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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी
वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

मनुष्य एक आत्मज्ञान रहित प्राणी है। फिर भी, स्वयं को जानने में असमर्थ वह इसके बावजूद अपनी हथेली के समान अन्य हर किसी को जानता है, मानो कि कुछ भी कहने या करने से पूर्व अन्य सभी उसके "निरीक्षण" से गुजरते हों या उसका अनुमोदन प्राप्त करते हों, इस प्रकार से मानो कि, उसने अन्य सभी की उनकी मनोवैज्ञानिक अवस्था तक पूर्ण रूप से माप ले ली हो। सभी मनुष्य इसी प्रकार के हैं। आज मनुष्य परमेश्वर के राज्य के युग में प्रवेश कर चुका है, परंतु उसका स्वभाव अपरिवर्तित रहा है। वह अब भी मेरे सामने वैसा ही करता है जैसा मैं करता हूँ, परंतु मेरी पीठ पीछे वह अपने विशिष्ट "व्यापार" में लगना आरंभ कर देता है। एक बार यह समाप्त हो जाने पर जब वह मेरे सम्मुख फिर से आता है, तो वह एक भिन्न व्यक्ति के समान होता है, ढीठता से शांत प्रतीत होता हुआ, शांत, मुखावृति, संतुलित धड़कन वाला। क्या यही वास्तव में नहीं जो मनुष्य को हेय बनाता है? कितने लोग दो पूर्णतः भिन्न चेहरे रखते हैं, एक मेरे सामने और दूसरा मेरी पीठ पीछे? उनमें कितने मेरे सामने नवजात मेमने के समान हैं किन्तु मेरे पीछे भूखे शेरों के समान हैं, और फिर पहाड़ी पर आनंद से मँडराती छोटी सी चिड़िया के समान बन जाते हैं? कितने मेरे सामने उद्देश्य और संकल्प प्रदर्शित करते हैं? कितने प्यास और लालसा के साथ मेरे वचनों की तलाश करते हुए मेरे सामने आते हैं किन्तु मेरी पीठ पीछे, उनसे उकता जाते हैं और उन्हें त्याग देते हैं, मानो कि मेरे वचन कोई बोझ हों? कई बार मेरे शत्रु द्वारा भ्रष्ट की गई मनुष्यजाति को देखकर, मैंने मनुष्यजाति पर आशा करना छोड़ दिया है। कई बार, मनुष्य को रोते हुए क्षमा के लिये विनती करने के लिए अपने सामने आता देख कर, किन्तु उनमें आत्मसम्मान के अभाव, उसकी हठी असंशोधनीयता के कारण, मैंने क्रोधवश उसके कार्यों के प्रति अपनी आँखें बंद कर ली हैं, यहाँ तक कि उस समय भी जब उसका हृदय सच्चा और अभिप्राय ईमानदार होता है। कई बार, मैं देखता हूँ कि मनुष्य में मेरा सहयोग करने के लिए विश्वास होता है, और कैसे, मेरे सामने, मेरे आलिंगन की गर्माहट का स्वाद लेते हुए, मेरे आलिंगन में, झूठ बोलता हुआ प्रतीत होता है। कई बार, अपने चुने हुए लोगों का भोलापन, उनकी जीवंतता और प्रेम देख कर, मैंने अपने हृदय में इन बातों के कारण सदैव आनंद लिया है। मानवजाति मेरे हाथों से पूर्व नियत आशीषों का आनंद लेना नहीं जानती है, क्योंकि वह नहीं जानती है कि आशीषों या पीड़ाओं से अंततः क्या तात्पर्य है। इसी कारण, मानवजाति मेरी खोज में ईमानदारी से बहुत दूर है। यदि आने वाले कल के जैसी कोई चीज़ नहीं होती तो मेरे सामने खड़े, तुम लोगों में से कौन, शुद्ध बर्फ के जैसा गोरा, शुद्ध हरिताश्म के जैसा बेदाग़ होता? निश्चित रूप से मेरे प्रति तुम लोगों का प्रेम कुछ ऐसा नहीं है जिसे स्वादिष्ट भोजन या कपड़े के किसी उत्कृष्ट सूट, या किसी उत्तम परिलब्धियों वाले उच्च पद के साथ से अदला-बदला जा सके? अथवा क्या इसकी उस प्रेम से अदला-बदली की जा सकती है जो दूसरे तुम्हारे लिए रखते हैं? निश्चित रूप से परीक्षण से गुजरने से मनुष्य मेरे प्रति अपने प्रेम को नहीं त्यागेगा? निश्चित रूप से कष्ट और क्लेश उसे मेरी व्यवस्था के विरूद्ध शिकायत करने का कारण नहीं बनेंगे? किसी भी मनुष्य ने कभी भी वास्तव में मेरे मुख की तलवार की प्रशंसा नहीं की हैः वह वास्तव में अभ्यंतर को समझे बिना केवल इसके सतही अर्थ को जानता है। यदि मानवजाति वास्तव में मेरी तलवार की धार को देखने में सक्षम होती, तो वह चूहों की तरह तेजी से दौड़ कर अपने बिलों में घुस जाती। उनकी संवेदनशून्यता के कारण, मनुष्य जाति मेरे वचनों के सच्चे अर्थ को नहीं जानती है, और इसलिए उन्हें कोई भनक नहीं है कि मेरे वचन कितने विकट हैं, या उन वचनों के अंतर्गत, उनकी केवल कितनी प्रकृति प्रकट होती है, और उनकी भ्रष्टता को कितना न्याय प्राप्त हुआ है। इस कारण, मेरे वचनों के बारे में उनकी अपरिपक्व अवधारणाओं के आधार पर, अधिकांश लोगों ने उदासीन और वचनबद्ध न होने वाला दृष्टीकोण अपना लिया है।

राज्य के भीतर, न केवल कथन मेरे मुख से निकलते हैं बल्कि मेरे पाँव भी ज़मीन पर हर जगह औपचारिक रूप से चलते हैं। इस तरह, मैंने सभी अस्वच्छ व अपवित्र स्थानों पर विजय पा ली है। जिसकी वजह से, न केवल स्वर्ग परिवर्तित हो रहा है, बल्कि उसके बाद शीघ्र नवीकृत होने के लिए, पृथ्वी भी परिवर्तन की प्रक्रिया में है। ब्रह्माण्ड के भीतर, हर चीज, हृदयस्पर्शी पहलू प्रस्तुत करते हुए जिससे इंद्रियाँ मुग्ध हो जाती हैं और आत्माओं का उत्थान हो जाता है, मेरी महिमा के तेज से नयी हो जाती है, मानो कि अब मनुष्य स्वर्ग से परे स्वर्ग में विद्यमान हो, शैतान से बाधारहित, बाहरी शत्रुओं के हमलों से मुक्त, जैसा कि मानवीय कल्पना में समझा जाता है। ब्रह्माण्ड के ऊपर असंख्य सितारे, अंधकार की बेला में समस्त नक्षत्रीय मंडल में अपने प्रकाश को दीप्तिमान करते हुए, मेरी आज्ञा से अपने-अपने निर्धारित स्थान ले लेते हैं। कोई एक प्राणी भी अवज्ञा का विचार मात्र करने का भी साहस नहीं करता है, और इसलिए, मेरी प्रशासनिक आज्ञाओं के सार के अनुसार, संपूर्ण ब्रह्माण्ड अच्छी तरह से और निपुण क्रम में नियंत्रित होता है: कभी भी कोई बाधा खड़ी नहीं हुई, न ही कभी ब्रह्माण्ड की एकता खंडित हुई है। मैं तारों के ऊपर से उड़ती हुई छलांग लगाता हूँ, और जब सूर्य अपनी किरणों की बौछार करता है तो मैं हंस के पंखों जितने बड़े हिमकणों के झौंकों को अपने हाथों से नीचे बहाते हुए उसकी गर्मी को मिटा देता हूँ। परंतु जब मैं अपना मन बदलता हूँ, तो सारा बर्फ पिघल कर एक नदी बन जाता है। एक ही पल में, आकाश के नीचे सब ओर बसंत फूट पड़ता है, और हरित-मणी जैसी हरियाली समस्त पृथ्वी के भूदृश्य को रूपान्तरित कर देती है। मैं नभमण्डल में भ्रमण करने जाता हूँ, और तुरंत, मेरे आकार के कारण पृथ्वी गहरे-काले अंधकार में ढक जाती है। बिना चेतावनी के "रात" आ गई है, और समस्त विश्व में इतना अंधकार हो गया है कि कोई अपने चेहरे के सामने अपने हाथ को नहीं देख सकता है। रोशनी के विलुप्त होते ही मनुष्य परस्पर विनाश के उपद्रव, एक दूसरे से छीना-झपटी और लूट-खसोट शुरू करने के लिए इस पल पर कब्जा जमा लेता है। पृथ्वी के देश, अराजक फूट में गिरते हुए, गंदी अशांति में प्रवेश करते हैं, इस स्थिति तक कि उनका छुटकारा पाना अतीत की बात हो जाता है। मनुष्य पीड़ा की कसक में संघर्ष करते हैं, पीड़ा के बीच विलाप करते और कराहते हैं, अपनी पीड़ा का दारूण विलाप स्थापित करते हैं, लालसा करते हैं कि एक बार पुनः उनके मध्य ज्योति आ जाए और इस तरह अंधकार के दिनों को समाप्त करे और उस प्राण-शक्ति को पुनर्सथापित करे जो कभी विद्यमान रहती थी। किन्तु मैंने संसार की गलतियों के कारण फिर कभी दया न करने के लिए मनुष्य को बहुत पहले ही अपनी आस्तीन से झटक दिया है: बहुत पहले ही मैंने समस्त संसार के लोगों को तिरस्कृत और अस्वीकृत कर दिया है, संसार की हालत के प्रति अपनी आँखे बंद कर ली हैं, मनुष्य की हर चाल, उसके हर हाव-भाव से अपना मुख फेर लिया है और उनके शैशव और भोलेपन से आनन्द लेना बंद कर दिया है। मैंने संसार को नए सिरे से बनाने की एक और योजना आरंभ की है, ताकि यह नया संसार यथासमय पुनर्जीवन पाए तथा अब और अधिक समय तक जलमन्ग न रहे। मानवजाति के बीच, कितने ही विचित्र राज्य उन्हें अधिकारों पर निर्धारित करने के लिए मेरी प्रतीक्षा कर रहे हैं, मुझे कितनी गलतियों को होने से रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से आना है, मुझे कितनी धूल झाड़नी है, मुझे कितने ही रहस्यों से पर्दा उठाना है: सारी मानवजाति मेरी प्रतीक्षा में है और मेरे आगमन की लालसा करती है।

पृथ्वी पर मैं मनुष्यों के हृदय में व्यवहारिक परमेश्वर स्वयं हूँ; स्वर्ग में मैं समस्त सृष्टि का स्वामी हूँ। मैंने पर्वत चढ़े हैं और नदियाँ लाँघी हैं और मानवजाति के बीच से भीतर-बाहर होता रहा हूँ। कौन व्यवहारिक परमेश्वर स्वयं का खुलेआम विरोध करने की हिम्मत करता है? कौन सर्वशक्तिमान की संप्रभुता से अलग होने का साहस करता है? कौन यह दृढ़ता से कहने का साहस करता है कि मैं, संदेह की छाया से परे, स्वर्ग में हूँ? पुनः, कौन यह दृढ़ता से कहने का साहस करता है कि मैं, त्रुटि की थोड़ी सी भी संभावना के बिना, पृथ्वी पर हूँ? समस्त मानवजाति में कोई भी उन स्थानों के बारे में स्पष्ट रूप से हर विवरण के साथ कहने में सक्षम नहीं है जहाँ मैं रहता हूँ। क्या ऐसा हो सकता है कि, जब मैं स्वर्ग में हूँ तो मैं अलौकिक परमेश्वर स्वयं हूँ? क्या ऐसा हो सकता है कि, जब मैं पृथ्वी पर हूँ तो मैं व्यवहारिक परमेश्वर स्वयं हूँ? कि मैं समस्त सृष्टि का शासक हूँ, या कि मैं समस्त मानव संसार की पीड़ा का अनुभव करता हूँ—निश्चय ही, ये सब निर्धारित नहीं कर सकते हैं कि मैं व्यवहारिक परमेश्वर स्वयं हूँ या नहीं? यदि मनुष्य ऐसा सोचता है,[क] तो क्या वह समस्त आशाओं से परे अनाड़ी नहीं बनता है? मैं स्वर्ग में हूँ; मैं पृथ्वी पर भी हूँ; मैं सृष्टि की असंख्य वस्तुओं के बीच हूँ और असंख्य लोगों के बीच भी हूँ। मनुष्य मुझे हर दिन छू सकता है; इसके अलावा, वह मुझे हर दिन देख सकता है। जहाँ तक मानवजाति का संबंध है, मैं कभी-कभी छिपा हुआ और कभी-कभी दृश्यमान प्रतीत होता हूँ; ऐसा प्रतीत होता है कि मेरा अस्तित्व वास्तविक है, और फिर भी ऐसा भी प्रतीत होता है कि मेरा व्यक्तित्व नहीं है। मुझमें मनुष्यजाति के लिए अज्ञेय रहस्य पड़े हैं। यह ऐसा है मानो कि सभी मनुष्य मुझमें और अधिक रहस्यों को खोजने के लिए सूक्ष्मदर्शीयंत्र से झाँक रहे हों, जिसके द्वारा अपने हृदय से उस असुखद अनुभूति को दूर करने की आशा करते हों। परंतु यदि वे फ़्लूरोस्कोप का भी उपयोग करें, तब भी मानवजाति कैसे मुझमें छुपे रहस्यों में से किसी का भी खुलासा कर सकेगी?

जब मेरे लोग मेरे कार्यों के माध्यम से, मेरे साथ-साथ महिमा पाएँगे, उस समय उस विशाल लाल अजगर की माँद खोदी जाएगी, सारी कीचड़ और मिट्टी साफ की जाएगी, और असंख्य वर्षों से जमा प्रदूषित जल मेरी दहकती आग में सूख जाएगा और उसका अस्तित्व नहीं रहेगा। इसके बाद वह विशाल लाल अजगर आग और गंधक की झील में नष्ट हो जाएगा। क्या तुम लोग सचमुच मेरी सतर्क देखभाल के अधीन रहना चाहते हो ताकि अजगर द्वारा छीने न जाओ? क्या तुम लोग सचमुच इसके कपटपूर्ण दाँव-पेंचों से घृणा करते हो? कौन मेरे लिए निष्ठावान गवाही देने में सक्षम है? मेरे नाम के वास्ते, मेरे आत्मा के वास्ते, मेरी समस्त प्रबंधन योजना के वास्ते—कौन अपने शरीर की समस्त ताकत समर्पित करने में सक्षम है? आज, जब राज्य मनुष्यों के संसार में है, यही वह समय है कि मैं व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के संसार में आया हूँ। यदि ऐसा ना हेाता, क्या कोई है जो, बहादुरी से, मेरी ओर से युद्ध क्षेत्र में जाता? ताकि राज्य आकार ले सके, ताकि मेरा हृदय तृप्त हो सके, और पुनः, ताकि मेरा दिन आ सके, ताकि वह समय आ सके जब सृष्टि की असंख्य वस्तुएँ पुर्नजन्म लेती हैं और बहुतायत से बढ़ती हैं, ताकि मनुष्य को पीड़ा के सागर से बचाया जा सके, ताकि आने वाला कल आ सके, और ताकि वह अद्भुत हो सके और फल-फूल सके और विकसित हो सके, और पुनः, ताकि भविष्य का आंनद हो सके, समस्त मानवजाति मेरे लिए अपने आप को बलिदान करने में कुछ भी नहीं बचाते हुए, अपनी संपूर्ण शक्ति से प्रयास कर रही है। क्या यह इस बात का एक संकेत नहीं है कि विजय पहले से ही मेरी है, और क्या यह मेरी योजना की परिपूर्णता का निशान नहीं है?

मनुष्य जितना अधिक अंत के दिनों में रहेंगे, उतना ही अधिक वे संसार का खालीपन महसूस करेंगे और उतना ही उनमें जीवन जीने का उनका साहस कम हो जाएगा। इसी कारण से, असंख्य लोग निराशा में मर गए हैं, असंख्य अन्य लोग अपनी खोज में निराश हो गए हैं, और असंख्य अन्य लोग शैतान के हाथों स्वयं में छेड़छाड़ किए जाने की पीड़ा भोग रहे हैं। मैं ने बहुत से लोगों को बचाया है, बहुतों को राहत दी, और कितनी ही बार, जब मानवजाति ने ज्योति खो दी, मैं उन्हें वापस ज्योति के स्थान पर ले गया, ताकि वे मुझे ज्योति के भीतर जान सकें, और खुशी के बीच मेरा आनंद ले सकें। क्योंकि मेरी ज्योति के आने की वजह से, मेरे राज्य में रहने वाले लोगों के हृदय में श्रद्धा बढ़ती है, क्योंकि प्रेम करने के लिए मैं मानवजाति के लिए एक परमेश्वर हूँ, ऐसा परमेश्वर जिससे मानवजाति अनुरक्त आसक्ति के साथ चिपकती है, और मानवजाति मेरी आकृति की स्थायी छाप से परिपूर्ण हो जाती है। किंतु, हर चीज पर विचार किए जाने पर, कोई भी ऐसा नहीं है जो समझता हो कि क्या यह पवित्रात्मा का कार्य है, या देह की क्रिया है। यही अकेली बात एक जीवनकाल के दौरान मनुष्य के लिए सूक्ष्म विस्तार में अनुभव पाने हेतु पर्याप्त है। मनुष्य ने अपने हृदय की अंतरतम गहराईयों में मुझे कभी भी तिरस्कृत नहीं किया है, बल्कि, वह अपनी आत्मा की गहराई में मुझसे लिपटा रहता है। मेरी बुद्धि उसकी सराहना को ऊपर उठाती है, जो अद्भुत कार्य मैं करता हूँ वे उसकी आँखों के लिए एक दावत हैं, मेरे वचन उसके मन को हैरान करते हैं, और फिर भी वे उसे बहुत अच्छे लगते हैं। मेरी वास्तविकता मनुष्य को अनिश्चित, अवाक् और व्यग्र कर देती है, और फिर भी वह सब स्वीकार करने के लिये तैयार है। क्या यह मनुष्य का सटीक माप नहीं है, जो कि वास्तव में वह है?

मार्च 13, 1992

फुटनोट

क. मूल पाठ में "इस मामले में" पढ़ा जाता है।

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग एक परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो

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