परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 63

भले ही लोग जो सुनते हैं या समझ प्राप्त करते हैं वह परमेश्वर के स्वभाव, वह जो उसके पास है तथा जो वह है उसके बारे में है जो वे प्राप्त करते हैं वो वह जीवन है जो परमेश्वर से आता है। एक बार जब यह जीवन तुम्हारे भीतर डाल दिया जाता है, तो परमेश्वर के प्रति तुम्हारा भय बड़ा और बड़ा होता जाएगा, और इस फसल को काटना बहुत ही स्वाभाविक होता है। यदि तुम परमेश्वर के स्वभाव और उसके सार के बारे में समझना और जानना नहीं चाहते हो, और यदि तुम इन चीज़ों के ऊपर मनन करना और ध्यान केन्द्रित करना भी नहीं चाहते हो, तो मैं निश्चित रूप से तुम्हें बता सकता हूँ कि जिस तरह से तुम वर्तमान में परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास का अनुसरण कर रहे हो यह तुम्हें उसकी इच्छा को संतुष्ट करने और उसकी तारीफ़ को प्राप्त करने की अनुमति कभी नहीं दे सकता है। उससे अधिक, तुम कभी भी सचमुच में उद्धार तक नहीं पहुँचोगे—ये अन्तिम परिणाम हैं। जब लोग परमेश्वर को नहीं समझते हैं और उसके स्वभाव को नहीं जानते हैं, तो उनका हृदय कभी भी परमेश्वर के लिए नहीं खुलेगा। एक बार जब वे परमेश्वर को समझ जाते हैं, वे रूचि और विश्वास के साथ जो कुछ परमेश्वर के हृदय में है उस को समझना और उसका स्वाद लेना प्रारम्भ कर देंगे। जब तुम जो परमेश्वर के दिल में है उसे समझने और उसका स्वाद लेने लग जाते हो, तुम्हारा हृदय धीर-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके उसके लिए खुलता जाता है। जब तुम्हारा हृदय उसके लिए खुल जाता है, तब तुम्हें महसूस होगा कि परमेश्वर के प्रति तुम्हारा बर्ताव, परमेश्वर से तुम्हारी माँगें, और तुम्हारी बेकार की अभिलाषाएँ कितनी शर्मनाक और घृणित थी। जब तुम्हारा हृदय सचमुच में परमेश्वर के लिए खुल जाता है, तब तुम देखोगे कि उसका हृदय एक असीमित संसार के जैसा है, और तुम एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करोगे जिसे तुमने पहले कभी भी अनुभव नहीं किया होगा। इस क्षेत्र में कोई धोखेबाज़ी नहीं है, कोई धूर्तता नहीं है, कोई अंधकार नहीं है, और कोई बुराई भी नहीं है। वहाँ केवल ईमानदारी और विश्वास्यता है; केवल ज्योति और सदाचार है; केवल धार्मिकता और कृपालुता है। यह प्रेम और देखरेख से भरा हुआ है, तरस और सहिष्णुता से भरा हुआ है, और उसके द्वारा तुम जिन्दा रहने की प्रसन्नता और आनन्द को महसूस करोगे। ये वो चीज़ें हैं जिन्हें वह तुम्हारे लिए प्रकाशित करेगा जब तुम अपने हृदय को उसके लिए खोलोगे। यह असीमित संसार परमेश्वर की बुद्धि, और उसकी सर्वसामर्थता से भरा हुआ है; वह उसके प्रेम और अधिकार से भी भरा हुआ है। यहाँ तुम परमेश्वर के स्वरूप, वह जो उसके पास है तथा जो वह है, और वह किस बात से आनन्दित होता है, वह चिन्ता क्यों करता है और वह उदास क्यों हो जाता है, और वह क्यों क्रोधित हो जाता है उसके हर एक पहलू को देख सकते हो।... यह वही है जिसे प्रत्येक इंसान देख सकता है जो अपने हृदय को खोलता है और परमेश्वर को भीतर आने की अनुमति देता है। परमेश्वर तभी तुम्हारे हृदय के भीतर आ सकता है जब तुम उसके लिए उसे खोल देते हो। यदि वह तुम्हारे हृदय के भीतर आ गया है केवल तभी तुम परमेश्वर के स्वरूप को देख सकते है, केवल तभी तुम अपने लिए उसकी इच्छा को देख सकते हो। उस समय, तुम्हें यह पता चलेगा कि परमेश्वर के बारे में हर चीज़ कितनी बहुमूल्य है, अर्थात् जो उसका स्वरूप है वह सँभाल कर रखने के कितना योग्य है। उसकी तुलना में, वे लोग जो तुम्हें घेरे रहते हैं, तुम्हारे जीवन की घटनाएँ और व्यक्ति, और यहाँ तक कि तुम्हारे प्रियजन, तुम्हारा जीवनसाथी, और ऐसी चीज़ें जिन से तुम प्रेम करते हो, वे मुश्किल से जिक्र करने के योग्य भी नहीं हैं। वे इतने छोटे हैं, और इतने निम्न हैं; तुम महसूस करोगे कि कोई भौतिक पदार्थ फिर से तुम्हें उसमें खींचने में कभी भी सक्षम नहीं होगा, और तुम्हें फिर से उनके लिए कोई कीमत चुकानी नहीं पड़ेगी। परमेश्वर की दीनता में तुम उसकी महानता, और उसकी सर्वोच्चता को देखोगे; इसके अतिरिक्त, यदि उसने कुछ किया था जिसके विषय में तुम यह विश्वास करते थे कि वह काफी छोटा था, तो तुम उसकी असीमित बुद्धि और उसकी सहिष्णुता को देखोगे, और उसके धीरज, उसकी सहनशीलता, और तुम्हारे प्रति उसकी समझ को देखोगे। यह तुममें उसके लिए एक प्रेम उत्पन्न करेगा। उस दिन, तुम्हें लगेगा कि मानवजाति कितने दूषित संसार में रह रही है, यह कि वे लोग जो तुम्हारे आस-पास रह रहें हैं और वे चीज़ें जो तुम्हारे जीवन में घटित हो रही हैं, और यहाँ तक कि जिनसे तुम प्रेम करते हो, तुम्हारे लिए उनका प्रेम, और उनकी तथाकथित सुरक्षा या तुम्हारे लिए उनकी चिन्ता इस योग्य नहीं हैं कि उनका जिक्र भी किया जाए—केवल परमेश्वर ही तुम्हारा प्रिय है, और तुम केवल उसी को सब से ज़्यादा सहेज कर रख सकते हो। जब वह दिन आता है, तो मैं विश्वास करता हूँ कि वहाँ कुछ लोग होंगे जो कहेंगेः परमेश्वर का प्रेम कितना महान है, और उसका सार कितना पवित्र है—परमेश्वर में कोई धूर्तता नहीं है, कोई बुराई नहीं है, कोई कपट नहीं है, और कोई कलह नहीं है, परन्तु केवल धार्मिकता और प्रमाणिकता है, और मनुष्यों को सब कुछ जो परमेश्वर के पास है, और सब कुछ जो वह है उस की लालसा करनी चाहिए। मनुष्यों को उसके लिए प्रयास करना चाहिए और उसकी आकांक्षा करना चाहिए। इसे किस मानवीय योग्यता के आधार पर निर्मित किया जाता है? यह मनुष्यों के द्वारा परमेश्वर के स्वभाव की समझ, और उनके द्वारा परमेश्वर के सार की समझ के आधार पर निर्मित होता है। इस प्रकार परमेश्वर के स्वभाव और जो उसके पास है तथा जो वह है उसे समझना, प्रत्येक इंसान के लिए जीवन पर्यन्त शिक्षा है, और यह एक जीवन पर्यन्त उद्देश्य है जिस का अनुसरण प्रत्येक इंसान के द्वारा किया जाना है जो अपने स्वभाव को बदलना चाहते हैं, और परमेश्वर को जानने के लिए संघर्ष करते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए

जब तुम जानते नहीं परमेश्वर को और उसके स्वभाव को, तुम्हारे हृदय खुल नहीं सकते सचमुच, परमेश्वर के लिए। जब समझ लेते हो तुम सब परमेश्वर को, तुम समझ पाओगे क्या है हृदय में उसके, ले पाते हो आनंद जो है उसके भीतर, अपने पूरे विश्वास और ध्यान से। जब तुम लेते हो आनंद जो है उसके भीतर का, थोड़ा-थोड़ा कर के, एक-एक दिन कर के, जब तुम लेते हो आनंद जो है उसके भीतर का, तुम्हारा हृदय खुल जाएगा परमेश्वर के लिए।

जब तुम्हारा हृदय सचमुच खुलता है, जब तुम्हारा हृदय सचमुच खुलता है, तुम्हें होगी घृणा, आएगी शर्म तुम्हें अपने अत्यधिक और स्वार्थी अनुरोधों पर। जब तुम्हारा हृदय सचमुच खुलता है, जब तुम्हारा हृदय सचमुच खुलता है, तो परमेश्वर के हृदय में दिखेगी एक अनंत दुनिया, अनकही आश्चर्य की दुनिया में खुद को पाओगे। ख़त्म होता है अंधकार, बुराई, और झूठ, जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए। सिर्फ़ सच्चाई, सिर्फ़ विश्वास, सिर्फ़ रोशनी, सिर्फ़ न्याय, जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए।

वो है प्रेम, वो है दयालु, अनंत करूणा से भरपूर। महसूस करोगे तुम सिर्फ़ सुख, जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए। उसकी समझ और शक्ति, उसके अधिकार और प्रेम से, भर जाती है ये दुनिया। देखोगे तुम परमेश्वर का स्वरूप क्या है, क्या दे उसे ख़ुशी, क्या तोड़े उसका दिल, क्या करता है उसे दुखी और क्रोधित, देख पाता है हर एक, जब तुम खोलते हो अपना हृदय परमेश्वर के लिए, और अंदर आने की देते हो इजाज़त।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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