परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 41

शैतान ने पहली बार अय्यूब को परखा (उसकी भेड़-बकरियां चुरा ली गईं और उसके बच्चों के ऊपर आपदा आई)

क. परमेश्वर के द्वारा कहे गए वचन

(अय्यूब 1:8) यहोवा ने शैतान से पूछा, "क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है।"

(अय्यूब 1:12) यहोवा ने शैतान से कहा, "सुन, जो कुछ उसका है, वह सब तेरे हाथ में है; केवल उसके शरीर पर हाथ न लगाना।" तब शैतान यहोवा के सामने से चला गया।

ख. शैतान का जवाब

(अय्यूब 1:9-11) शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, "क्या अय्यूब परमेश्वर का भय बिना लाभ के मानता है? क्या तू ने उसकी, और उसके घर की, और जो कुछ उसका है उसके चारों ओर बाड़ा नहीं बाँधा? तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है, और उसकी सम्पत्ति देश भर में फैल गई है। परन्तु अब अपना हाथ बढ़ाकर जो कुछ उसका है, उसे छू; तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।"

परमेश्वर शैतान को अय्यूब की परीक्षा लेने की अनुमति देता है जिससे अय्यूब के विश्वास को सिद्ध बनाया जाएगा

यहोवा परमेश्वर एवं शैतान के बीच हुए संवाद के विषय में अय्यूब 1:8 वह पहला लेख है जिसे हम बाइबल में देखते हैं। और परमेश्वर ने क्या कहा था? मूल पाठ हमें निम्नलिखित लेख प्रदान करता हैः "यहोवा ने शैतान से पूछा, 'क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है।'" शैतान के सामने अय्यूब के विषय में यह परमेश्वर का आंकलन था; परमेश्वर ने कहा कि वह एक खरा एवं सीधा मनुष्य था, ऐसा मनुष्य जो परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था। परमेश्वर एवं शैतान के मध्य इन वचनों से पहले, परमेश्वर ने दृढ़ निश्चय किया था कि वह अय्यूब की परीक्षा लेने के लिए शैतान का इस्तेमाल करेगा—यह कि वह अय्यूब को शैतान के हाथों में सौंप देगा। एक लिहाज से, यह इस बात को साबित करेगा कि अय्यूब के विषय में परमेश्वर का अवलोकन एवं आंकलन सटीक और त्रुटिहीन था, और वह अय्यूब की गवाही के जरिए शैतान को लज्जित करेगा; दूसरे लिहाज से, यह परमेश्वर में अय्यूब के विश्वास को और परमेश्वर के प्रति उसके भय को सिद्ध करेगा। इस प्रकार, जब शैतान परमेश्वर के सामने आया, तो परमेश्वर ने अस्पष्ट रुप से बात नहीं की। उसने सीधे मुद्दे की बात की और शैतान से कहाः "क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है।" परमेश्वर के प्रश्न में निम्लिखित अर्थ थाः परमेश्वर जानता था कि शैतान ने सभी स्थानों में भ्रमण किया था, और उसने बार बार अय्यूब की जासूसी की थी, जो परमेश्वर का सेवक था। उसने अकसर उसकी परीक्षा की थी और उस पर आक्रमण किया था, इस बात की कोशिश करते हुए कि वह अय्यूब को बर्बाद करने के लिए कोई मार्ग खोज सके जिससे यह साबित हो कि परमेश्वर में अय्यूब का विश्वास और परमेश्वर के प्रति उसका भय दृढ़ता से स्थिर नहीं रह सकता था। शैतान भी तत्परता से अय्यूब को तबाह करने के लिए अवसरों को खोजता रहता था, कि शायद अय्यूब परमेश्वर को त्याग सकता था और शैतान को अनुमति दे सकता था जिससे वह उसे परमेश्वर के हाथों से हथिया ले। फिर भी परमेश्वर ने अय्यूब के हृदय में झांका और देखा कि वह खरा एवं सीधा था, और यह कि वह परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था। परमेश्वर ने शैतान को यह बताने के लिए एक प्रश्न का उपयोग किया कि अय्यूब एक खरा एवं सीधा मनुष्य है जो परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था, यह कि अय्यूब कभी परमेश्वर को नहीं त्यागेगा और शैतान के पीछे नहीं चलेगा। अय्यूब के विषय में परमेश्वर की सराहना को सुनने के बाद, शैतान के भीतर लज्जा से उत्पन्न एक प्रचण्ड क्रोध ने प्रवेश किया, तथा वह और भी अधिक क्रोधित हो गया, और वह अय्यूब को छीनने के लिए और भी अधिक अधीर हो गया, क्योंकि शैतान ने कभी भी यह विश्वास नहीं किया था कि कोई खरा और सिद्ध भी हो सकता है, या यह कि वे परमेश्वर का भय मान सकते हैं और बुराई से दूर रह सकते हैं। ठीक उसी समय, शैतान ने भी मनुष्य की खराई एवं सीधाई से घृणा की थी, और वह ऐसे लोगों से नफरत करता था जो परमेश्वर का भय मानकर बुराई से दूर रह सकते थे। और इस प्रकार अय्यूब 1:9-11 में लिखा हुआ है कि "शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, क्या अय्यूब परमेश्‍वर का भय बिना लाभ के मानता है? क्या तू ने उसकी, और उसके घर की, और जो कुछ उसका है उसके चारों ओर बाड़ा नहीं बाँधा? तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है, और उसकी सम्पत्ति देश भर में फैल गई है। परन्तु अब अपना हाथ बढ़ाकर जो कुछ उसका है, उसे छू; तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।" परमेश्वर शैतान के द्वेषपूर्ण स्वभाव से भली भांति वाकिफ था, और पूरी तरह से जानता था कि शैतान ने अय्यूब पर तबाही लाने के लिए बहुत पहले से ही योजना बनाई थी, और शैतान को एक बार फिर से बताने के माध्यम से कि अय्यूब खरा एवं सीधा था और वह परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था, परमेश्वर इस सिलसिले में शैतान को सीधे रास्ते पर लाना चाहता था, और शैतान से उसके असली चेहरे को प्रकट करवाना चाहता था और उससे अय्यूब पर हमला करवाना और उसकी परीक्षा करवाना चाहता था। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर ने जानबूझ कर इस बात पर जोर डाला कि अय्यूब खरा एवं सीधा था, और यह कि वह परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था, और इसकी सहायता से उसने शैतान से अय्यूब पर हमला करवाया था अय्यूब के प्रति शैतान की घृणा एवं कोप के कारण कि अय्यूब कैसे एक खरा और सीधा मनुष्य था, ऐसा मनुष्य जो परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था। परिणामस्वरूप, परमेश्वर ने उस तथ्य के जरिए शैतान को लज्जित किया कि अय्यूब खरा एवं सीधा मनुष्य था, ऐसा मनुष्य जो परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था, और शैतान को पूरी तरह से लज्जित एवं पराजित करके छोड़ दिया जाएगा। उसके बाद, शैतान अय्यूब की खराई, सीधाई, परमेश्वर के भय, या बुराई से दूर रहने के विषय में आगे से फिर कभी सन्देह या दोषारोपण नहीं करेगा। इस रीति से, परमेश्वर का परीक्षण और शैतान की परीक्षा लगभग अपरिहार्य थे। एकमात्र व्यक्ति जो परमेश्वर के परीक्षण और शैतान की परीक्षा का डटकर मुकाबला करने के योग्य था वह केवल अय्यूब था। इस संवाद के आगे, शैतान को अय्यूब की परीक्षा लेने की अनुमति प्रदान की गई थी। इस प्रकार शैतान के हमलों का पहला चक्र आरम्भ हुआ। इन हमलों का निशाना था अय्यूब की सम्पत्ति, क्योंकि शैतान ने अय्यूब के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप लगाया था: "क्या अय्यूब परमेश्वर का भय बिना लाभ के मानता है? ... तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है, और उसकी सम्पत्ति देश भर में फैल गई है।" इसके परिणामस्वरूप, परमेश्वर ने शैतान को अनुमति दी कि अय्यूब के पास जो भी था उसे ले ले—यह वही उद्देश्य था जिसके लिए परमेश्वर ने शैतान से बातचीत की थी। तोभी, परमेश्वर ने शैतान के सामने एक मांग रखी: "जो कुछ उसका है, वह सब तेरे हाथ में है; केवल उसके शरीर पर हाथ न लगाना" (अय्यूब 1:12)। शैतान को अय्यूब की परीक्षा लेने की अनुमति देने के पश्चात् यही वह शर्त थी जिसे परमेश्वर ने रखा था और अय्यूब को शैतान के हाथ में कर दिया था, और यही वह सीमा थी जिसे परमेश्वर ने शैतान के लिए निर्धारित की थी: उसने शैतान को अय्यूब को हानि न पहुंचाने का आदेश दिया। क्योंकि परमेश्वर पहचान गया था कि अय्यूब खरा एवं सीधा पुरुष था, और उसे विश्वास था कि उसके सामने अय्यूब की खराई एवं सीधाई सन्देह से परे थी, और परीक्षा में पड़ने पर वह दृढ़ता से सामना कर सकता था; इस प्रकार, परमेश्वर ने अय्यूब की परीक्षा लेने के लिए शैतान को अनुमति दी, परन्तु शैतान पर एक प्रतिबंध लगा दिया: शैतान के पास अय्यूब की सारी सम्पत्ति लेने की अनुमति थी, किन्तु वह उसे अपनी ऊंगली से छू नहीं सकता था। इसका क्या अर्थ है? इसका अर्थ है कि परमेश्वर ने उस समय अय्यूब को पूरी तरह से शैतान के हाथों में नहीं दिया था। शैतान अय्यूब की परीक्षा ले सकता था किसी भी माध्यम के द्वारा जिसे वह चाहता था, परन्तु वह स्वयं अय्यूब को हानि नहीं पहुंचा सकता था, उसके सिर के एक बाल को भी नुकसान नहीं पहुंचा सकता था, क्योंकि मनुष्य की हर चीज़ को परमेश्वर के द्वारा नियन्त्रित किया जाता है, चाहे मनुष्य जीवित रहे या मर जाए इसका निर्णय परमेश्वर के द्वारा किया जाता है, और शैतान के पास ऐसा लाइसेंस नहीं है। जब परमेश्वर ने शैतान से इन वचनों को कहा उसके पश्चात्, शैतान शुरुआत करने के लिए और इंतजार नहीं कर सकता था। उसने अय्यूब की परीक्षा लेने के लिए हर प्रकार के साधन का उपयोग किया था, और बहुत पहले ही अय्यूब ने अपनी बहुत सारी भेड़-बकरियों एवं बैलों को और सारी सम्पत्ति को खो दिया था जिन्हें परमेश्वर के द्वारा उसे दिया गया था...। इस प्रकार परमेश्वर की परीक्षाएं उस पर आ गईं।

हालाँकि बाइबल हमें अय्यूब की परीक्षा की शुरुआत के विषय में बताती है, फिर भी क्या अय्यूब स्वयं, वह पुरुष जिसे इन परीक्षाओं के अधीन किया गया था, जानता था कि क्या हो रहा था? अय्यूब मात्र एक नश्वर मनुष्य था; वास्तव में वह उस कहानी के बारे में कुछ भी नहीं जानता था जो उसके पीछे प्रकट हो रही थी। फिर भी, परमेश्वर के प्रति उसके भय, और उसकी खराई एवं सीधाई ने उसे यह महसूस कराया कि परमेश्वर की परीक्षाएं उस पर आ गई थीं। वह नहीं जानता था कि आत्मिक आयाम में क्या घटित हुआ था, न ही वह यह जानता था कि इन परीक्षाओं के पीछे परमेश्वर के इरादे क्या थे। परन्तु वह नहीं जानता था कि इसके बावजूद कि उसके साथ क्या घटित होगा, उसे अपनी खराई एवं सीधाई के प्रति सच्चाई को थामे रहना चाहिए, और उसे परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के मार्ग में बने रहना चाहिए। इन मुद्दों के प्रति अय्यूब की मनोवृत्ति एवं प्रतिक्रिया को परमेश्वर के द्वारा साफ साफ देखा गया था। और उसने क्या देखा था? उसने अय्यूब के हृदय को देखा जो परमेश्वर का भय मानता था, क्योंकि प्रारम्भ से लेकर ठीक उस समय तक जब अय्यूब को परखा नहीं गया था, अय्यूब का हृदय परमेश्वर के सामने खुला हुआ था, इसे परमेश्वर के सामने रखा गया था, और अय्यूब ने अपनी खराई एवं सीधाई का त्याग नहीं किया था, न ही उसने परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने की रीति को दूर किया था या उससे पीछे हटा था—और इससे बढ़कर और कोई भी चीज़ परमेश्वर के लिए संतोषजनक नहीं थी।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

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