परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" | अंश 150

शैतान कैसे अंधविश्वास का उपयोग मनुष्य को दूषित करने में करता है

शैतान कैसे अंधविश्वास का उपयोग लोगों को भ्रष्ट करने में करता है? लोग शकुन विचार, चेहरा पढ़ना और भविष्य बताना आदि जानना चाहते हैं, ताकि वे अपने भविष्य के विषय में जान सकें कि उनका भविष्य कैसा होगा या और आगे का मार्ग कैसा होगा, परन्तु अंतत:, किस के हाथ पहले से ही इन सब बातों को नियंत्रित कर रहे हैं? (परमेश्वर के हाथ।) वे परमेश्वर के हाथों में हैं। जहां तक शैतान का सवाल है, इन विधियों का उपयोग करके वह लोगों को क्या जताना चाहता है? शैतान चेहरा पढ़ना और भविष्य बताने का उपयोग कर लोगों को बताना चाहता है कि वह उनका आगे का भविष्य जानता है और शैतान लोगों को बताना चाहता है कि वह इन बातों को जानता है, वह उन्हें नियंत्रित करता है। शैतान इस अवसर का लाभ उठाना चाहता है और लोगों को नियंत्रित करने में इन विधियों का उपयोग करता है ताकि लोग उस पर अंधा यकीन करें और उसकी हर बात मानें। उदाहरण के लिए, यदि भविष्यवक्ता आपका चेहरा पढ़कर कुछ देर अपनी आंखें बंद करे और आपके साथ पिछले कुछ दशकों में जो भी घटा है, उसे बड़ी स्पष्टता से बता दे तो आप अपने भीतर कैसा महसूस करेंगे? आप अचानक महसूस करेंगे, “मैं वास्तव में इस भविष्य बतानेवाले की सराहना करता हूं, वह कितना सटीक है! मैंने अपना अतीत कभी पहले किसी को नहीं बताया, वह इसके विषय में कैसे जानता है?” यह शैतान के लिए बहुत कठिन नहीं होगा कि आपका अतीत जानें, सही? आज परमेश्वर आपको यहां लाया है, और शैतान भी लोगों को अब तक दूषित करता आया है और आपका पीछा करता आया है। शैतान एक बुरी आत्मा है, आपके दशकों का कालखण्ड शैतान के लिए कुछ भी नहीं है और उसके लिए ये सब बातें जानना कुछ कठिन नहीं है। जब आप जानते हैं कि जो शैतान ने कहा सटीक है, क्या आप उसके नियंत्रण में नहीं जा रहे हैं? आपका भविष्य और किस्मत, क्या आप उसके नियंत्रण पर निर्भर नहीं कर रहे हैं? एकदम से आपका हृदय उसके लिए कुछ आदर या श्रद्धा महसूस करेगा और कुछ लोगों के आत्मा पर तो उसने पहले ही कब्ज़ा कर लिया है। और आप तत्काल भविष्य बताने वाले से पूछोगे, “मैं आगे क्या करूं? आने वाले साल में मुझे किस से बचना चाहिए? मुझे क्या नहीं करना चाहिए?” और तब वह कहेगा: “आपको वहां नहीं जाना चाहिए, आपको यह नहीं करना चाहिए, फलाने रंग के कपड़े मत पहनो, आपको ऐसे और ऐसे स्थानों पर बहुधा नहीं जाना चाहिए, और आपको कुछ बातें और अधिक करना चाहिए…” क्या आप हरेक बात जो वह कहता है एक दम से अपने दिल में ले नहीं लोगे? आप उसे परमेश्वर के वचन की अपेक्षा जल्दी से याद कर लोगे। आप उसे इतनी जल्दी कैसे याद कर लोगे? क्योंकि आप अच्छे भाग्य के लिए शैतान पर आश्रित होना चाहोगे, क्या यह वह समय नहीं है जब वह आपके दिल पर अपनी पकड़ बनाता है? तब जैसा उसने कहा है आप वैसा ही करते हैं तब उसके कहे हुए शब्द वैसे ही पूरे होते हैं जैसा पूर्वानुमान लगाया गया था। तब क्या आप यह जानने के लिए कि अगला साल क्या भाग्य लाएगा, फिर से उसके पास नहीं जाना चाहोगे? (हां।) आप वही करेंगे जो शैतान आपसे करने के लिए कहेगा और आप उन बातों से बचोगे जिनसे वह बचने के लिए कहता है, क्या आप उसकी हर बात का पालन नहीं कर रहे हैं जो वह कहता है? आप तुरन्त उसकी शरण में चले जाओगे, भटककर पूरी तरह उसके नियंत्रण में चले जाओगे। इसका कारण यह है कि आप उस पर विश्वास करते हैं कि जो वह कहता है वह सच है और क्योंकि आप विश्वास करते हैं कि वह आपके पिछले जीवन के विषय में जानता है, आपके वर्तमान जीवन के बारे जानता है और भविष्य में क्या होगा यह भी जानता है; यह वह विधि है जिससे शैतान लोगों को नियंत्रित करता है। पर वास्तविकता में कौन है जो नियंत्रण करता है? यह स्वयं परमेश्वर हैं, शैतान नहीं, शैतान केवल चालाकी से काम करता है। इस मामले में लोग अनजान हैं उसकी चालाकी से, लोग केवल भौतिक जगत को देखते हैं, उस पर आश्रित रहते और विश्वास करते हैं। तब वे शैतान के चंगुल में पड़ जाएंगे और उसकी हर बात मानेंगे। परन्तु क्या जब लोग परमेश्वर पर विश्वास करना और उसके पीछे चलना चाहेंगे तब शैतान छोड़ देगा? शैतान नहीं छोड़ेगा। इस परिस्थिति में क्या लोग वास्तव में शैतान के चंगुल में पड़ रहे हैं? (हां।) क्या हम कह सकते हैं कि इस संदर्भ में शैतान का व्यवहार सचमुच शर्मनाक है? (हां।) हम ऐसा क्यों कहेंगे? (शैतान चालाकी उपयोग में लाता है।) क्योंकि शैतान की चालाकी धोखा देने वाली और छल से भरी हुई है, शैतान बेशर्म है और शैतान लोगों को गुमराह करता है ताकि लोग यह सोचें कि वह उनकी सब बातों को नियंत्रित करता है वह लोगों को धोखा देता है ताकि लोग यह सोचें कि वह उनके भाग्य को नियंत्रित करता है। यह अनभिज्ञ लोगों से पूरी तरह से अपनी बात मनवा लेता है और उन्हें केवल एक या दो वाक्य से बहकावे में लेकर स्तम्भित कर देता है और लोग उसके आगे झुक जाते हैं। क्या यह सही है? (हां।) तो शैतान किस प्रकार के तरीकों का उपयोग करता है, वह क्या कहता है कि आप उस पर विश्वास करें? उदाहरण के लिए, आपने शैतान को नहीं बताया होगा कि आपके परिवार में कितने सदस्य हैं? पर शायद वह बता दे कि आपके परिवार में तीन सदस्य हैं, आपकी बेटी सात साल की है, और आपके माता-पिता की उम्र इतनी है। यदि आरम्भ में आपको कुछ शक था भी तो यह सुनने के बाद क्या आपका विश्वास नहीं जमने लगेगा? (हां।) तब शैतान कह सकता है कि आज आपके लिए कार्य करना कठिन होगा, आपके वरिष्ठ अधिकारी आपको उतना महत्व नहीं देते जितना आपको मिलना चाहिए और हमेशा आपके विरुद्ध कार्य करते रहते हैं। इतना सुनने के बाद, आप सोचेंगे, “यह बिल्कुल सही है। दफ्तर में सब ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।” इससे आप शैतान पर थोड़ा और विश्वास करने लगोगे। तब वह आपको धोखा देने के लिये कुछ और कहेगा, ताकि आप और विश्वास करो, धीरे धीरे करके आपका प्रतिरोध कम होता चला जायेगा और आपका संदेह भी दूर हो जायेगा शैतान आपको अपनी छोटी-मोटी चालों से ही सम्मोहित कर देता है। और जैसे ही आप सम्मोहित हो जाते हैं, आप अपने आपे में नहीं रहते आप को समझ नहीं आएगा कि आप क्या करें और आप वही करना प्रारम्भ कर देंगे जो शैतान चाहता है। “क्या कमाल है!” विधि से शैतान मनुष्य को दूषित करता है, और आप अनजाने में शैतान के चंगुल में फंस कर उसके अधीन हो जाते हैं। शैतान जो कुछ बातें आपसे कहता है उन्हें लोग अच्छी बात समझते हैं, और तब वह आपको बताता है कि क्या करना है और क्या नहीं करना चाहिए, इस प्रकार आप अनजाने में उसकी राह पर चलने लगते हैं। एक बार जब आप उस राह पर चल पडें तो फिर आपको परेशानी ही परेशानी मिलेगी; आप लगातार यही सोचते रहेंगे कि शैतान ने क्या कहा, और आपको क्या करने को कहा और आप अनजाने में उसके वश में हो जाओगे। ऐसा क्यों है? यह इसलिए है क्योंकि मनुष्यों में सत्य की कमी है और वे शैतान के प्रलोभन और बहकावे में फंसने से बचने में असमर्थ हैं। शैतान की बुराई और उसकी दगाबाजी, चालाकी और दुर्भावना का सामना करने में मानवजाति बेहद अनभिज्ञ, नासमझ और कमज़ोर है, सही है न? क्या यह उनमें से एक तरीका नहीं है जिनसे शैतान मनुष्य को दूषित करता है? (हां।) मनुष्य अनजाने में धीरे धीरे शैतान के धोखे और चालाकियों में फंसता चला जाता है, क्योंकि लोग सकारात्मक और नकारात्मक के बीच अंतर नहीं कर पाते। उनमें शैतान पर विजय पाने का न तो स्तर होता है और न योग्यता होती है।

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

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