परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 157

पारम्परिक संस्कृति एवं अंधविश्वास के बीच में अनेक समानताएँ हैं, केवल पारम्परिक संस्कृति में ही कई कहानियाँ, संकेत, एवं स्रोत हैं। शैतान ने कई लोक कहानियों या इतिहास की पुस्तकों में कहानियों को गढ़ा है एवं अविष्कार किया है, और लोगों पर पारम्परिक संस्कृति या अंधविश्वासी प्रसिद्ध व्यक्तियों के विषय में गहरे प्रभाव डाले हैं। उदाहरण के लिए चीन की आठ अमर हस्तियाँ जो समुद्र को पार करती हैं, जरनी टू द वेस्ट, जेड सम्राट, नेज़्हा कंकर्स दि ड्रेगन किंग है, और परमेश्वरों के प्रतिष्ठापन को ही लो। क्या ये मनुष्य के मनों में गहराई से जड़ नहीं पकड़ चुकी हैं? भले ही कुछ लोग इन सभी विवरणों को नहीं जानते हैं, फिर भी वे अब भी सामान्य कहानियों को तो जानते ही हैं, और यही वह सामान्य विषय सूची है जो तुम्हारे हृदय एवं तुम्हारे मनों में चिपकी हुई है, और तुम इसे भूल नहीं सकते हो। विभिन्न समयों पर इसके भिन्न भिन्न विचारों एवं जीवन दर्शनों को फैलाने के बाद, ये ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें शैतान ने बहुत लम्बे समय पहले से मनुष्य के लिए निर्धारित किया था। ये चीज़ें सीधे तौर पर हानि पहुँचाती हैं और लोगों की आत्माओं को नष्ट करती हैं और लोगों को एक सम्मोहन के बाद दूसरे सम्मोहन में डालती हैं। कहने का तात्पर्य है कि जब एक बार तुमने इन चीज़ों को स्वीकार कर लिया है जो पारम्परिक संस्कृति, कहानियों या अंधविश्वास से उत्पन्न होती हैं, जब एक बार ये चीज़ें तुम्हारे मन में स्थापित हो जाती हैं, जब एक बार वे तुम्हारे हृदय में अटक जाती हैं, तो यह बस एक सम्मोहन के समान है—तुम उलझ जाते हो और इन संस्कृतियों, इन विचारों एवं पारम्परिक कहानियों के द्वारा प्रभावित हो जाते हो। वे तुम्हारे जीवन, एवं जीवन पर तुम्हारे बाह्य दृष्टिकोण को प्रभावित करती हैं और साथ ही वे चीज़ों के विषय में तुम्हारे फैसले को भी प्रभावित करती हैं। इससे बढ़कर वे जीवन के सच्चे मार्ग के लिए तुम्हारे अनुसरण को भी प्रभावित करती हैं: यह वास्तव में एक सम्मोहन है! तुम कोशिश तो करते हो परन्तु तुम उन्हें झटक कर दूर नहीं कर सकते हो; तुम उन्हें चोट पहुँचाते तो हो किन्तु तुम उन्हें काटकर नीचे नहीं गिरा सकते हो; तुम उन पर प्रहार तो करते हो किन्तु तुम उन पर प्रहार करने नीचे नहीं गिरा सकते हो। क्या ऐसा ही नहीं है? (हाँ।) इसके अतिरिक्त, जब मनुष्य को इस प्रकार के सम्मोहन में अनजाने में डाल दिया जाता है, तो वे अनजाने में शैतान की आराधना करना प्रारम्भ कर देते हैं, अपने अपने हृदय में शैतान की छवि को बढ़ावा देते हैं। दूसरे शब्दों में, वे शैतान को अपनी मूर्ति के रूप में, और ऐसी वस्तु के रूप में स्थापित कर लेते हैं कि उसकी आराधना करें और उसकी ओर देंखें, यहाँ तक कि उस हद तक चले जाते हैं कि उसके साथ उसी रीति से व्यवहार करते हैं जैसे वे परमेश्वर के साथ करते। अनजाने में ही, ये चीज़ें लोगों के हृदय में हैं जो उनके वचनों एवं कार्यों को नियन्त्रित कर रही हैं। तुम अनजाने में इन कहानियों के अस्तित्व को मान लेते हो, उन्हें वास्तविक प्रसिद्ध व्यक्ति बना देते हो, और उन्हें वास्तव में मौजूद वस्तुओं में बदल देते हो। अनभिज्ञता में, तुम अवचेतन रूप से इन विचारों को और इन चीज़ों के अस्तित्व को ग्रहण कर लेते हो। साथ ही तुम अवचेतन रूप से दुष्टों, शैतान एवं मूर्तियों को अपने स्वयं के घर में और अपने स्वयं के हृदय में ग्रहण कर लेते हो—यह वास्तव में एक सम्मोहन है! क्या तुम लोग ऐसा ही महसूस करते हो? (हाँ।) क्या तुम लोगों के बीच में कोई ऐसा है जिसने धूप जलायी हो और बुद्ध की आराधना की हो? (हाँ।) अतः धूप जलाने और बुद्ध की आराधना करने का उद्देश्य क्या था? (शान्ति के लिए प्रार्थना करना।) क्या शांति के लिए शैतान से प्रार्थना करना बेतुका है? क्या शैतान शान्ति लाता है? (नहीं।) इसके विषय में अब सोच रहे हो, क्या तुम लोग पहले अनजान थे? (हाँ।) उस प्रकार का आचरण बहुत ही बेतुका, अज्ञानी एवं नौसिखिया है, है कि नहीं? शैतान तुम्हें शान्ति नहीं दे सकता है। क्यों? शैतान सिर्फ यही विचार करता है कि किस प्रकार तुम्हें भ्रष्ट करे और वह तुम्हें शान्ति नहीं दे सकता है; वह तुम्हें केवल एक अस्थायी राहत दे सकता है। परन्तु तुम्हें एक प्रतिज्ञा करनी होगी और यदि तुम अपने वादे को तोड़ते हो या उस प्रतिज्ञा को तोड़ते हो जिसे तुमने उसके लिए किया है, तो तुम देखोगे कि वह तुम्हें किस प्रकार कष्ट देता है। तुमसे एक प्रतिज्ञा करवाने में, वह वास्तव में तुम्हें नियन्त्रित करना चाहता है, क्या वह नहीं चाहता है? जब तुम लोगों ने शान्ति के लिए प्रार्थना की थी, तो क्या तुम लोगों ने शान्ति पाई थी? (नहीं।) तुम लोगों ने शान्ति नहीं पाई थी, परन्तु इसके विपरीत वह दुर्भाग्य, अंतहीन आपदाएँ और विपत्तियों के पूरे समूह को लेकर आया था—सही मायने में कड़वाहट का असीम महासागर। शान्ति शैतान के अधिकार क्षेत्र के भीतर नहीं है, और यही सत्य है। सामंती अन्धविश्वास एवं पारम्परिक संस्कृति के विषय में यह मानवजाति का परिणाम है।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

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