परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 149

शैतान कैसे पारम्परिक संस्कृति का उपयोग मनुष्य को दूषित करने में करता है

क्या कई बातें पारम्परिक संस्कृति का एक भाग मानी जाती हैं? (हां।) इस पारम्परिक संस्कृति का मतलब क्या है? (यह वंशानुगत चली आती है।) यह वंशानुगत चली आती है, यह एक पहलू है। परिवार, जातीय समूह, यहां तक कि मानव जाति अपनी जीवन पद्धति को प्रारम्भ से ही आगे बढ़ाती रही है, या वे अपने रीति-रिवाज, कहावत और नियम आगे बढ़ाते रहे हैं जो लोगों के विचारों में छप गए हैं। लोगों को इन से क्या मिलता है? लोग ऐसा समझते हैं कि ये चीज़ें उनके जीवन से अलग नहीं की जा सकती। वे उन चीज़ों को लेते और नियम तथा जीवन का हिस्सा मानते हैं। चूंकि ये बातें उनके पुरखों द्वारा दी गई हैं इसलिए वे उन्हें बदलने और छोड‌ने को बिल्कुल तैयार नहीं होते। पारम्परिक संस्कृति के अन्य पहलू हैं जैसे वे जो कि चीनी दार्शनिकों द्वारा प्रतिपादित किए गये थे, लोगों को चीनीवाद और कन्फयूशियसवाद द्वारा लोगों को सिखाई गई थीं जो प्रत्येक व्यक्ति का अंतर्तम भाग बन गई हैं। क्या यह सही नहीं हैं? (हां।) इस पारम्परिक संस्कृति में और क्या शामिल है? क्या इनमें वे त्यौहार शामिल हैं जो लोग मानते हैं? उदाहरण के लिए, इसमें वसंत उत्सव, दीप उत्सव, चिंग मिंग दिवस, ड्रैगन नौका उत्सव और अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस, बाल दिवस, मध्य हेमंत उत्सव और राष्ट्रीय दिवस प्रमुख हैं। कुछ परिवार, अन्य त्यौहार भी मनाते हैं या जब वरिष्ठ लोग एक उम्र को प्राप्त कर लेते हैं उत्सव मनाते हैं या जब बच्चे एक माह की उम्र को प्राप्त करते हैं और जब वे 100 दिन की आयु के हो जाते हैं तो उत्सव मनाते हैं। ये सब पारम्परिक त्यौहार हैं। क्या इन त्यौहारों की पृष्ठभूमि पारम्परिक संस्कृति नहीं है? पारम्परिक संस्कृति का सार क्या है? क्या इनमें परमेश्वर की उपासना के विषय में कुछ है? क्या इसमें लोगों को सच का अभ्यास करने के विषय में कहने को कुछ है? (नहीं।) क्या लोगों का कोई ऐसा त्यौहार है जिसमें वे परमेश्वर के लिए बलिदान करें, परमेश्वर की वेदी के पास जाएं और उसके कुछ वचन प्राप्त करें? क्या ऐसा कोई त्यौहार है? (नहीं।) इन सारे त्यौहारों में लोग क्या करते हैं? (शैतान की उपासना करते हैं, खाते-पीते, और मौज करते हैं।) आधुनिक युग में यह एक अवसर होता है खाने, पीने और मज़े करने का। तब पारम्परिक संस्कृति के पीछे स्रोत क्या है? पारम्परिक संस्कृति किस से है (शैतान से।) यह "शैतान" से है। इन पारम्परिक उत्सवों की पृष्ठभूमि में, शैतान मनुष्यों में कुछ बातें भर देता है, ये चीज़ें क्या हैं? यह सुनिश्चित करना कि लोग अपने पूर्वजों को याद रखें, क्या यह उनमें से एक है? उदाहरण के लिए, चिंग मिंग उत्सव के दौरान लोग कब्र को व्यवस्थित करते हैं और अपने पूर्वर्जों को भेंट चढ़ाते हैं। इस प्रकार लोग अपने पूर्वजों को स्मरण रखेंगे। सही? शैतान ड्रैगन बोट उत्सव के माध्यम से सुनिश्चित करता है कि लोग देशभक्त होना स्मरण रखें, मध्य हेमंत उत्सव के बारे में क्या? (परिवार मिलन।) परिवार मिलन की पृष्ठभूमि क्या है? इसका कारण क्या है? (परिवार और भावना को पहले रखना।) भावनात्मक रूप से संवाद करना और जुड़ना, सही? वाकई चंद्र नववर्ष की पूर्व संध्या या दीप-उत्सव को मनाने के पीछे की भावना के कई कारण हैं, हालांकि उन्हें मनाने के पीछे के कई कारण दिये जाते हैं, लेकिन इनमें से प्रत्येक का कारण है कि शैतान उनके माध्यम से अपनी दार्शिनिकता और सोच को लोगों में बैठाता है ताकि वे परमेश्वर से दूर रहें और यह न जानें कि परमेश्वर है। वे या तो अपने पूर्वजों को या शैतान को अर्पित करते हैं। या फिर यह खाने, पीने और मज़ा करके शरीर की अभिलाषा पूरी करने का बहाना मात्र है। हर उत्सव के बाद शैतान के विचार और दृष्टिकोण मनुष्य के दिमाग पर और गहरे होते जाते हैं और वे इसे जान भी नहीं पाते। जब व्यक्ति अधेड़ हो जाते हैं, वृद्ध हो जाते हैं तो शैतान की ये बातें, ये विचार, ये दृष्टिकोण पहले से ही उनके हृदयों में गहरे बैठ चुके होते हैं। और चाहे ये विचार सही हों या गलत, बिना सोच विचार के अपनी अगली पीढ़ी को स्थानांतरित करते रहते हैं। क्या यह सही है? (हां।) तो ये पारम्परिक संस्कृति और त्यौहार लोगों को कैसे दूषित करते हैं? (लोग इन परम्पराओं के नियमों से इतने बंध जाते हैं कि परमेश्वर की खोज के लिये उनके पास न तो समय बचता है और न शक्ति बचती है।) यह एक पहलू है। उदाहरण के लिए, हर कोई चंद्र नव वर्ष मनाता है, यदि आप नहीं मनाते, तो क्या आप दुखी महसूस नहीं करेंगे? आपको नहीं लगेगा, "ओह, मैंने तो नववर्ष का उत्सव मनाया ही नहीं, चन्द्र नव वर्ष का यह दिन बहुत खराब था और यह मनाया नहीं गया है; क्या यह पूरा वर्ष खराब जायेगा?" क्या आप असहज महसूस नहीं करेंगे? (हां।) और थोड़ा सा डर भी जायेंगे, सही? कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने बहुत वर्षों से अपने पुरखों के लिए भेंट नहीं चढ़ाई और वे अचानक स्वप्न देखते हैं कि एक मृत व्यक्ति पैसा मांग रहा है, वे भीतर कैसा महसूस करेंगे? "कितने दुख की बात है कि इस मृत को खर्च करने के लिए पैसा चाहिए! मैं उनके लिए कुछ कागज की मुद्रा को जला दूंगा, यदि मैं ऐसा नहीं करता तो यह सही नहीं होगा। अगर मैं कुछ कागज की मुद्राएं नहीं जलाऊंगा तो हम जीवित लोग किसी मुसीबत में पड़ सकते हैं, कौन बता सकता है आफत कब आ जाए?" उनके मन में डर और चिंता का ये बादल हमेशा मंडराता रहेगा। तो उन्हें यह चिंता कौन देता है? (शैतान।) शैतान यह लाता है। क्या यह एक तरीका नहीं है जिससे शैतान मनुष्य को दूषित करता है? वह आपको नियंत्रित करने के कई तरीके और बहाने काम में लाता है; आपको डराने और आपको उस हद तक बांधने के लिए जब तक कि आप उसकी चाल में न फंस जायें और न झुक जायें और समर्पण न कर दें; इसी तरीके से शैतान मनुष्य को दूषित करता है। अक्सर ऐसे समय में जब लोग कमज़ोर होते हैं या वे परिस्थितियों के प्रति पूर्ण रूप से सजग नहीं होते तब वे अनभिज्ञता में, दिमागी उलझन में कुछ ऐसा कर देते हैं, कि वे अनजाने में शैतान के चंगुल में फंस जाते हैं यानी वे शैतान की गिरफ्त में आकर अनजाने में ऐसा कुछ कर सकते हैं और वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। यह वह तरीका है जिससे शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करता है। अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं उन सांस्कृतिक परम्पराओं से अलग होने के अनिच्छुक हैं जिनकी जड़ें उनके दिमाग में गहरी जमी हुई हैं और वे उन्हें छोड़ नहीं सकते। विशेषकर यह तब होता है जब वे कमजोर और उदासीन होते हैं कि वे इस प्रकार की छुट्टियों को मनाने की इच्छा रखते हैं और वे फिर से शैतान से मिलना और उसे संतुष्ट करना चाहते हैं, ताकि ऐसा करके वे अपने अंदर भी संतुष्टि महसूस कर सकें। क्या ऐसा ही नहीं होता है? (हां।) इन सांस्कृतिक परम्पराओं की पृष्ठभूमि क्या है? क्या दृश्य के पीछे शैतान का काला हाथ डोर को खींच रहा है? क्या शैतान का बुरा स्वभाव चीज़ों को चालाकी से नियंत्रित नहीं कर रहा है? क्या शैतान इन सब चीज़ों को नियंत्रित नहीं कर रहा है? (हां।) जब लोग इस पारम्परिक संस्कृति में जीते और इस प्रकार की पारम्परिक छुट्टियों को मनाते हैं, तब क्या हम कह सकते हैं कि यह एक ऐसा वातावरण है जिसमें वे शैतान द्वारा मूर्ख बनाए जा रहे है और शैतान द्वारा भ्रष्ट किए जा रहे हैं? क्या वे शैतान द्वारा भ्रष्ट किए जाने से खुश नहीं हैं? क्या यह वह तरीका नहीं है? (हां।) इस बात को तो हम सब मानते हैं, सही? और हम सब जानते भी हैं।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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