परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 198

परमेश्वर वह है जो सभी चीज़ों पर राज्य करता है, और सभी चीज़ों का प्रबंधन करता है। जो कुछ है वह उसी ने रचा है, जो कुछ है उसकी व्यवस्था वही करता है और जो कुछ है उस पर वही राज्य करता है और सभी चीज़ें उसी के द्वारा पोषित होती हैं। यह परमेश्वर का पद और पहचान है। सभी चीजों के लिए और सब कुछ जो है, परमेश्वर की असली पहचान सृष्टिकर्ता की है, और वह सभी चीज़ों का शासक है। परमेश्वर की पहचान इस प्रकार की है और वह सभी बातों में अद्वितीय है। परमेश्वर की कोई भी रचना—चाहे वह मनुष्य के मध्य हो या आत्मिक दुनिया में हो—किसी भी साधन या बहाने का उपयोग करके परमेश्वर की पहचान और पद को परमेश्वर का वेष धारण करने या हटाने के लिए नहीं कर सकता, क्योंकि सभी बातों में वह ही एक है जो इस पहचान, शक्ति, अधिकार, और सभी बातों पर राज्य करने की योग्यता से सम्पन्न है: हमारा अद्वितीय परमेश्वर स्वयं। वह सभी वस्तुओं के बीच में रहता और चलता है, वह सभी चीज़ों के ऊपर सर्वोच्च स्थान तक उठ सकता है, वह मनुष्य बनकर अपने आपको को विनम्र बना सकता है, जो मांस और लहू के हैं उनके मध्य उनके जैसा बन सकता है, लोगों से रूबरू होकर उनके सुख—दुख बांट सकता है, साथ ही जो कुछ है सब उसी की आज्ञा के अधीन है और सभी चीज़ों का भाग्य और किस दिशा में इसे जाना है यह भी वही निश्चित करता है और इसके अलावा, वह सभी मनुष्यों के भाग्य का पथ और उसकी दिशा भी वही निर्धारित करता है। ऐसे परमेश्वर की आराधना, आज्ञा पालन होना चाहिए और सभी प्राणियों को उसे जानना चाहिये। और इसलिए, इस बात की परवाह किये बगैर कि तुम किस समूह और किस प्रकार के मनुष्यों से सम्बन्ध रखते हो, अपने प्रारब्ध के लिए परमेश्वर में विश्वास करना, परमेश्वर का अनुसरण करना, परमेश्वर का आदर करना, परमेश्वर के शासन को स्वीकार करना, और परमेश्वर की व्यवस्था को स्वीकार करना ही किसी भी इंसान के लिए, किसी जीव के लिए एकमात्र और आवश्यक विकल्प है। परमेश्वर की अद्वितीयता में, लोग देखते हैं कि उसका अधिकार, उसका धर्मी स्वभाव, उसका सार-तत्व, और वे सभी साधन जिनके द्वारा वह सभी का पोषण करता है, अद्वितीय हैं। उसकी अद्वितीयता, स्वयं परमेश्वर की पहचान को निश्चित करती है, और उसके पद को भी। और इसलिए, सभी प्राणियों के मध्य, यदि कोई जीवित प्राणी आत्मिक दुनिया में या मनुष्यों के मध्य में परमेश्वर की जगह में खड़ा होने की इच्छा रखता है, यह असंभव होगा, जैसे परमेश्वर का रूप धरने का प्रयास किया जा रहा हो। यह तथ्य है। ऐसे सृष्टिकर्ता और शासक की मनुष्य जाति से क्या अपेक्षाएं हैं, जिसके पास स्वयं परमेश्वर की पहचान है, शक्ति है और पद है? यह सब आज तुम सबको स्पष्ट हो जाना चाहिये, और तुम्हें याद रखना चाहिए और यह परमेश्वर और मनुष्य दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है!

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

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