजगर को पराजित कर सकते हो? यही वह चीज़ है जो मैं तुम लोगों से मांगता हूँ। मैं तुम सभी से यही अपेक्षा करता हूँ कि तुम लोग इस योग्य हो कि इस कदम के साथ साथ दूर तक जा सको; क्या तुम लोग इसे करने में सक्षम होगे? क्या तुम लोगों में ऐसा विश्वास है जिससे तुम लोग इसे हासिल कर सकते हो? मनुष्य क्या करने में सक्षम है? उसके बजाए क्या यह वह नहीं है जिसे मैं स्वयं करता हूँ? मैं ऐसा क्यों कहता हूँ कि मैं व्यक्तिगत रूप से उस स्थान पर नीचे उतरा हूँ जहाँ लोग युद्ध में शामिल हो गए हैं। जो मैं चाहता हूँ वह तुम लोगों का विश्वास है, न कि तेरे कार्य। मनुष्य सीधे तरीके से मेरे वचनों को प्राप्त करने में असमर्थ हैं, बस बगल से झाँकते हैं। और क्या तुम लोगों ने इस तरीके से लक्ष्य हासिल किया है? क्या तुम लोग इस तरीके से मुझ जान पाए हो? सच कहूँ, पृथ्वी के मनुष्यों में, ऐसा कोई भी नहीं है जो सीधे मुझ से निगाहें मिलाने के योग्य है, और ऐसा कोई भी नहीं है जो मेरे वचनों का पवित्र और शुद्ध अर्थ प्राप्त करने के काबिल है। और इसलिए मैंने, अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए और मनुष्यों के हृदयों में अपने सच्चे स्वरूप को स्थापित करने के लिए, पृथ्वी पर इंजीनियरिंग के एक अभूतपूर्व साहसिक कार्य को गतिमान किया है, और इस तरह से मैं उस अवधि को समाप्त करता हूँ जब धारणाएँ मनुष्यों के ऊपर हावी हो जाती हैं।

आज, मैं न केवल उस बड़े लाल अजगर के राष्ट्र के ऊपर उतर रहा हूँ, बल्कि मैं पूरे विश्व की ओर भी मुड़ रहा हूँ, जिससे पूरा उच्चतम स्वर्ग कांप रहा है। क्या ऐसा कोई स्थान है जो मेरे न्याय से होकर नहीं गुज़रता है? क्या ऐसा कोई स्थान है जो उन विपत्तियों के अंतर्गत नहीं आता है जिसे मैं नीचे भेजता हूँ। मैं जहाँ कहीं भी जाता हूँ वहाँ मैं हर प्रकार के "विनाश के बीजों" को छितरा देता हूँ। यह एक तरीका है जिसके तहत मैं काम करता हूँ, और यह निःसन्देह मनुष्य के उद्धार का एक कार्य है, और जो मैं उसको देता हूँ वह अब भी एक प्रकार का प्रेम है। मैं चाहता हूँ कि अधिक से अधिक लोग मेरे बारे में जानें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोग मुझे देखने के योग्य हो सकें, और इस तरह से परमेश्वर का आदर करने के लिए आएँ जिसे उन्होंने इतने सालों से नहीं देखा है, लेकिन जो आज वास्तविक है। मैंने किस कारण संसार को बनाया था? मैंने किस कारण से, जब मानवजाति भ्रष्ट हो गया, उनका सम्पूर्ण विनाश नहीं किया था? किस कारण से पूरी मनुष्य जाति विपत्तियों के अधीन जीवन बिताती है? किस कारण से मैंने स्वयं देहधारण किया था? जब मैं अपना कार्य कर रहा हूँ, तो मानवता उसका स्वाद जानता है और न केवल उसका कड़वा स्वाद बल्कि उसका मीठा स्वाद भी जानता है। इस संसार के लोगों में, कौन मेरे अनुग्रह के भीतर नहीं रहता है? क्या मैंने मनुष्यों को भौतिक आशीषें प्रदान नहीं की हैं, कौन संसार की पर्याप्तता का आनन्द उठा सकता है? निश्चित रूप से, तुम लोगों को अपनी प्रजा के रूप में स्थान ग्रहण करने की अनुमति देना ही एकमात्र आशीष नहीं है, क्या ऐसा है? मान लो कि तुम लोग मेरी प्रजा नहीं हो किन्तु उसके बजाए कर्मचारी हो, तो क्या तुम लोग मेरी आशीषों के अंतर्गत नहीं जी रहे होते हो? तुम लोगों में से कोई भी उस स्थान की गहराई को नापने के योग्य नहीं है जहाँ से मेरे वचन निकलते हैं। मानवता-उन नामों को संजोकर रखने से कहीं दूर जिन्हें मैंने तुम लोगों को प्रदान किया है, तुममें से बहुत से लोग, "कर्मचारी" की अपनी उपाधि के अनुसार अपने अपने हृदयों में द्वेष पालकर रखते हो, और बहुत से लोग "मेरी प्रजा" की उपाधि के साथ अपने अपने हृदयों में प्रेम का पालन पोषण करते हो। मुझे मूर्ख बनाने की कोशिश करने की हिम्मत मत करो-मेरी आँखें सभी चीज़ों को देखती हैं और उन्हें भेदती हैं! तुम लोगों में से कौन स्वेच्छा से ग्रहण करता है, और तुम लोगों में से कौन सम्पूर्ण आज्ञाकारिता प्रदान करता है? यदि राज्य की सलामी नहीं गूंजती, तो क्या तुम लोग अंत तक सचमुच में आज्ञा मानने के योग्य हो पाते? मनुष्य क्या कर सकता है और क्या सोच सकता है, और वह कितनी दूर तक जा सकता है-यह सब कुछ बहुत पहले से ही निर्धारित कर दिया गया था।

परमेश्वर न्याय संग उतरता है

बड़े लाल अजगर के देश में उतरते समय, परमेश्वर का मुख फिरता जगत की ओर, और वो थरथराती। हे परमेश्वर! हे परमेश्वर! बड़े लाल अजगर के देश में उतरते समय, परमेश्वर का मुख फिरता जगत की ओर, और वो थरथराती। क्या कोई स्थान है जो उसके न्याय से बचा है? या उसकी भयानक सज़ा से? जहाँ वो जाता विनाश का बीज है बोता, पर इसके द्वारा वो उद्धार करता और प्रेम अनन्त दिखाता। परमेश्वर चाहता कि सब उसको जानें, और देखें और आदर मानें। युगों से वो देखा न गया, पर अब वो कितना असल है। हे परमेश्वर! हे परमेश्वर! हे परमेश्वर!

बड़े लाल अजगर के देश में उतरते समय, परमेश्वर का मुख फिरता जगत की ओर, और वो थरथराती। क्या कोई स्थान है जो उसके न्याय से बचा है? या उसकी भयानक सज़ा से? जहाँ वो जाता विनाश का बीज है बोता, पर इसके द्वारा वो उद्धार करता और प्रेम अनन्त दिखाता। परमेश्वर चाहता कि सब उसको जानें, और देखें और आदर मानें। युगों से वो देखा न गया, पर अब वो कितना असल है।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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